खबरें अब तक

  • Jio की छलांग, Airtel रह गया पीछे; सितंबर के आंकड़ों ने चौंकाया

    Jio की छलांग, Airtel रह गया पीछे; सितंबर के आंकड़ों ने चौंकाया

     

    Reliance Jio: 30 अक्टूबर 2026: शेयर बाजार में दमदार लिस्टिंग के बाद रिलायंस जियो के लिए मोबाइल ग्राहकों के मोर्चे पर भी अच्छी खबर है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) की सितंबर की रिपोर्ट पर आधारित DAM Capital और IIFL Capital के विश्लेषण के मुताबिक, मशीन-टू-मशीन (M2M) कनेक्शन हटाने पर जियो के मोबाइल ग्राहकों की संख्या 19 लाख बढ़ी, जबकि एयरटेल के ग्राहकों में 2 लाख की बढ़ोतरी हुई। यानी जियो ने एयरटेल के मुकाबले करीब 10 गुना ज्यादा कोर मोबाइल ग्राहक जोड़े। देश में इस श्रेणी के मोबाइल ग्राहकों की कुल संख्या 22 लाख बढ़ी, जिसमें अकेले जियो की हिस्सेदारी करीब 86 फीसदी रही।

    एक्टिव मोबाइल यूजर्स के मामले में भी जियो ने मजबूत प्रदर्शन किया। DAM Capital की रिपोर्ट के मुताबिक, M2M कनेक्शन हटाकर की गई गणना में सितंबर के दौरान जियो के एक्टिव यूजर्स की संख्या 13 लाख बढ़ी, जबकि एयरटेल व वोडाफोन आइडिया के एक्टिव यूजर्स घटे। एयरटेल के 2 लाख और वोडाफोन आइडिया के 3 लाख एक्टिव यूजर्स कम हुए। इस आधार पर देशभर में एक्टिव मोबाइल यूजर्स की कुल संख्या में 6 लाख की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    कुल मोबाइल ग्राहक संख्या के मामले में भी जियो ने अपनी बढ़त बरकरार रखी। TRAI के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर के अंत में जियो के पास 51.11 करोड़ मोबाइल ग्राहक थे, जबकि एयरटेल का ग्राहक आधार 49.43 करोड़ रहा। वहीं, वोडाफोन आइडिया के 20.01 करोड़ और सरकारी टेलीकॉम कंपनी BSNL के 9.43 करोड़ मोबाइल ग्राहक थे। इन कुल आंकड़ों में M2M कनेक्शन भी शामिल हैं।

     

    और भी...

  • अमित शाह का विपक्ष को संदेश, बोले- 'अंगद का पैर है भाजपा सरकार, UP से कोई हिला नहीं सकता'

    अमित शाह का विपक्ष को संदेश, बोले- 'अंगद का पैर है भाजपा सरकार, UP से कोई हिला नहीं सकता'

     

    Amit Shah: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। वह BJP की राज्य कार्यसमिति की बैठक में शामिल हुए। कार्यसमिति की बैठक में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि बीजेपी के मालिक हमारे कार्यकर्ताओं को मेरा प्रणाम, मेरा राम राम। यूपी में 30 अक्टूबर का बड़ा योगदान है, आज के दिन 1990 अयोध्या में राम भक्तों पर गोलियां चलाई गई थीं। मैं पूछना चाहता हूं कि आप किस मुंह से सरकार बनाने की बात करते हैं। आपने राम भक्तों पर गोलियां चलाईं, हमने राम मंदिर बना दिया। आपकी तीसरी पीढ़ी को भी जनता माफ नहीं करेगी। कल्याण सिंह ने सरकार की चिंता किए बिना विवादित ढांचे को ध्वस्त कराया। यूपी में बीजेपी सरकार अंगद का पैर है, उसे कोई नहीं हटा सकता है। फिर से बीजेपी की सरकार बनने जा रही है, कोई दुविधा नहीं है।

    'तीसरी बार सरकार बनी तो UCC लागू करेंगे'

    अमित शाह ने कहा, "मैच हारने के बाद अब अंपायर पर आरोप लगाया जा रहा है कि वोट चोरी हुई। बीजेपी संसद में चर्चा के लिए तैयार है। एक बार आइए, विशेष सत्र बुलाते हैं। हम एक एक बात का जवाब देने को तैयार हैं। संसद में चर्चा कीजिए।" शाह ने आगे कहा, "2014 में हमारे केवल 44 विधायक थे। बहुत निराशा थी। मैं तहसील तक गया। एक बार संगठन ठीक हो गया तो 2014 में यूपी में 41 प्रतिशत वोट के साथ 73 सीट जीतीं। 2017 में नोटबंदी हुई थी तो अखिलेश को रात भर नींद नहीं आई थी। हमने 40 प्रतिशत वोट लेकर 312 सीट जीती थीं। उसी प्रदर्शन को दोहराने का वक़्त आ गया है। यूपी में तीसरी बार सरकार बना दो यहां भी यूसीसी लागू करेंगे।"

    यूपी चुनाव को लेकर अहम बैठक

    बता दें कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को देखते हुए, पार्टी अपना संगठनात्मक रोडमैप और चुनावी रणनीति तैयार कर रही है। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ राज्य नेतृत्व, जिला अध्यक्ष और प्रमुख पदाधिकारी शामिल होंगे। इसमें संगठनात्मक प्राथमिकताओं पर चर्चा की जाएगी, जमीनी स्तर पर पहुंच की समीक्षा होगी और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए लक्ष्य तय किए जाएंगे। राज्य कार्यसमिति की इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक के साथ-साथ पार्टी संगठन के अन्य पदाधिकारी भी हिस्सा लिए।

    और भी...

  • 'पापा को लगा मैं भटक गई हूं', अनुप्रिया नागर ने बताया 'हनुमान अंश' बनाने का पूरा किस्सा

    'पापा को लगा मैं भटक गई हूं', अनुप्रिया नागर ने बताया 'हनुमान अंश' बनाने का पूरा किस्सा

     

    Hanuman Ansh: 'हनुमान अंश' की सफलता किसी से छिपी नहीं है। मात्र 2 करोड़ के बजट में बनी ये फिल्म इस साल की सबसे कमाऊ फिल्मों में से एक बन चुकी है। बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने दुनियाभर में 450 करोड़ से भी ज्यााद का कलेक्शन किया और कई बिग बजट फिल्मों को धूल चटा दी। इस फिल्म की सफलता ने कई नए फिल्म मेकर्स को भी हौसला दिया है, जिसके चलते बैक टू बैक कई संत-महत्माओं की जिंदगी को पर्दे पर उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। अब इस फिल्म की को-प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर ने भी इस फिल्म की सफलता और इसे बनाने के फैसले पर घरवालों के रिएक्शन पर खुलकर बात की है। 'कर्ली टेल्स' से बात करते हुए 21 साल की अनुप्रिया नागर ने बताया कि कैसे इस फिल्म ने उनकी जिंदगी को एक नई दिशा दी और सबकुछ बदल दिया।

    पिता को लगा बेटी भटक गई- अनुप्रिया नागर

    अनुप्रिया नागर ने बातचीत के दौरान बताया कि शुरुआत में उन्होंने फिल्ममेकिंग के बारे में नहीं सोचा था। ये उनकी किस्मत थी जो उन्हें यहां तक लेकर आई। उन्होंने बताया कि वह शुरुआत में विदेश में अच्छी नौकरी करना चाहती थीं। उनके पास विदेश में अच्छी नौकरी करके करियर बनाने का मौका था। वह लगभग 'एप्पल' में सिलेक्ट हो गई थीं, लेकिन दूसरे राउंड में वह बाहर हो गईं। इसके बाद वह उन्होंने फिल्म बनाने का फैसला लिया और उनका परिवार उनके फैसले से हैरान रह गया। अनुप्रिया ने बताया कि उनके पिता को इस बात की चिंता थी कि वह कहीं भटक न जाएं और पढ़ाई और नौकरी छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री में उतरना कहीं उनके करियर की बड़ी भूल न बन जाए।

    अनुप्रिया नागर ने यूके से की है पढ़ाई

    'हनुमान अंश' की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नगर ने ब्रिटेन (UK) से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है और ज़्यूरिख में उनकी नौकरी पक्की थी। लेकिन, Apple कंपनी के दूसरे राउंड का इंटरव्यू वह नहीं निकाल पाईं। इसके बाद उन्होंने एप्पल के सह-संस्थापक रहे स्टीव जॉब्स के शुरुआती दिनों के बारे में पढ़ना शुरू किया और उन्हें पता चला कि स्टीव जॉब्स को उत्तराखंड स्थित नीम करोली बाबा के कैंची धाम से प्रेरणा मिली थी। इसके बाद अनुप्रिया भी कैंची धाम गईं और नीम करोली बाबा की भक्त बन गईं। यही वो वजह थी जिसके चलते वह विशाल चतुर्वेदी की फिल्म 'हनुमान अंश' से जुड़ीं, जिसने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया।

    फिल्ममेकिंग के फैसले के हक में नहीं थे पिता

    अनुप्रिया नागर बताती हैं कि उनके पिता को शुरुआत में फिल्म में पैसे लगाने के फैसले से आपत्ति थी। वह कहती हैं- 'जब मैंने अपने पिता को फिल्ममेकिंग के अपने फैसले के बारे में बताया, तो उन्हें लगा कि मेरी बेटी भटक रही है। मेरे पिता को लगा कि मैंने विदेश से इकोनॉमिक्स की पढ़ाई की है और अब ज्यूरिख में अच्छी नौकरी छोड़कर फिल्म में पैसे लगाना चाहती हूं। बड़ी नौकरी छोड़कर बॉलीवुड में पैसे लगाना एक बड़ा जोखिम हो सकता है।' बता दें, हनुमान अंश 7 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। शुरुआत में चींटी की चाल चल रही इस फिल्म ने 3 हफ्ते बाद ऐसी रफ्तार पकड़ी की हर कोई हैरान रह गया। जब फिल्म रिलीज हुई अनुप्रिया के पिता लंदन में थे और जब वह लंदन यात्रा से भारत वापस लौटे तो 'हनुमान अंश' देखने की इच्छा जताई, लेकिन हैरान करने वाली बात यह थी कि मुंबई के किसी भी थिएटर में उन्हें एक भी टिकट नहीं मिल सकी।

    और भी...

  • शुभमन गिल ने कनपटी पर क्यों लगाई खास मशीन? जानिए क्या है इसकी खासियत

    शुभमन गिल ने कनपटी पर क्यों लगाई खास मशीन? जानिए क्या है इसकी खासियत

     

    Shubman Gill: ऑकलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज से पहले भारतीय टीम की तैयारी के दौरान शुभमन गिल ने सबका ध्यान खींचा। उन्हें माथे पर ‘टेम्पल’ नाम का एक फिटनेस ट्रैकिंग डिवाइस पहने देखा गया। यह डिवाइस सिर्फ पारंपरिक फिटनेस मेट्रिक्स ही नहीं, बल्कि दिमाग से जुड़े संकेतों को भी ट्रैक करने के लिए बनाया गया है।

    गिल भारतीय टीम के साथ ऑकलैंड में जुड़ने के बाद एक ट्रेनिंग सेशन में यह छोटा सा डिवाइस पहने नजर आए थे। गिल ने यह नहीं बताया है कि वह इस डिवाइस का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं। लेकिन दो बड़े भारतीय एथलीटों पर इसकी मौजूदगी ने इस उभरती हुई तकनीक और खेल में इसकी भूमिका को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

    क्या है ‘टेम्पल’ डिवाइस?

    ‘टेम्पल’ डिवाइस जोमैटो के सह-संस्थापक दीपेंद्र गोयल से जुड़ी एक टीम ने बनाया है। इसे माथे के किनारे, कनपटी के पास लगाया जाता है। इसका काम सेरेब्रल ब्लड फ्लो और दिमाग के काम से जुड़े अन्य शारीरिक संकेतों पर नजर रखना है।

    स्मार्टवॉच और फिटनेस बैंड मुख्य रूप से हृदय गति, मूवमेंट और नींद पर ध्यान देते हैं। वहीं, ‘टेम्पल’ संज्ञानात्मक काम और तनाव के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया के बारे में जानकारी देने का लक्ष्य रखता है।

    यह डिवाइस ब्रेनफ्लो नामक तकनीक के जरिए ऑप्टिकल सेंसर का उपयोग करके सेरेब्रल ब्लड फ्लो में बदलाव को ट्रैक करता है। इसका मकसद ऑक्सीजन के स्तर और संज्ञानात्मक लोड से जुड़े संकेतों पर भी नजर रखना है।

    इसका एंट्रॉपी स्कोर शारीरिक तनाव को बताता है। इस पर व्यायाम, नींद और तनाव जैसे कारकों का असर हो सकता है। हालांकि, यह डिवाइस वेलनेस और रिसर्च के लिए है, न कि मेडिकल डायग्नोसिस के लिए।

    पीवी सिंधु भी कर चुकी हैं इस्तेमाल

    सिंधु ने थॉमस और उबर कप में अप्रैल में ‘टेम्पल’ का इस्तेमाल किया था। इसके बाद बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में भी उन्हें इसे पहने देखा गया। खबर है कि बैडमिंटन स्टार इस पहनने योग्य डिवाइस को टेस्ट कर रही हैं, क्योंकि इसके डेवलपर्स इसके संभावित उपयोगों का पता लगा रहे हैं।

    एलीट एथलीटों के लिए ट्रेनिंग और रिकवरी को ट्रैक करना तैयारी का एक अहम हिस्सा है। दिमाग से जुड़े संकेतों को मॉनिटर करने वाला डिवाइस संज्ञानात्मक तनाव के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकता है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि व्यक्तिगत एथलीट इस डेटा का उपयोग कैसे कर रहे हैं या यह उनकी ट्रेनिंग को किस तरह प्रभावित करता है।

    और भी...

  • Israel Election Results: नेतन्याहू को नहीं मिला बहुमत, अरब दल बने किंगमेकर; अब किसकी बनेगी सरकार?

    Israel Election Results: नेतन्याहू को नहीं मिला बहुमत, अरब दल बने किंगमेकर; अब किसकी बनेगी सरकार?

     

    Israel Election 2026 Results: इजरायल में 27 अक्टूबर को हुए संसदीय चुनावों की मतगणना पूरी हो गई है, लेकिन आखिरी नतीजों ने पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य को अनिश्चितता में डाल दिया है। सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बावजूद, नेतन्याहू की लीडरशिप वाले लिकुड गुट को बहुमत की सरकार बनाने के लिए जरूरी सीटें नहीं मिल पाई हैं। बीते गुरुवार को इजरायली मीडिया की रिपोर्टों के मुताबिक, 120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। विपक्ष को 48 सीटें मिलीं, जबकि अरब पार्टियों को कुल 19 सीटें हासिल हुईं। संसदीय बहुमत साबित करने के लिए कम से कम 61 सीटों की जरूरत होती है।

    लिकुड बनी सबसे बड़ी पार्टी

    सभी वोटों की गिनती पूरी हो गई है, जिसमें सैनिकों, कैदियों, विदेशों में तैनात राजनयिकों और अस्पतालों में भर्ती मतदाताओं के विशेष मत भी शामिल हैं। लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे आगे रही। गादी आइसेनकोट की ‘यशार’ को 21 सीटें मिलीं, इसके बाद ‘बी-याचाद’ को 12 और ‘जॉइंट लिस्ट’ को 11 सीटें मिलीं। डेमोक्रेट्स और राआम को 8-8 सीटें मिलीं। यूनाइटेड टोरा जुडाइज्म, यिसराएल बेतेइनू और ओत्ज्मा येहुदित को 7-7 सीटें मिलीं, जबकि शस और रिलीजियस जायोनिज्म को 6-6 सीटें हासिल हुईं।

    विदेशी साजिश-इस्लामीकरण के आरोप

    चुनाव नतीजों के बाद कथित गड़बड़ियों और विदेशी साजिश को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। लिकुड ने अरब पार्टियों पर आरोप लगाया है कि उन्हें कथित तौर पर वोट खरीदने और मतदाताओं को गैर-कानूनी तरीके से जुटाने का फायदा मिला है। इजरायल की घरेलू सुरक्षा एजेंसी, शिन बेट, कतर और तुर्की से जुड़े विदेशी फंडिंग के संदेह की जांच कर रही है। उनका ये भी आरोप है कि इजरायल का इस्लामीकरण हो रहा है। पुलिस अलग से चुनाव से जुड़ी रिश्वतखोरी की भी जांच कर रही है। हालांकि, ये आरोप अभी साबित नहीं हुए हैं। कतर ने किसी भी तरह के दखल से इनकार किया है, जबकि एक चुनाव अधिकारी ने कहा कि मतदान की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाले बड़े पैमाने पर नियमों के उल्लंघन का कोई सबूत नहीं मिला है।

    अब आगे क्या होगा?

    किसी भी राजनीतिक गुट को 61 सीटों का जादुई आंकड़ा नहीं मिल पाया है। नतीजों के आधिकारिक तौर पर डिक्लेयर होने के बाद, इजरायल के राष्ट्रपति किसी एक सांसद को गठबंधन सरकार बनाने की जिम्मेदारी सौंपने की प्रक्रिया की देखरेख करेंगे। नेतन्याहू छोटी पार्टियों से समर्थन मांग सकते हैं, लेकिन बातचीत करना मुश्किल हो सकता है। एक वैकल्पिक सरकार बनाने के लिए अरब पार्टियों के सहयोग की भी जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इसके लिए उन पार्टियों की शर्तें माननी होगी। अगर राजनीतिक नेता तय प्रक्रिया के भीतर एक पूर्ण गठबंधन बनाने में नाकाम रहते हैं, तो इजराइल को एक और संसदीय चुनाव कराने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

     

    और भी...

  • हरियाणा में SIR की डेडलाइन बढ़ी, अब 30 नवंबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

    हरियाणा में SIR की डेडलाइन बढ़ी, अब 30 नवंबर को आएगी फाइनल वोटर लिस्ट

     

    PM Kisan 24th Installment: हरियाणा में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) की समयसीमा बढ़ा दी गई है। भारत निर्वाचन आयोग ने 29 अक्टूबर को जारी आदेश में संशोधित कार्यक्रम के तहत दावे और आपत्तियों के निपटारे की अंतिम तारीख 20 नवंबर 2026 निर्धारित की है।

    वहीं, मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन अब 30 नवंबर 2026 को किया जाएगा। आयोग के अवर सचिव संदीप कुमार की ओर से हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भेजे गए पत्र में संशोधित कार्यक्रम की जानकारी दी गई है। पत्र के अनुसार, यह निर्णय हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुरोध के बाद लिया गया है।

    इससे पहले आयोग ने 14 मई, 14 जुलाई और 29 अगस्त 2026 को एसआइआर के कार्यक्रम से संबंधित आदेश जारी किए थे। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि संशोधित कार्यक्रम की जानकारी संबंधित सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को दी जाए।

    इसके साथ ही उपलब्ध सभी माध्यमों से नए कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि मतदाताओं तक समयसीमा में बदलाव की जानकारी पहुंच सके। आयोग ने राजनीतिक दलों को भी संशोधित कार्यक्रम के बारे में लिखित रूप से सूचित करने को कहा है। आदेश की प्रति हरियाणा के मुख्य सचिव को भी भेजी गई है।

    और भी...

  • किसानों को बड़ी सौगात! PM-Kisan की 24वीं किस्त जारी, PM मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना

    किसानों को बड़ी सौगात! PM-Kisan की 24वीं किस्त जारी, PM मोदी ने विपक्ष पर साधा निशाना

     

    PM Kisan 24th Installment: देश के करोड़ों किसानों के लिए शुक्रवार का दिन बड़ी राहत लेकर आया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की 24वीं किस्त जारी कर दी। इसके तहत पात्र किसानों के बैंक खातों में करीब ₹19,000 करोड़ ट्रांसफर किए गए। वहीं, पीएम मोदी ने गुजरात को हजारों करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात भी दी। इन परियोजनाओं से खेती, पशुपालन, सड़क और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

    गुजरात के बनासकांठा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में PM-Kisan योजना की नई किस्त जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश के किसानों के खातों में एक और किस्त पहुंच गई है। किसान देश की मजबूत नींव और विकास के अहम स्तंभ हैं। सरकार हमेशा से किसानों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उनके हितों को प्राथमिकता देने के लिए काम करती रही है।

    बनासकांठा की अनूठी व्यवस्था का किया जिक्र

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनासकांठा की अनूठी व्यवस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल सभी लोग चारपाई पर बैठे हैं, जिसे देखकर देश के लोगों को हैरानी हो सकती है। बनासकांठा ने गांवों की पुरानी परंपराओं को फिर से जीवित किया है। पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर इस आयोजन की जानकारी गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स को दी जाती, तो शायद इसे विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कर लिया जाता।

    ₹14,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन

    पीएम मोदी के दो दिवसीय गुजरात दौरे के दौरान राज्य में करीब ₹14,000 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं में सड़क, और कृषि से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार शामिल है। सरकार का कहना है कि इनसे राज्य में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

    दो नई ट्रेनों को दिखाई हरी झंडी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को गुजरात में रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में दो नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। इनमें अहमदाबाद (साबरमती) से वाराणसी के बीच चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन और मेहसाणा-बेचराजी-साबरमती के बीच संचालित होने वाली MEMU ट्रेन शामिल हैं। इन सेवाओं से यात्रियों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और क्षेत्रीय रेल संपर्क बेहतर होगा।

    बनास डेयरी को भी मिली बड़ी सौगात

    गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने बनास डेयरी की कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें बनासकांठा जिले के भिलड़ी में बनाया गया भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर (BBBRC) प्रमुख है। यह केंद्र 127 एकड़ में फैला है और इसके निर्माण पर करीब ₹325 करोड़ खर्च किए गए हैं। इस केंद्र का उद्देश्य पशुओं की नस्ल सुधारने, बेहतर पशुपालन और दूध उत्पादन को बढ़ावा देने से जुड़ी रिसर्च को मजबूत करना है। इसके अलावा, पीएम मोदी ने पालनपुर स्थित बनास डेयरी के अल्ट्रा हाई टेम्परेचर (UHT) प्लांट में ऑटोमेटेड स्टोरेज सिस्टम का भी उद्घाटन किया।

    और भी...

  • 30 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

    30 अक्टूबर की महत्त्वपूर्ण घटनाएं

     

    1611 - गुस्टाॅफ द्वितीय एडोल्फ 17 साल की उम्र में स्वीडन का राजा बना।
    1922 - बेनिटो मुसोलिनी ने इटली में सरकार बनाई।
    1930 - तुर्की तथा यूनान ने मित्रता संधि पर हस्ताक्षर किये।
    1945 - भारत संयुक्त राष्ट्र में शामिल हुआ।
    1956 - भारत का पहला पांच सितारा होटल ‘अशोक’ खुला।
    1960 - ब्रिटेन में पहली बार सफलतापूर्वक किडनी ट्रांसप्लांट की गई।
    1963 - अफ्रीकी देश मोरक्को तथा अल्जीरिया ने युद्ध विराम संधि पर हस्ताक्षर किए।
    1975 - स्पेन में किंग जुआन कारलोस ने सत्ता संभाली।
    1980 - मध्य अमेरिकी देशों होंडुरस तथा अल सल्वाडोर ने सीमा विवाद हल किया।
    1994 - बाल्कन देश मेसिडोनिया के संसदीय चुनाव में वामपंथी गठबंधन की जीत।
    2001 - लादेन के सम्पर्क में रहने के आरोपी 3 परमाणु वैज्ञानिकों को पाकिस्तान ने अमेरिका को सौंपा।
    2003 - ब्रिटेन के राजकुमार प्रिंस चार्ल्स का भारत दौरा प्रारम्भ। अमेरिकी विदेश मंत्री कोलिन पावेल ने पाकिस्तान को भारत के साथ शांति वार्ता करने को कहा। पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ़ ने लोकतंत्र की बहाली के लिए अपनी कटिबद्धता घोषित की।
    2004 - उक्रेन ने फ़्रांस को 3-1 से पराजित कर 39.5 अंक के साथ ओलंपियाड का स्वर्ण जीता।
    2008-
    असम (भारत)की राजधानी गुवाहाटी और 13 अन्य स्थानों पर श्रेणिबद्ध धमाके हुए। इसमें 66 से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी।
    स्टेट बैंक आफ बीकानेर एवं जयपुर ने फिक्स डिपोजिट की व्याज़ दरों में एक प्रतिशत की कमी की।
    गुवाहाटी सहित असम के कई हिस्सों में कम से कम 18 धमाके हुए जिनमें 81 से अधिक व्यक्तियों की मौत हो गई और 400 से अधिक लोग घायल हो गए थे।
    2013 - तेलंगाना के महबूबनगर में बस में आग लगने से 44 लोगों की मौत।
    1990 - राही सरनोबत - भारत की महिला पिस्टल निशानेबाज़।
    1958 - अभिजीत भट्टाचार्य - हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध गायक हैं।
    1951 - दीपक धर- भारतीय भौतिक विज्ञानी हैं।
    1949- प्रमोद महाजन, प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ
    1932- बरुन डे, प्रसिद्ध इतिहासकार
    1922 - भाई महावीर - भाजपा के प्रसिद्ध नेता तथा मध्य प्रदेश के भूतपूर्व राज्यपाल।
    1909- होमी जहाँगीर भाभा, प्रसिद्ध वैज्ञानिक।
    1887- सुकुमार राय, बंगाल के लोकप्रिय उपन्यासकार
    1853 - प्रमथनाथ मित्र - 'अनुशीलन समिति' के प्रारम्भिक संस्थापक सदस्यों में से एक थे।
     

    और भी...

  • Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर बादलों में छिप जाए चांद तो क्या करें? जानें व्रत खोलने का तरीका

    Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर बादलों में छिप जाए चांद तो क्या करें? जानें व्रत खोलने का तरीका

     

    Karwa Chauth Fast 2026: करवाचौथ पर सभी सुहागिन महिलाएं व्रत रखती हैं और चंद्रमा को अर्घ्य देकर ही अपना व्रत पूरा करती हैं। इस वर्ष करवा चौथ का पावन पर्व 29 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। इस विशेष दिन पर सभी सुहागिनें पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर रात में चंद्रमा के निकलने का इंतजार करती हैं। कई बार ऐसा देखा जाता है कि करवाचौथ के दिन आकाश में बादल छाए हुए होते हैं, जिसके कारण हमें चांद दिखाई नहीं देता। लेकिन ऐसी स्थिति में भी व्रत खोलना अनिवार्य होता है। अगर आपके शहर या क्षेत्र में भी मौसम खराब हो जाए और चांद नजर न आए, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। ऐसे में कुछ आसान उपायों के द्वारा व्रत संपन्न किया जा सकता है। आइए, इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि चांद न दिखने पर आप अपना व्रत कैसे खोल सकती हैं।

    चांद न दिखे तो कैसे खोलें करवा चौथ का व्रत?

    अगर मौसम खराब होने या बादलों की वजह से प्रत्यक्ष रूप से चंद्रमा के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं, तो दूसरा उपाय भगवान शिव की पूजा से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के मस्तक पर हमेशा चंद्रदेव विराजमान रहते हैं। इसलिए चांद न दिखने पर आप अपने घर के मंदिर में रखी भगवान शिव की तस्वीर या प्रतिमा के मस्तक पर विराजमान चंद्रदेव के दर्शन कर सकती हैं। भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित चंद्रदेव की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करें और उनका ध्यान करते हुए अर्घ्य देकर अपने व्रत को संपन्न करें। इस प्रकार पूजन करके भी व्रत को पूरा किया जा सकता है। यह उपाय उन सभी महिलाओं के लिए मददगार साबित होता है, जो चांद दिखाई न देने पर असमंजस में पड़ जाती हैं और व्रत खोलने को लेकर परेशान होती हैं।

    चावल से चंद्रमा की आकृति बनाकर पूजन की विधि

    अगर करवाचौथ की रात आसमान में बादल छा जाने के कारण चांद दिखाई न दे, तो इस सरल उपाय से पूजन पूरा किया जा सकता है।

    लाल कपड़ा बिछाएं: सबसे पहले एक चौकी या थाली पर लाल कपड़ा बिछाकर तैयारी करें।

    चावल की आकृति बनाएं: लाल कपड़े के ऊपर चावल की मदद से चंद्रमा की सुंदर आकृति बनाएं।

    मंत्र का जाप करें: ‘ॐ चतुर्थ चंद्राय नमः’ मंत्र का जाप करते हुए मन ही मन चंद्रदेव का ध्यान करें।

    अर्घ्य अर्पित करें: चावल से बनाई गई आकृति को चंद्रदेव का प्रतीक मानकर उन्हें श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें।

    व्रत पूरा करें: इस सरल विधि से पूजा करने पर व्रत बिना किसी रुकावट के पूरा किया जा सकता है और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा का फल प्राप्त होता है।

    मौसम की रुकावट होने पर ऐसे करें अपना व्रत पूरा

    करवाचौथ के पावन पर्व पर हर सुहागिन महिला का मुख्य उद्देश्य चंद्रदेव को अर्घ्य देकर अपना यह कठिन निर्जला उपवास पूरा करना होता है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि करवाचौथ के दिन अचानक मौसम खराब होने या आकाश में घने बादल छाए रहने के कारण चांद बिल्कुल दिखाई नहीं देता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि धार्मिक परंपराओं में इसके कुछ वैकल्पिक उपाय बताए गए हैं।

    मौसम की किसी भी प्रकार की रुकावट होने पर भी आप इन आसान विधियों को अपनाकर अपना व्रत पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पूरा कर सकती हैं। आप घर के अंदर ही लाल कपड़े पर चावल से चंद्रमा की सुंदर आकृति बनाकर या भगवान शिव के मस्तक पर सुशोभित चंद्रदेव के दर्शन करके अपनी पूजा संपन्न कर सकती हैं। इन विकल्पों के जरिए धार्मिक परंपराओं के अनुसार व्रत पूरा किया जा सकता है।

    Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र और धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।

    और भी...

  • Water Tank Winter Tips: सर्दियों में भी टंकी का पानी रहेगा गर्म, अपनाएं ये आसान तरीके

    Water Tank Winter Tips: सर्दियों में भी टंकी का पानी रहेगा गर्म, अपनाएं ये आसान तरीके

     

    Water Tank Winter Tips: सर्दियों में सुबह नल खोलते ही जब टंकी का बेहद ठंडा पानी सामने आता है, तो नहाने से लेकर रोजमर्रा के काम तक मुश्किल लगने लगते हैं। खासकर जिन घरों में पानी की टंकी छत पर खुले में रखी होती है, वहां रात की ठंडी हवा और ओस की वजह से पानी और ज्यादा ठंडा हो जाता है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि सर्दियों में टंकी का पानी बहुत ज्यादा ठंडा न हो, तो अभी से कुछ आसान इंतजाम किए जा सकते हैं।

    पानी की टंकी को इंसुलेट करें

    टंकी को ठंड से बचाने का एक आसान तरीका उसकी इंसुलेशन करना है। इसके लिए टंकी के ऊपर और आसपास इंसुलेशन वाली सामग्री लगाई जा सकती है। फाइबरग्लास, मिनरल वूल, सिरेमिक फाइबर या दूसरी कुशनिंग सामग्री का इस्तेमाल इसके लिए किया जाता है। इसका मकसद टंकी को बाहर की ठंडी हवा के सीधे संपर्क से बचाना और अंदर के तापमान को तेजी से गिरने से रोकना है। हालांकि, बहुत ज्यादा ठंड पड़ने वाली जगहों पर इंसुलेशन भी उसी हिसाब से मजबूत रखना पड़ता है। इसलिए अपने इलाके के मौसम के हिसाब से सामग्री का चुनाव करना बेहतर रहेगा।

    थर्माकोल की मोटी शीट लगाएं

    अगर टंकी छत पर खुले में रखी है, तो उसके चारों तरफ मोटी थर्माकोल शीट लगाना भी काम आ सकता है। थर्माकोल टंकी के आसपास एक इंसुलेटिंग लेयर बना देता है, जिससे बाहर की ठंडी हवा का असर कम हो सकता है। इसे टंकी के आसपास अच्छी तरह लगाकर सुरक्षित किया जा सकता है। यह तरीका खास तौर पर उन लोगों के लिए आसान है, जो बिना किसी बड़े खर्च के टंकी को ठंड से बचाने का इंतजाम करना चाहते हैं।

    बबल रैप भी आएगा काम

    घर में अगर बबल रैप रखा है, तो उसे फेंकने के बजाय सर्दियों में टंकी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बबल रैप में मौजूद हवा की परत इंसुलेशन का काम करती है। टंकी के चारों तरफ इसकी दो-तीन परतें लगाकर उसे अच्छी तरह सुरक्षित किया जा सकता है। इससे ठंडी हवा सीधे टंकी की सतह तक पहुंचने से कुछ हद तक रुक सकती है और पानी ज्यादा देर तक सामान्य तापमान के करीब रह सकता है।

    टंकी को ढककर रखें

    अगर आपकी पानी की टंकी खुले टेरेस पर रखी है, तो उसे ठंडी हवा और ओस से बचाना भी जरूरी है। इसके लिए टंकी के ऊपर तिरपाल, लकड़ी की शेड या छोटी टिन की छत बनाई जा सकती है। इससे ठंडी हवा सीधे टंकी से टकराने से बचती है। कुछ जगहों पर लोग टंकी के आसपास पुराने बोरे या मोटे कपड़े का भी इस्तेमाल करते हैं। यह एक आसान घरेलू तरीका है, जिससे टंकी पर पड़ने वाली ठंड का असर कम किया जा सकता है।

    टंकी को धूप वाली जगह रखें

    अगर छत पर टंकी रखने की जगह बदलना संभव है, तो उसे ऐसी जगह रखना बेहतर हो सकता है, जहां दिन में अच्छी धूप आती हो। दिनभर धूप मिलने से टंकी और उसके अंदर के पानी का तापमान कुछ बढ़ सकता है। इससे सुबह पानी बहुत ज्यादा ठंडा महसूस होने की परेशानी कम हो सकती है।

    टंकी पर गहरे रंग की पेंट करें

    टंकी पर गहरे रंग की पेंट करना भी एक तरीका बताया जाता है। काला, गहरा नीला या गहरा भूरा जैसे रंग धूप की गर्मी को ज्यादा सोखते हैं। दिन के समय धूप पड़ने पर टंकी धीरे-धीरे गर्म हो सकती है और इसका असर पानी के तापमान पर भी पड़ सकता है। इस तरीके में बिजली या गैस का खर्च नहीं होता। हालांकि, इसका असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि टंकी को कितनी धूप मिलती है।

    रात में टंकी को जरूर ढकें

    दिनभर धूप मिलने के बाद रात में टंकी को खुला छोड़ देने से जमा हुई गर्मी जल्दी निकल सकती है। इसलिए रात में टंकी को मोटे कपड़े, कंबल या किसी दूसरी उपयुक्त कवरिंग से ढककर रखना मददगार हो सकता है। इससे रात की ठंडी हवा और ओस का सीधा असर कम किया जा सकता है।

    अगर आपके इलाके में सर्दियों के दौरान तापमान बहुत ज्यादा गिरता है और पानी जमने की समस्या होती है, तो सिर्फ टंकी को ढकना पर्याप्त नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में बेहतर इंसुलेशन की जरूरत पड़ सकती है। कुछ मामलों में पानी गर्म रखने के लिए वॉटर हीटर जैसी व्यवस्था भी की जाती है, लेकिन यह ज्यादा खर्चीला विकल्प है।

    और भी...

  • सरकारी कर्मचारियों को DA देने में कितना खर्च करती है सरकार? जानें पैसा कहां से आता है

    सरकारी कर्मचारियों को DA देने में कितना खर्च करती है सरकार? जानें पैसा कहां से आता है

     

    Dearness Allowance: देश में बढ़ती महंगाई के दौर में दैनिक उपयोग की वस्तुओं के दामों में होने वाली वृद्धि के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत प्रदान करने के लिए महंगाई भत्ता यानी DA बेहद महत्वपूर्ण साधन है। वस्तुओं और सेवाओं की दरों में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की क्रय शक्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर दरों में संशोधन करती है। इस वित्तीय राहत का ऐलान होते ही केंद्रीय खजाने पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता है। ऐसे में यह जानना अत्यंत प्रासंगिक है कि सरकार इस बड़े वित्तीय खर्च का प्रबंधन कहां से करती है।

    हालिया बढ़ोतरी और सरकारी खजाने पर दबाव

    जनवरी 2026 से लागू दरों के तहत जब केंद्र सरकार ने महंगाई भत्ते और महंगाई राहत की दरों में 2 प्रतिशत की वृद्धि की, तो भत्ते का स्तर 58% से बढ़कर 60% तक पहुंच गया। इस 2% की बढ़ोतरी के कारण केंद्र सरकार के वार्षिक खजाने पर लगभग 6,791.24 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। भत्तों की यह राशि सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में स्थानांतरित की जाती है।

    DA का लाभ पाने वाले लाभार्थी कितने?

    DA में की गई इस वृद्धि का सीधा फायदा देश भर के लाखों परिवारों को मिलता है। आंकड़ों के अनुसार, इस निर्णय से लगभग 50.46 लाख से अधिक सेवारत केंद्रीय कर्मचारियों को सीधा लाभ मिला। इसके साथ ही, देश भर के करीब 68.27 लाख पेंशनभोगियों को भी बढ़ी हुई महंगाई राहत का फायदा दिया गया, जिससे उनके मासिक बजट को मजबूती मिली।

    सरकार कहां से चुकाती है इतना पैसा?

    सरकार अपने कर्मचारियों को महंगाई भत्ते का भुगतान भारत की संचित निधि (कंसोलिडेटेड फंड ऑफ इंडिया) से करती है। इस खजाने को भरने का मुख्य जरिया देश के नागरिकों और व्यावसायिक संस्थानों द्वारा चुकाए जाने वाले प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर हैं। इसमें इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स और GST जैसे राजस्व संग्रह के मुख्य साधन शामिल हैं, जिनके माध्यम से भत्ते का वित्तपोषण होता है।

    बजट आवंटन और भत्ते की व्यवस्था

    वार्षिक बजट सत्र के दौरान ही केंद्र और राज्य सरकारें अपने राजस्व बजट में कर्मचारियों के वेतन तथा विभिन्न भत्तों के लिए अग्रिम धनराशि निर्धारित करती हैं। केंद्र सरकार अपने अधीनस्थ कर्मियों का व्यय खुद वहन करती है, जबकि राज्य सरकारें अपने राजस्व कोष से अपने कर्मचारियों के DA का भुगतान करती हैं। इस प्रकार भत्ते का भुगतान एक सुनियोजित वित्तीय प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

    महंगाई भत्ते की गणना कैसे होती है?

    महंगाई भत्ते में बदलाव का निर्णय मनमाने ढंग से नहीं होता, बल्कि इसके लिए एक निर्धारित सांख्यिकीय पैमाना मौजूद है। सरकार देश में खुदरा महंगाई की स्थिति को दर्शाने वाले अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (AICPI) के आंकड़ों को आधार मानती है। इसी सूचकांक में होने वाले उतार-चढ़ाव के गणितीय फॉर्मूले के आधार पर ही भत्ते की नई दरों का निर्धारण किया जाता है।

    महंगाई भत्ता कर्मचारियों के मूल वेतन पर आकलित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30,000 रुपये है और वर्तमान DA दर 60 प्रतिशत है, तो उसे हर महीने 18,000 रुपये भत्ते के रूप में दिए जाएंगे। इस स्थिति में कुल मिलाकर बेसिक सैलरी और भत्ते को जोड़कर कुल देय राशि 48,000 रुपये बनेगी, जिसमें अन्य भत्ते अलग रहते हैं।

    कितनी बार बढ़ता है DA?

    केंद्र सरकार आमतौर पर एक वर्ष के भीतर दो बार महंगाई भत्ते की समीक्षा और संशोधन करती है। ये संशोधन मुख्य रूप से 1 जनवरी और 1 जुलाई की तिथियों से प्रभावी माने जाते हैं। हालांकि, जनवरी से लागू होने वाले भत्ते का औपचारिक ऐलान मार्च या अप्रैल के महीनों में किया जा सकता है, जिसके बाद कर्मचारियों को पिछले महीनों का एरियर प्रदान किया जाता है।
     

    और भी...

  •  जियो की धमाकेदार एंट्री, रिलायंस बना देश का नंबर-1 कारोबारी समूह, टाटा से ₹3.23 लाख करोड़ आगे

    जियो की धमाकेदार एंट्री, रिलायंस बना देश का नंबर-1 कारोबारी समूह, टाटा से ₹3.23 लाख करोड़ आगे

     

    Jio Platforms Market Cap: शेयर बाजार में जियो प्लेटफॉर्म्स की धमाकेदार एंट्री ने देश के सबसे मूल्यवान कारोबारी समूहों की रैंकिंग बदल दी है। बुधवार को जियो का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट होते ही रिलायंस समूह ने टाटा समूह को पीछे छोड़कर पहला स्थान हासिल कर लिया। जियो की लिस्टिंग के बाद रिलायंस समूह की सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप ₹28.9 लाख करोड़ पहुंच गया। टाटा समूह ₹25.6 लाख करोड़ के साथ दूसरे और अदाणी समूह ₹16.6 लाख करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर रहा।

    जियो की इस एंट्री ने रिलायंस समूह की मार्केट वैल्यू में बड़ा इजाफा किया। ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले जियो का शेयर ₹1,358 पर लिस्ट हुआ, यानी 21.4 फीसदी प्रीमियम पर। इस भाव पर जियो का मार्केट कैप ₹12.5 लाख करोड़ पहुंच गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स की संयुक्त मार्केट वैल्यू ही ₹28.7 लाख करोड़ हो गई। *जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरहोल्डर्स की संख्या भी देश में सबसे ज्यादा है। कंपनी के कुल 79.8 लाख शेयरहोल्डर्स हैं।*

    मुंबई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में जियो की लिस्टिंग के अवसर पर पारंपरिक बेल-रिंगिंग सेरेमनी आयोजित की गई। समारोह में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, नीता अंबानी, आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी शामिल हुए। लिस्टिंग से पहले आकाश, ईशा और अनंत अंबानी ने कार्यक्रम को संबोधित किया। जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कहा, “आज की लिस्टिंग मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। हम खुलकर संवाद करेंगे, अपने वादे निभाएंगे और अपने काम से आपका भरोसा जीतेंगे।”

    इस लिस्टिंग की एक और खास बात यह रही कि मार्केट कैप के लिहाज से रिलायंस इंडस्ट्रीज और जियो प्लेटफॉर्म्स देश की क्रमशः पहली और दूसरी सबसे मूल्यवान लिस्टेड कंपनियां बन गईं। अकेले इन दो कंपनियों की संयुक्त मार्केट वैल्यू ही टाटा समूह की सभी सूचीबद्ध कंपनियों के कुल मार्केट कैप से ₹3.1 लाख करोड़ अधिक रही। इस तरह जियो की एंट्री ने देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों के साथ-साथ बड़े कारोबारी समूहों की रैंकिंग भी बदल दी।

    यह तुलना कारोबारी समूहों की सूचीबद्ध कंपनियों के संयुक्त बाजार पूंजीकरण के आधार पर की गई है। रिलायंस समूह की गणना में Jio Financial Services को शामिल नहीं किया गया है।

    और भी...

  • Kedarnath-Badrinath Snowfall: बर्फबारी के बाद अलर्ट, यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी

    Kedarnath-Badrinath Snowfall: बर्फबारी के बाद अलर्ट, यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी

     

    Uttarakhand Weather Change: उत्तराखंड में पश्चिमी विक्षोभ के कारण आज सुबह से बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो रही है। मौसम विभाग ने 2 नवंबर तक कई पहाड़ी जिलों में बारिश और बर्फबारी का अनुमान जताया था। राजधानी देहरादून में आज सुबह से झमाझम बारिश हो रही है। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण ठिठुरन बढ़ गई है। केदारनाथ और बदरीनाथ में बर्फबारी जारी है।

    केदारनाथ धाम में आज सुबह से बर्फबारी हो रही है। मौसम में आए बदलाव के कारण केदारपुरी में ठंड बढ़ गई है। चारों ओर बर्फ गिरने से कुछ देर यात्री आनंद ले रहे हैं किंतु धीरे-धीरे ठंड के चलते वह भी कमरों में चले जा रहे हैं। फिलहाल केदारनाथ धाम सहित ऊंची पहाड़ियों पर लगातार बर्फबारी हो रही है। चमोली जनपद स्थित बदरीनाथ धाम में भी बर्फबारी हो रही है। बदरीनाथ में नर -नारायण, नीलकंठ पर्वत पर गुरुवार सुबह से ही भारी हिमपात शुरू हो गया है।

    श्रद्धालुओं के लिए एडवाइजरी

    केदारनाथ धाम में बर्फबारी के चलते तापमान में गिरावट को देखते हुए पुलिस ने श्रद्धालुओं से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। पुलिस ने श्रद्धालुओं को गर्म कपड़े, जैकेट, टोपी, दस्ताने और गर्म मोजे पहनने, गर्म पेय पदार्थों का सेवन करने और खुले व ठंडे स्थानों पर अनावश्यक रूप से ज्यादा देर न रुकने की सलाह दी है। साथ ही, अपनी सेहत का ध्यान रखने, अस्वस्थ महसूस होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखने को कहा है। पुलिस ने श्रद्धालुओं से मौसम को देखते हुए प्रशासन और पुलिस की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की भी अपील की है।

    देहरादून में झमाझम बारिश

    राजधानी देहरादून में आज सुबह से ही मौसम बदल गया। आसमान में काले बादल छाए हुए हैं और कई इलाकों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने आज 10 जिलों में बारिश के साथ आंधी और तेज हवाओं का अनुमान जताया है। आज और कल देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, चमोली, चंपावत और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा हो सकती है। श्रीनगर और कोटद्वार में भी बारिश हुई है।

    13 दिन और चलेगी बाबा केदार की यात्रा

    रुद्रप्रयाग। केदारनाथ धाम की यात्रा अब महज 13 दिन और चलेगी। ऐसे में इन दिनों बड़ी संख्या में यात्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं, हालांकि धाम में अब काफी ठंड होने लगी हैं, जिससे यात्रियों को मुश्किलों का सामना भी करना पड़ रहा है।

    केदारनाथ में अब तक कुल 1844656 यात्रियों ने दर्शक किए हैं। आगामी 11 नवम्बर भैया दूज को केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। ऐसे में बाबा केदार की चल विग्रह डोली विभिन्न स्थानों से होते ओंकारेश्वर मंदिर में विराजमान होगी जहां छह महीने शीतकाल में बाबा केदार की पूजा अर्चना होगी। इसी को देखते हुए इन दिनों बड़ी संख्या में यात्री केदारनाथ धाम पहुंच रहे हैं।

     

    और भी...

  • प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखना कितना सुरक्षित? जानें कौन-सी गलतियों से बचें

    प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखना कितना सुरक्षित? जानें कौन-सी गलतियों से बचें

     

    Pregnancy Karwa Chauth: करवा चौथ इस बार 29 अक्टूबर को सेलिब्रेट किया जाएगा। महिलाएं इस दिन बिना पानी के उपवास करती हैं और शाम को चंद्रमा का पूजन करके व्रत पारण किया जाता है। निर्जला उपवास काफी कठिन माना जाता है। अगर कोई मेडिकल कंडीशन हो, तो और भी ध्यान रखने की जरूरत होती है। प्रेग्नेंसी फेज में हैं और करवा चौथ का व्रत करने की सोच रही हैं, तो एक्सपर्ट से जान लें कि यह सुरक्षित है या फिर नहीं। अगर व्रत करना आवश्यक है, तो आपको किन बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।

    एक्सपर्ट ने बताया है कि गर्भावस्था के दौरान व्रत करना हो, तो सरगी में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। किन-किन कंडीशन में व्रत रखने से बचना चाहिए और व्रत के दौरान आप अपना रूटीन किस तरह रखें। इसके अलावा, पारण के वक्त भी खानपान से जुड़ी कुछ बातों को ध्यान में रखना आवश्यक होता है। चलिए, जान लेते हैं विस्तार में।

    प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत

    कैलाश दीपक हॉस्पिटल की कंसल्टेंट ऑब्स एंड गायनेकोलॉजिस्ट, डॉ. प्रज्ञा कंसल ने कहा, “करवा चौथ का व्रत एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है, लेकिन क्या यह व्रत किसी हेल्थ कंडीशन के दौरान भी सुरक्षित है? दरअसल, यह सब आपके स्वास्थ्य, हाइड्रेशन, दवाओं और आप कितने समय तक उपवास कर सकते हैं, इस पर निर्भर करता है।”

    बीमार होने पर या प्रेग्नेंसी में बिना पानी के व्रत करना सुरक्षित विकल्प नहीं है। लेकिन फिर भी, अगर आप करवा चौथ पर उपवास करना चाहती हैं, तो आप पौष्टिक सरगी खा सकती हैं। इसका मतलब है कि सुबह 4:00 बजे से पहले आप दही, फल और मेवे जैसी चीजें ले सकती हैं, जिन्हें थाली का हिस्सा बनाना चाहिए। इसके अलावा, आप उपवास से पहले अच्छी तरह शरीर को हाइड्रेटेड करें। इसके लिए आप एक बार में बहुत सारा पानी न पिएं, बल्कि व्रत से पहले नियमित रूप से पानी के साथ ही हेल्दी ड्रिंक्स पीती रहें।

    इन बातों का रखें ध्यान

    प्रेग्नेंसी में व्रत कर रही हैं, तो इस बात का भी ध्यान रखें कि किसी भी तरह की भारी गतिविधि करने से बचें। ज्यादा काम करने से आपको कमजोरी और थकान हो सकती है। बाहर धूप में जाने से बचें। कोशिश करें कि आप आराम करें और लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचें। सरगी में बहुत तली-भुनी और भारी चीजें न खाएं। कोशिश करें कि निर्जला व्रत करने से बचें, क्योंकि गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक बिना पानी पिए रहने से बहुत ज्यादा कमजोरी हो सकती है।

    पारण के समय भी रखें ध्यान

    अगर आपने करवा चौथ का व्रत रखा है, तो उपवास का पारण करने के दौरान भी ध्यान रखें। सबसे पहले पानी से शुरुआत करें, फिर हल्का भोजन और उसके बाद संतुलित भोजन करें। इस बात का भी ध्यान रखें कि एक बार में बहुत सारा खाना या ढेर सारा पानी पीने से बचें। अगर आपको मधुमेह, उच्च रक्तचाप या किसी अन्य प्रकार की मेडिकल कंडीशन है, तो बेहतर है कि आप उपवास से बचें। अगर आप उपवास करना चाहती हैं, तो पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

    ये है सबसे जरूरी बात

    प्रेग्नेंसी में करवा चौथ का व्रत रखने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। गायनेकोलॉजिस्ट आपकी मेडिकल कंडीशन के हिसाब से बताएंगी कि यह आपके और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए सुरक्षित है या नहीं। अगर आप गर्भावस्था में व्रत कर रही हैं और इस दौरान असहजता या कमजोरी महसूस होती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। अपने डॉक्टर से संपर्क करें। परेशानी होने पर पानी, दूध जैसी चीजें ले लें और निर्जला व्रत जारी रखने के लिए खुद पर दबाव न डालें।
     

    और भी...

  • प्रदर्शन किया तो सरकारी नौकरी पर संकट? UP में चरित्र सत्यापन के नियम चर्चा में

    प्रदर्शन किया तो सरकारी नौकरी पर संकट? UP में चरित्र सत्यापन के नियम चर्चा में

     

    UP Government Jobs: यूपी मे आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त की गई है, जिसमें बताया गया है कि राजनीतिक विचारधारा के आधार पर ही किसी को अयोग्य नहीं माना जाएगा, लेकिन किसी भी तरह के हिंसक प्रदर्शन में हिस्सा लेने पर सरकारी नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है। इस तरह से अब उत्तर प्रदेश में जो प्रदर्शन या फिर किसी हिंसक आंदोलन में शामिल होंगे, उन्हें सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी। यूपी सरकार के इस आदेश में कहा गया है कि यूपी में किसी भी प्रदर्शन में शामिल होकर उसमें किसी भी तरह की हिंसा हुई तो ऐसे अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी।

    ऑर्डर में लिखा प्वाइंट

    • यूपी मे आंदोलन में शामिल होने  के लिये हिंसा की तो सरकारी नौकरी से होंगे दूर।
    • सरकारी नौकरी के लिए आवेदकों के चरित्र सत्यापन को लेकर नीति और सख्त कर दी है।
    • नए नियम के तहत यूपी के सरकारी विभागों, निगमों, परिषद और स्थानीय निकायों मे सीधी भर्ती के तहत चयन में चरित्र सत्यापन पर सख़्ती की गई है।
    • राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी को नहीं माना जायेगा अयोग्य।
    • नियुक्ति विभाग के प्रमुख सचिव एम देवराज की ओर से जारी किया निर्देश।
    • केवल एफआईआर दर्ज होने या जांच लंबित रहने से अभ्यर्थी स्वतः अयोग्य नहीं माना जायेगा।
    • पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों का नहीं होगा सत्यापन।
      पिछले विभाग से ली जा सकती है जानकारी, पुलिस को 30 दिन के भीतर देनी होगी सत्यापन रिपोर्ट।

    ऑर्डर में क्या कहा गया है?

    उपरोक्त प्रस्तरों में किसी बात के होते हुये भी किसी व्यक्ति को मात्र उसकी राजनीतिक विचारधारा के कारण नियुक्ति हेतु अनुपयुक्त नहीं माना जायेगा किन्तु ऐसे व्यक्ति जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिसका संकल्पित उद्देश्य हिंसात्मक रीति से समाज की विद्यमान व्यवस्था को बदलना है, सरकार के अधीन नियुक्ति के लिये अपात्र समझे जायेंगे। इक्कीस वर्ष की आय प्राप्त कर लेने के बाद और जांच के दिनांक से तीन वर्ष के भीतर किसी भी ऐसी गतिविधि में भाग लेने को इस बात का प्रमाण माना जायेगा कि वह व्यक्ति अभी भी ऐसी गतिविधियों में सक्रिय रूप से संलग्न है, जब तक कि समय के इस अन्तराल में उसकी प्रवृत्ति में परिवर्तन के सकारात्मक (ठोस) प्रमाण उपलब्ध न हो।
     

    और भी...