अध्यात्म

  • 14 जनवरी को है मकर संक्रांति, जानें इस दिन क्या करें और क्या भूलकर भी न करें

    14 जनवरी को है मकर संक्रांति, जानें इस दिन क्या करें और क्या भूलकर भी न करें

     

    मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं। इसलिए इसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन को उत्तरायण के नाम से भी जाना जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्य की पूजा, नदियों में स्नान, देव दर्शन और दान से विशेष पुण्य फल मिलता है। वहीं ज्योतिष की मानें तो इस संक्रांति का वाहन बाघ और उप वाहन घोड़ा होने से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश का पराक्रम बढ़ सकता है और दूसरे देशों से भारत के संबंध और अधिक मजबूत हो सकते हैं। विद्वान और शिक्षित लोगों के लिए ये संक्रांति शुभ रहेगी। लेकिन अन्य कुछ लोगों में डर बढ़ सकता है। अनाज बढ़ेगा और महंगाई पर नियंत्रण भी रहेगा। चीजों की कीमतें सामान्य रहेंगी। तो आइए जानते हैं मकर संक्रांति के दिन गायत्री आराधना और सूर्य पूजा के महत्व के बारे में।

    मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त 
    मकर संक्रांति तिथि-  शुक्रवार, 14 जनवरी 
    मकर संक्रांति पुण्य काल-  दोपहर 02:43 से शाम 05:45 बजे तक 
    मकर संक्रांति महा पुण्य काल दोपहर-  02:43 से 04:28 तक

    मकर संक्रांति पर क्या करें 
    - मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन नदियों में स्नान करने से विशेष लाभ होता है। इस दिन घर में नहाने के पानी में गंगा जल मिलाकर भी स्नान किया जा सकता है। इसके साथ ही पानी में काले तिल डालकर भी स्नान कर सकते हैं।
    - इस दिन काले तिल दान का विशेष महत्व है। ऐसा करने से शनि देव और सूर्य देव प्रसन्न होते हैं। 
    - इस दिन तिल का पानी पीने, तिल का लड्डू खाने और तिल का उबटन लगाने की खास परंपरा है।
    - धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की परंपरा है। जिसके पीछे एक पौराणिक कथा भी है। 

    मकर संक्रांति पर क्या न करें 
    कहते हैं कि मकर संक्रांति के दिन मदिरा पान, तामसिक पदार्थों का सेवन आदि से परहेज करना चाहिए। इस दिन स्नान और दान से पूर्व भोजन नहीं ग्रहण करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन घर के बाहर आए किसी भिखारी या जरूरतमंद व्यक्ति को खाली हाथ न लौटाएं। इस दिन दान अवश्य करें।

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  • बेस्ट हिंदी शुभकामना संदेश भेजकर दे अपनों को बधाई, कहें- इससे पहले कि लोहड़ी की शाम हो जाए...

    बेस्ट हिंदी शुभकामना संदेश भेजकर दे अपनों को बधाई, कहें- इससे पहले कि लोहड़ी की शाम हो जाए...

     

    Lohri 2022: आज साल 2022 का पहला त्योहार लोहड़ी देशभर में धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। लोहड़ी का पर्व उत्तर भारत के कई हिस्सों में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। अगर आप आज के दिन अपनों से दूर हैं तो उन्हें इन चुनिंदा मैसेज को भेजकर इस तरह खास दिन की बधाई दे सकते हैं।

    कोई हम से पहले ना कह दे आपको, 
    इसलिए हम पहले ही आपको “हैप्पी लोहड़ी” कहते हैं

    फिर आ गई भंगड़े दी वारी,
    लोहड़ी मनाओ दी करो तैयारी!
    लोहड़ी की लख लख बधाइयां..

    मक्की दी रोटी ते सरसों दा साग, सूरज दिया करण,
    खुशियां दी बहार, ढोल दी आवाज ते नचदी मुटियार,
    मुबारक होव सरकार लोहड़ी दा त्यौहार..
    Happy Lohri

    इससे पहले कि लोहड़ी की शाम हो जाए,
    मेरा SMS औरों की तरह आम हो जाए,
    और सारे मोबाइल नेटवर्क जाम हो जाए,
    आपको लोहड़ी की शुभकामनाएं हैप्पी लोहड़ी..

    लोहड़ी की आग में दहन हो सारे गम
    खुशियां आए आप के जीवन में हरदम 
    हैप्पी लोहड़ी 2022

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  • Lohri Festival 2022: 13 जनवरी को मनाया जाएगा लोहड़ी पर्व, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

    Lohri Festival 2022: 13 जनवरी को मनाया जाएगा लोहड़ी पर्व, जानिए पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

     

    Lohri 2022: लोहड़ी को पहले तिलोड़ी कहा जाता था। यह शब्द तिल+रोड़ी से मिलकर बना है। जोकि वर्तमान समय में बदल कर लोहड़ी के रूप में प्रसिद्ध हो गया। भारतवर्ष में ऋतुओं के अनुसार, पतझड़, सावन और बसंत में कई तरह के पर्व मनाने का विधान है। उन्हीं पर्वों में से एक प्रमुख पर्व लोहड़ी पर्व है। 

    हिन्दू पंचांग के अनुसार सूर्य का मकर राशि में गोचर होने के कारण 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनायी जाएगी। वहीं लोहड़ी का पर्व 13 जनवरी को मनाया जाएगा। लोहड़ी के पर्व को शाम के समय मनाने का विधान है। इसका शुभ मुहूर्त 13 जनवरी को शाम सात बजकर 34 मिनट के बाद शुरू होगा। इससे पहले भद्राकाल रहेगा। लोहड़ी के दिन मूंगफली, गुड़, तिल और गज्जक के साथ में मक्के के दानों का खास प्रयोग किया जाता है। शाम के समय लोग खुली जगह पर लोहड़ी जलाते हैं। अग्नि में मूंगफली, गज्जक, तिल और मक्का के दाने डालकर उस अग्नि की परिक्रमा करते हैं और इस अग्नि के पास खड़े होकर लोकगीत गाते हैं।

    लोहड़ी पूजाविधि 
    लोहड़ी के दिन पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पूजा की जाती है। एक काले कपड़े पर महादेव का चित्र स्थापित करके उसके आगे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। उसके बाद उन्हें सिंदूर, बेलपत्र तथा रेबड़ियों का भोग लगाएं। फिर सूखे नारियल अथवा गोला लेकर उसमें कपूर डालकर अग्नि जलाकर उसमें रेबड़ी, मूंगफली या मक्का आदि डाली जाती है। इसके बाद इस अग्नि की कम से कम सात बार परिक्रमा जरुर करें। कुछ पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि, लोहड़ी श्रीकृष्ण व अग्निदेव के पूजन का भी पर्व है।
     

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  • Guru Gobind Singh Jayanti 2022: गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर जानें उनके प्रेरणादायक विचार

    Guru Gobind Singh Jayanti 2022: गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती पर जानें उनके प्रेरणादायक विचार

     

    इतिहास में सिखों के दस गुरुओं के जीवन में ऐसे कई वाक्ये हुए हैं, जो हमें जीवन जीने का सलिका सिखाते हैं कि हमें अपना जीवन कैसे जीना चाहिए। जीवन में सभी के प्रति चाहे वह हमारे परिवार, मित्र,अनजान व्यक्ति या दुश्मन ही क्यों न हों, यहां तक कि पेड़-पौधे और जानवरों आदि के लिए भी अपने मन में प्रेम व दया की भावना रखनी चाहिए। सिखों के 10वें गुरु गुरु गोविंद सिंह का जन्म श्री पटना साहिब में अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार 22 दिसंबर 1666 को हुआ था। बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह पहले गुरु थे जिन्होंने मुगलों के अत्याचार के खिलाफ 1699 में  खालसा पंथ की स्थापना की थी।

    इस दौरान उन्होंने जीवन जीने के पांच सिद्धांत दिए, जिन्हें ‘पंच ककार’ के नाम से जाना जाता है। खालासा पंथ में शामिल होने वाले हर व्यक्ति को इन्हें अपनाना होता था। आज के दिन सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह की जयंती के अवसर पर पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, पटना और देशभर में अन्य जगहों पर हजारों सिख श्रद्धालु मत्था टेकने और प्रार्थना करने के लिए गुरुद्वारों में जाते हैं। गुरु गोबिंद सिंह के संदेश के अनुसार ही खालसा सिखों में पांच चीजों को अनिवार्य माना गया है। ये पांच चीजें हैं- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा।

    गुरु गोबिंद सिंह के प्रेरणादायक विचार:

    -बचन करके पालना: अगर आपने किसी को वादा किया है तो उसे हर कीमत में निभाना चाहिए।
    -किसी दि निंदा, चुगली, अतै इर्खा नै करना : किसी की चुगली व निंदा करने से हमें हमेशा बचना चाहिए और किसी से ईर्ष्या करने   के बजाय परिश्रम करने पर ध्यान देना चाहिए।
    -कम करन विच दरीदार नहीं करना : काम में खूब मेहनत करें और काम को लेकर कभी कोई कोताही न बरतें।
    -गुरुबानी कंठ करनी : गुरुबानी को कंठस्थ करें।
    -दसवंड देना : अपनी कमाई का दसवां हिस्सा दान में दें।

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  • Grahan: 2022 में कब- कब लग रहा है 'सूर्य ग्रहण' और 'चंद्र ग्रहण', जानें भारत का सही समय

    Grahan: 2022 में कब- कब लग रहा है 'सूर्य ग्रहण' और 'चंद्र ग्रहण', जानें भारत का सही समय

     


    Surya and Chandra Grahan 2022 date And Time: साल 2021 समाप्त होने में अब केवल कुछ ही दिन शेष रह गया है।  इसके साथ यह चर्चा भी होने लगी है कि अगले साल कौन-कौन से ग्रहण पड़ेंगे और कब-कब पड़ेंगे। तो आइए जानते हैं साल 2022 में पड़ने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण के बारे में...

    2022 में पहला सूर्य ग्रहण 
    आपको बता दें साल 2022 में कुल चार ग्रहण पड़ेंगे। इनमें दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण पड़ेंगे। पंचांग के मुताबिक, साल का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को लगेगा। वहीं इस सूर्य ग्रहण को लगने का समय दोपहर के 12:15 बजे से शाम 04:07 बजे तक होगा। माना जा रहा है कि यह एक आंशिक ग्रहण होगा। जोकि दक्षिणी/पश्चिमी अमेरिका, पेसिफिक अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा। वहीं भारत में इसका प्रभाव ना के बराबर होगा। इसीलिए इसका सूतक भी भारत में मान्य नहीं होग। 

    2022 का दूसरा सूर्य ग्रहण
    पंचांग के अनुसार साल 2022 का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगेगा। जोकि एक आंशिक ग्रहण के रूप में ही होगा। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण शाम को 04:29 बजे से 05:42 बजे तक लगेगा। यह ग्रहण यूरोप, दक्षिणी/पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और अटलांटिक में दिखाई देगा। वहीं इस ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं रहेगा और इसीलिए भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

    2022 में पहला चंद्रग्रहण
    वहीं साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई को लगने जा रहा है। यह ग्रहण सुबह 07:02 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक लगेगा। माना जा रहा है कि इस बार का चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और यह ग्रहण भारत में भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा यह दक्षिणी/पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी/पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिका, हिन्द महासागर में भी देखा जा सकेगा। इस ग्रहण का सूतक काल विशेष रूप से प्रभावी माना जाएगा और गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी सावधान रहना होगा।

    2022 का दूसरा चंद्रग्रहण
    आपको बता दें 16 मई के बाद साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 08 नवंबर 2022 को लगेगा और यह भी एक पूर्ण चंद्र ग्रहण ही होगा। इस ग्रहण में भी सूतक काल मान्य होगा। इसका प्रभाव भारत समेत दक्षिणी-पूर्वी यूरोप, एशिया और आस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिका और हिन्द महासागर में देखने को मिलेगा। वहीं चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 01:32 बजे से होगी और शाम 07:27 बजे चंद्र ग्रहण पूरा होगा।

    सूतक काल
    इस वर्ष 2022 में पड़ने वाले ग्रहण के दौरान सूतक नियमों का पालन नहीं किया जाएगा। मान्यता के अनुसार सूतक नियमों का पालन तभी किया जाता है जब पूर्ण ग्रहण की स्थिति बनें। वहीं इस वर्ष सभी ग्रहण आंशिक माने जा रहे हैं, जिस कारण सूतक नियमों का पालन आवश्यक नहीं होगा।

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  • वास्तु शास्त्र: उत्तर दिशा में इन 3 चीजों के होने से घर में होता है मां लक्ष्मी का वास, आप भी जानें

    वास्तु शास्त्र: उत्तर दिशा में इन 3 चीजों के होने से घर में होता है मां लक्ष्मी का वास, आप भी जानें

     

    कहा जाता है कि वास्तु शास्त्र का जीवन पर बड़ा गहरा प्रभाव पड़ता है। वास्तु शास्त्र में हर दिशा का अलग महत्व बताया गया है। जानकारों की मानें तो अलग-अलग दिशाओं में रखी कई वस्तुएं व्यक्ति के जीवन पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। हालांकि जानकारी न होने के कारण आमतौर पर लोग इन सब बातों पर ध्यान नहीं देते हैं।

    वास्तु शास्त्र (Vaastu Shaastra) के मुताबिक, उत्तर दिशा को धन के देवता कुबेर (Kuber) की दिशा माना जाता है। इसलिए कहा जाता है कि उत्तर दिशा को हमेशा दोष मुक्त होना चाहिए। अगर उत्तर दिशा में वास्तु दोष होता है तो व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कहते हैं कि इस दिशा में किसी भी भारी वस्तु को नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से धन-धान्य में भारी कमी होती है।

    वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का प्रवेश द्वार हमेशा उत्तर दिशा की ओर ही होना चाहिए। कहते हैं कि इस दिशा में आईना लगाना बहुत शुभ माना जाता है। इसके अलावा इस दिशा में मनी प्लांट (Money Plant) रखने से भी घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। नौकरी में तरक्की पाने के लिए उत्तर दिशा में धन के देवता कुबेर जी की प्रतिमा होनी चाहिए।

    उत्तर दिशा में रसोई घर
    वास्तु शास्त्र के मुताबिक, उत्तर दिशा में रसोई घर होना बेहद शुभ होता है। कहते हैं कि रसोई घर उत्तर दिशा में होने से मां अन्नपूर्णा की कृपा हमेशा बनी रहती है और घर में कभी अनाज की कमी नहीं होती। घर की उत्तर दिशा में हमेशा नीले रंग का पेंट करवाना चाहिए। ताकि धन लाभ क योग बनता रहे।

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  • Christmas 2021:25 दिसंबर को मनाया जाता है क्रिसमस का त्यौहार, जानिए क्या है सीक्रेट सांता की कहानी

    Christmas 2021:25 दिसंबर को मनाया जाता है क्रिसमस का त्यौहार, जानिए क्या है सीक्रेट सांता की कहानी

     

    ईसाइयों का प्रमुख त्योहार क्रिसमस 25 दिसंबर को बड़े ही उत्साह के साथ पूरी दुनिया में मनाया जाता है। क्रिसमस के पहले दिन अर्थात 24 दिसंबर से ही क्रिसमस के कार्यक्रम आदि प्रारंभ हो जाते हैं। कई देशो में क्रिसमस के दिन खूब रंगारंग कार्यक्रम और समारोह आयोजित होते हैं। 

    देश के शहरों में तथा सभी चर्चों में भी इस दिन लोग प्रभु यीशु का ध्यान और प्रार्थना करते हैं। क्रिसमस की पूर्व संध्या पर लोग प्रभु यीशु को याद करके कैरोल गाते हैं और क्रिसमस के दिन लोग प्रेम और भाईचारे का संदेश देने के उद्देश्य से एक-दूसरे के घर जाते हैं। और एक-दूसरे को बधाई देते हैं। तो आइए जानते हैं क्रिसमस से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में। 

    क्रिसमस अब सिर्फ ईसाईयों का ही धार्मिक पर्व नहीं रह गया है बल्कि अब यह त्योहार एक सामाजिक पर्व के रूप में उभर कर सामने आ गया है। अब तो सभी धर्मों के मानने वाले लोग क्रिसमस के पर्व को बढ़−चढ़कर मनाने लगे हैं। क्रिसमस प्रसन्नता का पर्व है। 

    क्रिसमस र्व से जुड़ी ये बड़ी बातें 
    क्रिसमस के दिन दुनिया भर के चर्चों में प्रार्थना की जाती है। और प्रभु यीशु की जन्मगाथा की अनेक झांकियां प्रस्तुत की जाती हैं। पहले तो क्रिसमस के पर्व को केवल ईसाई समुदाय के लोग ही मनाते थे लेकिन आजकल अनेक गैर ईसाई लोग भी इस पर्व को एक उत्सव के रूप में मनाने लगे हैं। इस त्योहार के दिन लोग घरों में क्रिसमस ट्री लगाते हैं। 

    क्रिसमस ट्री को सुन्दर-सुन्दर गिफ्ट और उपहारों से सजाया जाता है। इसी दिन से 12 दिन के उत्सव क्रिसमसटाइड की भी शुरुआत होती है। क्रिसमस पर बच्चों के बीच सांता क्लाज की बहुत धूम रहती है। सांता क्लाज बच्चों के लिए उपहार लेकर आते हैं। बच्चे भी इस दिन सुंदर और रंगीन कपड़े पहनते हैं। इस दिन बच्चे हाथ में छड़ियां लेकर नृत्य भी करते हैं।

    सीक्रेट सांता की कहानी
    आपको बता दें प्रचलित कहानियों के अनुसार चौथी शताब्दी में एशिया माइनर की एक जगह मायरा (अब तुर्की) में सेंट निकोलस नाम का एक शख्स रहता था। जो बहुत अमीर था, लेकिन उनके माता-पिता का देहांत हो चुका था। वो हमेशा गरीबों की चुपके से मदद करता था। उन्हें सीक्रेट गिफ्ट देकर खुश करने की कोशिश करता रहता था।

    एक दिन निकोलस को पता चला कि एक गरीब आदमी की तीन बेटियां है, जिनकी शादियों के लिए उसके पास बिल्कुल भी पैसा नहीं है। ये बात जान निकोलस इस शख्स की मदद करने पहुंचे। एक रात वो इस आदमी की घर की छत में लगी चिमनी के पास पहुंचे और वहां से सोने से भरा बैग डाल दिया। उस दौरान इस गरीब शख्स ने अपना मोजा सुखाने के लिए चिमनी में लगा रखा था। इस मोजे में अचानक सोने से भरा बैग उसके घर में गिरा। ऐसा एक बार नहीं बल्कि तीन बार हुआ। आखिरी बार में इस आदमी ने निकोलस ने देख लिया। निकोलस ने ये बात किसी को ना बताने के लिए कहा, लेकिन जल्द ही इस बात का शोर बाहर हुआ। उस दिन से जब भी किसी को कोई सीक्रेट गिफ्ट मिलता सभी को लगता कि ये निकोलस ने दिया। पूरी दुनिया में क्रिसमस के दिन मोजे में गिफ्ट देने यानी सीक्रेट सांता बनने का रिवाज है।
     

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  • Kharmas 2021:  16 दिसंबर से शुरू होगा खरमास, जानिए क्यों इस महीने बंद होते हैं सभी शुभ कार्य?

    Kharmas 2021: 16 दिसंबर से शुरू होगा खरमास, जानिए क्यों इस महीने बंद होते हैं सभी शुभ कार्य?

     

    अब एक माह तक सभी प्रकार के शुभ कार्यों पर ब्रेक लग जाएगा। क्योंकि 16 दिसम्बर से खरमास आरंभ होने वाला है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खरमास में शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। खरमास को अशुभ माना जाता है। जब सूर्य गोचरवश धनु और मीन में प्रवेश करते हैं तो इसे क्रमश: धनु संक्रांति एवं मीन संक्रांति कहा जाता है। सूर्य किसी भी राशि में लगभग एक माह तक रहते हैं। सूर्य के धनु राशि एवं मीन राशि में स्थित होने की अवधि को ही खरमास अथवा मलमास कहा जाता है। मलमास में वैवाहिक कार्य और शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। गृह प्रवेश नींव पूजन, नवीन व्यापार, विवाह, सगाई सहित सभी शुभ कार्य खरमास में वर्जित माने गए हैं। मलमास में ईश्वर की आराधना एवं पूजन,अर्चन, भागवत कथाएं, रामायण कथा, रामायण का पाठ, मंत्र जाप धार्मिक कृत्य किए जा सकते हैं।

    इसके साथ ही इस साल का आखिरी विवाह मुहूर्त 13 दिसंबर रहा। 15 दिसंबर अंतरात्रि बाद से खरमास शुरू हो जाएगा जोकि 14 जनवरी दोपहर तक रहेगा। इसके बाद विवाह की शहनाइयां नए साल में 15 जनवरी से गूंजनी शुरू होगी। दूसरी तरफ आने वाले नए साल में विवाह मुहूर्त का टोटा नहीं रहेगा। यद्यपि साल में केवल 8 माह ही विवाह होंगे, परंतु इस अवधि में 87 दिन शुभ विवाह लग्न मुहूर्त रहेंगे। बीते वर्ष में सिर्फ 62 दिन ही शुभ मुहूर्त थे। इसमें भी कोरोना के चलते विवाह कम हुए थे। 

    खरमास में यह करें
    - खरमास के महीने में पूजा-पाठ, धर्म-कर्म, मंत्र जाप, भागवत गीता, श्रीराम की कथा, पूजा, कथावाचन, और विष्णु भगवान की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। 
    - दान, पुण्य, जप और भगवान का ध्यान लगाने से कष्ट दूर होते हैं। 
    - इस मास में भगवान शिव की आराधना करने से कष्टों का निवारण होता है। शिवजी के अलावा खरमास में भगवान विष्णु की पूजा भी फलदायी मानी जाती है। 
    - खरमास के महीने में सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर तांबे के लोटे में जल, रोली या लाल चंदन, शहद लाल पुष्प डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी होता है।

    क्यों बंद होते हैं शुभ कार्य?
    ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, धनु राशि का स्वामी बृहस्पति होता है। कहते हैं कि बृहस्पति का अपनी ही राशि में प्रवेश इंसान के लिए अच्छा नहीं होता है। ऐसा होने पर कुंडली का सूर्य कमजोर हो जाता है। इस राशि में सूर्य के मलीन होने के कारण से इसको मलमास तक कहा जाता है। ऐसा कहा जाता हैं कि खरमास में सूर्य का स्वभाव उग्र हो जाता है। जिस कारण से शुभ कार्यों में पाबंदी होती है।

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  • अष्टमी के दिन रखें मां दुर्गा का व्रत, हर संकट होगा दूर

    अष्टमी के दिन रखें मां दुर्गा का व्रत, हर संकट होगा दूर

     

    हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मां दुर्गा (Maa Durga) को समर्पित मासिक दुर्गाष्टमी (Durgashtami) का त्योहार मनाया जाता है। मासिक दुर्गाष्टमी को महाष्टमी भी कहा जाता है।  इसलिए दुर्गाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन देवी का व्रत और पूजा-पाठ करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, आरोग्य का वरदान मिलता है और परिवार में सुख-शांति आती है।

    दुर्गा पूजा और व्रत विधि
    अष्टमी के दिन सुबह स्नान के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण कर तांबे के पात्र से सूर्य देवता को अर्घ्य दें। मां की मूर्ति पर लाल रंग के पुष्प अर्पित करें और धूप-दीप जलाएं। मां को सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। इस व्रत में दुर्गा सप्तशती का पाठ अवश्य करें। इस व्रत में दुर्गा चालीसा का पाठ भी करना चाहिए। ऐसा करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। अष्टमी के दिन गाय के उपले पर कर्पूर का टुकड़ा रखकर पूरे घर में धूप दिखाएं। यह व्रत दांपत्य जीवन को सुखमय बनाने वाला है। इस व्रत के प्रभाव से पारिवारिक रिश्तों में मजबूती आती है और बेहतर स्वास्थ्य का आशीष प्राप्त होता है। मान्यता है कि इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा की थी। इस व्रत में सच्चे मन से मां दुर्गा का स्मरण करें। मां की आरती करें और उनका आशीर्वाद लें। अष्टमी के दिन मां दुर्गा को हलवे और उबले चने का भोग लगाएं। आखिर में कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें उपहार दें। 

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  • Surya Grahan 2021: 4 दिसंबर को है सूर्य ग्रहण, जानिए भारत में सूतक लगेगा या नहीं

    Surya Grahan 2021: 4 दिसंबर को है सूर्य ग्रहण, जानिए भारत में सूतक लगेगा या नहीं

     

    साल 2021 समाप्त होने में अब केवल एक माह शेष रह गया है। सूर्य ग्रहण 04 दिसंबर को लगने वाला है। यह इस साल  का दूसरा व अंतिम सूर्य ग्रहण है। जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच से गुजरता है और सूर्य व पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य कुछ समय के लिए ढंक जाता है। यह घटना सूर्य ग्रहण कहलाती है। सूर्य ग्रहण को अशुभ घटना माना जाता है। सूर्य ग्रहण के दौरान शुभ व मांगलिक कार्यों की मनाही होती है। इस दौरान मंदिर के कपाट भी बंद कर दिए जाते हैं। 

    भारत में सूतक काल
    आपको बता दें सूर्य ग्रहण शुरू होने से 12 घंटे पहले ही सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। 4 दिसंबर को लगने वाला सूर्य ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा। जिसके कारण भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा।

    यहां दिखेगा सूर्य ग्रहण
    इस साल का आखिरी सूर्य ग्रहण दक्षिण अमेरिका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, अटलांटिक के दक्षिणी भाग और दक्षिण अफ्रीका में दिखाई देगा।

    सूर्य ग्रहण 2021 का समय
    सूर्य ग्रहण 04 दिसंबर को सुबह 11 बजे से आरंभ होकर दोपहर 03 बजकर 07 मिनट पर समाप्त होगा।

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  • Surya and Chandra Grahan : साल 2022 में कुल कितने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगेंगे, जानें भारत का सही समय

    Surya and Chandra Grahan : साल 2022 में कुल कितने सूर्य और चंद्र ग्रहण लगेंगे, जानें भारत का सही समय

     

    Surya and Chandra Grahan 2022 date And Time: साल 2021 समाप्त होने में अब केवल एक माह शेष रह गया है। वहीं साल 2021 का आखिरी सूर्य ग्रहण 04 दिसंबर को लगने वाला है। इसी के साथ यह चर्चा भी होने लगी है कि अगले साल कौन-कौन से ग्रहण पड़ेंगे और कब-कब पड़ेंगे। तो आइए जानते हैं साल 2022 में पड़ने वाले सूर्य और चंद्र ग्रहण के बारे में...

    साल 2022 में कुल चार ग्रहण पड़ेंगे। इनमें दो सूर्य और दो चंद्र ग्रहण पड़ेंगे। पंचांग के मुताबिक, साल का पहला सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल 2022 को लगेगा। वहीं इस सूर्य ग्रहण को लगने का दोपहर 12:15 बजे से शाम 04:07 बजे तक होगा।

    माना जा रहा है कि यह एक आंशिक ग्रहण होगा। जोकि दक्षिणी/पश्चिमी अमेरिका, पेसिफिक अटलांटिक और अंटार्कटिका में देखने को मिलेगा। वहीं भारत में इसका प्रभाव ना के बराबर होगा। इसीलिए इसका सूतक भी भारत में मान्य नहीं होग। वहीं पंचांग की मानें तो साल 2022 का दूसरा सूर्य ग्रहण 25 अक्टूबर को लगेगा। जोकि एक आंशिक ग्रहण के रूप में ही होगा। 

    हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह ग्रहण शाम को 04:29 बजे से 05:42 बजे तक लगेगा। यह ग्रहण यूरोप, दक्षिणी/पश्चिमी एशिया, अफ्रीका और अटलांटिक में दिखाई देगा। वहीं इस ग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं रहेगा और इसीलिए भारत में इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

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    वहीं साल 2022 का पहला चंद्र ग्रहण 16 मई को लगने जा रहा है। यह ग्रहण सुबह 07:02 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक लगेगा। माना जा रहा है कि इस बार का चंद्र ग्रहण पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा और यह ग्रहण भारत में भी देखा जा सकेगा। इसके अलावा यह दक्षिणी/पश्चिमी यूरोप, दक्षिणी/पश्चिमी एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिका, हिन्द महासागर में भी देखा जा सकेगा। इस ग्रहण का सूतक काल विशेष रूप से प्रभावी माना जाएगा और गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी सावधान रहना होगा।

    वहीं 16 मई के बाद साल का दूसरा चंद्र ग्रहण 08 नवंबर 2022 को लगेगा और यह भी एक पूर्ण चंद्र ग्रहण ही होगा। इस ग्रहण में भी सूतक काल मान्य होगा। इसका प्रभाव भारत समेत दक्षिणी-पूर्वी यूरोप, एशिया और आस्ट्रेलिया, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, पैसिफिक, अटलांटिक, अंटार्कटिका और हिन्द महासागर में देखने को मिलेगा। वहीं चंद्र ग्रहण की शुरुआत दोपहर 01:32 बजे से होगी और शाम 07:27 बजे चंद्र ग्रहण पूरा होगा।

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  • त्रिनेत्र गणेश मंदिर में गणपति जी चिट्ठी लिखकर चढ़ाने से कर देते हैं मनोकामना पूरी, जानें

    त्रिनेत्र गणेश मंदिर में गणपति जी चिट्ठी लिखकर चढ़ाने से कर देते हैं मनोकामना पूरी, जानें

     

    गणेश जी का यह मंदिर कई मायनों में अनूठा है। इस मंदिर को भारत ही नहीं दुनिया का पहला गणेश मंदिर माना जाता है। यहां गणेश की पहली त्रिनेत्रधारी प्रतिमा स्थापित है। यह मूर्ति स्वयंभू है। देश में ऐसी चार गणेश प्रतिमाएं हैं। हम बात कर रहे हैं रणथम्भौर स्थित त्रिनेत्र गणेश मंदिर की। यह मंदिर भारत के राजस्थान प्रांत में सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। इसे रणताभवन मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर अरावली और विंध्याचल की पहाड़ियों में 1579 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। मंदिर विश्व धरोहर में शामिल रणथम्भौर दुर्ग के भीतर बना हुआ है। अरावली और विन्ध्याचल पहाड़ियों के बीच स्थित रणथम्भौर दुर्ग में त्रिनेत्र गणेश मंदिर प्रकृति व आस्था का अनूठा संगम है। मान्यता है कि यहां विराजमान गणेश जी लड्डू, दुर्वा, फल, फूल या पूजा पाठ से नहीं, बल्कि चिट्ठी लिखकर चढ़ाने से भक्तों की मनोकामना पूरी कर देते हैं। 

    कहा जाता है कि इस मंदिर में विराजमान गणेश जी यहां केवल अपने भक्तों की लिखित अर्जी यानि चिट्ठी में लिखी अर्जी ही स्वीकार करते हैं। गणेश जी के बारे में ऐसी मान्यता है कि वे केवल चिट्ठी में लिखी अर्जी से ही प्रसन्न होते हैं। कहा जाता है कि यहां अर्जी लगाने वाला भक्त कभी भी उनके दर से निराश नहीं होता। गणपति जी उस भक्त की मनोकामना जरुर पूरी कर देते हैं। यहां रोजाना हजारों आमंत्रण पत्र और पत्र डाक से पहुंचते हैं। कहा जाता है कि यहां सच्चे दिल की मुराद पूरी होती है।

    त्रिनेत्र गणेश मंदिर का निर्माण महाराजा हम्मीरदेव चौहान ने करवाया था लेकिन मंदिर के अंदर भगवान गणेश की प्रतिमा स्वयंभू है। इस मंदिर में भगवान गणेश त्रिनेत्र रूप में विराजमान हैं जिसमें तीसरा नेत्र ज्ञान का प्रतीक माना जाता है

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  • Chandra Grahan 2021 : जानिए आज चंद्र ग्रहण के बाद कब लगेगा 'सूर्य ग्रहण' ?  इस राशि के लोग रहे सतर्क

    Chandra Grahan 2021 : जानिए आज चंद्र ग्रहण के बाद कब लगेगा 'सूर्य ग्रहण' ? इस राशि के लोग रहे सतर्क

     

    पंचांग के मुताबिक कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा की तिथि 19 नवंबर 2021 को सदी का सबसे बड़ा चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2021) लगने जा रहा है। ये ग्रहण साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है। बता दें कि ज्योतिष शास्त्र में 'ग्रहण' को नहीं माना जाता है। मान्यता है कि जब चंद्रमा और सूर्य पर ग्रहण लगता है तो, इन ग्रहों की शक्ति कम हो जाती है और ये पीड़ित होने लगाते हैं। जिसके वजह से राशियों पर इसका शुभ प्रभाव नहीं पड़ता है।

    कब लगेगा चंद्र ग्रहण
    19 नवंबर को चंद्र ग्रहण सुबह: 11 बजकर 34 मिनट से शुरू होगा और शाम 05 बजकर 33 मिनट पर खत्म होगा। ये चंद्र ग्रहण वृषभ राशि और कृत्तिका नक्षत्र में लग रहा है। इसलिए इस राशि और नक्षत्र से जुड़े लोगों को खास सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

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    -सूर्य ग्रहण कब है 
    पंचांग के अनुसार सूर्य ग्रहण  4 दिसंबर 2021, शनिवार को मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि को लगेगा। यह वृश्चिक राशि में लगेगा। पंचांग के मुताबिक, 4 दिसंबर को वृश्चिक राशि में 4 ग्रहों की युति बन रही है। इस दिन वृश्चिक राशि पर सूर्य, बुध, चंद्रमा और पाप ग्रह केतु विराजमान रहेगें।

    -ग्रहण के दौरान सावधान रहें वृश्चिक राशि वाले
    सूर्य ग्रहण के दौरान वृश्चिक राशि वालों को सावधानी बरतने की जरूरत है। इस दिन तनाव, विवाद से बचने की पूरी कोशिश करें। इस दिन धन के प्रयोग में भी सतर्कता बरतनी आवश्यक होगी। इतना ही नहीं, इस दिन गर्भवती महिलाओं को भी सावधानी बरतनी होगी और गायत्री मंत्र का जाप करना होगा।

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  • Amla Navami 2021: आंवला नवमी आज, जरुर करें ये उपाय, सुख-सौभाग्य के साथ धन में होगी बढ़ोत्तरी

    Amla Navami 2021: आंवला नवमी आज, जरुर करें ये उपाय, सुख-सौभाग्य के साथ धन में होगी बढ़ोत्तरी

     

    कार्तिक शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी का पर्व मनाया जाता है। आंवले के पेड़ का पूजन कर परिवार के लिए आरोग्य और सुख-सौभाग्य की कामना के उद्देश्य ये आंवला नवमी के दिन लोग पूजा करते हैं। आज के दिन किया गया धर्म, जप, तप और दान इत्यादि सभी दुखों और कष्टों से मुक्ति दिलाता है। आंवला नवमी के दिन किए गए कुछ ऐसे उपाय है, जोकि प्रत्येक मनोकामना को पूरी करने के साथ-साथ अगले जन्म तक इसका अक्षय फल देते हैं। तो आइए जानते हैं।

    आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ की पूजा करें। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन पीपल और केले के पेड़ के अलावा आंवला के पेड़ की पत्तियों में भगवान विष्णु, शिव और माता लक्ष्मी का वास होता है। इस दिन अक्षय लाभ पाने के लिए आंवले के पेड़ की पूजा जरुर करें।

    आंवला नवमी के दिन आंवले के पेड़ के नीचे भोजन पकाना चाहिए। आंवला नवमी के दिन आंवला के पेड़ के नीचे बैठकर भोजन बनाएं और परिवार संग खाना खाएं। इससे अक्षय फल और अक्षय सेहत की प्राप्ति होती है। आंवला पेड़ के नीचे खाना खाते समय अगर आंवले के पेड़ से कोई पत्ती गिर जाए तो इससे साक्षात भगवान विष्णु का आशीर्वाद माना जाता है।

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    वहीं भगवान विष्णु जी को इस दिन आंवला जरुर अर्पित करें। ऐसा माना जाता है कि, सृष्टि के निर्माण के लिए ब्रह्मा जी के आंसुओं से इस पेड़ की उत्पति हुई और इसे पृथ्वी का पहला फल माना जाता है। इस दिन भगवान की पूजा करते समय उन्हें भोग में आंवला अवश्य अर्पित करें।

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  • Chhath Puja 2021: आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य, जानें क्या है इसका महत्व

    Chhath Puja 2021: आज डूबते सूर्य को दिया जाएगा अर्घ्य, जानें क्या है इसका महत्व

     

    Chhath Puja 2021: महापर्व छठ के तीसरे दिन यानी बुधवार को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। वहीं इसके अगले दिन गुरुवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस चार दिन तक चलने वाले पर्व का समापन हो जाएगा। इन दोनों ही दिनों में सूर्यदेव की पूजा का खास महत्व होता है। सूर्यदेव को पंचदेवों में से एक माना जाता है। इसी लिए रोज सुबह सूर्य को अर्घ्य देने से धर्म लाभ के साथ ही सेहत को भी लाभ मिलता है। ज्योतिष की माने तो छठ पर्व के तीसरे दिन सूर्यास्त के समय अर्घ्य देने के बाद सूर्य देव के 12 नामों का जाप किया जाए, तो सूर्य देव की तरह ही भक्त की किस्मत भी चमक जाएगी।

    इस समय दें छठ पर पहला अर्घ्य?
    बुधवार यानी 10 नवंबर को सूर्योदय (Sunrise) सुबह 6 बजकर 3 मिनट पर होगा। जबकि, सूर्यास्त (Sunset) शाम 5 बजकर 3 मिनट पर हो जाएगा। सूर्यास्त होते ही सभी व्रती सूर्य देव को अर्घ्य देना शुरू करे देंगे।
     

    छठ पूजा 2021 की प्रमुख तिथियां-

    8 नवंबर- नहाय-खाए से छठ पूजा प्रारंभ
    9 नवंबर- खरना
    10 नवंबर छठ पूजा, डूबते सूर्य को अर्घ्य
    11 नवंबर- उगते सूर्य को अर्घ्य, छठ पूजा समापन

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