दुनिया के 7 महासागरों में से एक हिंद महासागर का नाम सुनते ही आपको भी लगता होगा कि इसपर भारत का मालिकाना हक है. हिंद महासागर में अमेरिकी सबमरीन द्वारा ईरानी युद्धपोत को डूबाने पर अब लोगों के मन में सवाल उठने लगा है कि क्या हिंद महासागर पर भारत का अधिकार है, अगर है तो अमेरिका कैसे भारत की इजाजत के बिना उसके महासागर में ईरानी युद्धपोत पर हमला कर सकता है? ईरान ने अमेरिका के इस हमले पर आक्रामक रुख अपनाया है.
ईरान के युद्धपोत IRIS डेना पर अमेरिकी पनडुब्बी के हमले ने इस बहस को हवा दे दी है. बुधवार सुबह श्रीलंका के गल द्वीप के करीब 40 नॉटिकल मील दक्षिण में हुए इस हादसे ने भारत के रणनीतिक पिछवाड़े में तनाव बढ़ा दिया. अमेरिकी नौसेना ने ईरानी फ्रिगेट को टॉरपीडो से डुबो दिया, जो विशाखापत्तनम में नौसैनिक अभ्यास के बाद लौट रही थी. विवाद यह है कि क्या भारत को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है?
क्या भारत का है हिंद महासागर?
सबसे पहले स्पष्ट कर दें कि हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय महासागर है, जिसपर भारत का कोई अधिकार नहीं है. कुल मिलाकर, हिंद महासागर का नाम भारत के केंद्रीय स्थान पर पड़ा, मगर यह साझा जलक्षेत्र है. ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना अंतरराष्ट्रीय जल में था. संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) के तहत महासागर को विभिन्न क्षेत्रों में बांटा गया है. भारत का क्षेत्रीय जल 12 नॉटिकल मील (करीब 22 किलोमीटर) तक सीमित है, जहां पूर्ण संप्रभुता है. उसके बाद 24 नॉटिकल मील तक सन्निकटस जोन है, जहां सीमा शुल्क और आवागमन नियम लागू होते हैं. असली दायरा एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) का है, जो 200 नॉटिकल मील (370 किलोमीटर) तक फैला हुआ.
दुनिया में 18वां सबसे बड़ा इकोनॉमिक जोन
भारत का ईईजेड दुनिया में 18वां सबसे बड़ा है जो कि 23 लाख वर्ग किलोमीटर का है. यहां प्राकृतिक संसाधनों जैसे तेल, गैस, खनिज और मछली पर विशेष अधिकार हैं. उदाहरणस्वरूप, अरब सागर में मुंबई हाई जैसे क्षेत्र भारत के ऊर्जा स्रोत हैं. लेकिन ईईजेड से आगे हाई सीज शुरू हो जाते हैं, जहां कोई देश मालिक नहीं. यहां नेविगेशन, उड़ान और मछली पकड़ने की आजादी सबको है. डेना घटना श्रीलंका के ईईजेड में हुई, मगर युद्धकालीन नियमों के तहत युद्धपोतों को पारित होने का अधिकार मिला.
रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि यह घटना भारत के द्वार पर ईरान युद्ध ले आई. 90 प्रतिशत से ज्यादा भारत का व्यापार इसी महासागर से गुजरता है, इसलिए सुरक्षा अहम है. चीन की पाकिस्तान और श्रीलंका में बंदरगाह बनाने की चुनौती के बीच भारत एंडमान-निकोबार में बेस मजबूत कर रहा है.