1990 - ईराक द्वारा कुवैत पर अधिकार एवं वहाँ के अमीर का सऊदी अरब पलायन। 1999 - चीन ने लम्बी दूरी (8000 किमी.) की सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइल का परीक्षण किया। 2001 - पाकिस्तान से भारत से चीनी आयात को मंजूरी दी। 2003 - संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लाइबेरिया में संघर्ष विराम लागू करने के लिए सेना भेजने की अनुमति दी। 2004 - अमेरिका की लिंडसे डेवनपोर्ट ने रूस की मिस्कीनी की हराकर सान डियागो टेनिस चैम्पियनशिप का महिला एकल ख़िताब जीत लिया। पराग्वे की राजधानी आसुनसियोन में एक सुपर बाज़ार में आग लगने से 300 लोग मरे। 2007 - जाफना के दक्षिणी द्वीप कियुशु में सुबह आये भयानक तूफ़ान उगासी ने व्यापक पैमाने पर क्षति पहुँचायी। 2008 - सार्वजनिक क्षेत्र के यूनियन बैंक ने हांगकांग में अपनी पहली शाखा खोली। सुधीर कुमार चतुरर्वेदी ने पावर ग्रिड कार्पोरेशन के नये अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक के रूप में अपना कार्यभार संभाला। 2012- लंदन ओलम्पिक 2012 में भारत ने कुल 6 पदक जीते जिसमें 2 रजत और 4 कांस्य शामिल हैं। भारत इस प्रतियोगिता में 55वें नम्बर पर रहा। पदक तालिका में अमेरिका शीर्ष पर रहा जिसने 104 पदक जीते। 1952 - ज्ञान चतुर्वेदी - भारतीय चिकित्सक होने के साथ-साथ जाने-माने व्यंग्यकार भी हैं। 1861 - प्रफुल्ल चंद्र राय - भारत के प्रसिद्ध वैज्ञानिक, जिन्हें 'रसायन विज्ञान का जनक' माना जाता है। 1878 - पिंगलि वेंकय्या- भारत के राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगे' के अभिकल्पक। 1877 - रविशंकर शुक्ल - मध्य प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री। 1947 - रमेश बैस - भारतीय जनता पार्टी से जुड़े राजनीतिज्ञ हैं। 1944 - प्रकाशराव असावडी - जानेमाने भारतीय कवि, विद्वान, आलोचक तथा अनुवादक हैं। 1955 - धीरेन्द्र अग्रवाल - ग्यारहवीं, और बारहवीं लोकसभा के सदस्य। 1956 - विजय रूपाणी, गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री। 1958 - अरशद अयूब - पूर्व भारतीय क्रिकेटर 1966 - एम.वी.श्रीधर - भारतीय क्रिकेटर 1970 - फिलो वालेस - पश्चिम भारतीय क्रिकेटर 1931 - उमाकांत मालवीय - प्रतिष्ठित कवि एवं गीतकार 1922 - जी.पी. बिड़ला - भारत के प्रसिद्ध उद्यमियों में से एक थे। और भी...
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LPG Price Today: अगस्त के पहले दिन अच्छी खबर आई है। देश की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल या हलवाई सिलेंडर की कीमत में 209 रुपये तक की कटौती की है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक इस कटौती के बाद कोलकाता में अब इसका रेट 2,872.50 रुपये रह गया है। वहीं 5 किलो वाला छोटा गैस सिलेंडर भी सस्ता हो गया है। घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव की सूचना नहीं है। ANI के मुताबिक आज से दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 192 रुपये की कमी हुई है। अब इसकी नई कीमत 2738 रुपये रह गई है। इससे पहले दिल्ली में इसका दाम 2930 रुपये था। पटना में इस सिलेंडर की कीमत 3018 रुपये रह गई है। वहां पहले इसकी कीमत 3227 रुपये थी। इस सिलेंडर का उपयोग होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैटरिंग सर्विसेज आदि देने वाले कारोबारी करते हैं। जुलाई में भी घटी थी कीमतें इससे पहले बीते एक जुलाई को भी 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत में कटौती हुई थी। तब दिल्ली में इसके दाम में 183.50 रुपये की कटौती की गई थी। उस समय भी घरों में यूज होने वाले 14.2 किलो वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इस साल खूब बढ़ी कीमतें इस साल जनवरी से ही लगातार 19 किलो वाले सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हो रहा है। पिछले साल 1 दिसंबर को इस सिलेंडर की कीमत 1580.50 रुपये थी। इस साल एक जनवरी में यह बढ़कर 1691.50 रुपये हो गई। फिर फरवरी में इसे बढ़ाकर 1740.50 रुपये कर दिया गया। मार्च में अमेरिका-ईरान युद्ध की वजह से इसकी कीमत में दो बार बढ़ोतरी की गई थी। एक मार्च को इसकी कीमत बढ़ कर 1768.50 रुपये हुई और 7 मार्च को 1883 रुपये पहुंच गई। फिर 1 अप्रैल को इसका दाम 2078.50 रुपये हो गया। मई में इसमें फिर इसकी कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। तब दिल्ली में इसकी कीमत 3,071.50 रुपये पर पहुंच गई थी। जून में इसकी कीमत में 42 रुपये का इजाफा किया गया था। हां, जुलाई में इसकी कीमतों में जरूर 183.50 रुपये की कटौती की गई थी। रसोई गैस सिलेंडरों का क्या हाल आम घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत में इस बार भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। इसमें आखिरी बार 7 जून 2026 को बदलाव किया गया था। इस समय दिल्ली में बिना सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडर की कीमत 942 रुपये है। कोलकाता में इसकी कीमत 968 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और चेन्नई में 957.50 रुपये है। छोटू सिलेंडर भी सस्ता सरकारी तेल कंपनियों ने पांच किलो गैस वाले छोटू गैस सिलेंडर (5 kg FTL Non Domestic) के दाम में भी कटौती की है। दिल्ली में अब इसका दाम 46.50 रुपये कम किया है। पहले इस सिलेंडर की कीमत 808.50 रुपये थी जो कि अब घट कर 762.00 रुपये रह गया है। और भी...
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Asmita Dey: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शुक्रवार, 31 जुलाई का दिन भारतीय जूडो के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। दक्षिण त्रिपुरा के छोटे से कस्बे बेलोनिया की रहने वाली अस्मिता डे ने महिलाओं की 48 किलोग्राम जूडो कैटेगरी के फाइनल में कनाडा की हाइडी क्वाक को गोल्डन स्कोर में हराकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही अस्मिता, कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में जूडो इवेंट में भारत के लिए पहला महिला गोल्ड मेडल जीतने वाली खिलाड़ी बन गईं। लेकिन अस्मिता डे के लिए त्रिपुरा के बेलोनिया से ग्लासगो के पोडियम तक का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा। जूडो में कैसे आईं अस्मिता डे? दिलचस्प बात यह है कि अस्मिता का खेल करियर शुरुआत से जूडो में नहीं था। साल 2015 में त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल में दाखिला लेने के दौरान उन्होंने 800 मीटर रेस से अपने एथलेटिक करियर की शुरुआत की थी। लेकिन बाद में कोच की सलाह पर उन्होंने जूडो को अपनाया। इसके बाद बेलोनिया विद्यापीठ कोचिंग सेंटर की बीना देबनाथ और त्रिपुरा स्पोर्ट्स स्कूल के कोच माणिक लाल देब ने उनकी शुरुआती तकनीक को निखारा। नेशनल स्कूल खेलों और खेलो इंडिया में शानदार प्रदर्शन के दम पर उनका चयन भोपाल के स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के लिए हुआ, जहां वह मौजूदा समय में भी अभ्यास करती हैं। यहां उन्होंने साई रीजनल सेंटर में दिग्गज जूडो कोच यशपाल सोलंकी के साथ मिलकर अपने खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वह भारतीय जूडो टीम में जगह बनाने वाली त्रिपुरा की पहली खिलाड़ी भी हैं। आर्थिक तंगी और पिता के निधन के बाद भी नहीं टूटी जिद अस्मिता का पारिवारिक बैकग्राउंड संघर्षों से भरा रहा है। उनके पिता बेलोनिया में साइकिल मरम्मत की एक छोटी-सी दुकान चलाते थे। साल 2023 में ताशकंद ग्रैंड स्लैम में हिस्सा लेने के लिए उनके पास पैसे तक नहीं थे। राज्य सरकार से गुहार लगाने के बाद भी फंड की कमी के कारण वह टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं ले सकीं। लेकिन आर्थिक चुनौतियों के बावजूद अस्मिता डे ने कभी हार नहीं मानी। कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने से पहले भी अस्मिता कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन कर चुकी हैं। उन्होंने 2022 एशियन कैडेट एवं जूनियर जूडो चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल, 2023 कुवैत एशियन ओपन में सिल्वर मेडल, जूनियर एशियन कप में गोल्ड मेडल और 2025 कासाब्लांका अफ्रीकन ओपन में भी गोल्ड मेडल अपने नाम किया। दिसंबर 2025 में पिता का साया उठा दिसंबर 2025 में अस्मिता के पिता का निधन हो गया, जिससे वह पूरी तरह टूट गई थीं। लेकिन सिर्फ दो महीने बाद हुए एशियन गेम्स ट्रायल्स में उन्होंने नेशनल लेवल पर पहली रैंक हासिल कर दमदार वापसी की। कॉमनवेल्थ गेम्स में ऐतिहासिक गोल्ड जीतने के बाद अस्मिता डे भावुक नजर आईं। उन्होंने कहा, "यह पदक जीतकर मैं बेहद खुश हूं। यह पदक मेरे लिए, मेरे राज्य त्रिपुरा और पूरे देश के लिए बहुत अहम था। मैं इस उपलब्धि को अपने कोच और अपने दिवंगत पिता को समर्पित करती हूं। दिसंबर 2025 में जब मेरे पिता का निधन हुआ, तो मुझे लगा कि मेरा सब कुछ खत्म हो गया है, क्योंकि वह मेरे सबसे बड़े सपोर्टर थे। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी और आज उनका सपना पूरा किया।" और भी...
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Kiara Advani Birthday: बॉलीवुड एक्ट्रेस कियारा आडवाणी 35 साल की हो गई हैं। उन्होंने 31 जुलाई को अपना बर्थडे सेलिब्रेट किया। इस खास मौके पर फैंस के साथ-साथ कई सेलेब्स ने उन्हें ढेर सारी शुभकामनाएं दीं। वहीं, सिद्धार्थ मल्होत्रा ने भी देर रात बेहद रोमांटिक अंदाज में अपनी पत्नी कियारा को बर्थडे विश किया। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा। चॉकलेट आइसक्रीम खाती दिखीं कियारा आडवाणी सिद्धार्थ ने इंस्टाग्राम पर कियारा की एक फोटो शेयर की है, जिसमें वह पिंक कलर का सलवार-सूट पहने मजे से चॉकलेट आइसक्रीम खाती दिख रही हैं। फोटो के साथ सिद्धार्थ ने कैप्शन में लिखा, "उसे जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई, जो हर दिन को थोड़ा और मीठा बना देती है... भले ही वो मेरी आइसक्रीम चुरा लेती हो।" उनके इस पोस्ट को फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा का पोस्ट वायरल सिद्धार्थ का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फैंस के साथ-साथ कई सेलेब्स भी कियारा को जन्मदिन की शुभकामनाएं दे रहे हैं। फिल्ममेकर करण जौहर ने सिद्धार्थ के पोस्ट पर कमेंट करते हुए लिखा, "उसे मेरी तरफ से गले लगाना।" वहीं, फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा ने पोस्ट पर रेड हार्ट इमोजी शेयर कर कियारा को बर्थडे विश किया। कब हुई थी कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा की शादी? बता दें कि कियारा आडवाणी और सिद्धार्थ मल्होत्रा बॉलीवुड के सबसे पसंदीदा कपल्स में से एक हैं। दोनों की केमिस्ट्री को फैंस खूब पसंद करते हैं। दोनों ने 7 फरवरी, 2023 को राजस्थान के जैसलमेर स्थित सूर्यगढ़ पैलेस में सात फेरे लिए थे। वहीं, जुलाई 2025 में यह कपल अपनी नन्ही बेटी सरायाह मल्होत्रा के माता-पिता बना। दोनों इन दिनों अपने पेरेंटिंग फेज को एंजॉय कर रहे हैं। सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी की आने वाली फिल्में वर्क फ्रंट की बात करें तो कियारा आडवाणी जल्द ही फिल्म 'टॉक्सिक' में नजर आएंगी। गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी इस फिल्म में यश लीड रोल में हैं। नयनतारा, तारा सुतारिया और हुमा कुरैशी भी इस फिल्म का हिस्सा हैं। यह फिल्म 26 अगस्त, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। वहीं, सिद्धार्थ मल्होत्रा की अगली फिल्म 'वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट' है। एकता कपूर के प्रोडक्शन में बनी इस लोककथा पर आधारित थ्रिलर फिल्म में तमन्ना भाटिया भी मुख्य भूमिका में हैं। यह फिल्म 25 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। और भी...
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Neeraj Chopra: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों, विशेषकर हरियाणा के लाल और लाडलियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने जेवलिन थ्रो (भाला फेंक) स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए देश के लिए रजत पदक अपने नाम किया है। उनकी इस उपलब्धि पर पूरे देश के साथ-साथ प्रदेश में खुशी की लहर है। सीएम नायब सैनी ने भी नीरज को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने नीरज चोपड़ा को बधाई देते हुए कहा कि नीरज ने एक बार फिर अपने शानदार खेल से पूरे विश्व में हरियाणा और भारत का नाम रोशन किया है। मुक्केबाजी रिंग में छाया हरियाणा वहीं, कॉमनवेल्थ गेम्स में आज का दिन भारतीय मुक्केबाजी के लिए बेहद ऐतिहासिक रहने वाला है। विभिन्न भार वर्गों के फाइनल मुकाबलों में आज देश के कुल 10 मुक्केबाज रिंग में उतरेंगे। गर्व की बात यह है कि फाइनल में पहुंचे इन 10 मुक्केबाजों में से 7 खिलाड़ी हरियाणा के हैं। सीएम सैनी ने दीं शुभकामनाएं खिलाड़ियों के इस ऐतिहासिक प्रदर्शन पर खुशी जताते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी फाइनल में पहुंचे खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं। हरियाणा के खिलाड़ियों ने हमेशा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान ऊंचा किया है। आप सभी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर देश की पदक तालिका को और भी ऊपर लेकर जाएं, यही हमारी कामना है। - नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री (हरियाणा) और भी...
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Kanpur News: उत्तर प्रदेश के कानपुर में अपराधियों पर कानून का खौफ किस कदर हावी है, इसकी एक बानगी घाटमपुर इलाके में देखने को मिली। यहां की सड़कों पर एक अनोखा नजारा देखने को मिला। दरअसल, सजेती थाना की पुलिस ने एक शातिर अंतरजनपदीय इनामी चोर को गिरफ्तार किया। इसके बाद पुलिस ने कस्बे की सड़कों पर आरोपी का जुलूस निकाल दिया। इस दौरान मजेदार बात ये रही कि चोर हाथ जोड़े हुए था और पूरे रास्ते माफी मांगता दिखा। जुलूस के दौरान चोर माफी मांगते हुए कहा रहा था कि 'चोरी करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है'। इसके अलावा वह बार-बार माफी मांगता दिखा। चोर का निकाला जलूस दरअसल, यूपी के कानपुर से अनोखा वीडियो सामने आया है, जो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहा है। यहां सजेती थाना की पुलिस ने कस्बे की सड़कों पर एक चोर का जुलूस निकाला। पुलिस की कस्टडी में चल रहे इस चोर ने सरेराह दोनों हाथ जोड़कर कसम खाई और बोला- "साहेब! अब आगे से कभी चोरी नहीं करूंगा!" इस दौरान चोर लगातार 'चोरी करना पाप है, पुलिस हमारी बाप है' का नारा भी लगाता रहा। जानकारी के मुताबिक पकड़ा गया आरोपी सजेती के बिलगवां गांव का रहने वाला है। इस शातिर अपराधी के खिलाफ अलग-अलग थानों में चोरी के 15 से भी ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस की पूछताछ में खुलासा हुआ कि यह शातिर चोर पहले सूने और बंद पड़े मकानों की रेकी करता था, और फिर मौका मिलते ही ताले तोड़कर नकदी व कीमती जेवरात उड़ा लेता था। पुलिस ने की सख्त कार्रवाई पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर भारी मात्रा में चोरी का माल और जेवरात बरामद कर लिया। अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने और आम जनता में सुरक्षा का अहसास कराने के लिए पुलिस ने आरोपी को पैदल घुमाकर उसकी परेड कराई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराधियों पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सजेती पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हुई कई पुरानी चोरियों का भी पर्दाफाश हुआ है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस गैंग के अन्य साथियों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा। और भी...
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Pakistan News: भारत में हुए CJP प्रोटेस्ट के बाद अब पाकिस्तान में भी 'कॉकरोच पार्टी' बन गई है। इसे हाल ही में लॉन्च किया गया है। इसके इंस्टाग्राम पेज पर 1.12 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं। यह भ्रष्टाचार और जमे-जमाए राजनीतिक रसूखदारों के खिलाफ युवाओं का आंदोलन बताया जा रहा है। इस ग्रुप का कहना है कि पाकिस्तान वहां के लोगों का है, न कि भ्रष्ट माफिया का। वे पारदर्शी शासन और लोकतांत्रिक बदलाव की मांग कर रहे हैं। पाकिस्तान की सरकार में भी इसका खौफ दिखाई देने लगा है। गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने आशंका जताई है कि अगर सिस्टम ठीक नहीं हुआ, तो ये 'कॉकरोच' सबकुछ बदल सकते हैं। मोहसिन नकवी ने अपनी ही सरकार को अलर्ट करते हुए कहा, "आप इन्हें यूथ कहें, कॉकरोच कहें या कुछ भी कहें। अगर वे एक हो जाएं, तो सबकुछ उलट-पुलट सकता है।" पाकिस्तान में राजनीतिक स्थिति के साथ-साथ आर्थिक हालात भी बेहद खराब हैं। देश कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ते कर्ज, हिंसा और बेरोजगारी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। गृहमंत्री मोहसिन नकवी ने हाल ही में इन चुनौतियों का जिक्र करते हुए देश की आर्थिक नाकामियों को भी खुलकर स्वीकार किया। नकवी बोले- अगर कॉकरोच एक साथ आ जाएं... उन्होंने कहा, "अगर ये कॉकरोच एक साथ आ जाएं, तो वे सबकुछ पलट सकते हैं। वे चाहते हैं कि सिस्टम ठीक से काम करे। वे न्याय, मेरिट, नौकरी के मौके और सरकारी नौकरियों तक समान पहुंच चाहते हैं। हम अपने युवाओं को यह सब नहीं दे पाए हैं। उन्हें युवा कहें, कॉकरोच कहें या कुछ भी कहें। अगर वे एकजुट हो जाएं, तो सबकुछ बदल सकता है।" "हमें युवाओं की उम्मीदों को पूरा करना है" नकवी ने अपनी ही सरकार को आगाह करते हुए कहा कि इससे पहले 'कॉकरोच' भड़कें, हमें उनकी उम्मीदों को पूरा करना होगा। उनकी मांगें आसान हैं। मेरिट के आधार पर नौकरियां और रोजगार के बेहतर अवसर। हमें इस पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। नकवी ने अंदेशा जताया कि पाकिस्तान में 'कॉकरोच' जैसा विद्रोह हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम अपने युवाओं को वह नहीं दे पा रहे हैं, जिसकी उन्हें जरूरत है। गृहमंत्री ने सार्वजनिक तौर पर माना कि पाकिस्तान की मौजूदा शासन व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि देश का 70 साल पुराना प्रशासनिक ढांचा नाकाम साबित हुआ है और इसमें व्यापक बदलाव की जरूरत है। नकवी ने ये सभी बातें इकोनॉमिस्ट समिट में कहीं। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर जोर देते हुए कहा कि "प्रधानमंत्री घंटों काम करें, तब भी बिना सिस्टम रीसेट किए स्थायी सुधार संभव नहीं है।" और भी...
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Pappu Yadav Controversy: राम मंदिर में कथित चंदा चोरी मामले को लेकर सांसद पप्पू यादव ने संसद में प्रदर्शन किया। उन्होंंने साधु का भेष बनाकर प्रदर्शन किया, जिसमें विपक्ष के अन्य सांसद भी शामिल हुए। वहीं अब पप्पू यादव के विरोध प्रदर्शन के बाद जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता सूर्य मैथिल द्वारा दर्ज कराई गई इस शिकायत में पप्पू यादव पर विरोध प्रदर्शन के दौरान धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि इस प्रदर्शन को विपक्षी 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के कई नेताओं का समर्थन प्राप्त था। धार्मिक भावनाओं का किया अपमान इस मामले को लेकर सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया कि पप्पू यादव ने संसद के बाहर अपने प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया। मैथिल ने कहा, "आज पप्पू यादव ने जिस तरह से भगवा का अपमान किया और संसद के बाहर जो ड्रामा किया, उसे राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश कुमार और INDI गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन मिला। इसमें पप्पू यादव ने भगवान राम लल्ला विराजमान की तस्वीर तक अपने पैरों के नीचे रख दी। इससे सनातनियों की भावनाएं आहत हुई हैं।" तुरंत कार्रवाई की मांग उन्होंने आगे कहा, "इसके खिलाफ मैंने जहांगीरपुरी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। मैं गृह मंत्री अमित शाह, दिल्ली पुलिस कमिश्नर, DCP नॉर्थ, DCP नॉर्थ वेस्ट, ACP जहांगीरपुरी और SHO जहांगीरपुरी से मांग करता हूं कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए उन सभी के खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।" संसद के बाहर विपक्ष ने किया प्रदर्शन बता दें कि शुक्रवार 31 जुलाई को संसद परिसर में विरोध का एक नजारा देखने को मिला। विपक्षी सांसदों ने कई मुद्दों पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए नुक्कड़ नाटक का सहारा लिया, जिसमें राम मंदिर चंदे में कथित "चोरी" का मामला मुख्य मुद्दा रहा। विपक्ष ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाबदेही की भी मांग की और उनसे संसद की कार्यवाही में शामिल होने और विरोध कर रहे छात्रों के खिलाफ हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई पर जवाब देने को कहा। इस प्रदर्शन के दौरान पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव भगवा कपड़े पहने हुए सामने आए। वे मंदिर के पुजारी का रूप धरे हुए थे जो भक्तों से चढ़ावा इकट्ठा कर रहा था। उनके हाथ में अयोध्या के भगवान राम की तस्वीर थी। और भी...
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1914 - प्रथम विश्व युद्ध की शुरुआत, जर्मनी द्वारा रूस। 1995 - हब्बल दूरबीन ने शनि के एक और चन्द्रमा की खोज की। 2000 - ईरान में महिलाएं भी इमाम बनीं। 2004 - श्रीलंका ने प्रेमदासा स्टेडियम में आयोजित फ़ाइनल मैच में भारत को 25 रनों से हराकर एशिया कप जीत लिया। सनत जयसूर्या 'मैन आफ़ द सिरीज' बने। 2005 - सऊदी अरब के बादशाह फहद बिन अब्दुल अजीज का निधन, दिवंगत बादशाह के भाई शाहजादा अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज को देश का नया शासक नियुक्त किया गया। 2006 - जापान ने दुनिया की पहली भूकम्प पूर्व चेतावनी सेवा शुरू की। 2007 - वियतनाम के हनोई शहर में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गणित ओलम्पियाड (आई.एम.ओ.) में भारतीय दल के छ: सदस्यों ने तीन रजत पदक जीते। 2008 - अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ने भारत के विशेष निगरानी समझौते को हरी झंडी दी। 1955 - अरुण लाल, पूर्व भारतीय क्रिकेटर 1939 - गोविन्द मिश्र, प्रसिद्ध साहित्यकार 1932 - मीना कुमारी, फ़िल्म अभिनेत्री 1924 - फ्रैंक वोरेल, वेस्ट इंडीज के पूर्व क्रिकेटर 1924 - शाह अब्दुल्ला - सऊदी अरब के राजा। 1913 - भगवान दादा, प्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता एवं फ़िल्म निर्माता-निर्देशक 1910 - मुहम्मद निसार, भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी 1899 - कमला नेहरू - प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की पत्नी 1882 - पुरुषोत्तम दास टंडन - स्वतंत्रता सेनानी 1869 - हरकोर्ट बटलर - उत्तर प्रदेश के प्रथम राज्यपाल थे। 2020 - अमर सिंह (राजनेता) - भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जिनका सम्बंध समाजवादी पार्टी से था। 2018 - भीष्म नारायण सिंह - भारतीय राजनीतिज्ञ थे, जो असम और मेघालय के राज्यपाल रहे। 2008 - हरकिशन सिंह सुरजीत, भारतीय राजनेता। 2001 - बेगम ऐज़ाज़ रसूल - भारतीय संविधान सभा की एकमात्र मुस्लिम महिला सदस्य थीं। 2000 - अली सरदार जाफ़री, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध शायर। 1999 - नीरद चन्द्र चौधरी - भारत में जन्मे प्रसिद्ध बांग्ला तथा अंग्रेज़ी लेखक और विद्वान। 1969 - कांठे महाराज - भारत के प्रसिद्ध तबला वादकों में से एक थे। 1920 - बाल गंगाधर तिलक, विद्वान, गणितज्ञ, दार्शनिक और भारतीय राष्ट्रवादी नेता 1913 - देवकीनन्दन खत्री - हिन्दी के महान् और प्रथम तिलिस्मी लेखक। 1863 - ज़िन्दाँ रानी - सरदार मन्ना सिंह औलख जाट की पुत्री थी। पंजाब के महाराज रणजीत सिंह की पाँचवी रानी तथा उनके सबसे छोटे बे1591 - उर्फ़ी शीराजी - मुग़ल दरबार में बादशाह अकबर के प्रसिद्ध कवियों में से एक था। और भी...
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Monsoon Home Care: मानसून की बारिश जहां गर्मी से राहत देती है, वहीं अपने साथ कई परेशानियां भी लेकर आती है। इनमें सबसे आम समस्या है रात होते ही घर में मच्छरों, मक्खियों, चींटियों, कॉकरोच और दूसरे उड़ने वाले कीड़ों का बढ़ जाना। शाम ढलते ही लाइट जलने के बाद ये कीड़े घर के अंदर पहुंचने लगते हैं, जिससे न सिर्फ रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होती है बल्कि कई बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में बढ़ी हुई नमी और जगह-जगह जमा पानी इनके पनपने के लिए अनुकूल माहौल तैयार कर देता है। हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय अपनाकर इस परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है। घर के आसपास पानी जमा न होने दें बारिश के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ने की सबसे बड़ी वजह रुका हुआ पानी होता है। बाल्टी, कूलर, गमलों की ट्रे, बंद नालियां या घर के बाहर रखे छोटे बर्तनों में जमा पानी मच्छरों के लार्वा के लिए आदर्श जगह बन जाता है। इसलिए सप्ताह में कम से कम एक बार इन सभी जगहों की जांच करें और जमा पानी को तुरंत खाली करें। पानी की टंकियों और स्टोरेज कंटेनरों को हमेशा ढककर रखें। अगर किसी बर्तन में पानी रखना जरूरी हो तो उसमें तांबे का सिक्का या मिट्टी के तेल की एक बूंद डालने से मच्छरों के लार्वा विकसित होने की संभावना कम हो सकती है। मच्छरदानी और जाली का करें इस्तेमाल अगर रात में बार-बार कीड़े घर के अंदर आ जाते हैं तो दरवाजों और खिड़कियों पर महीन जाली लगाना एक आसान और असरदार तरीका है। इससे हवा भी आती रहती है और कीड़े भी अंदर नहीं पहुंच पाते। सोते समय मच्छरदानी का इस्तेमाल करने से पूरी रात मच्छरों से बचाव मिलता है। यह तरीका बच्चों और पालतू जानवरों के लिए भी पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं होता। घर को साफ और सूखा रखें कॉकरोच, मक्खियां और कई दूसरे कीड़े गंदगी और नमी वाली जगहों पर तेजी से पनपते हैं। इसलिए बारिश के मौसम में घर की नियमित सफाई बेहद जरूरी है। फर्श को रोज पोछें और रसोई, बाथरूम तथा स्टोर रूम को सूखा रखने की कोशिश करें। खाने की चीजों को हमेशा ढककर रखें और कूड़ेदान को समय पर खाली करें। सिंक के नीचे, ड्रेनेज के आसपास और घरेलू उपकरणों के पीछे जमी गंदगी की भी नियमित सफाई करें। चाहें तो सफेद सिरका, नींबू का रस और बेकिंग सोडा मिलाकर घरेलू क्लीनिंग स्प्रे भी तैयार कर सकते हैं, जो सफाई के साथ कीड़ों को दूर रखने में भी मदद कर सकता है। सफेद रोशनी की जगह पीली या वॉर्म लाइट लगाएं बहुत कम लोग जानते हैं कि सफेद और नीली रोशनी की ओर कीड़े ज्यादा आकर्षित होते हैं। अगर बालकनी, बरामदे या घर के मुख्य दरवाजे के बाहर पीले या वॉर्म टोन वाले बल्ब लगाए जाएं तो रात में कीड़ों की संख्या कम हो सकती है। इस तरह की रोशनी अधिकांश कीड़ों को कम आकर्षित करती है और घर के बाहर का माहौल भी आरामदायक बना रहता है। कपूर और लहसुन का लें सहारा भारतीय घरों में कपूर का इस्तेमाल लंबे समय से प्राकृतिक कीट-रोधी उपाय के रूप में किया जाता रहा है। कमरे में कपूर जलाने या पानी से भरे कटोरे में कपूर की टिकिया रखकर अलग-अलग कोनों में रखने से मच्छरों और कॉकरोच को दूर रखने में मदद मिल सकती है। इसी तरह लहसुन की कुछ कलियों को पानी में उबालकर ठंडा करें और इस घोल को स्प्रे बोतल में भर लें। इसे सिंक के नीचे, कूड़ेदान के आसपास और अंधेरे कोनों में छिड़कने से कीड़े वहां आने से बचते हैं। इन दोनों की तेज गंध कीड़े पसंद नहीं करते। बाहर निकलते समय पूरे कपड़े पहनें अगर बारिश के मौसम में शाम के समय बाहर जाना पड़ता है तो हल्के रंग के फुल स्लीव कपड़े पहनना बेहतर माना जाता है। मच्छर गहरे रंग और खुली त्वचा की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। अतिरिक्त सुरक्षा के लिए नारियल तेल में नीम या सिट्रोनेला जैसे एसेंशियल ऑयल की कुछ बूंदें मिलाकर खुली त्वचा पर लगाया जा सकता है। इससे मच्छरों के काटने का खतरा कम हो सकता है। और भी...
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Sawan Rudrashtakam Path: शिव जी की आराधना का सावन महीना चल रहा है। भक्त मंदिरों और शिवालयों में महादेव की विशेष पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनका जलाभिषेक और रुद्राभिषेक किया जा रहा है। सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से जीवन में महादेव की कृपा और शुभ फल प्राप्त होते हैं। सावन के समय घर पर भी शिव जी की उपासना शुभ फल प्रदान करती है। यही कारण है कि सावन में शिव जी के भक्त घर में शिव पुराण का पाठ और महादेव के मंत्रों का जाप करते हैं। सावन के समय श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करना भी बहुत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ किया था। आइए जानते हैं कि श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र क्या है और इसे सावन में कब और कैसे पढ़ें। गोस्वामी तुलसीदास ने रचा है ये स्तोत्र श्री रुद्राष्टकम भगवान शिव की स्तुति में रचित एक प्रसिद्ध स्तोत्र माना जाता है। इसके रचयिता गोस्वामी तुलसीदास जी माने जाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, लंका पर चढ़ाई करने से पहले भगवान श्रीराम ने रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना की थी। उसी दौरान भगवान श्रीराम ने शिव जी की आराधना करते समय रुद्राष्टकम का पाठ किया था। रुद्राष्टकम के नियमित पाठ से मन शांत होता है। सावन में किस समय करें रुद्राष्टकम का पाठ? सावन में रुद्राष्टकम का पाठ करने के लिए सुबह का समय बहुत उत्तम माना जाता है। सावन का महीना शिव जी की भक्ति का है, इसलिए इस महीने में सुबह और शाम नियमित रूप से रुद्राष्टकम का पाठ करना विशेष फलदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि लगातार 7 दिनों तक विधि-विधान से रुद्राष्टकम का पाठ करने से भगवान शिव की कृपा मिलती है। रुद्राष्टकम का पाठ करने की विधि सावन में रोजाना सूर्योदय से पहले उठकर स्नान आदि कर लें। इसके बाद साफ वस्त्र धारण करें। फिर सूर्य देव को जल अर्पित करें। इसके बाद पूजा स्थान पर दीपक जलाकर शिव जी और मां पार्वती का स्मरण करें। शिव जी को जल अर्पित करने के बाद श्रद्धा भाव से उनकी आराधना और आरती करें। इसके बाद शांत मन से श्री रुद्राष्टकम स्तोत्र का पाठ करें। पाठ पूरा करने के बाद महादेव को खीर, फल या मिठाई का भोग अर्पित करें। अंत में अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करें। रुद्राष्टकम स्तोत्र नमामीशमीशान निर्वाणरूपं, विभुं व्यापकं ब्रह्म वेदस्वरूपं। निजं निर्गुणं निर्विकल्पं निरीहं, चिदाकाशमाकाशवासं भजेऽहं।।1।। निराकारमोंकारमूलं तुरीयं, गिरा ग्यान गोतीतमीशं गिरीशं। करालं महाकाल कालं कृपालं, गुणागार संसारपारं नतोऽहं।।2।। तुषाराद्रि संकाश गौरं गभीरं, मनोभूत कोटि प्रभा श्रीशरीरं। स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गंगा, लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजंगा।।3।। चलत्कुंडलं भ्रू सुनेत्रं विशालं, प्रसन्नाननं नीलकंठं दयालं। मृगाधीशचर्माम्बरं मुंडमालं, प्रियं शंकरं सर्वनाथं भजामि।।4।। प्रचंडं प्रकृष्टं प्रगल्भं परेशं, अखंडं अजं भानुकोटिप्रकाशं। त्रयः शूल निर्मूलनं शूलपाणिं, भजेऽहं भवानीपतिं भावगम्यं।।5।। कलातीत कल्याण कल्पान्तकारी, सदा सज्जनानन्ददाता पुरारी। चिदानन्द संदोह मोहापहारी, प्रसीद प्रसीद प्रभो मन्मथारी।।6।। न यावद् उमानाथ पादारविन्दं, भजंतीह लोके परे वा नराणां। न तावत्सुखं शान्ति सन्तापनाशं, प्रसीद प्रभो सर्वभूताधिवासं।।7।। न जानामि योगं जपं नैव पूजां, नतोऽहं सदा सर्वदा शम्भु तुभ्यं। जरा जन्म दुःखौघ तातप्यमानं, प्रभो पाहि आपन्नमामीश शम्भो।।8।। रुद्राष्टकमिदं प्रोक्तं विप्रेण हरतोषये। ये पठन्ति नरा भक्त्या तेषां शम्भुः प्रसीदति।।9।। और भी...
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Sawan Health Tips: गीली मिट्टी की खुशबू , ठंडी हवाएं और बारिश की बूंदों के साथ सावन का महीना शुरु हो जाता है। सावन में लोग सोमवार का व्रत करते हैं और पूरे महीने भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं। हालांकि इस महीने में लोग खाने पीने से जुड़े परहेज भी करते हैं। स्वास्थ्य के लिहास से भी सावन का महीना काफी सतर्क रहने वाला होता है। इस महीने में मच्छर से और पानी से जुड़ी बीमारियां तेजी से फैलती हैं। सावन का समय वातावरण में नमी और ठंडक लाता है, आयुर्वेद के अनुसार यही मौसम आपके शरीर में असंतुलन का कारण बनता है। ऐसे में आइए जानते हैं सावन में क्या नहीं खाना चाहिए? सावन में बिगड़ जाते हैं वात, पित्त और कफ दोष वात का असंतुलन- नमी और ठंडी हवा के कारण शरीर में वात बढ़ जाता है। इसके कारण जोड़ों में दर्द, अकड़न, बदन दर्द और थकान होती है। पित्त का असंतुलन- गर्मी के बाद बारिश का मौसम जमीन से भाप छोड़ता है जो प्रकृति में एसिडिक होता है। इससे शरीर में पित्त बढ़ता है। पेट में जलन और एसिडिटी की परेशानी होती है। जिसका सीधा असर आपकी पाचन क्रिया पर पड़ता है, जिसके कारण खाना पचाने में समय लगता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर आपको भी हल्की सी सर्दी लगने पर सर्दी, खांसी और कफ की समस्या होती है, तो इसका कारण आपका बढ़ा हुआ कफ दोष है। सावन के महीने में अच्छी बारिश होती है, जिससे हवा में नमी बढ़ जाती है और कई तरह के जीवों के पनपने और फैलने के लिए अनुकूल माहौल बनता है। यही वजह है कि बारिश के मौसम में कीड़े-मकोड़ों और दूसरे जीवों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जाती है। सावन में इन चीजों का सेवन करने से बचें - इस मौसम में बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं और कीड़े-मकोड़ों का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे समय इन खाद्य पदार्थो से बचें।
- बारिश के मौसम में डेयरी प्रोडक्ट्स का सेवन कम से कम करना चाहिए। खासकर दही तो बिल्कुल नहीं खानी चाहिए।
- हरी पत्तेदार सब्ज़ियों का सेवन भी नहीं करना चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद छोटे कीड़े या सूक्ष्मजीव, जो अक्सर सब्जियों के रंग में घुल-मिल जाते हैं वह बीमारी का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, बैंगन खाने से भी बचना चाहिए।
- इस मौसम में खासकर मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए ये आपके पाचन को धीमा करती है और अशुद्ध होने की वजह से कई बीमारियां अपने साथ लाती हैं।
- तामसिक और तीखे खाद्य पदार्थ, प्याज, लहसुन, हल्दी, हींग और लाल मिर्च का सेवन नहीं करना चाहिए, इससे शरीर में भारीपन और सुस्ती आती है।
- मैदा से बनी चीजों का सेवन करने से डायबिटीज़, कमज़ोर हड्डियां, पाचन संबंधी समस्याएं, कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना, पोषक तत्वों की कमी और अन्य कई समस्याएं हो सकती हैं।
सावन में क्या खाना चाहिए? एक्सपर्ट्स के अनुसार, सावन के महीने में आपको हल्का भोजन करना चाहिए, जो आसानी से पचने वाला हो। आपको ताज़ा और गर्म खाना खाना चाहिए, जिससे पाचन शक्ति बढ़ती है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाने चाहिए जो वात को संतुलित रखें। आपको अपने खाने में सब्जियों में लौकी, भिंडी, तोरई, टमाटर और पुदीने की चटनी के साथ सब्जियों का सूप पीना चाहिए। फलों में सेब, केला, अनार, नाशपाती, पके हुए जामुन और पके हुए देसी आम खाने चाहिए। पानी को किसी भी तरह की गंदगी या प्रदूषण से सुरक्षित रखने का ध्यान रखें, क्योंकि दूषित पानी से हैजा और फ़ूड पॉइज़निंग जैसी कई बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए पानी को अच्छी तरह उबालकर ठंडा होने पर पिएं या फिर वॉटर फ़िल्टर का इस्तेमाल करें। अपनी सेहत से समझौता न करें, अपनी दिनचर्या में नियमित भोजन और व्यायाम अपनाएं। और भी...
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Pappu Yadav Parliament Protest: बिहार की पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने अयोध्या राम मंदिर के लिए इकट्ठा किए गए चंदे में कथित गड़बड़ी के विरोध में साधु के वेश में संसद परिसर पहुंचकर सबका ध्यान खींचा। उन्होंने संसद के बाहर धरना दिया और राहुल गांधी के साथ-साथ विपक्ष के कई सांसदों ने उनके विरोध का समर्थन किया। इस घटना ने इस बात पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या सांसदों को संसद में शामिल होने के दौरान वेशभूषा या फिर भेष बदलने की अनुमति है। आइए जानते हैं क्या है इस सवाल का जवाब। सांसदों के लिए कोई भी आधिकारिक ड्रेस कोड नहीं भारतीय संविधान और लोकसभा व राज्यसभा दोनों की नियम पुस्तकों में सांसदों के लिए कोई भी अनिवार्य ड्रेस कोड तय नहीं किया गया है। सदस्य भारत की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाने वाले पारंपरिक या औपचारिक कपड़े पहनने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। सांसदों को कुर्ता-पायजामा, धोती, साड़ी, सूट, मुंडू, मेखला-चादर और दूसरी क्षेत्रीय पोशाक पहने हुए देखना आम बात है। हालांकि, संसद सदन की गरिमा को बनाए रखने के सिद्धांत पर काम करती है और सदस्यों से कार्यवाही के दौरान सभ्य और उपयुक्त कपड़े पहनने की उम्मीद की जाती है। क्या सांसद वेशभूषा या फिर भेष बदल सकते हैं? वेशभूषा पर रोक लगाने वाला कोई भी तय नियम नहीं है, लेकिन संसदीय नियम सदस्यों को कार्यवाही में बाधा डालने या सदन को प्रदर्शन का मंच बनाने के साधन के रूप में पहनावे का इस्तेमाल करने से रोकते हैं। लोकसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियम 349 के तहत सांसदों से शिष्टाचार बनाए रखने और ऐसे किसी भी व्यवहार से बचने की उम्मीद की जाती है, जो संसद की गरिमा को कम करता हो। इसका मतलब है कि सदन के अंदर विस्तृत भेष, प्रतीकात्मक वेशभूषा या दूसरी नाटकीय पोशाक पहनने पर अध्यक्ष की ओर से आपत्ति जताई जा सकती है। कपड़ों पर नारे और विरोध की वस्तु की सदन के अंदर अनुमति नहीं संसदीय नियम सदन की कार्यवाही के दौरान राजनीतिक नारों या संदेशों वाले कपड़ों के इस्तेमाल को भी प्रतिबंधित करते हैं। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला यह साफ कर चुके हैं कि सदन के अंदर नारे लिखी टी-शर्ट या कपड़े पहनना संसदीय शिष्टाचार का उल्लंघन है। इसी तरह सांसदों को कार्यवाही के दौरान सदन में तख्ती, झंडा, दान पेटी, बैनर या विरोध प्रदर्शन की दूसरी प्रतीकात्मक सामग्री लाने की अनुमति नहीं है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बहस दृश्य प्रदर्शन के बजाय संसदीय प्रक्रियाओं के जरिए आयोजित की जाए। सदन के अंदर और संसद परिसर में नियम अलग-अलग संसद परिसर के दूसरे हिस्सों की तुलना में लोकसभा और राज्यसभा कक्षों के अंदर प्रतिबंध काफी ज्यादा सख्त हैं। सदन के अंदर सांसदों से हर समय संसदीय शिष्टाचार का पालन करने की उम्मीद की जाती है। अगर कोई सदस्य भेष बदलकर या ऐसी प्रतीकात्मक पोशाक पहनकर आता है, जो मर्यादा के खिलाफ हो, तो स्पीकर उन्हें तुरंत बाहर जाने या अपने कपड़े बदलने के लिए कह सकते हैं। सदन के बाहर मकर द्वार, हंस द्वार या गांधी प्रतिमा के पास सांसद अक्सर राजनीतिक मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन करते हैं। इन जगहों पर प्रदर्शनों में प्रतीकात्मक पोशाक शामिल हो सकती है। लेकिन ये संसद के सुरक्षा नियमों और अनुमति की शर्तों के दायरे में आते हैं। स्पीकर किसी सांसद के खिलाफ क्या कार्रवाई कर सकते हैं? अगर कोई सांसद नियमों का उल्लंघन करता है या सदन की गरिमा का अनादर करता है, तो स्पीकर के पास कई अनुशासनात्मक शक्तियां होती हैं। अध्यक्ष पहले चेतावनी दे सकते हैं और सदस्य से वह व्यवहार बंद करने या सदन से बाहर जाने के लिए कह सकते हैं। नियम 373 के तहत स्पीकर सदस्य का नाम ले सकते हैं, जिसके बाद उन्हें उस दिन के बाकी समय के लिए सदन से बाहर जाना पड़ता है। बार-बार या गंभीर उल्लंघन के मामले में नियम 374 स्पीकर को यह अधिकार देता है कि वह व्यवहार की गंभीरता के आधार पर किसी सांसद को एक तय समय के लिए या पूरे सत्र के लिए निलंबित कर सकते हैं। और भी...
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ITR Filing Last Day: एसेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की 31 जुलाई 2026 की समयसीमा आज समाप्त हो रही है। हर साल लाखों करदाता आखिरी वक्त की तकनीकी दिक्कतों, सर्वर धीमा चलने या फिर भागदौड़ में यह अहम काम समय पर पूरा नहीं कर पाते हैं। अगर आप भी इस डेडलाइन तक अपना टैक्स रिटर्न भरने से चूक जाते हैं, तो घबराने की कोई जरूरत नहीं है। आयकर विभाग ऐसे करदाताओं को एक और मौका देता है। आइए समझते हैं कि डेडलाइन बीतने के बाद आपके पास क्या रास्ते बचते हैं।
डेडलाइन के बाद क्या है विकल्प? 31 जुलाई की तारीख निकलने के बाद भी आपके पास रिटर्न भरने का मौका सुरक्षित रहता है। आयकर कानून की धारा 139(4) के तहत करदाता ‘बिलेटेड रिटर्न’ (Belated Return) यानी देर से भरा जाने वाला ITR दाखिल कर सकते हैं। इसके लिए सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक का समय तय किया है। यह एक तरह का ग्रेस पीरियड है। हालांकि, यह सुविधा मुफ्त नहीं मिलती है। इस अवधि के दौरान रिटर्न भरने पर आपको लेट फीस और बकाया टैक्स पर ब्याज का भुगतान करना अनिवार्य हो जाता है। लेट फीस का गणित समझ लें देरी से ITR दाखिल करने की स्थिति में इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत पेनाल्टी वसूली जाती है। यदि आपकी कुल सालाना आय 5 लाख रुपये से ज्यादा है, तो 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा। वहीं, यदि आपकी सालाना आय 5 लाख रुपये से कम है, तो लेट फीस 1,000 रुपये से अधिक नहीं होगी। अगर आपकी आय टैक्स छूट की बेसिक लिमिट से कम है और आप केवल रिकॉर्ड के लिए स्वेच्छा से ITR दाखिल कर रहे हैं, तो किसी भी तरह का जुर्माना नहीं लगेगा। जुर्माने के अलावा ब्याज का बोझ भी अलग से पड़ता है। यदि आप पर टैक्स देनदारी बनती है और आपने समय पर रिटर्न दाखिल नहीं किया, तो धारा 234A के तहत 1 अगस्त 2026 से हर महीने 1% साधारण ब्याज लगाया जाएगा। यह ब्याज तब तक लगेगा, जब तक पूरी बकाया टैक्स राशि जमा नहीं कर दी जाती। लेट फाइलिंग के चार बड़े आर्थिक नुकसान 1. नुकसान की भरपाई नहीं होगी यदि आपको शेयर बाजार, कारोबार या फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) में नुकसान हुआ है, तो आप उसे आने वाले वर्षों के मुनाफे के साथ एडजस्ट नहीं कर पाएंगे। 31 जुलाई के बाद रिटर्न भरने पर केवल हाउस प्रॉपर्टी के नुकसान को कैरी फॉरवर्ड करने की अनुमति मिलती है। 2. रिफंड मिलने में देरी अगर आपका ज्यादा TDS कटा है, तो रिटर्न देर से भरने का मतलब है कि आपका रिफंड भी देर से मिलेगा। इसके अलावा, रिफंड पर मिलने वाले ब्याज (धारा 244A) का भी नुकसान हो सकता है। 3. ओल्ड टैक्स रिजीम का विकल्प खत्म 31 जुलाई के बाद आप अपनी इच्छा से ओल्ड टैक्स रिजीम नहीं चुन सकते। सिस्टम आपको डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम में डाल देगा, जिससे कई टैक्स डिडक्शन और छूट का लाभ नहीं मिल पाएगा। 4. इनकम टैक्स विभाग का नोटिस यदि आप 31 दिसंबर 2026 तक भी बिलेटेड रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं, तो आयकर विभाग धारा 142(1) या धारा 148 के तहत नोटिस जारी कर सकता है। आगे चलकर यह कानूनी कार्रवाई का कारण भी बन सकता है। और भी...
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Himachal family court: हिमाचल प्रदेश में अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश फैमिली कोर्ट सुंदरनगर की अदालत ने अपने एक फैसले में नौकरीपेशा पत्नी की अंतरिम भरण-पोषण और मुकदमा खर्च की अर्जी को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त आय अर्जित करने वाली और आर्थिक रूप से सक्षम महिला पति से रखरखाव भत्ता पाने की हकदार नहीं है। मामला हंसा देवी बनाम अमनदीप सिंह से जुड़ा है। पत्नी ने मांगा था 10000 भत्ता आवेदक हंसा देवी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत आवेदन दायर कर पति से 30,000 रुपये मुकदमा खर्च और 10,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम भरण-पोषण की मांग की थी। आवेदक का तर्क था कि उसके पास मुकदमे का खर्च उठाने और जीवन यापन के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं, जबकि उसका पति जिम चलाकर प्रतिमाह दो लाख रुपये से अधिक कमाता है। महिला सीआरपीएफ में स्टाफ नर्स वहीं, पति अमनदीप सिंह के अधिवक्ता की ओर से अदालत को अवगत कराया गया कि महिला उच्च शिक्षित है और वर्तमान में भारतीय सीआरपीएफ में सब-इंस्पेक्टर (स्टाफ नर्स) के पद पर तैनात है। उसकी बेसिक सैलरी ही 56,000 रुपये प्रतिमाह से अधिक है। टिप्पणी करते हुए खारिज की याचिका अदालत ने दोनों पक्षों के संपत्ति व आय के हलफनामों और अभिलेखों का अवलोकन करने के बाद पाया कि आवेदक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि जब महिला स्वयं सम्मानजनक वेतन प्राप्त कर रही है और अपना भरण-पोषण करने में पूरी तरह सक्षम है, तो उसे पति से अंतरिम रखरखाव या कानूनी खर्च दिलाने का कोई औचित्य नहीं बनता। इन्हीं टिप्पणियों के साथ अदालत ने महिला की याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया। और भी...
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