अध्यात्म

  • Pitru Paksha 2020: श्राद्ध भोज थाली में इन चीजों के परहेज से पितरों का मिलता है आशीर्वाद

    Pitru Paksha 2020: श्राद्ध भोज थाली में इन चीजों के परहेज से पितरों का मिलता है आशीर्वाद

     

    पितृपक्ष का हिन्दू रीति रिवाजों में बड़ा महत्व होता हैं। पितृपक्ष यानी की परिवार के जिन पूर्वजों का देहांत हो चुका हैं उनकी आत्मा की शांति के लिए किया गया भोज का आयोजन। ये दिन पूरे 15 दिन तक चलते हैं। इस वर्ष पितृपक्ष भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 1 सितंबर से शुरू हो गए हैं और इस बार आश्विन के कृष्ण अमावस्या 17 सितंबर तक रहेगें। पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पंडितो को भोजन व दान देकर पितरों को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद लिया जाता हैं।

    हिंदू रिवाजों के अनुसार पितृपक्ष में कुल 16 श्राद्ध होते हैं। इस बार पूर्णिमा श्राद्ध 2 सितंबर को और सर्वपितृ अमावस्या श्राद्ध 17 सितंबर को है। बता दें कि श्राद्ध में जो भोजन तैयार किया जाता हैं उसमें खीर-पूड़ी, हलवा शुभ माना जाता है। लेकिन मान्यता है कि आपके पूर्वजों को उनके जीवन में जो चीज पंसद रही हो उन्हीं चीजों का भोग लगाना चाहिए। इससे आपके पितर खुश होते हैं और आपको उनका आशीर्वाद भी मिलेंगा।

    बता दें कि श्राद्ध भोज की थाली में मसूर,चना,काला जीरा,कचनार,कुलथी,उड़द, सत्तू, मूली, खीरा, काला उड़द, प्याज, लहसुन, काला नमक, लौकी, बड़ी सरसों, काले सरसों की पत्ती और बासी, खराब अन्न, फल और मेवे जैसी चीजें शामिल नहीं करनी चाहिए। इन चीजों का प्रयोग करना श्राद्ध में अशुभ माना जाता है। कहा जाता हैं कि इस पितरों में नाराजगी होती हैं और परिवार में अशांति दुःख दरिद्रता का वास होता है।

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  • माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए अच्छी खबर,अब देशभर में श्रद्धालुओं को डाक के जरिए मिल सकेगा प्रसाद

    माता वैष्णो देवी के भक्तों के लिए अच्छी खबर,अब देशभर में श्रद्धालुओं को डाक के जरिए मिल सकेगा प्रसाद

     

    माता वैष्णो देवी मंदिर का प्रसाद अब देशभर में श्रद्धालुओं को उनकी मांग पर घर तक पहुंचा दिया जाएगा। दरअसल, जम्मू-कश्मीर के रेयासी जिले में त्रिकूट पर्वत पर स्थित मंदिर को 16 अगस्त को खोला गया। बता दें कि कोरोना वायरस के कारण मंदिर करीब पांच महीने बंद रहा। ऐसे में मंदिर का प्रबंधन देखने वाले बोर्ड ने देशभर में लोगों तक प्रसाद पहुंचाने के लिए डाक विभाग से करार किया है।

    बोर्ड ने एक बयान में कहा, 'माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीडीएसबी) ने देशभर में श्रद्धालुओं को प्रसाद पहुचाने के लिए डाक विभाग के साथ एक समझौता किया है।' वही, श्राइन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश कुमार और निदेशक (मुख्यालय) डाक विभाग, जम्मू कश्मीर गौरव श्रीवास्तव ने आध्यात्मिक विकास केंद्र कटरा में शनिवार को समझौते पर दस्तखत किए है।

    बयान में कहा गया, 'श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए खासकर मौजूदा हालात के दौरान बोर्ड ने प्रसाद को पहुंचाने की सुविधा शुरू की है।' बयान में आगे कहा गया, 'बोर्ड की इस पहल से महामारी के कारण यात्रा नहीं कर पाए श्रद्धालुओं तक प्रसाद पहुंचाने में बड़ी मदद होगी।' 

    ऐसे लाभ उठा सकते है श्रद्धालु 

    ना लाभ,ना हानि के आधार पर बोर्ड ने प्रसाद की तीन श्रेणियों की शुरुआत की है जिसे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए बुक किया जा सकता है। फोन के जरिए नंबर - 9906019475 पर कॉल कर भी इस सुविधा का लाभ उठाया जा सकता है । बता दें कि इससे पहले श्राइन बोर्ड ने श्रद्धालुओं के लिए उनकी गैरमौजूदगी में भवन स्थित यज्ञ शाला में हवन या पूजा की सुविधा की भी शुरुआत की थी।

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  • Ganesh Chaturthi पर हर दस दिन चढ़ाएं गणपति जी को अलग-अलग प्रसाद, जानें क्या  हैं उनके 10 प्रिय भोग

    Ganesh Chaturthi पर हर दस दिन चढ़ाएं गणपति जी को अलग-अलग प्रसाद, जानें क्या हैं उनके 10 प्रिय भोग

     

    गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में धुमधाम से मनाया जा रहा हैं, कल ही हर घर में गणपति बप्पा की स्थापना की जा चुकी हैं। इस दिन गणपति बप्पा का जन्म हुआ था। इस दिन से लेकर आने वाले दस दिन तक भक्त गणेश जी की पूजा करते हैं। कहा जाता हैं कि हर दिन गणेश जी को अलग-अलग भोग अर्पित करने चाहिए। इससे परिवार पर कृपा बरसती रहती हैं। आज हम आपको बताएगें की गणेश जी के 10 प्रिय भोग कौन से हैं जो आप उन्हें अर्पित कर सकते हैं।

    मोदक: यह गणपति बप्पा का सबसे प्रिय भोग हैं। मोदक का भोग आप पहले दिन गणपति जी को लगाएं। गुड़ का मोदक और नारियल उन्हें सर्वप्रिय है।

    मोतीचूर के लड्डू: गणेश जी के साथ- साथ ये लड्डू उनके वाहन मूषकराज को भी बहुत पसंद है। शुद्ध घी से बने बेसन के लड्डू को गणपति जी को दूसरे दिन अर्पित करें।

    नारियल चावल: तीसरे दिन गणपति जी को नारियल वाले चावल अर्पित करें। यह भी उन्हें बेहद पसंद है। नारियल के दूध में चावल को पकाकर भोग लगाएं।

    पूरण पोली: कहा जाता हैं कि भगवान जी को भोग लगाने के लिए पोली अच्छी है, और यह गणपति जी का प्रसाद भी है। इसे गणेश जी के समक्ष अर्पित करें।

    श्रीखंड: गणेश जी के पूजन में श्रीखंड सबसे प्रिय भोग माना जाता है। आप चाहें तो श्रीखंड के अलावा पंचामृत या पंजरी का भी भोग भी लगा सकते हैं। यह भोग पांचवें दिन लगाएं।

    केले का शीरा: छठे दिन भगवान को पके हुए केले का शीरा भोग लगाए। इसे मैश कर सूजी और चीनी में मिलाएं। यह गणपति जी को बेहद पंसद है।

    रवा पोंगल: सातवें दिन गणपति जी को रवा पोंगल का भोग लगाए। इसे रवा यानी सूजी और मूंग की दाल को पीस कर बनाया जाता है। इसमें घी और ढेर सारे मेवे भी डाले जाते हैं।

    पयसम: आठवें दिन इसे गणपति जी को भोग लगाएं। यह खीर का ही एक प्रकार है। यह भोग गणेश जी को बहुत पसंद है।

    शुद्ध घी और गुड़: नौंवे दिन गणपति जी को शुद्ध घी में पका हुआ गुड़ भोग लगाएं। ये उन्हें बेहद पसंद है। इसमें छुआरे और नारियल भी मिलाया जा सकता है।

    छप्पन भोग: दसवें दिन गणेश जी के सभी पसंदीदा भोग बनाएं। इसका नाम छप्पन भोग इसलिए है क्योंकि इनकी संख्या 56 होती है। इन 56 भोगों में आप कोई भी भोग बना सकते हैं।  

     

     

       

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  • Ganesh Chaturthi पर भूलकर भी ना करें ये गलतियां, माना जाता है अशुभ

    Ganesh Chaturthi पर भूलकर भी ना करें ये गलतियां, माना जाता है अशुभ

     

    देशभर में आज यानि 22 अगस्त से 1 सितंबर तक गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में लोग भगवन गणेश की मूर्ति को श्रद्धापूर्वक अपने घर में स्थापित कर उनकी पूजा करेंगे। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी से अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच ही रहते हैं। इसके बाद 11वें दिन इनका विसर्जन किया जाता है। ऐसे में गणेश चतुर्थी पर कई बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जी हां, आज हम आपको बताने जा रहे है कि गणेश चतुर्थी पर क्या करना अशुभ माना जाता है। तो चलिए जानते है... 

    - कहा जाता है कि गणेश चतुर्थी की पूजा में किसी भी व्यक्ति को नीले और काले रंग के कपड़े नहीं पहनने चाहिए ऐसे में लाल और पीले रंग के कपड़े पहनना शुभ होता है।

    - हिंदू धर्म के अनुसार, गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए। यदि आप भूलवश चंद्रमा का दर्शन कर भी लें तो जमीन से एक पत्थर का टुकड़ा उठाकर पीछे की तरफ फेंक दें।

    - इसके अलावा भगवान गणेश की मूर्ति के पास अगर अंधेरा हो तो ऐसे में उनके दर्शन नहीं करने चाहिए। अंधेरे में भगवान की मूर्ति के दर्शन करना अशुभ माना जाता है।

    - गणपति की पूजा करते वक्त कभी तुलसी के पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए। मान्यता है कि तुलसी ने भगवान गणेश को लम्बोदर और गजमुख कहकर शादी का प्रस्ताव दिया था। गणेश भगवान ने नाराज होकर उन्हें श्राप दिया था।

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  • आज घर-घर विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश, जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    आज घर-घर विराजेंगे विघ्नहर्ता भगवान गणेश, जानें मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

     

    देशभर में आज यानि 22 अगस्त से पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ गणेश चतुर्थी का त्योहार मनाया जाएगा। कोविड-19 महामारी की वजह से इस साल गणेश पूजा कार्यक्रम बड़े स्तर पर नहीं हो रहे। ऐसे में लोग गणपति की मूर्तियों को श्रद्धापूर्वक अपने घरों में स्थापित कर उनकी पूजा करेंगे। बता दें कि इस दिन लोग गणपति को बड़ी धूमधाम से अपने घर लेकर आते हैं। वही, हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार गणेश चतुर्थी से अगले 10 दिनों तक भगवान गणेश अपने भक्तों के बीच ही रहते हैं। इसके बाद 11वें दिन इनका विसर्जन किया जाता है। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे है मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और गणपति जी की पूजा करते समय सामग्री में किन चीजों को शामिल करना चाहिए उसके बारे में। तो चलिए जानते है... 

    गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Ganesh Chaturthi 2020: Shubh Muhurat) 

    - पूजा का शुभ मुहर्त पूर्वाह्न 11 बजकर सात मिनट से दोपहर एक बजकर 42 मिनट तक।

    - दूसरा शाम चार बजकर 23 मिनट से सात बजकर 22 मिनट तक।

    - वही, तीसरा शुभ मुहर्त रात में 9 बजकर 12 मिनट से 11 बजकर 23 मिनट तक है। 

    ये है पूजा सामग्री 

    पान, सुपारी, लड्डू, सिंदूर, दूर्वा। 

    गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Ganesh chaturthi Puja Vidhi) 

    गणेश चतुर्थी के दिन प्रातरू काल स्नान-ध्यान करके गणपति के व्रत का संकल्प लें। इसके बाद दोपहर के समय गणपति की मूर्ति या फिर उनका चित्र लाल कपड़े के ऊपर रखें। फिर गंगाजल छिड़कने के बाद भगवान गणेश का आह्वान करें। भगवान गणेश को पुष्प, सिंदूर, जनेऊ और दूर्वा (घास) चढ़ाए।  इसके बाद गणपति को मोदक लड्डू चढ़ाएं, मंत्रोच्चार से उनका पूजन करें। गणेश जी की कथा पढ़ें या सुनें, गणेश चालीसा का पाठ करें और अंत में आरती करें। 

    गणपति जी की स्थापना करते समय इन बातों का रखें खास ख्याल हो सके तो भगवान गणेश को लाल वस्त्र चौकी पर बिछाकर स्थान दें और पूजा करें। इसके साथ ही एक कलश में जलभरकर उसके ऊपर नारियल रखकर चौकी के पास रख दें। वही, सुबह और शाम दोनों समय गणपति की आरती और चालीसा का पाठ करें। प्रसाद में लड्डू का वितरण करें।

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  • 5 महीने बाद आज से फिर शुरू होगी वैष्णो देवी यात्रा, जानें रोजाना कितने तीर्थयात्री कर सकेंगे दर्शन

    5 महीने बाद आज से फिर शुरू होगी वैष्णो देवी यात्रा, जानें रोजाना कितने तीर्थयात्री कर सकेंगे दर्शन

     

    कोविड-19 संकट के बीच जम्मू-कश्मीर में रियासी जिले की त्रिकुटा पहाड़ियों में वैष्णो देवी गुफा मंदिर की यात्रा आज यानि रविवार से फिर शुरू होगी। बता दें कि यह यात्रा 18 मार्च को निलंबित की गई थी। वही, श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (एसएमवीएसबी)  के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रमेश कुमार ने बताया कि पहले सप्ताह में हर रोज अधिकतम दो हजार तीर्थयात्रियों की सीमा तय की गई है। इनमें से 1,900 यात्री जम्मू-कश्मीर और शेष 100 यात्री बाहर के होंगे। इसके बाद हालात की समीक्षा कर फैसले लिए जाएंगे। ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही लोगों को यात्रा की अनुमति दी जाएगी।

    सूत्रों  ने बताया कि यात्रियों के लिए अपने मोबाइल फोन में आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना अनिवार्य होगा। चेहरे पर मास्क और कवर अनिवार्य होगा। यात्रा के प्रवेश बिंदुओं पर यात्रियों की थर्मल जांच की जाएगी। इसके अलावा 10 साल से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, अन्य गंभीर बीमारियों से ग्रसित लोगों और 60 साल से अधिक आयु के लोगों के लिए यात्रा नहीं करने का परामर्श जारी किया गया है। हालात सामान्य होने के बाद इस परामर्श की समीक्षा की जाएगी।

    सूत्रों ने बताया कि कटरा से भवन जाने के लिए बाणगंगा, अर्धकुंवारी और सांझीछत के पारम्परिक मार्गों का इस्तेमाल किया जाएगा। भवन से आने के लिए हिमकोटि मार्ग-ताराकोट मार्ग का इस्तेमाल किया जाएगा। वही, जम्मू-कश्मीर के बाहर के यात्रियों और केंद्रशासित प्रदेश के रेड जोन वाले जिलों से आने वाले यात्रियों के कोरोना से संक्रमित नहीं होने संबंधी रिपोर्ट की हेलीपैड और दर्शनी ड्योढ़ी पर यात्रा प्रवेश बिंदुओं पर जांच की जाएगी।

    जिन यात्रियों के पास कोविड-19 से संक्रमित नहीं होने संबंधी रिपोर्ट होगी, उन्हें ही भवन की ओर जाने दिया जाएगा। इसके अलावा पिट्ठुओं, पालकियों और खच्चरों को शुरुआत में मार्ग पर चलने पर अनुमति नहीं होगी। यात्रियों की सुविधा के लिए बैटरी चालित वाहनों, रोपवे और हेलीकॉप्टर सेवाओं जैसी सभी पूरक सुविधाओं की व्यवस्था की गई है।

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  • JANMASHTAMI2020 : आज और कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी, जानें श्रृंगार से लेकर पूजा की विधि तक सबकुछ

    JANMASHTAMI2020 : आज और कल मनाई जाएगी जन्माष्टमी, जानें श्रृंगार से लेकर पूजा की विधि तक सबकुछ

     

    कृष्ण जन्माष्टमी का पावन त्योहार बड़ी धुम-धाम से मनाया जाता हैं। इस साल 11 और 12 अगस्त को यह त्योहार मनाया जा रहा हैं। बता दे कि 11 अगस्त यानी आज के दिन गृहस्थ और पारिवारिक लोग जन्माष्टमी का व्रत रख रहें हैं। वही 12 अगस्त को वैष्णव, संत या संन्यासी व्रत रखेंगे। लेकिन क्या आप जानते हैं इस पावन दिन पर श्री कृष्ण की श्रृंगार और पूजा कैसे करें। अगर नहीं जानते हैं तो आइये आपको बताते हैं जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण का श्रृंगार और पूजा कैसे करें।

    श्री कृष्ण के श्रृंगार में फूलों का खूब प्रयोग करें। गोपी चन्दन, पीले रंग के वस्त्र और चंदन की सुगंध से ही इनका श्रृंगार करें। बता दें कि श्रृंगार करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भगवान श्री कृष्ण के वस्त्र से लेकर गहनों तक कुछ भी काला नहीं होना चाहिए। क्योंकि उन्हें काला रंग बिल्कुल भी पंसद नहीं हैं।

    बात की जाएं अगर प्रसाद की तो जन्माष्टमी के प्रसाद में पंचामृत जरूर आर्पित करें साथ ही तुलसी दल भी जरूर डालें। माखन, मेवा और मिसरी का भोग भी लगाएं। इस पावन दिन पर लड्डू गोपल को पूर्ण सात्विक भोजन अर्पित किए जाता हैं, जिसमें काफी सारे व्यंजन शामिल होते हैं।

    इस बार पंचांग के अनुसार 11 अगस्त यानि आज सुबह 9 बजकर 6 मिनट से जन्माष्टमी की पूजा का शुभ समय आरंभ हो रही है। वही 12 अगस्त को सुबह 11 बजकर 16 मिनट पर समाप्त हो रहा हैं। 11 अगस्त को भरणी और 12 अगस्त को कृतिका नक्षत्र है।

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  • Bakrid 2020: जानें क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी और क्‍या है इसका महत्व !

    Bakrid 2020: जानें क्यों दी जाती है बकरे की कुर्बानी और क्‍या है इसका महत्व !

     

    मुस्लिमों के लिए ईद सबसे प्रमुख त्‍योहारों में से एक है। साल में दो बार मनाई जाने वाली ईद दो तरह की होती है। पहली- मीठी ईद (Eid ul-Fitr) और दूसरी- बकरीद (Eid al-Adha )। ऐसे में देशभर में मीठी ईद यानि ईद-उल-फितर मई के माह में मनाई जा चुकी है। वही, बकरीद इस महीने के अंत में मनाई जाएगी। बताया जा रहा है कि इस बार बकरीद 31 जुलाई को संभवत: मनाई जाएगी। दरअसल, ईद की तारीख चांद का दीदार करने के बाद तय होती है।

    इस साल बकरीद का त्योहार 31 जुलाई से शुरु होकर 1 अगस्त की शाम को चलेगी। जानकारी के लिए आपको बता दें कि ईद-उल फितर के करीब 70 दिन बाद बकरीद को मनाया जाता है। मुसलमान यह त्यौहार कुर्बानी के पर्व के तौर पर मनाते हैं। इस्लाम में इस पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन लोग नमाज अदा करने के बाद बकरे की कुर्बानी देते हैं। यह त्यौहार लोगों को सच्चाई की राह पर सबकुछ कुर्बान करने का संदेश देता है। ईद के इस अवसर पर आज हम आपको बताने जा रहे है बकरीद के महत्व एवं उससे जुड़ी कुछ बातें। तो चलिए जानते है... 

    यह है बकरीद का महत्व 

    इस्लाम धर्म में पैगंबर हजरत इब्राहिम से ही कुर्बानी देने की परंपरा की शुरु की गई थी। माना जाता है कि इब्राहिम अलैय सलाम की कोई औलाद नहीं थी। कई मिन्नतों बाद उन्हें एक औलाद हुई जिसका नाम इस्माइल रखा। इब्राहिम, इस्माइल से बेहद प्यार करता था। लेकिन एक रात अल्लाह ने इब्राहिम से उसकी सबसे प्यारी चीज की कुर्बानी मांग ली। इब्राहिम ने अपने प्यारे जानवरों की कुर्बानी एक-एक कर दे दी। इसके बाद भी अल्लाह एक बार फिर उसके सपने में आए और फिर से सबसे प्यारी चीज की कुर्बान करने का आदेश दिया।

    मान्यता है कि इब्राहिम को इस्माइल यानी अपने बेटे से बेहद प्यार था। अल्लाह के आदेश का पालन करते हुए वो अपने बेटे की कुर्बानी देने को तैयार हो गया। इस दौरान इब्राहिम ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध ली। अपने बेटे की कुर्बानी देने के बाद जब इब्राहिम ने अपने आंखों से पट्टी खोली तो उन्होंने देखा कि उनका बेटा जीवित है। यह देखकर वो बहुत खुश हुआ।

    अल्लाह ने उसकी निष्ठा देख उसके बेटे की जगह बकरा रख दिया। तब से ही यह परंपरा चली आ रही है कि बकरीद पर बकरे की कुर्बानी दी जाए। लोग इब्राहिम द्वारा दी गई कुर्बानी को याद करते हुए बकरों की कुर्बानी देते हैं। आपको बता दें कि कुछ मुस्लिम परिवारों में कुर्बानी के लिए बकरे को पालपोसकर बड़ा किया जाता है और फिर बकरीद पर उसकी कुर्बानी दी जाती है। वहीं, जो लोग बकरे को नहीं पालते हैं और फिर भी उन्‍हें कुर्बानी देनी होती है उन्हें कुछ दिन पहले बकरा खरीदकर लाना होता है ताकि उस बकरे से उन्हें लगाव हो जाए। 

    Eid पर ऐसे दी जाती है कुर्बानी 

    दरअसल, ईद के दिन मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह की नमाज अदा करते हैं। इसके बाद बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के बाद बकरे के मीट तीन भागों में बांट दिया जाता है। एक भाग गरीबों के लिए, दूसरा भाग रिश्तेदारों में बांटने के लिए और तीसरा भाग अपने लिए रखा जाता है।

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  •  Eid al-Adha : इस बार चांद दिखने के साथ तय होगी बकरीद की तारीख, देशभर में ऐसे मनाई जाएगी ईद

    Eid al-Adha : इस बार चांद दिखने के साथ तय होगी बकरीद की तारीख, देशभर में ऐसे मनाई जाएगी ईद

     

    ईद-अल-अजहा यानी बकरीद जल्द ही देशभर में मनाई जाएगी। ऐसे में चांद अगर 30 जुलाई की शाम को दिखाई दिया तो ईद 31 जुलाई को जुमे के दिन होगी और यदि इस तारीख यानि शुक्रवार को चांद न दिखा तो 1 अगस्त, शनिवार के दिन ईद मनाई जाएगी। इस्लामिक कैलेंडर में ईद उल अजहा या ईद उल अदहा को बकरीद कहा जाता है। इसका अर्थ है 'कुर्बानी की ईद'। 

    साल में दो बार मनाई जाती है Eid 

    दरअसल, इस्लाम को मानने वाले दो ईद मनाते हैं। पहली ईद रमजान का महीना खत्म होते ही आती है, उसे 'मीठी ईद' कहा जाता है। वही, दूसरी ईद 'कुर्बानी की ईद' होती है, जिसे रमजान का महीना खत्म होने के लगभग 70 दिन बाद मनाया जाता है। 

    ...तो इसलिए मनाई जाती है बकरीद 

    इस्लाम मजहब की मान्यता के अनुसार, कहा जाता है अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से सपने में उनकी सबसे प्रिय चीज की कुर्बानी मांगी थी। हजरत इब्राहिम अपने बेटे से बहुत प्यार करते थे, लिहाजा उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला किया। अल्लाह के हुक्म की फरमानी करते हुए हजरत इब्राहिम ने जैसे ही अपने बेटे की कुर्बानी देनी चाही तो अल्लाह ने एक दुंबा की कुर्बानी दिलवा दी। कहते हैं तभी से बकरीद का त्योहार मनाया जाने लगा। इसलिए ईद-उल-अजहा यानी 'बकरीद' हजरत इब्राहिम की कुर्बानी की याद में ही मनाया जाता है। 

    कोरोना संकट के चलते इस बार ऐसे मनाई जाएगी ईद 

    जैसा की आप जानते ही है पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है, ऐसे में देश में  इस बार ईद सादगी के साथ मनाई जाएगी। यही नहीं, ईद की मुबारकबाद भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही दूर से देने की अपील की जा रही है। इसके अलावा लगातार लोगों से अपील की जा रही है कि वह घर पर रह कर ही नमाज अदा करें है। वही, कहा जा रहा है कि जानवर की कुर्बानी भी बंद जगह में की जाएगी। 

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  • घर में हनुमानजी की ये तस्वीरें लगाना होता हैं शुभ और इन फोटो को लगाने से पडता हैं नकारात्मक प्रभाव

    घर में हनुमानजी की ये तस्वीरें लगाना होता हैं शुभ और इन फोटो को लगाने से पडता हैं नकारात्मक प्रभाव

     

    हिंदू धर्म के लोग अपने घरों में भगवान के किसी न किसी स्वरूप की तस्वीर जरूर लगते हैं। उनका मानना हैं कि इन तस्वीरों से हमें सकारात्मक ऊर्जा मिलती हैं। लेकिन तस्वीर लगाने के लिए भी कई नियम होते हैं। जिन्हें तस्वीर लगाते समय ध्यान रखना होता हैं। अगर सही दिशा में तस्वीर न लगी हो तो नकारात्मक शक्तियां का प्रभाव भी पड़ता हैं। आज हम आपको बताएंगे कि पवनपुत्र हनुमान जी की कौन सी तस्वीर को घर पर रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है और किस मूर्ति से नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

    ऐसा माना जाता हैं कि अगर सकारात्मक ऊर्जा होती हैं तो नकारात्मक ऊर्जा भी होती हैं। और पवनपुत्र हनुमान जी अपने भक्तों की हर तरह की बाधा से रक्षा करते हैं। वे राहु-केतु और शनि जैसे ग्रहों के दुष्प्रभाव से भक्तों की रक्षा करते हैं। नकारात्मक शक्तियां जैसे प्रेत आदि सभी हनुमानजी के डरते हैं।

    भूलकर भी न लगाएं इन तस्वीरों को  

    - हनुमान जी की ऐसी तस्वीर जिसमें वह अपनी छाती को चीरते हुए दिखाई देते हों नहीं लगानी चाहिए। 

    - जिन तस्वीरों में हनुमान जी ने भगवान राम और लक्ष्मण को अपने कांधे पर बैठाया हो, तो उन तस्वीरों को भी नहीं लगाना चाहिए।

    - जिस तस्वीर में हनुमान जी संजीवनी लेकर उड़ रहे हों उस तस्वीर को भी घर में रखना शुभ नहीं माना जाता।

    - हनुमान जी की ऐसी तस्वीरों को नहीं लगाना चाहिए जिसमें वो राक्षसों और अधर्मी लोगों को संहार करने की मुद्रा में या लंका दहन करते हुए नजर आ रहे हैं।

    घर में इन तस्वीरों को लगाना हैं शुभ 

    - हनुमानजी जिस तस्वीर में युवा अवस्था में पीले रंग के कपड़ों में हों। ऐसी तस्वीर लगाने से घर में सुख-समृद्धि आती हैं।

    - हनुमान जी की लाल लंगोट में तस्वीर घर पर लगाने से बच्चों  का मन पढ़ाई में लगता हैं।

    - राम दरबार की तस्वीर घर में लगाने से परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता हैं।

    - घर के मुख्य द्वार पर पंचमुखी हनुमान जी की तस्वीर या मूर्ति लगानी चाहिए। इससे नकारात्मक शक्तियों का प्रवेश घर में नहीं हो पाता।

    - हनुमानजी की ऐसी तस्वीर लगानी चाहिए जिसमें वह अपने प्रभु भगवान राम की सेवा में लीन हो। इससे घर पर लगाने से धन की कमी नहीं होती।

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  • नाग पंचमी पर इन बातों का रखें खास ख्याल, यह हैं शुभ मुहूर्त

    नाग पंचमी पर इन बातों का रखें खास ख्याल, यह हैं शुभ मुहूर्त

     

    सावन महीने की शुक्ल पंचमी को नाग पंचमी मनाई जाती हैं। नाग पंचमी को पूरे देश में मनाया जाता हैं। खासतौर से बड़े शिव मंदिर और आदिवासी इलाकों में इसका ज्यादा चलन हैं। इस बार नाग पंचमी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। इस दिन नागों को पूजा जाता हैं। ऐसा कहा गया हैं कि इस दिन अगर नागों को सच्चे मन से दूध चढ़ाया जाता हैं तो भोलेनाथ खुश हो जाते हैं और सर्पदंश का खतरा भी कम हो जाता हैं। नाग पंचमी के दिन लोग गोबर से अपने घरों में नाग बनाकर उनकी पूजा करते हैं। वही, अगर इस दिन नाग दिख जाए तो उसे बेहद ही शुभ माना जाता हैं। आज हम आपको बताने जा रहे है नाग पंचमी 2020 का शुभ मुहूर्त। तो चलिए जानते हैं...

    इस बार नाग पंचमी का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 42 मिनट से 8 बजकर 24 मिनट तक हैं. ऐसा बताया जाता हैं कि नाग पंचमी पर उस नाग की पूजा नहीं करनी चाहिए जिसे सपेरे द्वारा पकड़ा गया हो। ऐसा इसलिए कि जिन नागों को सपेरे पकड़ते हैं उनके दांत तोड़ दिए जाते हैं। वो शिकार करने लायक नहीं रहते हैं और बाद में उनकी मृत्यु हो जाती है। अगर ऐसे नागों की पूजा की जाए तो उनका पाप जो पूजन कर रहा है उसे लगता है। नाग पंचमी पर नागों को दूध नहीं पिलाया जाता हैं क्योंकि दूध पीने से नागों की मृत्यु हो जाती है।

    इसके अलावा नाग पंचमी के दिन मिट्टी की खुदाई पूरी तरह से प्रतिबंधित होती हैं। वहीं, इस दिन तवा भी चूल्हे पर नहीं चढ़ाना चाहिए। क्योंकि नाग का फन तवे जैसा होता है इसलिए माना जाता हैं कि इस दिन तवे को चूल्हे पर चढ़ाने से नाग के फन को आग पर रखने जैसा होता हैं।  

     

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  • Hariyali Teej 2020: जानिए तीज पर सोलह कौन-कौन से होते है श्रृंगार और क्या होता है इनका महत्व

    Hariyali Teej 2020: जानिए तीज पर सोलह कौन-कौन से होते है श्रृंगार और क्या होता है इनका महत्व

     

    इस साल 23 जुलाई 2020 को हरियाली तीज मनाई जाएगी। इस दिन सुहागन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती है। ऐसा कहा जा है कि सोलह श्रृंगार अखंड सौभाग्य की निशानी होती है। बता दें कि हरियाली तीज सावन मास का महत्वपूर्ण पर्व है। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की प्रथम मिलन हुआ था। सुहागिन स्त्रियों के लिए यह पर्व सुखद दांपत्य जीवन के लिए प्रेरित करता है। इस दिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं। ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं सोलह श्रृंगार के अंर्तगत कौन-कौन से श्रृंगार आते हैं और उनका क्या महत्व है... 

    - माथे पर बिंदी या टिका: सोलह श्रृंगार में इसे एक श्रृंगार के तौर पर माना गया है। माथे पर सिंदूर का टिका लगाने से सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है। इससे मानसिक शांति भी मिलती है। इस दिन चंदन का भी टिका लगाया जाता है। 

    - गले में मंगल सूत्र: मोती और स्वर्ण से युक्त मंगल सूत्र या हार पहनने से ग्रहों की नकारात्मक ऊर्जा को रोकने में मदद मिलती है वहीं इससे प्रतिरोधक क्षमता में भी वृद्धि होती है। गले में स्वर्ण आभूषण पहनने से हृदय रोग संबंधी रोग नहीं होते हैं। हृदय की धड़कन नियंत्रित रहती है। वहीं मोती चंद्रमा का प्रतिनिधित्व करते हैं इससे मन चंचल नहीं होता है। 

    - पुष्प का श्रृंगार: सोलह श्रृंगार में फुलों से श्रृंगार करना शुभ माना गया है। बरसात के मौसम में उमस बड़ जाती है। सूर्य और चंद्रमा की शक्ति वर्षा ऋतु में क्षीण हो जाती है। इसलिए इस ऋतु में आलस आता है. मन को प्रसन्नचित रखने के लिए फुलों को बालों में लगाना अच्छा माना गया है। फुलों की महक स्फूर्ति प्रदान करती है। 

    - कानों में कुंडल: कान में आभूषण या वाली पहनने से मानसिक तनाव नहीं होता है। कर्ण छेदन से आंखों की रोशनी तेज होती है। सिर का दर्द कम करने में भी सहायक होता है। 

    -  मांग में सिंदूर: मांग में सिंदूर लगाना सुहाग की निशानी है वहीं इस स्थान पर सिंदूर लगाने से चेहरे पर निखार आता है। इसका अपने वैज्ञानिक फायदे भी होते हैं। मांग में सिंदूर लगाने से शरीर में विद्युत ऊर्जा को नियंत्रित करने में भी मदद मिलती है। 

    - कंगन या चूडियां: हाथों में कंगन या चूडियां पहनने से रक्त का संचार ठीक रहता है। इससे थकान नहीं नहीं होती है। साथ ही, हार्मोंस को भी नहीं बिगड़ने देती हैं।

    - माथे पर स्वर्ण टिका: माथे पर स्वर्ण का टिका महिलाओं की सुंदरता बढ़ाता है। वहीं मस्तिष्क का नर्वस सिस्टम भी अच्छा रहता है। 

    - कमरबंद: इससे पहनने से पेट संबंधी दिक्क्तें कम होती हैं। कई बीमारियों से बचाव होता है। हार्निया जैसी बीमारी होने का खतरा कम होता है। - बाजूबंद: इसे पहनने से भुजाओं में रक्त प्रवाह ठीक बना रहता है। दर्द से मुक्ति मिलती है। वहीं इससे सुंदरता में निखार आता है। 

    - पायल: पायल पैरों की सुंदरता में चारचांद लगाती हैं वहीं इनको पहनने से पैरों से निकलने वाली शारीरिक विद्युत ऊर्जा को शरीर में संरक्षित करती है। इसका एक बड़ा कार्य महिलाओं में वसा को बढ़ने से रोकना भी है वहीं चांदी की पायल पैरों की हड्डियों को मजबूत बनाती हैं। 

    - नथनी: नथनी चेहरे की सुंदरता में चारचांद लगाती है। यह एक प्रमुख श्रृंगार है। लेकिन इसका वैज्ञानिक महत्व भी है। नाक में स्वर्ण का तार या आभूषण पहनने से महिलाओं को दर्द सहन करने की क्षमता बढ़ती है। 

    - बिछिया: बिछिया को सुहाग की एक प्रमुख निशानी के तौर पर माना जाता है लेकिन इसका प्रयोग पैरों की सुंदरता तक ही सीमित नहीं है। बिछिया नर्वस सिस्टम और मांसपेशियां को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार होती है।

    - मुद्रिका या अंगूठी: अंगूृठी पहनने से रक्त का संचार शरीर में सही बना रहता है। इससे हाथों की सुंदरता बढ़ती है. इससे पहनने से आलस कम आता है।

    - काजल या सुरमा: काजल या सुरमा जहां आंखों की सुरंदता को बढ़ाता है। वहीं आंखों की रोशनी भी तेज करने में सहायक होता है। इससे नेत्र संबंधी रोग दूर होते हैं।

    - मेहंदी: हरियाली तीज पर मेहंदी लगाने की परंपरा है। स्त्रियां खास तौर पर इस दिन हाथों में मेहंदी लगाती हैं। ये सोलह श्रृंगार में प्रमुख श्रृंगार में से एक है। मेहंदी शरीर को शीतलता प्रदान करती है और त्वचा संबंधी रोगों को दूर करती है।

    - मुख सौंदर्य: इसे मेकअप भी कहा जाता है। मुख पर प्रकृति सौंदर्य प्रसाधन लगाने से मुख की सुंदरता बढ़ती है। वहीं, इससे महिलाओं के आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और ऊर्जा बनी रहती है।

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  • क्यों मनाया जाता हैं हरियाली तीज का पर्व, जानिए महत्व, पूजा विधि

    क्यों मनाया जाता हैं हरियाली तीज का पर्व, जानिए महत्व, पूजा विधि

     

    हरियाली तीज सावन के महीने में मनाया जाने वाला त्योहार हैं. श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर यह त्योहार मनाया जाता है. हरियाली तीज के मौके पर सुहागन महिलाएं व्रत रखती हैं और भगवान शिव माता पार्वती की पूजा- आराधना करती हैं. बता दें सुहागन महिलाओं के साथ कुंवारी लड़कियां अच्छे वर की कामना के साथ व्रत रखती हैं। मान्यता है कि सावन महीने में भगवान शिव ने देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार करने का वर दिया था।

    हरियाली तीज का पर्व सावन के महीने में आता हैं जब इस समय चारों तरफ हरियाली छाई होती है. यही वजह है कि इस त्योहार को हरियाली तीज के नाम से बुलाया जाता है.

    हरियाली तीज का त्योहार मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में बड़े ही धूम धाम के साथ मनाया जाता हैं। इस दिन माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, इससे प्रसन्न होकर शिव ने हरियाली तीज के दिन ही माँ पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। तभी से ऐसा माना जाता हैं की जो सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर सुहागन महिलाएं उपवास रखकर भगवान शंकर और माता पार्वती की पूजा करेगी उन्हें अखंड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्राप्त मिलता है.

    बता दें कि हरियाली तीज का व्रत करवा चौथ के व्रत से भी कठिन होता है. इस दिन महिलाएं निर्जजा व्रत रख पूजा करती हैं. और अगले दिन उपवास तोड़ती हैं. हरियाली तीज के दिन विवाहित महिलाओं को सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए। फिर इसके बाद नए कपड़े पहनकर पूजा का संकल्प ले। पूजा स्थल की साफ-सफाई करने के बाद मिट्टी से भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति बनाएं। इसके बाद उन्हें लाल कपड़े के आसन में स्थापित कर पूजा अनुष्ठान आरंभ करें। पूजा की थाली में सुहाग की सभी चीजों को लेकर भगवान शिव और माता पार्वती को अर्पित करें। अंत में तीज कथा और आरती करें.

     

     

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  • इस हरियाली तीज पर बन रहे है दो शुभ संयोग, जानें किस राशि वालों को होगा फायदा

    इस हरियाली तीज पर बन रहे है दो शुभ संयोग, जानें किस राशि वालों को होगा फायदा

     

    हरियाली तीज का व्रत इस वर्ष 23 जुलाई 2020 यानि गुरुवार को रखा जाएगा। हरियाली तीज पर रखा जाने वाला ये व्रत सुहागिन महिलाओं और मनचाहे वर की इच्छा रखने वाली कन्याओं के लिए बहुत फलदायी होता है। वही, इस बार हरियाली तीज पर खास संयोग भी बन रहा है। जी हां, पहली बात हरियाली तीज इस बार गुरुवार को पड़ रही है और गुरु अपनी ही धनु राशि में है, जो पति का कारक भी होता है। दूसरा, केतु अपने माघ नक्षत्र के साथ गुरु के साथ बैठा हुआ है। ऐसे में ग्रह नक्षत्रों का योग कई राशि वालों की किस्मत चमका सकता है। तो आइए जानते है इस तीज किसकी किस्मत चमकने वाली है... 

    मेष राशि- इस राशि के लोगों का विवाह फरवरी, जून और अक्टूबर में होने की संभावना ज्यादा होती है। आयु के 22 व 27वें वर्ष में विवाह होने की संभावना ज्यादा होती है। वही, तीज के दिन रेशमी वस्त्र शिवजी को अर्पित करें। साथ ही, शिव जी को पंचामृत अर्पित करें, लाभ मिलेगा।

    वृष राशि- इस राशि के लोगों का विवाह जनवरी, मार्च या अप्रैल के महीने में होने की संभावना ज्यादा होती है। आयु के 23, 28, 29वें वर्ष में विवाह की संभावना ज्यादा होती है। वही, वृष राशि वाली तीज के दिन शिव और पार्वती को गुलाब के पुष्प अर्पित करें। साथ ही, शिव जी को सुगंध अर्पित करें। 

    मिथुन राशि- इन लोगों का विवाह फरवरी, मई और जून में होने के प्रबल योग होते हैं। आयु के 24, 27 या 29वें वर्ष में विवाह की प्रबल संभावनाएं होती हैं। ऐसे में तीज के दिन मिथुन राशि वाले मां पार्वती को हल्दी और शिव जी को सफेद चंदन अर्पित करें। हरे वस्त्र धारण करें। 

    कर्क राशि- इस राशि के लोगों का विवाह मार्च ,अप्रैल, या नवम्बर में होने की संभावना ज्यादा होती है। आयु के 25, 29 या 30वें वर्ष में विवाह होने के योग ज्यादा प्रबल होते हैं। कर्क राशि वाले तीज के दिन शिव जी का श्रृंगार करें और नमः शिवाय का जाप करें। 

    सिंह राशि- इन लोगों का विवाह जुलाई,अक्टूबर, नवम्बर में होने के योग ज्यादा प्रबल होते हैं। आयु के 26, 29 या 31वें वर्ष में विवाह के योग प्रबल होते हैं। वही, सिंह राशि वाले इस तीज पर शिव पार्वती को पीले फूल की माला अर्पित करें। 

    कन्या राशि- इस राशि के लोगों का विवाह मार्च, जुलाई या अगस्त में होने की संभावना ज्यादा प्रबल होती है। आयु के 27, 30 या 32वें वर्ष में विवाह के योग मजबूत होते हैं। 

    तुला राशि- इन लोगों का विवाह आम तौर पर जनवरी या दिसम्बर में होता हुआ दिखता है। आयु के 20, 28 या 31वें वर्ष में विवाह के योग काफी प्रबल होते हैं। वही, तीज के दिन शिव जी को पंचामृत अर्पित करें। श्रृंगार की वस्तुओं का दान करें। 

    वृश्चिक राशि- इन राशि के लोगों का विवाह आम तौर पर जून,नवम्बर या दिसंबर में होता है। आयु के 21, 29 या 32वें वर्ष में विवाह होने के योग प्रबल होते हैं। इस तीज शिव जी को दूर्वा अर्पित करें। पीले वस्त्र धारण करें। 

    धनु राशि- इन लोगों का विवाह आम तौर पर फरवरी, मार्च या नवम्बर के महीने में होता है। आयु के 20, 23 या 31वें वर्ष में विवाह की संभावनाएं ज्यादा होती हैं। वही, तीज पर शिव पार्वती को एक साथ सुगन्धित पुष्प अर्पित करें। इसके अलावा लाल वस्त्र धारण करें। 

    मकर राशि- इनका विवाह सामान्यतः जनवरी, मई या जून में होने की संभावना ज्यादा होती है। आयु के 21वें, 24वें या 30वें वर्ष में विवाह होने के योग बनते हैं। तीज पर शिव जी के मंदिर में घी का दीपक जलाएं और सफेद चंदन शिवलिंग पर अर्पित करें। 

    कुंभ राशि- इनका विवाह आम तौर पर मई,अक्टूबर या नवंबर में होता है। आयु के 22, 25 या 29वें वर्ष में विवाह के संयोग ज्यादा प्रबल होते हैं। इस तीज पर शिव जी को सफेद पुष्प अर्पित करें और गुलाबी वस्त्र धारण करके पूजा करें।

    मीन राशि- इन राशि के लोगों का विवाह आम तौर पर जनवरी, फरवरी या मई के महीने में होता है। आयु के 21, 26 या 32वें वर्ष में विवाह होने की संभावनाएं ज्यादा मजबूत होती हैं। ऐसे में इस तीज पर पीले रंग के वस्त्र अर्पित करें। श्रृंगार की सामग्री भेंट करें।

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    मेहंदी बिन श्रृंगार रहेगा अधूरा, इस हरियाली तीज पर लगाएं ये लेटेस्ट डिजाइन

     

    श्रावस मास में मनाई जाने वाली हरियाली तीज का त्योहार गुरुवार, 23 जुलाई को हैं. हरियाली तीज का दिन सुहागनों के लिए बेहद खास माना जाता हैं. इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पत्ति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रखती हैं. इसके अलावा हरियाली तीज के दिन सभी महिलाएं एक साथ मिलकर गीत गाती हैं और सावन के झुले झूलती हैं.

    इस दिन सुहागन महिलाएं पूरा श्रंगार करके शिव-पर्वाती की विधि-विधान से पुजा करती हैं. बता दें महिलाएं तीज पर विशेष रूप से तैयार होती हैं. हाथों में चूडियां और मेहंदी लगाती हैं. ऐसे में आज हम आपको मेहंदी के कुछ खास डिजाइन दिखाएगें, जिन्हें आप हरियाली तीज लगा सकती हैं.

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