Holi 2026: होली भारत का वह त्योहार है जो खुशियों, हंसी-मजाक और रंगों से भरा होता है. यह त्योहार गिले-शिकवे भूलकर आपसी रिश्तों में मिठास घोलने, पुराने मतभेद मिटाने और जीवन में नए उत्साह को लाने का प्रतीक माना जाता है। भारत में होली को खुले मैदानों, गलियों और सड़कों पर मनाया जाता है, जहां बड़े-बड़े जुलूस, रंगों का उत्सव और पारंपरिक मिठाइयों के साथ धूमधाम होती है, लेकिन जब हम सीमाओं के पार झांकते हैं, खासकर उन देशों में जहां मुसलमान बहुसंख्यक हैं, तो होली का रंग और उत्साह कई तरह से बदल जाता है।
कई इस्लामिक देशों में धार्मिक और सामाजिक नियम इतने सख्त हैं कि होली को सार्वजनिक रूप से मनाना नामुमकिन है। कुछ जगहों पर यह पूरी तरह प्रतिबंधित है, और अगर कोई खुले तौर पर रंग खेलता है, तो उसे भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है। तो आइए जानते हैं कि किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है और रंग दिखने पर कितनी कड़ी सजा मिलती है।
किन मुस्लिम देशों में होली नहीं खेली जाती है
अफगानिस्तान में तालिबान के शासन के बाद धार्मिक नियम बहुत सख्त हो गए हैं. हिंदू और सिख समुदाय की संख्या बहुत कम रह गई है, इसलिए होली अब सार्वजनिक रूप से नहीं मनाई जाती है। रंग खेलना या जुलूस निकालना प्रतिबंधित है। त्योहार सिर्फ घर या मंदिर के भीतर ही सीमित है. प्रशासन ने सुरक्षा का आश्वासन तो दिया है, लेकिन खुले मैदानों पर कोई उत्सव नहीं होता है। इसलिए अफगानिस्तान में होली का रंग फीका नहीं बल्कि दबा हुआ है।अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है, तो कानूनी कार्रवाई का खतरा रहता है।
इसके अलावा सऊदी अरब में गैर-इस्लामी त्योहारों के सार्वजनिक आयोजन पर लंबे समय तक सख्ती रही है। भारतीय प्रवासी भी सिर्फ निजी परिसरों या दूतावास में ही होली मना सकते हैं। वहीं अन्य खाड़ी देश जैसे कतर और ओमान मे धार्मिक स्वतंत्रता सीमित है। सार्वजनिक रूप से रंग खेलना नहीं होता है, सिर्फ प्रशासन की अनुमति से निजी कार्यक्रम हो सकते हैं। इन देशों में होली का उत्सव पूरी तरह प्रतिबंधित या बहुत सीमित है।अगर कोई सार्वजनिक रूप से रंग खेलता है, तो उसे कानूनी कार्रवाई या भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
रंग दिखने पर क्या सजा मिलती है?
कुछ इस्लामिक देशों में होली में रंग खेलना या सार्वजनिक रूप से मनाना कानूनी अपराध माना जाता है, और इसके लिए सजा काफी कड़ी हो सकती है। सजा की सीमा देश के कानून और स्थानीय प्रशासन के नियमों पर निर्भर करती है। जैसे अफगानिस्तान में सार्वजनिक रूप से होली के रंग खेलना या जुलूस निकालना गैरकानूनी है। उल्लंघन करने पर गिरफ्तारी, जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है।
विशेष रूप से तालिबानी शासन के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए कोई भी सार्वजनिक आयोजन कठोर रूप से रोका जाता है। वहीं सऊदी अरब में रंग खेलते पकड़े जाने पर अपराधी को गिरफ्तार किया जा सकता है, और कुछ मामलों में जेल या प्रत्यर्पण तक हो सकता है। वहीं कतर और ओमान में सार्वजनिक रूप से होली मनाना भी प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर जुर्माना, प्रशासनिक कार्रवाई या अपवित्रता के आरोप लग सकते हैं।