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  • Firing in America university: अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी में गोलीबारी, एक की मौत और सात घायल

    Firing in America university: अमेरिका की इस यूनिवर्सिटी में गोलीबारी, एक की मौत और सात घायल

     

    Firing in America university: अमेरिका के ग्रैम्बलिंग स्टेट यूनिवर्सिटी में शनिवार रात को हुई गोलीबारी की घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सात अन्य घायल हुए हैं। लूसियाना के इस संस्थान में चार दिन के भीतर गोलीबारी की यह दूसरी घटना है। गोलीबारी में मारा गया व्यक्ति यहां का छात्र नहीं था।

    विश्वविद्यालय की ओर से सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के अनुसार,ये घटना, विश्वविद्यालय के परिसर में शनिवार देर रात करीब एक बजे हुई। एक घायल की पहचान यहां के छात्र के तौर पर हुई है जबकि अन्य घायलों की पहचान अभी उजागर नहीं की गई है।

    घटना के मद्देनजर रविवार को होने वाले 'होमकमिंग' कार्यक्रम के साथ-साथ सोमवार-मंगलवार की कक्षाएं निलंबित कर दी गई हैं। विश्वविद्यालय में अगले आदेश तक रात साढ़े नौ बजे से सुबह साढ़े छह बजे तक कर्फ्यू रहेगा। गौरतलब है कि गत बुधवार को भी परिसर में गोलीबारी की घटना हुई थी जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे।

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  • कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान में तेजी देख विश्व बैंक के प्रेसिडेंट ने की भारत की तारिफ

    कोरोना के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान में तेजी देख विश्व बैंक के प्रेसिडेंट ने की भारत की तारिफ

     

    पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। ऐसे में भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ वैक्सीनेशन अभियान में आई तेजी को देख सभी देश दंग रह गए हैं। इस पर विश्व बैंक ने भी भारत के काम की खुलकर तारीफ की है। अब तक भारत में वैक्सीनेशन का आंकड़ा लगभग 100 करोड़ तक पहुंच गया है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman ) के साथ हुई मुलाकात में विश्व बैंक प्रेसिडेंट डेविड मालपास भारत में वैक्सीनेशन की तेजी को लेकर खुश नजर आ रहे थे। 

    केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ बैठक के दौरान डेविड मलपास ने कहा भारत ने कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान में बहुत अच्छा काम किया है। इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि वैक्सीन उत्पादन में भी भारत का योगदान सराहनीय है। इसके अलावा बैठक में 'जलवायु परिवर्तन'  को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। भारत को प्रभावी योजनाओं के जरिए समय रहते अपने लक्ष्यों को हासिल करना होगा।

    बता दें कि भारत में कुल 97.23 करोड़ लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। अब वैक्सीनेश की रफ्तार देश में दिन पर दिन तेज गति से चलते हुए  बढ़ रही है। बीते 24 घंटे में देश भर में कोरोना के सिर्फ 15,981 मामले सामने आए हैं। जबकि मौत का आंकड़ा 200 से कम रहा।

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  • PAK की साजिश के चलते 2020 में ही मारा गया था अखुंदजादा, ताबिलान ने की पुष्टि

    PAK की साजिश के चलते 2020 में ही मारा गया था अखुंदजादा, ताबिलान ने की पुष्टि

     

    अफगानिस्तान में कब्जे के बाद पिछले काफी समय से तालिबान में सुप्रीम लीडर को लेकर चल रही अटकलों पर अब विराम लग गया है। तालिबान ने सुप्रीम लीडर हैबतुल्लाह अखुंदजादा की मौत की पुष्टि कर दी है। इस पर तालिबान के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि ‘2016 से तालिबान का मुखिया रहा हैबतुल्लाह अखुंदजादा की 2020 में पाकिस्तान में एक आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी।

    दरअसल, जब अगस्त महीने में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जे जमाया था, तब ही से अखुंदजादा को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन तालिबान की ओर से एक ही जवाब आ रहा था कि अखुंदजादा जिंदा है और जल्द ही सबके सामने आएगा। वास्तविकता तो ये है कि अखुंदजादा आज तक कभी भी लोगों के सामने नहीं  आया और न ही उसे किसने देखा है। वह पर्दे के पीछे रहकर ही सब कुछ ऑपरेट करता रहा। न्यूयॉर्क पोस्ट के अनुसार इंटरनेट पर अखुंदजादा की जो तस्वीर है, वह भी सालों पुरानी है।

    2016 में अखुंदजादा को तालिबान का चीफ बनाया गया था
    बता दें कि अमेरिका ने 2016 में एक ड्रोन हमले में तालिबान के प्रमुख अख्तर मंसूर को मार दिया था। इसके बाद ही अखुंदजादा को मंसूर का उत्तराधिकारी बनाने का ऐलान किया गया था। उस वक्त अखुंदजादा कंधार के कट्टर धार्मिक नेताओं में से एक था। कहा जाता है कि इस्लामी सजा की शुरुआत अखुंदजादा ने इस्लामी ही की थी, जिसके तहत हत्या और चोरी करने वालों को मौत की सजा देता था।  

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  • बॉयफ्रेंड से नाराज गर्लफ्रेंड ने उसके पिता से की शादी, जानिए हैरान कर देने वाली कहानी

    बॉयफ्रेंड से नाराज गर्लफ्रेंड ने उसके पिता से की शादी, जानिए हैरान कर देने वाली कहानी

     

    'प्यार और जंग में सब जायज है' ये डायलॉग तो आपने कई बार सुना होगा। लेकिन इस डायलॉग को सही साबित करता, एक जिता जागता उदाहरण ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर जगह से सामने आया। जहां अपने (Boyfriend-GirlFriend) बॉयफ्रेंड से गुस्साई गर्लफ्रेंड ने बदला लेने के लिए उसके पिता से ही शादी कर ली। इसका खुलासा उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर किया है। जिस पर उसने बताया कि उसके बॉयफ्रेंड की मां नहीं थी। उसके पिता बहुत ही परेशान रहते थे। यह देखकर गर्लफ्रेंड ने बॉयफ्रेंड के पिता से शादी करने का फैसला किया, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई और भी चौंकाने वाली है। 

    मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मूलरूप से ब्रिटेन के ग्लूस्टरशायर निवासी एक महिला ने सोशल मीडिया पर अपनी कहानी साझा की है। इसमें उसने बताया कि उसका एक बॉयफ्रेंड था। जिसके साथ उसका अच्छा संबंध था। इतना ही दोनों का एक दूसरे के घर पर भी आना जाना था। युवती भी अक्सर अपने बॉयफ्रेंड के घर जाती थी। यहां पर उसके पिता भी उसे मिलते थे। बॉयफ्रेंड के पिता अपनी पत्नी की मौत के बाद से परेशान रहते थे। बॉयफ्रेंड के पिता की यह उदासी देखकर हमेशा युवती उनका हाल चाल जानती थी। वह उन्हें खुश करने के लिए अपनी तरफ से प्रयास भी करती थी। ब्रिटेन की युवती ने खुलासा किया कि न जाने क्यों उसके मन में बॉयफ्रेंड के पिता के लिए अलग सा प्यार और आकर्षण आने लगा। इसबीच ही बॉयफ्रेंड ने ऐसी हरकत कर दी। जिस पर उसने बॉयफ्रेंड के पिता से न सिर्फ शादी करने का फैसला किया। उनके साथ शादी कर घर भी बसा लिया।

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  • अफगानिस्तान की राजधानी काबुल अंधेरे में डूबा, बिजली हुई गुल

    अफगानिस्तान की राजधानी काबुल अंधेरे में डूबा, बिजली हुई गुल

     

    अफगानिस्तान (Afghanistan) की राजधानी काबुल (kabul) के साथ ही कई अन्य प्रांतों में बिजली (Electricity) हुई गुल है। अफगानिस्तान की सरकारी बिजली कंपनी 'दा अफगानिस्तान ब्रेशना शेरकत (DABS)' ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। यह ब्लैकआउट  ऐसे समय में हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले यह रिपोर्ट सामने आई थी कि मध्य एशियाई देशों को करीब 6.2 करोड़ डॉलर के बिजली बिलों का भुगतान करने के लिए DABS सरकारी अधिकारियों की संपत्ति को बेचने की तैयारी में है। बता दें कि तालिबान के कब्जे के बाद से ही अफगानिस्तान में खाने-पीने तक का संकट पैदा हो गया है। 

    अफगानी बिजली कंपनी के हवाले से समाचार एजेंसी स्पुतनिक ने जानकारी दी कि उत्तरी अफगानिस्तान के बगलान प्रांत में तकनीकी समस्या आने की वजह से बिजली आपूर्ति बाधित हुई है। हालांकि, बिजली कंपनी ने यह भी कहा है कि उनका तकनीकी स्टाफ इस समस्या को जल्द-से-जल्द दूर करने के लिए काम कर रहा है। 

    बता दें कि बिजली आपूर्ति के लिए अफगानिस्तान मध्य एशिया के देशों पर निर्भर है। अफगानिस्तान को 80 फीसदी बिजली उजबेकिस्तान और ताजिकिस्तान से मिलती है। हालांकि, इस साल अगस्त में तालिबान के कब्जे के बाद से तालिबान इन देशों का कर्ज चुकाने में नाकामयाब रहा है। 

    DABS के पूर्व प्रमुख दाऊद नूरजई ने इसी महीने बताया था कि अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में सर्दियां आने तक भारी बिजली कटौती हो सकती है। उन्होंने कहा था कि तालिबान द्वारा बिजली आपूर्ति करने वाले देशों को बकाया बिल का भुगतान न करने की वजह से ऐसा हो सकता है। हालांकि, इस बीच DABS के कार्यकारी प्रमुख सफीउल्ला अहमदजई ने कहा है कि वे जल्द ही योजनागत तरीके से सभी बकाया चुका देंगे ताकि बिजली कटौती से बचा जा सके। 

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  • America border reopen: 19 महीने बाद खुलेंगे अमेरिका के बॉर्डर, सिर्फ इन लोगों को मिली एंट्री

    America border reopen: 19 महीने बाद खुलेंगे अमेरिका के बॉर्डर, सिर्फ इन लोगों को मिली एंट्री

     

    कोरोना महामारी के चलते लम्बे समय अमेरिका (US) सीमाओं को बंद किया गया था। लेकिन कोरोना के केसों में गिरावट के बाद अमेरिका ने फिर से सीमाओं को खोलने का फैसला लिया है। अमेरिका की सीमाएं पर कोरोना की वजह  से 19 महीने तक रोक लगी हुई थी। जिन्हें अगले महीने खोलने के फैसला किया गया है। हालांकि, यूएस (US) में एंट्री सिर्फ उन्हीं यात्रियों को दी जाएगी, जो कोविड 19 वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके हैं। 

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और कनाडा और मैक्सिको के बीच वाहन, ट्रेन और नौका यात्रा को महामारी के शुरुआती दिनों से ही व्यापार जैसे आवश्यक यात्रा तक सीमित कर दिया गया था। बुधवार को घोषित किए जाने वाले नए नियमों में उन लोगों को ही यात्रा की इजाजत मिलेगी, जो वैक्सीनेशन करा चुके हैं। विदेशी नागरिकों को नवंबर की शुरुआत में अमेरिका में एंट्री दी जाएगी।

    वहीं, देश में हवाई यात्रा के लिए प्रतिबंधों में इसी तरह की ढील दी जाएगी। जनवरी के मध्य तक, ट्रक ड्राइवरों की तरह, यू.एस. में आने वाले उन सभी यात्रियों को एंट्री मिलेगी जो वैक्शीनेशन करा चुके हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, जब यात्री बॉर्डर में एंट्री करेंगे तो उनसे मानक अमेरिकी सीमा शुल्क के साथ वैक्सीनेशन के बारे में जानकारी ली जाएगी। यात्रियों को वैक्सीनेशन का सबूत भी देना होगा। इसके बाद उन्हें स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। उसके बाद ही अमेरिका में एंट्री मिलेगी। 

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  • पाकिस्तान के मंत्री ने पाकिस्तान को महंगाई से निपटने के लिए दी 'अचूक सलाह', भड़के लोग

    पाकिस्तान के मंत्री ने पाकिस्तान को महंगाई से निपटने के लिए दी 'अचूक सलाह', भड़के लोग

     

    कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर के तमाम देशों में इस समय मंहगाई चरमा गई है। वहीं, इससे सबसे निजात पाने के लिए सभी सरकारें कई उपायों पर सोच-विचार कर रही है। लेकिन पाकिस्तान की राग दुनिया भर से अलग है और इसमें वहां के नेताओं का जबरदस्त योगदान है। हाल ही में इमरान सरकार में एक मंत्री ने ऐसा बयान दिया कि लोग उनपर भड़क गए। उन्होंने लोगों को महंगाई से निपटने की अजीबोगरीब सलाह दे डाली, इसके बाद वे लोगों के निशाने पर आ गए।

    दरअसल, पाकिस्तान तहरीके इंसाफ के नेता और इमरान खान सरकार में 'पीओके और गिलगित-बाल्टिस्तान मामलों' के मंत्री अली अमीन गंडापुर ने महंगाई नियंत्रित करने के लिए लोगों को सलाह दी है। उन्होंने पाकिस्तान के लोगों को 'कम रोटी खाने और चाय में कम चीनी डालने' की सलाह दे डाली है। इतना ही नहीं इस दौरान अली अमीन गंडापुर ने लोगों को महंगाई से बचने के लिए कई अन्य सलाह भी दी है।

    जियो टीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पीओके में एक सभा को संबोधित करते हुए अली अमीन ने कहा कि अगर मैं चाय में चीनी के सौ दाने डालता हूं और नौ दाने कम डाल दूं, तो क्या वह कम मीठी हो जाएगी। क्या हम अपने देश के लिए, अपनी आत्मनिर्भरता के लिए इतनी सी कुर्बानी भी नहीं दे सकते। अगर मैं रोटी के सौ निवाले खाता हूं तो उसमे नौ निवाले कम नहीं कर सकता हूं। इसलिए इसका उपयोग कम किया जाना चाहिए।

    अली अमीन गंडापुर के इस बयान के बाद यह सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जैसे ही उनका बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ लोग भड़क गए। पाकिस्तान के ही लोगों को उनका यह बयान पसंद नहीं आया। लोगों ने उलटे उन्हीं को ही सलाह दे डाली कि जनता के लिए अगर कुछ बोला जाए तो सोच समझकर बोला जाए तो ज्यादा ठीक रहेगा

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  • Jammu Kashmir Encounter: आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में 5 जवान शहीद, ऑपरेशन जारी

    Jammu Kashmir Encounter: आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में 5 जवान शहीद, ऑपरेशन जारी

     

    Jammu Kashmir Encounter: भारतीय सेना लगातार जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन चला रही है। ताकि आतंकियों का खत्म किया जा सके। इसी बीच (Jammu Kashmir Encounter) जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में सोमवार को आतंकियों से मुठभेड़ के दौरान 5 जवान शहीद हो गए। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, राजौरी जिले के पीर-पंजाल इलाके में आतंकियों के खिलाफ चल रही कार्रवाई में 4 जवान और एक जेसीओ (Junior Commissioned Officer) शहीद हो गए।

    बताया जा रहा है कि कुछ आतंकियों के छिपे होने की खबर के बाद भारतीय सेना ने कार्रवाई शुरू की थी, जिसके बाद आतंकियों ने गोलीबारी शुरू कर दी और फिर मुठभेड़ शुरू हुई। सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच एनकाउंटर अभी भी जारी है।

    अधिकारियों ने बताया कि भारी हथियारों के साथ आतंकवादियों के नियंत्रण रेखा पार कर जंगल में छुपे होने की खबर मिली थी। मौके पर अतिरिक्त बल को भेजा गया है, ताकि आतंकवादियों के निकलने के सभी रास्ते बंद किए जा सकें। रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि आतंकवादियों की मौजूदगी की जानकारी मिलने के बाद तड़के एक अभियान शुरू किया गया था।

    जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग (Anantnag) में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच देर रात शुरू हुई मुठभेड़ सेना के जवानों ने 1 आतंकी को मार गिराया। कश्मीर जोन की पुलिस ने बताया कि मुठभेड़ (Encounter in Anantnag) में पुलिस का एक जवान भी घायल है, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। एक शीर्ष पुलिस अधिकारी ने बताया कि एक विशेष सूचना पर पुलिस अनंतनाग के खगुंड वेरीनाग इलाके में एक ओजीडब्ल्यू (Over Ground Worker) को लेने गई थी। जैसे ही पुलिस दल संदिग्ध स्थान की ओर पहुंचा, छिपे हुए उग्रवादी ने पुलिस दल पर गोली चला दी, जिससे मुठभेड़ शुरू हो गई। पुलिस अधिकारी ने आगे बताया कि फायरिंग के दौरान एक अज्ञात आतंकवादी मारा गया, जबकि एक सिपाही को भी गोली लगी है। उसे इलाज के लिए पास के अस्पताल में ले जाया गया। इस दौरान मारे गए उग्रवादी के पास से एक पिस्टल और एक ग्रेनेड बरामद किया गया है।

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  • अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी दक्षिण चीन सागर में समंदर के अंदर टकराई, चीन ने जताई चिंता

    अमेरिकी परमाणु पनडुब्बी दक्षिण चीन सागर में समंदर के अंदर टकराई, चीन ने जताई चिंता

     

    नई दिल्ली: अमेरिका की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बी दक्षिणी चीन सागर में पानी के नीचे किसी ‘अज्ञात चीज’ से टकराने को लेकर हाल ही में एक बड़ी खबर आई है. इस हादसे में 15 अमेरिकी नौसैनिकों के घायल होने की खबर सामने आ रही है. अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को यूएसएस कनेक्टिकट नाम की यह पनडुब्बी किस अज्ञात चीज से टकराई है उसका फिलहाल पता नहीं चल पाया है.

    इस घटना ने एक बार फिर से इस क्षेत्र में तनाव पैदा कर दिया है क्योंकि चीन लगातार ताइवान के एयर डिफेंस जोन में घुसपैठ कर रहा है. अमेरिका ने ताइवान का साथ देने का भरोसा जताया है. अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता ने बताया कि यह पनडुब्बी अब गुआम में अमेरिकी क्षेत्र की ओर बढ़ रही है.

    परमाणु संयंत्र को कोई नुकसान नहीं

    अमेरिका के लिए राहत की बात यह है कि उसके न्यूक्लियर प्लांट (Nuclear Propulsion Plant) को नुकसान नहीं पहुंचा है. अमेरिकी नौसेना के प्रवक्ता ने बयान में कहा, ‘USS Connecticut के Nuclear Propulsion Plant को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और वह पूरी तरह से काम कर रहा है. इस घटना से पनडुब्बी को कितना नुकसान हुआ है, इसकी समीक्षा की जा रही है.’ ये घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और चीन के बीच ताइवान के एयर डिफेंस आईडेंटिफ‍िकेशन जोन (ADIZ) में चीनी मिलिट्री की घुसपैठ को लेकर तनाव बढ़ गया है.

    5 दिन पहले हुई थी घटना

    सी-वोल्फह क्ला स की ये परमाणु पनडुब्बी पांच दिन पहले दुर्घटना का शिकार हुई थी. मगर इस बारे में जानकारी गुरुवार को ही दी गई. यूएस पैसेफिक फ्लीट की तरफ से जो बयान जारी किया गया वो भी काफी संक्षिप्ता था और इसमें इस बात का कोई जिक्र नहीं था कि आखिर वो कौन सी चीज थी जिससे पनडुब्बीप टकराई थी. न्यूकज एजेंसी एपी से बात करते हुए यूएस नेवी के दो अधिकारियों ने इस बारे में बताया है हालांकि अभी तक घटना की विस्तृईत जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया गया है.

    किसी चीज से टकराई होगी पनडुब्बी

    अधिकारियों ने बताया है कि जिस समय यूएसएस कनेक्टिकट रूटीन ऑपरेशंस पर साउथ चाइना सी पर था, उसी समय ये दुर्घटना का शिकार हुआ. अधिकारियों की मानें तो अभी तक यह साफ नहीं है कि निश्चित तौर पर पनडुब्बी  किसी दूसरी पनडुब्बी  से नहीं टकराई है. एक अधिकारी की मानें तो हो सकता है कि ये कोई डूबा हुआ जहाज हो या फिर कोई कंटेनर हो या कुछ और हो लेकिन अभी तक वो क्या  चीज थी यह स्पहष्टह नहीं हो सका है. यूएस नेवी की तरफ से कहा गया है कि अभी इस बात का आकलन किया जा रहा है कि पनडुब्बी  को कितना नुकसान पहुंचा है.

     

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  • Earthquake in Pakistan: पाकिस्तान में भूकंप से थर्राई धरती, 15 लोगों की मौत और दर्जनों घायल

    Earthquake in Pakistan: पाकिस्तान में भूकंप से थर्राई धरती, 15 लोगों की मौत और दर्जनों घायल

     

    Earthquake in Pakistan: दक्षिण पाकिस्तान (Pakistan) के हरनई इलाके में तड़के भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। जिसके बाद लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की और दौड़े। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई हैं और दर्जनों की संख्या में लोग घायल हुए हैं। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 6.0 मापी गई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के मुताबिक, भूकंप के झटके अल सुबह 3.30 बजे महसूस किए गए। कई मकानों को काफी नुकसान हुआ है। भूकंप की तीव्रता काफी तेज होने के कारण आस-पास के कई जिलों में नुकसान की बात सामने आ रही है। लोगों की मदद और बचाव कार्य के लिए क्वेटा से भारी मशीनरी रवाना कर दी गई है। फिलहाल, घायलों को इलाज के लिए अस्पताल लेकर जाया गया है।

    क्यों आता है भूकंप?

    आपको बता दें कि पृथ्वी के अंदर कई प्लेट्स हैं जो लगातार घूम रही हैं। जब ये प्लेट्स बार-बार टकराती है तो इनके कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है। जब यह प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। 

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  • ब्रिटेन में भी महंगाई की मार, हर परिवार पर 1.80 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ

    ब्रिटेन में भी महंगाई की मार, हर परिवार पर 1.80 लाख रुपये का अतिरिक्त बोझ

     

    कोरोना महामारी से भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के बड़े देश भी महंगाई की मार से बेहाल हैं। वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आई बाधाओं, श्रमिकों की कमी और ईंधन की बढ़ती कीमतों के चलते ब्रिटेन में महंगाई की मार चरम पर पहुंच गई है। सेंटर फॉर इकोनॉमिक्स एंड बिजनेस रिसर्च (सीईबीआर) के हालिया अध्ययन में साल के अंत तक देश में चार लोगों के परिवार पर 1800 पाउंड (लगभग 1.80 लाख रुपये) का अतिरिक्त बोझ पड़ने का अनुमान जताया गया है।

    वहीं, सेवानिवृत्त जोड़ों की बात करें तो यह आंकड़ा 1100 पाउंड (करीब 1.10 लाख रुपये), जबकि कम आय वाले दंपत्ति के मामले में 900 पाउंड (लगभग 90 हजार रुपये) आंका गया है। इससे पहले, बैंक ऑफ इंग्लैंड ने आशंका जताई थी कि 2021 के अंत तक ब्रिटेन में महंगाई दर चार फीसदी के करीब पहुंच जाएगी। वहीं, सुपरमार्केट शृंखलाओं ने खाद्य वस्तुओं की कीमतों में कम से कम पांच प्रतिशत का इजाफा होने का अंदेशा जाहिर किया है।

    ट्रांसपोर्ट सहित कई अन्य क्षेत्रों में तो श्रमिकों की संख्या में 30 से 40 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है। इससे आपूर्ति शृंखला का बाधित होना और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल आना लाजिमी है। प्रशिक्षित श्रमबल की कमी दूर करने के लिए देश में हुनरमंद प्रवासी कर्मचारियों को बुलाने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।

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  • Nobel Prize Awards 2021: नोबेल पुरस्कार का ऐलान,  फिजिक्स में इन तीन वैज्ञानिकों को मिला सम्मान

    Nobel Prize Awards 2021: नोबेल पुरस्कार का ऐलान, फिजिक्स में इन तीन वैज्ञानिकों को मिला सम्मान

    Nobel Prize Awards 2021: हर साल होने वाले नोबेल अवॉर्ड्स (Nobel Prize Awards) का ऐलान होने शुरू हो गए हैं। साल 2021 में हुए नोबेल अवॉर्ड्स के ऐलान के दूसरे दिन भौतिक क्षेत्र के तीन वैज्ञानिकों को ये सम्मान स्युकुरो मनाबे, क्लॉस हेसलमैन और जियॉर्जियो पारिसी दिया गया है। इससे पहले बीते दिन मेडिसिन में दो अमेरिकी साइंटिस्ट डेविड जूलियस (David Julius) और लेबनान के अर्देम पटापाउटियन (Ardem Patapoutian) को दिया गया था।

    नोबेल पुरस्कारों में जलवायु और जटिल भौतिक प्रणालियों में खोज के लिए जापान के स्युकुरो मनाबे (Syukuro Manabe), जर्मनी के क्लॉस हेसलमैन (Klaus Hasselmann) और इटली के जियॉर्जियो पारिसी (Giorgio Parisi) को ये सम्मान दिया गया है। नोबेल पुरस्कारों का ऐलान करने वाली संस्था ने अपने बयान में कहा कि तीनों वैज्ञानिक को "जटिल भौतिक प्रणालियों की हमारी समझ में अभूतपूर्व योगदान" के लिए भौतिकी के लिए 2021 का नोबेल पुरस्कार जीता है।

     

    स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने एक बयान में कहा कि जटिल प्रणालियों को यादृच्छिकता और विकार की विशेषता होती है और इन्हें समझना मुश्किल होता है। इस साल का पुरस्कार उनका वर्णन करने और उनके दीर्घकालिक व्यवहार की भविष्यवाणी करने के लिए नए तरीकों को मान्यता देता है। आगे कहा कि जटिल भौतिक प्रणालियों की हमारी समझ में अभूतपूर्व योगदान के लिए मनाबे, हेसलमैन और जियॉर्जियो को भौतिकी में नोबेल पुरस्‍कार 2021 से सम्मानित करने का फैसला किया।

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  • Taliban regime: बेटी की जान बचाने के लिए अफगानी महिला ने अपने नवजात को बेचा

    Taliban regime: बेटी की जान बचाने के लिए अफगानी महिला ने अपने नवजात को बेचा

     

    काबुल। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे से बाद से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। महिलाओं के लिए तो तालिबान शासन में जीना दुष्वार हो गया। लोगों का जीना यहां पर बिल्कुल भी आसान नहीं है। दो वक्त की रोटी के लिए भी यहां पर लोगों को जद्दोजहद करनी पड़ रही है। यहां पर विस्थापित हुई एक अफगानी महिला के पास अपनी बेटी के इलाज कराने तक लिए पैसे नहीं हैं। आर्थिक तंगी के चलते एक मां को अपनी बेटी के इलाज के लिए अपने नवजात को बेचने के लिए मजूबर होना पड़ा। बगलान प्रांत से काबुल में विस्थापित हुई इस महिला ने गरीबी के चलते अपने डेढ़ साल के बच्चे को 30,000 अफगानी (करेंसी) में बेच दिया।

    टोलोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, उसने अपनी 13 वर्षीय बेटी के इलाज के लिए अपने डेढ़ साल के बच्चे को अफगानी को 30,000 में बेचा। काबुल में एक तंबू में रहने वाली लैलुमा ने कहा कि उसे अपना बच्चा बेचना पड़ा क्योंकि उसके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। उसने यह भी कहा कि उसका पति पिछले साल से लापता है।

    इस बीच, कई परिवार जो विस्थापित हो रहे हैं और अब काबुल में रह रहे हैं, उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। टेंट में रहने वाले कई परिवारों का कहना है कि ठंड के मौसम में उनके बच्चे बीमार हो रहे हैं। विस्थापित परिवारों ने कहा कि उन्हें तालिबान के नेतृत्व वाले शरणार्थी मंत्रालय से कोई मदद नहीं मिली है।

    टोलोन्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, तखर की एक विस्थापित महिला आयशा ने कहा, 'शरणार्थी मंत्रालय के लोग यहां आए और एक सर्वेक्षण किया, लेकिन उन्होंने अब तक कोई सहायता नहीं दी है। अगर यह स्थिति बनी रही तो हम भूख से मर जाएंगे।' बता दें कि अफगानिस्तान में अशरफ गनी सरकार के पतन और तालिबान के काबुल पर कब्जा करने के बाद से बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार काबुल में तंबू में रह रहे हैं।

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  • तहरीक-ए-तालिबान ने इमरान सरकार से लिया बदला, 5 पाकिस्‍तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत

    तहरीक-ए-तालिबान ने इमरान सरकार से लिया बदला, 5 पाकिस्‍तानी सुरक्षाकर्मियों की मौत

     

    तहरीक-ए-तालिबान (TTP) ने पाकिस्तान सेना के हाथों मारे गए एक कमांडर का बदला लिया है। जिसमें पाकिस्‍तान (Pakistan) के उत्‍तरी वजीरिस्‍तान (North Waziristan) इलाके में शनिवार को हुए एक भीषण आतंकी हमले में 5 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई है। बताया जा रहा है कि मारे गए 4 सुरक्षाकर्मी फ्रंटियर कोर के हैं, वहीं एक अन्‍य लेविस फोर्स का सब इंस्‍पेक्‍टर है। यह वही इलाका है जहां पर तहरीक-ए-तालिबान (TTP) के आतंकी सक्रिय हैं और इमरान खान (Imran Khan) उनके साथ बातचीत का दावा कर रहे हैं। 

    वहीं, टीटीपी (Tehreek-e-Taliban) ने ऐलान किया है कि उसने किसी तरह का सीजफायर घोषित नहीं किया है। इससे पहले पाकिस्‍तानी मीडिया ने दावा किया था कि टीटीपी ने संघर्ष विराम कर दिया है। आतंकी हमले के बाद पाकिस्‍तानी सुरक्षाकर्मी अ‍ब इलाके में तलाशी अभियान चला रहे हैं। पाकिस्‍तानी सुरक्षाकर्मियों की यह हत्‍या ऐसे समय पर हुई है जब उत्‍तरी वजीरिस्‍तान में सक्रिय हाफिज गुल बहादुर के आतंकियों ने 20 दिन के सीजफायर का ऐलान किया है। इमरान सरकार इन्‍हें टीटीपी का सदस्‍य बता रही है लेकिन विशेषज्ञ इससे सहमत नहीं हैं।


    विशेषज्ञों का कहना है कि ये दोनों ही अलग-अलग हैं। इससे पहले इमरान खान ने दावा किया था कि उनकी सरकार टीटीपी के सदस्‍यों के साथ बातचीत कर रही है। उन्‍होंने माना था कि अफगानिस्‍तान की तालिबान सरकार इस बातचीत में मदद कर रही है। उधर, टीटीपी के प्रवक्‍ता मोहम्‍मद खुरासानी ने सीजफायर के दावों को खारिज किया है और अपने लड़ाकुओं से कहा कि वे पाकिस्‍तानी सेना और सरकार के खिलाफ हिंसक कार्रवाई जारी रखें।

    तुर्की के टीवी चैनल TRT वर्ल्ड को दिए इंटरव्यू के दौरान इमरान खान ने दावा किया कि पाकिस्तानी तालिबानी समूह हमारी सरकार से शांति और समझौते के बारे में बात करना चाहते हैं। हम उनमें से कुछ से बात कर रहे हैं। जब उनसे सवाल किया गया कि क्या वह तहरीक-ए-तालिबान से बात कर रहे हैं तो उन्होंने कहा कि TTP के कई धड़े हैं और उनमें से कुछ के साथ बात की जा रही है। उन्होंने यह नहीं बताया कि आत्मसमर्पण की बात की जा रही है या नहीं लेकिन कहा कि सुलह की बात चल रही है।

    जब उनसे यह पूछा गया कि क्या अफगान तालिबान इसमें मदद कर रहा है? इस पर इमरान खान ने साफ कहा कि बातचीत अफगानिस्तान में हो रही है, तो उस आधार पर तालिबान मदद कर रहा है। उनसे सवाल किया गया कि टीटीपी के कुछ समूहों से बात चल रही है कि वे अपने हथियार डाल दें, इस पर इमरान ने आगे जोड़ा कि फिर हम उन्हें माफ कर देंगे और वे आम नागरिक हो जाएंगे। उम्मीद है कि समझौता होगा।

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  • ऑस्ट्रेलिया ने यात्रियों के लिए कोविशील्ड वैक्सीन को दी मान्यता

    ऑस्ट्रेलिया ने यात्रियों के लिए कोविशील्ड वैक्सीन को दी मान्यता

     

    कोविशील्ड का टीका ले चुके, ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करने की चाह रखने वाले लोगों के लिए अच्छी खबर है। ऑस्ट्रेलिया ने सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा निर्मित वैक्सीन कोविशील्ड को मान्यता दे दी है। ऑस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को एस्ट्राजेनेका टीके के भारतीय एडिशन कोविशील्ड को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 'मान्यता प्राप्त वैक्सीन' के रूप में घोषित किया। ऑस्ट्रेलिया के थेरेप्यूटिक गुड्स एडमिनिस्ट्रेशन (TGA) ने सेफ्टी डेटा का मुल्यांकन करने के बाद भारत की कोविशील्ड और चीन की कोरोनावैक (सिनोवैक) वैक्सीन को "मान्यता प्राप्त टीके" के रूप में सूचीबद्ध किया।

    ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और कई मंत्रियों द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक बयान में कहा गया है कि कोविशील्ड, जिसे सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा बनाया गया है और चीनी वैक्सीन कोरोनावैक को आने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को उचित रूप से टीकाकरण के रूप में निर्धारित करने के उद्देश्य से 'मान्यता प्राप्त टीके' के रूप में माना जाना चाहिए। बता दें कि इस घोषणा से उन लोगों को मदद मिलने की संभावना है, जिन्होंने कोविशील्ड की खुराक ली है और ऑस्ट्रेलिया की यात्रा करने की सोच रहे हैं। 

    बयान में ऑस्ट्रेलिया द्वारा दुनिया को सुरक्षित रूप से फिर से खोलने और अंतरराष्ट्रीय सीमा पर आने वाले परिवर्तनों के लिए उठाए जाने वाले अगले कदमों को रेखांकित किया गया है। बयान में कहा गया है कि हमारी सरकार आने वाले महीनों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा कैसी दिखेगी, इसके लिए रूपरेखा तैयार कर रही है। बता दें कि भारत ऑस्ट्रेलियाई पक्ष पर भारतीय यात्रियों, विशेष रूप से विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पाठ्यक्रमों में शामिल होने के इच्छुक छात्रों के लिए यात्रा की अनुमति देने के लिए दबाव डालता रहा है। ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों के लिए भारत, चीन के बाद दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। 2019-20 के दौरान भारतीय छात्रों ने ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में $6.6 बिलियन का योगदान दिया।

    हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई सरकार के बयान से यह संकेत मिलता है कि भारतीय छात्रों को ऑस्ट्रेलिया की यात्रा की अनुमति दिए जाने से पहले कुछ और इंतजार करना होगा। अधिकारियों ने पहले कहा था कि ऑस्ट्रेलिया में विदेशी छात्रों का प्रवेश 2022 में पहले सेमेस्टर के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है। 70% आबादी का पूरी तरह से टीकाकरण हो जाने के बाद ही ऑस्ट्रेलियाई सरकार की विदेश यात्रा पर आगे बढ़ने की योजना है। 78 फीसदी से अधिक आस्ट्रेलियाई लोगों ने पहली खुराक ले ली है और दूसरी खुराक की दर 55 है। माना जा रहा है कि कुछ इलाकों में अगले सप्ताह में 70 फीसदी लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो जाएगा।

    शुरुआती चरणों में ऑस्ट्रेलियाई सरकार ऑस्ट्रेलियाई परिवारों को फिर से मिलाने के लिए यात्रा की अनुमति देगी ताकि ऑस्ट्रेलियाई कर्मचारी अंदर और बाहर यात्रा कर सकें। सरकार का यह फैसला यह पर्यटकों को अनुमति देने की दिशा में भी काम करेगा।

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