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  • Jio यूजर्स की बल्ले-बल्ले! 12 महीने फ्री मिलेगा Canva Pro, ₹4,000 तक की बचत

    Jio यूजर्स की बल्ले-बल्ले! 12 महीने फ्री मिलेगा Canva Pro, ₹4,000 तक की बचत

     

     Jio Canva Pro Offer: 16 सितंबर 2026: जियो यूजर्स अब बिना अतिरिक्त पैसे दिए Canva के प्रीमियम डिजाइन टूल्स इस्तेमाल कर सकेंगे। जियो और Canva ने साझेदारी की है, जिसके तहत पात्र ग्राहकों को 12 महीने तक Canva Pro या Canva Pro Lite मुफ्त मिलेगा। कंपनी के मुताबिक इस ऑफर की कीमत ₹4,000 तक है और इसे 16 सितंबर से MyJio ऐप के जरिए एक्टिव किया जा सकेगा।

    किस ग्राहक को कौन-सा Canva मिलेगा, यह उसके जियो रिचार्ज प्लान पर निर्भर करेगा। ₹399 के प्लान पर Canva Pro मिलेगा, जबकि ₹349 और ₹349 से ऊपर के पात्र 2GB प्रतिदिन डेटा वाले प्लान पर Canva Pro Lite दिया जाएगा। ऑफर के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क या छिपा हुआ चार्ज नहीं होगा।

    इसका सीधा फायदा छात्रों, कंटेंट क्रिएटर्स, प्रोफेशनल्स और छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। Canva की मदद से मोबाइल पर ही स्कूल प्रोजेक्ट, सोशल मीडिया पोस्ट, प्रेजेंटेशन, मार्केटिंग मटीरियल और फेस्टिवल ग्रीटिंग जैसे डिजाइन बनाए जा सकते हैं। हिंदी समेत कई भारतीय भाषाओं में भी कंटेंट तैयार किया जा सकेगा।

    Canva Pro Lite में लाखों प्रीमियम टेम्पलेट, फोटो, वीडियो और फॉन्ट के साथ बैकग्राउंड रिमूवर, Magic Resize और 50GB क्लाउड स्टोरेज जैसे फीचर मिलेंगे। वहीं Canva Pro में इसके अलावा Canva AI, Content Planner, ज्यादा AI लिमिट और 100GB क्लाउड स्टोरेज जैसे अतिरिक्त फीचर होंगे।

    रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रेसिडेंट किरण थॉमस ने कहा कि इस साझेदारी के जरिए जियो लाखों भारतीयों तक AI आधारित डिजाइन टूल्स मुफ्त पहुंचाना चाहता है, ताकि छात्र, क्रिएटर्स और छोटे कारोबारी अपनी पसंद की भाषा में सीख और काम कर सकें।

    ऑफर का लाभ लेने के लिए पात्र जियो यूजर को MyJio ऐप खोलकर Canva ऑफर पर टैप करना होगा। इसके बाद वह सीधे डिजाइन बनाना शुरू कर सकेगा।

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  • अरब सागर में भारत-पाक नौसेना की टक्कर, पाकिस्तानी राजनयिक तलब; विदेश मंत्रालय ने जताया कड़ा विरोध

    अरब सागर में भारत-पाक नौसेना की टक्कर, पाकिस्तानी राजनयिक तलब; विदेश मंत्रालय ने जताया कड़ा विरोध

     

    India Pakistan Navy Collision North Arabian Sea: भारत ने बड़ा कदम उठाते हुए नई दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन के चार्ज डी'अफेयर्स को विदेश मंत्रालय में तलब किया। समुद्र में पाकिस्तानी नौसेना की यूनिट्स के अस्वीकार्य और गैर-पेशेवर व्यवहार के कारण भारतीय नौसेना की एक यूनिट के साथ हुई टक्कर को लेकर उनके सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया गया है।

    हालांकि, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में हुई इस घटना से कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन पाकिस्तानी नौसेना के जहाज का व्यवहार अप्रैल 1991 में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य अभ्यास, युद्धाभ्यास और सैनिकों की आवाजाही के बारे में पहले से सूचना देने के समझौते के आर्टिकल 10 का सीधा उल्लंघन था।

    दिल्ली में तलब करने के बाद क्या कहा गया

    पाकिस्तानी हाई कमीशन के चार्ज डी'अफेयर्स को दिल्ली में तलब करने के बाद ये सलाह दी गई है कि वे संबंधित पाकिस्तान के अधिकारियों को यह बात बताए कि सभी सैन्य यूनिट्स को पूरी सावधानी बरतनी चाहिए और ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए दोनों पक्षों के बीच हुए संबंधित समझौतों के प्रावधानों का सम्मान करना चाहिए।

    आपस में टकराए भारत और पाकिस्तान के जंगी जहाज

    बता दें कि बीते रोज (15 सितंबर) की शाम को उत्तरी अरब सागर में रूटीन निगरानी मिशन पर तैनात भारतीय नौसेना के एक फ्रंटलाइन युद्धपोत के पास पाकिस्तान का एक नौसैनिक जहाज तेज रफ्तार से आया और उसने गैर-पेशेवर तरीके का व्यवहार किया। पाकिस्तानी नौसैनिक जहाज की ओर से असभ्य व्यवहार के चलते दोनों जहाजों में टक्कर हो गई। हालांकि, अब तक किसी नुकसान की खबर नहीं है।

    पहले भी हो चुका है विवाद

    टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2011 में MV स्वेज मामले को लेकर एक राजनयिक विवाद खड़ा हो गया था। उस समय नौसेना प्रमुख एडमिरल निर्मल वर्मा ने कहा था कि पाकिस्तानी युद्धपोत PNS बाबर जरूरत से ज्यादा करीब आ गया था, जिससे INS गोदावरी पर लगा हेलिकॉप्टर नेट क्षतिग्रस्त हो गया था। उस दौरान भी भारतीय क्रू ने बहुत पेशेवर तरीके से काम किया और इस बात पर जोर दिया कि समुद्र में नेविगेशन के स्पष्ट नियम हैं।

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  • Alert! पाकिस्तान की इन 2 Beauty Creams से रहें दूर, CDSCO ने जारी की चेतावनी

    Alert! पाकिस्तान की इन 2 Beauty Creams से रहें दूर, CDSCO ने जारी की चेतावनी

     

    CDSCO Alert: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की कॉस्मेटिक डिवीजन ने ‘मेड इन पाकिस्तान’ ब्यूटी प्रोडक्ट को लेकर पब्लिक हेल्थ अलर्ट जारी किया है। CDSCO ने पाकिस्तान के दो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को भारत में बिक्री के लिए अनधिकृत बताया है, जिसमें गोरी ब्यूटी क्रीम (Goree Beauty Cream) और चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम (Chandni Whitening Cream) शामिल हैं। इन दोनों क्रीम को अनधिकृत कॉस्मेटिक्स घोषित किया गया है। CDSCO के मुताबिक, दोनों कॉस्मेटिक्स के लिए भारत में इंपोर्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच में दोनों प्रोडक्ट्स में तय सीमा से अधिक हेवी मेटल्स पाए गए। हेवी मेटल्स की अधिक मात्रा से उपभोक्ताओं को स्वास्थ्य संबंधी नुकसान का खतरा है। CDSCO ने भारत के लोगों को सलाह दी है कि वो पाकिस्तान के इन दो कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को नहीं खरीदें और अगर पहले से खरीदे हैं, तो उसका इस्तेमाल न करें। साथ ही, ऐसे ही नाम वाले मिलते-जुलते अनधिकृत कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स से भी बचने की सलाह दी गई है। इतना ही नहीं, CDSCO ने संबंधित एजेंसीज को इनकी बिक्री और वितरण पर भी रोक लगाने को कहा है।

    राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों को भी दिया निर्देश

    सीडीएससीओ ने सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के औषधि नियंत्रकों के साथ-साथ अपने जोन, सब-जोन और बंदरगाह कार्यालयों से भी यह सुनिश्चित करने को कहा है कि उनके अधिकार क्षेत्र में इन अनधिकृत सौंदर्य प्रसाधन उत्पादों की बिक्री न हो। उपभोक्ताओं को कॉस्मेटिक उत्पादों को खरीदने से पहले उनकी जांच करने की सलाह भी दी गई है। सीडीएससीओ ने कहा कि उपभोक्ताओं को अधिकृत कॉस्मेटिक उत्पाद ही खरीदने और उपयोग करने चाहिए, जिनपर मैन्यूफैक्चरिंग लाइसेंस नंबर, मैन्यूफैक्चरर डिटेल्स, बैच नंबर, मैन्यूफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट जैसी जानकारी और इंपोर्टेड कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर लिखा हो।

    CDSCO के नोटिस में और क्या?

    नोटिस में यह भी कहा गया है कि प्रोडक्ट लेबल पर पाई जाने वाली किसी भी प्रकार की अनियमितता की सूचना भारत में निर्मित उत्पादों के लिए संबंधित राज्य औषधि नियंत्रक को और इंपोर्टेड कॉस्मेटिक उत्पादों के लिए औषधि नियंत्रक महालेखाकार (भारत) को दी जानी चाहिए।

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  • तकिया मोड़कर सोना कहीं पड़ न जाए भारी, जानिए क्यों छोड़नी चाहिए ये आदत

    तकिया मोड़कर सोना कहीं पड़ न जाए भारी, जानिए क्यों छोड़नी चाहिए ये आदत

     

    Pillow Sleeping Habit: रात में आराम से सोने के लिए हर कोई अपनी पसंद का तरीका अपनाता है। कुछ लोगों को पतला तकिया पसंद होता है, तो कुछ लोग तकिए को मोड़कर या उसके नीचे दूसरा तकिया रखकर सोते हैं। ऐसा करने से शुरुआत में आराम महसूस होता है, लेकिन लंबे समय तक गलत तरीके से सोने की आदत शरीर के लिए परेशानी पैदा करती है। तकिया बहुत ऊंचा होने पर गर्दन अपनी सही स्थिति में नहीं रहती। इससे सुबह उठने पर गर्दन में दर्द, कंधों में खिंचाव और सिर भारी लगने जैसी परेशानी महसूस होती है।

    गर्दन पर पड़ता है ज्यादा दबाव

    जब तकिए को मोड़कर बहुत ऊंचा कर लिया जाता है, तो सोते समय गर्दन आगे की तरफ झुक जाती है। इस स्थिति में गर्दन की मांसपेशियों पर ज्यादा दबाव पड़ता है। अगर रोज इसी तरह सोया जाए, तो सुबह उठने के बाद गर्दन में अकड़न और दर्द रहने लगता है। कई बार यह दर्द कंधों और पीठ तक भी पहुंच जाता है। खासकर पेट के बल सोने वाले लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस स्थिति में गर्दन पहले ही एक तरफ मुड़ी रहती है। सही तकिया वही है, जो सोते समय सिर और गर्दन को शरीर के बाकी हिस्से के साथ सीधी स्थिति में रखने में मदद करे।

    नींद भी हो सकती है खराब

    तकिया बहुत ऊंचा होने पर शरीर को सोने के लिए सही स्थिति नहीं मिलती। इससे बार-बार करवट बदलने की जरूरत पड़ती है और नींद टूट सकती है। कुछ लोगों को सुबह उठने के बाद थकान भी महसूस होती है, भले ही उन्होंने कई घंटे सोया हो। अगर तकिया बहुत नरम है और सिर उसमें ज्यादा धंस जाता है, तब भी गर्दन की स्थिति बिगड़ सकती है। इसलिए तकिया चुनते समय केवल उसकी मोटाई नहीं, बल्कि आराम और गर्दन की सही स्थिति का भी ध्यान रखना चाहिए। हर व्यक्ति के लिए एक ही तरह का तकिया सही नहीं होता।

    कैसे रखें तकिया सही

    सोते समय तकिया इतना ऊंचा नहीं होना चाहिए कि सिर शरीर से बहुत ऊपर उठ जाए। करवट लेकर सोने वालों को ऐसा तकिया रखना चाहिए, जो सिर और गर्दन के बीच की जगह को ठीक से भर सके। पीठ के बल सोने पर आमतौर पर बहुत ऊंचे तकिए की जरूरत नहीं होती। अगर तकिया मोड़कर सोने की आदत है, तो धीरे-धीरे उसकी ऊंचाई कम की जा सकती है। तकिया बदलने के बाद भी अगर गर्दन या कंधे में लगातार दर्द रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। सही तरीके से सोना शरीर को आराम देने के साथ दिनभर की थकान कम करने में भी मदद करता है।

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  • Bigg Boss 20: ईशा रिखी का तलाक पर बड़ा खुलासा, 5 महीने में क्यों टूटा बादशाह संग रिश्ता?

    Bigg Boss 20: ईशा रिखी का तलाक पर बड़ा खुलासा, 5 महीने में क्यों टूटा बादशाह संग रिश्ता?

     

    Bigg Boss 20: रैपर बादशाह और उनकी एक्स वाइफ ईशा रिखी का रिश्ता लंबे वक्त से चर्चा में है। दोनों की शादी का खुलासा 5 महीने पहले ही हुआ था, लेकिन फिर पता लगा कि चीजें बिगड़ गई हैं। साथ ही दोनों अब अलग होने का ऑफिशियल ऐलान कर चुके हैं। यूं तो ईशा रिखी इस वक्त ‘बिग बॉस 20’ का हिस्सा हैं, साथ ही शुरुआत में कहा था कि उस रिश्ते को लेकर बातचीत नहीं करेंगी। पर कुछ ही दिन बाद ईशा ने तलाक की वजह बता दी है। वैसे तो ईशा ने कनिका को एग्जाम्पल देकर समझाया है, पर रिश्ता टूटने के पीछे बादशाह को वजह बताया है।

    पंजाबी एक्ट्रेस और ‘बिग बॉस 20’ कंटेस्टेंट ईशा रिखी ने रिश्ते और शादी को लेकर कई हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। ईशा ने बताया कि उस रिश्ते के दौरान उन्हें किस तरह के दर्द और धोखे से गुजरना पड़ा था। ”जब वो इस रिश्ते में थीं, तो चीजें वैसी नहीं थीं जैसी बाहर से नजर आ रही थीं। उनके साथ झूठ बोला गया और वो लंबे समय तक एक टॉक्सिक माहौल में रहीं।

    ईशा ने बादशाह को लेकर क्या कहा?

    बिग बॉस 20 के हालिया एपिसोड में, ईशा को कनिका से शादी को लेकर बात करते हुए देखा गया। वो कहती दिखीं- ”अगर कोई आकर मुझसे कहे कि कनिका ऐसी-ऐसी है, तो मैं तब तक उनकी बात पर यकीन नहीं करूंगी, जब तक मैं खुद न देख लूं। मैं ऐसी ही हूं। रिश्तों के मामले में भी मेरा यही रवैया है। अगर कोई आकर मुझसे कुछ भी कहेगा, तो मैं उनसे कहूंगी, ‘या तो मुझे सबूत दो, या फिर मेरे दिमाग के साथ खेलना बंद करो।’ जिसके बाद ईशा ने इशारा किया कि भले ही रिश्ते के दौरान उन्हें कुछ शक हुआ हो, लेकिन उन्होंने तब तक उन पर यकीन नहीं किया, जब तक उन्होंने खुद चीजें नहीं देख लीं।

    वो आगे कहती हैं, जब रिश्ता खत्म होता है, तब आपको एहसास होता है कि पूरे समय आपके साथ धोखा हो रहा था। जब कनिका ने उनसे पूछा कि उसे किस तरह के धोखे का सामना करना पड़ा? फिजिकल, इमोशनल या सोशल? तो ईशा ने जवाब देने से पहले थोड़ा रुककर कहा, ”ये सभी।”

    बादशाह के साथ रिश्ता था टॉक्सिक?

    ईशा ने कहा कि: ”बीच में लटके रहना बहुत टॉक्सिक होता है। यह ऐसा है जैसे मैं तुम्हें यकीन दिलाऊं कि तुम मेरी बेस्ट फ्रेंड हो। मैं तुम्हारे साथ बेस्ट फ्रेंड जैसा बर्ताव कर रही हूं। तुम्हें बेस्ट फ्रेंड की तरह जगहों पर ले जा रही हूं, लेकिन फिर तुम्हें पता चलता है कि तुम असल में कभी मेरी बेस्ट फ्रेंड थी ही नहीं। उन्हें अपने पार्टनर के सोशल सर्कल के सभी लोगों से नहीं, बल्कि सिर्फ कुछ खास लोगों से ही मिलवाया गया था।”

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  • रेहड़ी वाले से बड़े व्यापारी तक...किसे कितना देना होगा चार्ज, जानिए UPI पेमेंट के नए रूल्स?

    रेहड़ी वाले से बड़े व्यापारी तक...किसे कितना देना होगा चार्ज, जानिए UPI पेमेंट के नए रूल्स?

     

     UPI Rules Change 2026: अगर आप भी सब्जी खरीदने से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग बिल चुकाने के लिए गूगल पे (Google Pay), फोनपे (PhonePe) या पेटीएम (Paytm) जैसे UPI ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खबर है। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने 15 अक्टूबर से UPI पेमेंट से जुड़े नियमों में कुछ बदलाव करने का फैसला किया है। इस खबर के आते ही सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या अब UPI से पेमेंट करना महंगा हो जाएगा?

    आइए बिल्कुल आसान और सीधी भाषा में समझते हैं कि नया नियम क्या है और क्या इससे आम आदमी की जेब पर कोई असर पड़ेगा या नहीं।

    क्या आम जनता (कस्टमर्स) को कोई चार्ज देना होगा?

    बिल्कुल नहीं! आम ग्राहकों के लिए UPI पूरी तरह से मुफ्त था और आगे भी रहेगा। अगर आप अपने किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को पैसे भेजते हैं, तो उस पर 0 रुपये चार्ज लगेगा। जब आप किसी दुकान, मॉल या ऑनलाइन वेबसाइट पर पेमेंट करेंगे, तब भी आपसे कोई अतिरिक्त प्लेटफॉर्म या ट्रांजैक्शन फीस नहीं ली जाएगी। आप जो सामान खरीदेंगे, आपको सिर्फ उसकी तय कीमत ही चुकानी होगी।

    फिर चार्ज किस पर लगेगा और नियम क्या है?

    यह नया चार्ज ग्राहकों पर नहीं, बल्कि मर्चेंट्स (दुकानदारों/व्यापारियों) पर लागू होगा। इसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कहा जाता है। 2000 तक के ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से भी कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा। देश में रोज होने वाले 95% से ज्यादा UPI ट्रांजैक्शन 2000 से कम के ही होते हैं, इसलिए छोटे व्यापारी पूरी तरह सुरक्षित हैं।

    छोटे रेहड़ी-पटरी और सब्जी विक्रेताओं को भी इस नियम से राहत है, क्योंकि ऐसे छोटे व्यापारी (P2PM) जिन्हें UPI QR कोड के जरिए महीने में 1 लाख रुपये तक मिलते हैं, उन्हें भी इस चार्ज से बाहर रखा गया है।

    अगर कोई ग्राहक किसी बड़े मर्चेंट को 2000 से अधिक का भुगतान करता है, तो उस व्यापारी को 0.4% का MDR देना होगा। हालांकि, इसमें अधिकतम चार्ज की सीमा 300 रुपये तय की गई है, चाहे पेमेंट कितना भी बड़ा क्यों न हो।

    आइए आपको एक उदाहरण से समझते हैं। 3000 के पेमेंट पर व्यापारी को 12 रुपये का चार्ज देना होगा। 50000 के पेमेंट पर व्यापारी को 200 रुपये का चार्ज लगेगा। 1,00,000 के पेमेंट पर नियम के अनुसार 400 रुपये बनना चाहिए, लेकिन अधिकतम कैपिंग के कारण सिर्फ 300 रुपये ही चार्ज लगेगा।

    कुछ खास सेक्टर्स के लिए स्पेशल छूट

    NPCI ने कुछ जरूरी सेवाओं के लिए रियायती दरें तय की हैं। जैसे कि रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और पेट्रोल पंप (फ्यूल), यहां 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर 0.4% के बजाय केवल 5 रुपये का फ्लैट MDR लगेगा। वहीं शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड आदि कैपिटल-मार्केट से जुड़े पेमेंट पर सिर्फ 0.02% का चार्ज लगेगा, यानी अधिकतम 300 रुपये।

    NPCI ने यह चार्ज क्यों लगाया?

    UPI का इस्तेमाल अब बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है। अकेले अगस्त 2026 में UPI के जरिए 2451 करोड़ से ज्यादा ट्रांजैक्शन हुए। इस विशाल सिस्टम को सुरक्षित तरीके से चलाने, सर्वर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए हर साल लगभग 20000 करोड़ रुपये का खर्च आता है। सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता कम करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को और बेहतर बनाने के लिए यह कमर्शियल मॉडल लागू किया जा रहा है।

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  • UP में शिक्षक बनने का इंतजार खत्म, 15,012 पदों पर बंपर मौका, जानें कब से भरे जाएंगे फॉर्म

    UP में शिक्षक बनने का इंतजार खत्म, 15,012 पदों पर बंपर मौका, जानें कब से भरे जाएंगे फॉर्म

     

    UP teacher vacancy 2026: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार युवाओं को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक भर्ती का बड़ा अवसर उपलब्ध कराया है। आयोग ने असिस्टेंट टीचर और लेक्चरर (पीजीटी) के कुल 15,012 पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए दो महत्वपूर्ण विज्ञापन जारी किए हैं। इससे प्रदेश के हजारों शिक्षित युवाओं को शिक्षक बनने का अवसर मिलेगा।

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने बताया कि आयोग द्वारा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी के 897 रिक्त पदों और बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत सहायक अध्यापक (शहरी) के 11,508 रिक्त पदों का विज्ञापन जारी किया गया है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा विभाग के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए भी विज्ञापन जारी किया गया है।

    15,012 पदों के लिए दो विज्ञापन, आवेदन प्रक्रिया अलग-अलग

    आयोग द्वारा जारी विज्ञापन के तहत सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी और सहायक अध्यापक, शहरी के पदों पर भर्ती की जाएगी। इन दोनों कैटेगरी में कुल 12,405 पद शामिल हैं। वहीं विज्ञापन संख्या-06/2026 के तहत पीजीटी के 2,607 पदों पर भर्ती होगी। इस तरह दोनों विज्ञापनों के माध्यम से कुल 15,012 रिक्त पदों को भरा जाएगा।

    12,405 सहायक अध्यापक पदों के लिए 16 सितंबर से आवेदन

    सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी एवं सहायक अध्यापक, शहरी के पदों के लिए विज्ञापन के तहत 15 सितंबर को विज्ञापन जारी किया गया है, जिसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन की प्रक्रिया 16 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थियों के लिए आवेदन शुल्क जमा करने की आखिरी डेट 15 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है। ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 19 अक्टूबर, 2026 होगी, जबकि इन पदों के लिए लिखित परीक्षा का आयोजन 3 और 4 दिसंबर, 2026 को प्रस्तावित है। इस भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 897 सहायक अध्यापक सम्बद्ध प्राइमरी और बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत 11,508 सहायक अध्यापक शहरी के पदों पर चयन किया जाएगा।

    पीजीटी के 2,607 पदों के लिए 18 सितंबर से आवेदन

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) के 2,607 रिक्त पदों के लिए आयोग ने विज्ञापन जारी किया है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया 18 सितंबर 2026 से शुरू होगी। वहीं, इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन शुल्क जमा करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर, 2026 निर्धारित की गई है और ऑनलाइन आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 21 अक्टूबर, 2026 होगी, जबकि परीक्षा 15 और 16 दिसंबर, 2026 को आयोजित की जाएगी।

    वन टाइम रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू

    अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए आयोग ने वन टाइम रजिस्ट्रेशन (ओटीआर) व्यवस्था लागू की है। संबंधित पदों के लिए आवेदन करने से पहले अभ्यर्थियों को ओटीआर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसके बाद ही वो इन पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आयोग की ओर से अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वो आवेदन की आखिरी डेट का इंतजार किए बिना समय से रजिस्ट्रेशन और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें।

    डिटेल नोटिफिकेशन पढ़कर ही करें आवेदन

    आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने अभ्यर्थियों से अपील की कि आवेदन करने से पहले आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध डिटेल नोटिफिकेशन को पढ़ लें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग द्वारा विज्ञापित पदों की अर्हता एवं पात्रता के संबंध में अलग से कोई सूचना नहीं दी जाएगी। अभ्यर्थी भर्ती से संबंधित डिटेल, आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, परीक्षा कार्यक्रम और अन्य जरूरी निर्देशों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट upessc.up.gov.in देख सकते हैं।

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  • UCC पर अरशद मदनी की दो टूक, ‘मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन…’

    UCC पर अरशद मदनी की दो टूक, ‘मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन…’

     

    Uniform Civil Code: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के समान नागरिक संहिता (UCC) पर बयान पर मचे सियासी हंगामे के बीच जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा है कि मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन अपने धर्म और दीन से हरगिज़ कोई समझौता नहीं कर सकता।

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पिछले दिनों कहा था कि 2029 से पहले NDA के सभी 21 राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। इसी को लेकर मुस्लिम संगठन और विपक्षी पार्टियां विरोध कर रही है। साथ ही एनडीए में शामिल जेडीयू और एलजेपी भी असहज है।

    अरशद मदनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, ''गृह मंत्री का यह ऐलान कि 2029 से पहले एनडीए शासित सभी 21 राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर दी जाएगी, एक बुनियादी सवाल खड़ा करता है कि देश संविधान से चलेगा या किसी राजनीतिक दल के वैचारिक एजेंडे से?''

    संवैधानिक अधिकारों को सीमित करना है- मदनी

    अरशद मदनी ने कहा, ''समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का उद्देश्य नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाना और उनके संवैधानिक अधिकारों को सीमित करना है।''

    उन्होंने कहा, ''समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करना संविधान की सर्वोच्चता और नागरिकों को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता को समाप्त करने की एक सुनियोजित कोशिश है। जमीयत उलमा-ए-हिंद देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन को कायम रखना चाहती है। इसलिए उसने समान नागरिक संहिता (UCC) के खिलाफ उत्तराखंड हाईकोर्ट का रुख किया है और उम्मीद है कि हमें न्याय मिलेगा। उत्तराखंड हाईकोर्ट में अब तक छह सुनवाई हो चुकी हैं और जमीयत उलमा-ए-हिंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल सहित अन्य वकील अदालत में पेश हो चुके हैं।''

    मुसलमानों से अधिकार छीनना चाहते हैं- अरशद मदनी

    उन्होंने कहा, ''हम ऐसा कोई कानून स्वीकार नहीं कर सकते जो शरीयत के खिलाफ हो। मुसलमान हर चीज से समझौता कर सकता है, लेकिन अपने धर्म और दीन से हरगिज़ कोई समझौता नहीं कर सकता। यह सवाल मुसलमानों के वजूद का नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक और धार्मिक अधिकारों का है। सरकार समान नागरिक संहिता के माध्यम से मुसलमानों से वे अधिकार छीनना चाहती है, जो देश के संविधान ने उन्हें दिये हैं। मुस्लिम पारिवारिक कानून मनुष्यों द्वारा बनाए गए कानून नहीं हैं, बल्कि कुरआन मजीद और हदीस से लिए गए हैं। जो लोग किसी धार्मिक पर्सनल लॉ के तहत अपने मामलों का संचालन नहीं करना चाहते, उनके लिए देश में पहले से ही वैकल्पिक नागरिक कानून मौजूद हैं। ऐसे में अनिवार्य समान नागरिक संहिता की आवश्यकता क्यों है?''

    अरशद मदनी ने कहा, ''एक और बुनियादी सवाल यह है कि यदि संविधान के प्रावधानों के तहत अनुसूचित जनजातियों को इस कानून से छूट दी जा सकती है, तो संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मुसलमानों को प्राप्त धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान क्यों नहीं किया जा सकता? समान नागरिक संहिता के नाम पर यह भेदभाव क्यों? यह मुद्दा केवल मुस्लिम पर्सनल लॉ का नहीं, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान को उसकी मूल भावना के साथ बनाए रखने का है। भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और धर्मनिरपेक्षता का अर्थ यही है कि सरकार का अपना कोई धर्म नहीं होता तथा देश के नागरिक अपने धार्मिक मामलों में स्वतंत्र होते हैं। इसलिए ऐसा समान नागरिक संहिता, जो धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करे, मुसलमानों के लिए स्वीकार्य नहीं हो सकती।''

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  • Jos Buttler ने रचा इतिहास, बने T20I क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज

    Jos Buttler ने रचा इतिहास, बने T20I क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज

     

    Jos Buttler T20I Records: जोस बटलर मॉडर्न डे क्रिकेट के सबसे महान बल्लेबाजों में से एक हैं. उन्होंने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से कई सारे रिकॉर्ड तोड़े हैं. अब उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा का भी बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया है. रोहित T20I क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज थे. अब जोस बटलर ने श्रीलंका के खिलाफ शानदार पारी खेलकर ‘हिटमैन’ को पीछे छोड़ दिया है और इतिहास के पन्नों में अपना नाम दर्ज करा लिया है.

    जोस बटलर ने तोड़ा रोहित शर्मा का रिकॉर्ड

    जोस बटलर ने श्रीलंका के खिलाफ 15 सितंबर को जोरदार पारी खेली. उन्होंने 44 गेंदों में 80 रन ठोक दिए. बटलर और हैरी ब्रूक की पारियों के दम पर इंग्लैंड ने 255 रनों का बड़ा लक्ष्य श्रीलंका के सामने रखा. अपनी 80 रनों की इस पारी के साथ वह T20I क्रिकेट में 4,292 रन बना चुके हैं और रोहित शर्मा से आगे निकल चुके हैं. रोहित शर्मा 4,231 रन बनाकर T20I में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दूसरे बल्लेबाज थे. बटलर ने अब उन्हें पीछे छोड़ दिया है और दूसरे स्थान पर अपनी जगह बना ली है. रोहित शर्मा मेंस T20 वर्ल्ड कप 2024 के बाद रिटायर हो गए थे. उन्होंने अपने T20I करियर में कुल 159 मैच खेले और 4,231 रन बनाए. बता दें कि बटलर को लगभग इतने रन बनाने के लिए 161 मैच लगे.

    कौन है T20I में सबसे ज्यादा रन बनाने वाला बल्लेबाज?

    रोहित शर्मा एक समय पर T20I क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज थे. हालांकि, रिटायरमेंट के बाद वह दौड़ में पिछड़ते गए. बाबर आजम मौजूदा समय में T20I क्रिकेट में सबसे अधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं. उन्होंने 145 मैचों में 4,596 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक शामिल हैं. बटलर शानदार फॉर्म में हैं और वह जल्द ही बाबर का रिकॉर्ड भी तोड़ सकते हैं और T20I क्रिकेट के असली ‘किंग’ बन सकते हैं.

    बटलर-ब्रूक की पारी ने इंग्लैंड को दिलाई जीत

    जोस बटलर की 80 रनों और हैरी ब्रूक की 114 रनों की पारियों ने इंग्लैंड को श्रीलंका पर पहले T20I में जीत दिलाई. द एजस बाउल में खेले गए इस मैच में 255 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम 135 रनों पर ही ऑलआउट हो गई. सोनी बेकर ने 3 विकेट, लियाम डॉसन ने 2 विकेट और जेमी ओवरटन ने 2 विकेट झटके. जोश टंग, विल जैक्स और आदिल रशीद ने भी एक-एक विकेट चटकाया. इंग्लैंड ने 119 रनों से मैच जीतकर सीरीज में 1-0 से बढ़त बना ली.

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  • Haryana के 2 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट, मानसून पड़ा कमजोर

    Haryana के 2 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट, मानसून पड़ा कमजोर

     

    Haryana Weather: हरियाणा में फिर से मानसून कमजोर पड़ गया है। एक दिन पहले मौसम विभाग प्रदेश में अच्छी बारिश का अंदेशा जता रहा था मगर अब 2 जिलों अंबाला और यमुनानगर में ही बारिश का यलो अलर्ट जारी किया गया है।

    इसके अलावा मौसम विभाग ने पंचकूला, कुरुक्षेत्र, कैथल, करनाल, पानीपत, सोनीपत, जींद, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, नूंह और पलवल में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश का अंदेशा जताया है। वहीं सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, भिवानी, चरखी दादरी, महेंद्रगढ़ और रेवाड़ी के कुछ एक स्थानों पर बूंदाबांदी हो सकती है।

    बारिश में आई कमी और तेज धूप के कारण प्रदेश के औसतन अधिकतम तापमान में 0.8°C की बढ़ोतरी दर्ज की गई। मौसम केंद्र के आंकड़ों के अनुसार, 15 शहरों में तापमान 35 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक दर्ज किया गया है।

    जानिए अधिकतम और न्यूनतम तापमान…

    हिसार राज्य में सबसे गर्म रहा : प्रदेश में मंगलवार को औसत अधिकतम तापमान में 0.8°C की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हिसार में सर्वाधिक तापमान 36.2°C दर्ज किया गया। इसके अलावा भिवानी में 35.5°C, अंबाला में 35.4°C, सिरसा में 35.5°C और महेंद्रगढ़ में 35.9°C रिकॉर्ड हुआ।

    यमुनानगर में रात का तापमान सबसे कम : मानसून की बेरूखी से न्यूनतम तापमान में 0.4°C का इजाफा हुआ, हालांकि यह सामान्य के आसपास ही बना हुआ है। प्रदेश में सबसे कम न्यूनतम तापमान यमुनानगर में 23.4°C दर्ज किया गया। अंबाला में रात का पारा 25.3°C, हिसार में 25.0°C, करनाल में 24.6°C, नारनौल में 24.5°C में दर्ज किया गया।

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  • 16 सितंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

    16 सितंबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

     

    1810 - निगवेल हिदाल्गो ने स्पेन से मैक्सिको की आज़ादी के लिए संघर्ष शुरु किया।
    1821 - मैक्सिको की स्वतंत्रता को मान्यता मिली।
    1908 - 'जनरल मोटर्स निगम' की स्थापना की गई।
    1947 - टोक्यो के सईतामा में चक्रवाती तूफान कैथलीन से 1,930 लोगों की मौत हो गई।
    1975 - केप वर्डे, मोजाम्बिक, साओ टोमे और प्रिंसिप संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुए।
    1975 - पापुआ न्यू गिनी ने आस्ट्रेलिया से स्वतंत्रता हासिल की।
    1978 - जनरल जिया उल हक़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति निर्वाचित।
    2003 - भूटान ने भारतीय हितों के ख़िलाफ़ अपनी ज़मीन के इस्तेमाल नहीं होने देने का आश्वासन दिया।
    2007 - पाकिस्‍तान के मुख्‍य चुनाव आयुक्‍त ने परवेज मुशर्रफ़ के राष्‍ट्रपति पद पर दुबारा चुनाव लड़ने के लिए चुनाव से जुड़े क़ानूनों में संशोधन किया।
    2007 - वन टू गो एयरलांइस का विमान थाईलैंड में दुर्घटनाग्रस्त होने से 89 लोगों की मौत।
    2008 - भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) के कर्मचारियों को विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किया गया।
    2009 - दुनिया भर के समक्ष भारत के एक उत्कृष्ट पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने वाले अतुल्य भारत विज्ञान अभियान को ब्रिटिश पुरस्कार मिला।
    2013 - वाशिंगटन में एक बंदूकधारी ने नौसेना के एक शिविर में 12 लोगों की गोली मारकर हत्या की।
    2014 - इस्लामिक स्टेट ने सीरियाई कुर्दिश लड़ाकों के खिलाफ युद्ध छेड़ा।
    1981 - गीता रानी - भारत की महिला भारोत्तोलक हैं।
    1880 - अलफ्रेड नॉयस- ब्रिटिश लेखक, कवि और नाटककार।
    1882 - बलवंत सिंह- स्वतंत्रता सेनानी।
    1916 - एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी- प्रसिद्ध भारतीय गायिका और अभिनेत्री।
    1920 - आर्ट सैनसम- अमेरिकी कॉर्टूनिस्ट।
    1931 - आर. रामचंद्र राव- क्रिकेट अंपायर।
    1977 - सुशील आनंद- भारतीय अभिनेता।
    1975 - पुष्कर सिंह धामी - भारतीय जनता पार्टी के राजनीतिज्ञ और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हैं।
    1968 - प्रसून जोशी - भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध गीतकार।
    1942 - रामलक्ष्मण - हिन्दी सिनेमा जगत के प्रसिद्ध संगीतकार थे।
    1901 - एम. एन. कौल - तीसरी लोकसभा में लोकसभा महासचिव थे।
    1893 - श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'- झण्डा गीत 'विजयी विश्व तिरंगा प्यारा' के रचयिता।

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  • Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों को आराम देना क्यों है जरूरी? जानें मान्यता

    Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा पर मशीनों को आराम देना क्यों है जरूरी? जानें मान्यता

     

    Vishwakarma Puja 2026: इस साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर यानी गुरुवार को कन्या संक्रांति के अवसर पर बहुत ही धूमधाम से मनाई जाएगी। इस पावन दिन पर सभी लोग अपने कारखानों, दुकानों और कार्यस्थलों पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। इस दिन काम में आने वाले सभी औजारों, मशीनों, वाहनों और उपकरणों का पूजन करने का विशेष नियम होता है। पूजन के दौरान मशीनों पर तिलक लगाया जाता है और उन्हें विश्राम दिया जाता है। कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि आखिर इस दिन औजारों की पूजा क्यों की जाती है और मशीनों को विश्राम क्यों दिया जाता है। आइए जानते हैं कि इस पावन पर्व पर यंत्रों के पूजन और उन्हें विश्राम देने के पीछे की मुख्य वजह क्या है।

    शिल्प के देवता और यंत्रों का विशेष संबंध

    भगवान विश्वकर्मा को शास्त्रों में सृष्टि का पहला शिल्पकार और निर्माण का देवता माना गया है। पौराणिक काल में सोने की लंका, द्वारका नगरी, इंद्रपुरी और पुष्पक विमान जैसी अद्भुत रचनाओं का निर्माण उन्होंने ही किया था। दुनिया में जितने भी औजार, मशीनें, वाहन और उपकरण हैं, उन सभी को भगवान विश्वकर्मा का ही रूप और आशीर्वाद माना जाता है। इसी कारण से 17 सितंबर के पावन अवसर पर लोग अपने काम में इस्तेमाल होने वाले सभी यंत्रों को भगवान का प्रतीक मानकर प्रणाम करते हैं। शिल्प के देवता के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए ही इस दिन औजारों का पूजन किया जाता है। ऐसा करने से कारोबार में तरक्की मिलती है और काम की जगह पर हमेशा सुख-शांति बनी रहती है।

    मशीनों को विश्राम देने और सफाई का नियम

    विश्वकर्मा पूजा के दिन कारखानों और दुकानों में काम पूरी तरह से बंद रखा जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके अपने कार्यस्थल, कारखाने या दुकान की अच्छे से सफाई की जाती है। सफाई करने के बाद ही सभी औजारों, मशीनों और उपकरणों पर तिलक लगाया जाता है। पूरे साल जिन मशीनों और औजारों के सहारे लोग अपनी रोजी-रोटी कमाते हैं, उन्हें इस पावन दिन पर पूरी तरह विश्राम दिया जाता है। इस दिन मशीनों का उपयोग करके कोई भी नया काम नहीं किया जाता। यंत्रों को विश्राम देने का यह नियम यह सिखाता है कि जो उपकरण हमारे जीवन को आसान बनाते हैं, उनका ध्यान रखना और उन्हें समय-समय पर आराम देना भी बहुत आवश्यक होता है।

    औजारों पर तिलक और पूजन से लाभ

    पूजा के समय एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान विश्वकर्मा और श्री गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाती है। इसके बाद रोली, अक्षत, चंदन, फूल और माला से पूजन किया जाता है। फिर अपने सभी औजारों, मशीनों और वाहनों पर तिलक लगाकर रक्षा धागा बांधा जाता है। धूप-दीप जलाकर आरती की जाती है और फल व मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद बांटा जाता है। इस तरह से अपने औजारों का पूजन करने से भगवान विश्वकर्मा का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है। काम में आने वाली मशीनें और वाहन लंबे समय तक सही-सलामत रहते हैं और काम में कोई बाधा नहीं आती है। जब आप इन नियमों से पूजन करते हैं, तो धन की कभी कमी नहीं होती।

    Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है। 

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  • वेजिटेरियन लोगों की दुनिया में भारत टॉप पर, नंबर-2 कौन? देखें पूरी रैंकिंग

    वेजिटेरियन लोगों की दुनिया में भारत टॉप पर, नंबर-2 कौन? देखें पूरी रैंकिंग

     

    Vegetarian Countries: दुनिया में सबसे ज्यादा शाकाहारी आबादी भारत में है। यहां के लोगों का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से शाकाहारी खाना खाता है। लेकिन भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जहां पर शाकाहार का चलन ज्यादा है। हैरानी की बात है कि सबसे ज्यादा शाकाहारी आबादी वाले देशों में मेक्सिको दूसरे नंबर पर आता है। वर्ल्ड एटलस और स्टैटिस्टा जैसे ग्लोबल सोर्स के आंकड़ों के मुताबिक मेक्सिको के लगभग 19% आबादी शाकाहारी खाना खाती है। यह बात इस वजह से भी खास है क्योंकि मैक्सिकन खाना पारंपरिक रूप से मीट वाली डिश के लिए जाना जाता है।

    शाकाहारी आबादी के मामले में भारत पहले नंबर पर

    ग्लोबल रैंकिंग में भारत सबसे ऊपर है, जहां की लगभग 38% आबादी पूरी तरह से शाकाहारी मानी जाती है। देशभर में शाकाहार के लोकप्रियता में धार्मिक परंपरा, संस्कृतिक रीति रिवाज और लंबे समय से चली आ रही खान पान की आदतों ने अहम भूमिका निभाई है।

    भारतीय खाने में भी पेड़-पौधों से मिलने वाले खाने की काफी सारी वैरायटी मिलती है। इसमें सब्जियां, दाल, अनाज, डेयरी प्रोडक्ट और क्षेत्रीय खास व्यंजन शामिल हैं। हालांकि भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा मांसाहारी खाना भी खाता है, लेकिन शाकाहारी आबादी की संख्या की वजह से भारत इस कैटेगरी में सबसे आगे है।

    मेक्सिको दूसरे नंबर पर है

    मेक्सिको दूसरे नंबर पर है जहां की लगभग 19% आबादी शाकाहारी खाना खाती है। यह आंकड़ा हैरान करने वाला लग सकता है क्योंकि यह देश दुनिया भर में टैकोस, बुरिटोस और मीट वाली दूसरी डिश के लिए मशहूर है।

    हालांकि मैक्सिकन खाने से हमेशा से पेड़ पौधों से मिलने वाली चीजों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता रहा है। बीन्स, मक्का, एवोकाडो, सब्जियां, चावल और दूसरी चीज पारंपरिक मैक्सिकन खाने का एक जरूरी हिस्सा हैं। इससे लोकप्रिय डिश के शाकाहारी वर्जन बनाने के लिए एक मजबूत आधार मिलता है।

    हाल के सालों में युवा मैक्सिकन लोगों के बीच भी शाकाहार तेजी से लोकप्रिय हुआ है। सेहत के प्रति जागरूक जीवनशैली, जानवरों के साथ क्रूरता को लेकर चिंता और पर्यावरण के प्रति जागरूकता जैसी वजहें लोगों को अपने खाने से मीट कम करने या पूरी तरह से हटाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

    ब्राजील और ताइवान में भी बड़ी संख्या में शाकाहारी आबादी

    इस लिस्ट में ब्राजील तीसरे नंबर पर है। यहां की लगभग 14% आबादी शाकाहारी है। पर्यावरण संरक्षण के बारे में बढ़ती जागरूकता, खासकर युवाओं के बीच, ने पेड़ पौधों से मिलने वाले खाने में दिलचस्पी बढ़ाई है।

    ताइवान चौथे नंबर पर है जहां की लगभग 13.5% आबादी शाकाहारी खाना खाती है। ताइवान में खान-पान की आदतों पर बौद्ध धर्म का गहरा सांस्कृतिक प्रभाव रहा है, साथ ही वहां शाकाहारी रेस्टोरेंट और खाने के विकल्प भी आसानी से मौजूद हैं।

    इजरायल ताइवान के बाद आता है, यहां लगभग 13% आबादी शाकाहारी है। तेल अवीव को अक्सर वीगन खाने के लिए एक बड़े ग्लोबल सेंटर के तौर पर देखा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां बड़ी संख्या में प्लांट बेस्ड रेस्टोरेंट हैं।

    ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और जर्मनी का नंबर

    ऑस्ट्रेलिया छठे स्थान पर है। यहां लगभग 12.1% आबादी शाकाहारी डाइट अपनाती है। पर्यावरण की स्थिरता और जानवरों की भलाई से जुड़ी चिंता प्लांट बेस्ड खाने की बढ़ते लोकप्रियता के पीछे बड़ी वजह है।

    इसके बाद अर्जेंटीना का नंबर आता है। यहां लगभग 12% आबादी शाकाहारी जीवन शैली अपनाती है। यह बात इस वजह से खास है क्योंकि अर्जेंटीना पारंपरिक रूप से मांस खाने के लिए सांस्कृतिक रूप से जाना जाता है।

    जर्मनी में भी 12% शाकाहारी लोग हैं और यह आठवें स्थान पर है। जानवरों की भलाई, पर्यावरण से जुड़ी चिंता, और मांस के विकल्प की भर्ती उपलब्धता ने पूरे देश में शाकाहारी खाने के विकल्प को बढ़ाने में मदद की है।

    स्वीडन 9वें स्थान पर आता है। यहां लगभग 12% आबादी शाकाहारी है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता और स्थिरता खान-पान के फैसलों पर बड़ा असर डालते हैं। ऑस्ट्रेलिया टॉप 10 की सूची को पूरा करता है। यहां लगभग 11% आबादी शाकाहारी डाइट को अपनाती है।

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  • UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर! ₹2,000 तक पेमेंट फ्री, आगे क्या बदलेगा?

    UPI यूजर्स के लिए बड़ी खबर! ₹2,000 तक पेमेंट फ्री, आगे क्या बदलेगा?

     

    UPI Payments Rule: अगर आप यूपीआई से पेमेंट करते हैं तो 2000 रुपये की ये सीमा आपके लिए समझना जरूरी है। केंद्र सरकार ने 14 सितंबर 2026 को एक नया गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें 2000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन को बिना चार्ज वाला इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम तय किया गया है।

    इसका मतलब ये नहीं है कि 2000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट अब महंगा हो गया है। अभी किसी यूपीआई पेमेंट पर नई फीस लागू नहीं हुई है। बदलाव इतना है कि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई लेनदेन को पहले वाली कानूनी सुरक्षा से बाहर कर दिया गया है। यानी आगे चलकर इन पर फीस लगाने का रास्ता खुल गया है।

    क्या है नया नियम?

    नए नोटिफिकेशन में सरकार ने दो इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट माध्यम तय किए हैं जिन पर चार्ज नहीं लगाया जा सकता। पहला RuPay से किया गया डेबिट कार्ड पेमेंट और दूसरा 2000 रुपये तक का यूपीआई लेनदेन।

    नोटिफिकेशन के मुताबिक बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर इन माध्यमों से पैसा भेजने या लेने पर किसी व्यक्ति से सीधे या किसी दूसरे तरीके से कोई चार्ज नहीं ले सकता है। यहीं से 2000 रुपये की सीमा महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट अब इस खास कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं आते हैं।

    क्या 2000 रुपये से ऊपर यूपीआई करने पर फीस लगेगी?

    नहीं, ये इस पूरे मामले की सबसे जरूरी बात है। नए नोटिफिकेशन में 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई पेमेंट पर कोई नई फीस तय नहीं की गई है। यानी अगर आप 5000 रुपये का यूपीआई पेमेंट करते हैं तो सिर्फ इस नोटिफिकेशन की वजह से आपके खाते से कोई चार्ज नहीं कटेगा। अभी सिर्फ इतना हुआ है कि सरकार ने बड़े यूपीआई पेमेंट पर फीस लगाने की संभावना के लिए कानूनी रास्ता खोल दिया है। फीस लगेगी या नहीं, कितनी लगेगी और किस तरह वसूली जाएगी, इसपर अभी अंतिम फैसला होना बाकी है।

    2000 रुपये की सीमा क्यों लाई गई?

    इसे समझने के लिए पुराने नियम को देखना होगा। 30 दिसंबर 2019 के नोटिफिकेशन के तहत यूपीआई पेमेंट पर जीरो चार्ज की कानूनी सुरक्षा थी और इसमें पेमेंट की रकम की कोई सीमा नहीं थी। यानी 100 रुपये का यूपीआई पेमेंट हो या 50 हजार रुपये का, दोनों इस सुरक्षा के दायरे में आते थे। अब नए नोटिफिकेशन में पहली बार 2000 रुपये की सीमा जोड़ दी गई है। इसलिए 2000 रुपये तक के यूपीआई पेमेंट को तो सुरक्षा मिली हुई है लेकिन इससे ज्यादा के पेमेंट को उस सुरक्षा से बाहर रखा गया है।

    क्या ग्राहक से पैसे लिए जाएंगे?

    सरकार की तरफ से जो बात सामने आई है उसके मुताबिक अगर यूपीआई पर कोई फीस आती भी है तो उसका बोझ ग्राहक पर डालने की बात नहीं है। फीस MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट के रूप में दुकानदार या कारोबारी से ली जा सकती है। इसे और आसान भाषा में ऐसे समझिए कि आपने किसी दुकान पर यूपीआई से 5000 रुपये का पेमेंट किया। अगर भविष्य में उस तरह के लेनदेन पर MDR लागू किया जाता है तो फीस ग्राहक से नहीं बल्कि पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से ली जाएगी।

    MDR क्या होता है?

    MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वो फीस है जो दुकानदार या कारोबारी डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने के बदले बैंक या पेमेंट कंपनी को देता है। डेबिट और क्रेडिट कार्ड के मामले में ऐसी फीस लगती है। लेकिन दिसंबर 2019 से यूपीआई पर यह फीस खत्म थी। अब बड़े कारोबारी यूपीआई पेमेंट को कानूनी सुरक्षा से बाहर किए जाने के बाद इस बात की संभावना बनी है कि कुछ बड़े लेनदेन पर MDR जैसी फीस लगाई जा सके।

    क्या हर 2000 रुपये से ज्यादा के पेमेंट पर फीस लगेगी?

    अभी ऐसा तय नहीं हुआ है। सरकार की ओर से कहा गया है कि अगर फीस लगाई जाती है तो यह एक तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा कारोबारी लेनदेन पर होगी। व्यक्ति से व्यक्ति को भेजे जाने वाले यूपीआई पैसे को पूरी तरह मुफ्त रखने की बात भी कही गई है। इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि कल से 2001 रुपये का यूपीआई करने पर फीस लग जाएगी।

    सरकार ने बदलाव क्यों किया?

    सरकार का तर्क है कि यूपीआई सिस्टम को चलाने, उसकी सुरक्षा बनाए रखने और नई तकनीक पर लगातार खर्च होता है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 6 अगस्त को कांग्रेस नेता जयराम रमेश को जवाब देते हुए कहा था कि MDR दुकानदारों पर लगता है ग्राहकों पर नहीं। सरकार का कहना है कि इससे बैंकों और फिनटेक कंपनियों को यूपीआई के इंफ्रास्ट्रक्चर, सुरक्षा और नई तकनीक पर ज्यादा निवेश करने में मदद मिल सकती है।

    यूपीआई का कारोबार कितना बड़ा है?

    यूपीआई को NPCI चलाता है और ये देश में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। अगस्त 2026 में यूपीआई पर करीब 2451 करोड़ लेनदेन हुए। इन सभी लेनदेन की कुल कीमत करीब 29.82 लाख करोड़ रुपये रही। इनमें से करीब तीन-चौथाई लेनदेन गूगल पे और वॉलमार्ट की कंपनी फोन पे के जरिए हुए। यानी यूपीआई पर होने वाले पेमेंट का आकार इतना बड़ा है कि अगर बड़े कारोबारी लेनदेन पर छोटी सी फीस भी लागू होती है तो पेमेंट इंडस्ट्री के लिए यह बड़ी रकम बन सकती है।

    कितनी फीस लग सकती है?

    अभी कोई अंतिम दर तय नहीं है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के अनुमान के मुताबिक यह फीस 25 से 40 बेसिस पॉइंट के बीच हो सकती है। अगस्त में 2000 रुपये या उससे ज्यादा के लेनदेन पर 0.3 प्रतिशत की दर पर विचार किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी। लेकिन इसे फिलहाल तय फीस नहीं माना जा सकता।

    ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के अगस्त के अनुमान के मुताबिक बड़े यूपीआई लेनदेन पर दुकानदारों से फीस लेने की व्यवस्था शुरू होने पर पेमेंट इंडस्ट्री को सालाना करीब 5000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की कमाई हो सकती है। अभी यह तय नहीं हुआ है कि फीस लगेगी या नहीं और अगर लगेगी तो उसका ढांचा क्या होगा। इस पर अंतिम फैसला NPCI की अगुवाई वाली यूपीआई एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी करेगी। यानी सरकार के नए नोटिफिकेशन को फीस की शुरुआत समझना सही नहीं होगा। यह आगे फीस तय किए जाने के लिए कानूनी आधार तैयार करता है।

    नोटिफिकेशन में क्या-क्या साफ नहीं है?

    नए नोटिफिकेशन में कुछ बातें अभी स्पष्ट नहीं हैं। इसमें इसके लागू होने की तारीख नहीं दी गई है। 2019 के पुराने नोटिफिकेशन को सीधे तौर पर रद्द करने की बात भी नहीं लिखी गई है। इसके अलावा नए नोटिफिकेशन में व्यक्ति से व्यक्ति और व्यक्ति से दुकानदार वाले यूपीआई पेमेंट का अलग-अलग जिक्र नहीं है। 2019 के नोटिफिकेशन में भीम यूपीआई क्यूआर कोड का अलग से नाम था जबकि इस बार ऐसा नहीं है।

    आम आदमी पर अभी क्या असर?

    फिलहाल आपके यूपीआई इस्तेमाल करने के तरीके में कोई बदलाव नहीं हुआ है। चाय की दुकान पर 50 रुपये देने हों, किराने का 1500 रुपये का पेमेंट करना हो या किसी को 5000 रुपये भेजने हों, अभी यूपीआई पर कोई नई फीस नहीं लगी है। अगर आप 2000 रुपये से ज्यादा का यूपीआई पेमेंट करते हैं तो भी सिर्फ इस नोटिफिकेशन की वजह से आपके खाते से पैसा नहीं कटेगा। रुपे डेबिट कार्ड से किया गया पेमेंट भी पहले की तरह मुफ्त रहेगा।

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  • Himachal Weather Update: हिमाचल में मानसून रहेगा कब तक एक्टिव? मौसम विभाग ने दिया अपडेट

    Himachal Weather Update: हिमाचल में मानसून रहेगा कब तक एक्टिव? मौसम विभाग ने दिया अपडेट

     

    Himachal Weather Update: हिमाचल प्रदेश में बारिश का दौर रुक-रुककर जारी है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार आने वाले 7 दिनों 20 सितंबर तक प्रदेश में केवल कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। आगामी सप्ताह के लिए भारी बारिश की कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। सोमवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को प्रदेश के कई हिस्सों में वर्षा की संभावना जताई गई है। किसी जिले में भारी वर्षा या बाढ़ को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। 

    तीन जिलों में खूब बरसे मेघ

    सोमवार को जहां सिरमौर, मंडी और कांगड़ा के कई इलाकों में मूसलाधार वर्षा और भूस्खलन से नुकसान हुआ है। वहीं निचले व मैदानी इलाकों में पारा उछाल मार रहा है। धूप के चमकने पर सितंबर माह में गर्मी का अहसास हो रहा है। प्रदेश में अधिकतम तापमान में सबसे अधिक गिरावट कुफरी में 3.5 डिग्री की गिरावट आई है। बाकी स्थानों पर एक से दो डिग्री का अंतर आया है। 

    प्रदेश में बीते चौबीस घंटों के दौरान सिरमौर के नाहन में सर्वाधिक 46.8 मिलीमीटर, पंडोह में 32.2, कसौली में 25, निचार में 24, पांवटा साहिब में 22.6 और धर्मशाला में 22.1 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। 

    55 सड़कें बंद

    राज्यभर में 14 सितंबर शाम 5 बजे तक 55 सड़कें भूस्खलन के कारण बंद पड़ी हैं। मंडी में 24 सड़कें, कुल्लू में 12 और कांगड़ा में 10 सड़कें बंद हैं। इन्हें खोलने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिमला जिले के ठियोग उपमंडल में 19 पेयजल योजनाएं ठप पड़ी हैं, जिससे ग्रामीण इलाकों में पानी का संकट गहरा गया है। वहीं रामपुर और कुल्लू के आनी में 7 ट्रांसफार्मर खराब होने से बिजली गुल है।

    ऊना में बढ़ा, कल्पा में लुढ़का तापमान

    सोमवार को ऊना में अधिकतम तापमान में 1.4 डिग्री की वृद्धि के साथ सबसे अधिक 34 डिग्री दर्ज किया गया। मंडी में 33.6 डिग्री दर्ज किया गया। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन का तापमान सामान्य से 2 से 6 डिग्री अधिक बना हुआ है। वहीं जनजातीय क्षेत्र कल्पा में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ठंडा रहा।

    1683 करोड़ का नुकसान

    प्रदेश में 30 जून से 14 सितंबर तक 1683.94 करोड़ रुपये का नुकसान आंका गया है। लोक निर्माण विभाग को 1231 करोड़ से अधिक और जल शक्ति विभाग को 368 करोड़ से ज्यादा का नुकसान आंका गया है।

    सामान्य से 11 प्रतिशत कम वर्षा रिकॉर्ड

    इस बार 1 जून से 14 सितंबर तक 606 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य वर्षा 682.4 मिलीमीटर वर्ष दर्ज की गई जो सामान्य से 11 प्रतिशत कम है। हालांकि कांगड़ा में 1467 मिलीमीटर वर्षा हुई है जो सामान्य से चार प्रतिशत कम है। 

    कृषि व बागवानी को 26 करोड़ का नुकसान

    प्रदेश में इस दौरान कृषि और बागबानी फसलों को 26 करोड़ रुपये से अधिक के नुकसान का आकलन किया गया है। प्रदेश में वर्ष 2025 में 38 करोड़ और वर्ष 2023 में प्राकृतिक आपदा व बाढ़ के दौरान 83 करोड़ रुपये का कृषि और बागबानी को नुकसान हुआ है। अचानक आई बाढ़ के कारण सैंकडों बीघा जमीन बह गई, जिसमें फसलें लगाई गई थी। कम बारिश के कारण इस बार क्षति का आंकड़ा घटा है, मगर खेतों और बगीचों में किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।

    कांगड़ा में सबसे अधिक नुकसान

    कांगड़ा में सबसे अधिक 4.54 करोड़, जबकि शिमला में 3.88 करोड़, चंबा में 3.13 करोड़ का नुकसान आंका गया है। सिरमौर में 2.10 करेाड़, किन्नौर में 2.09, सोलन में 1.69, ऊना में 1.27, बिलासपुर में 1.10, कुल्लू में 1.06, लाहुल-स्पीति में 1.04 और हमीरपुर में 81 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।

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