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  • जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बहाल पर अमेरिकी राजनयिक का बयान, कहा जल्द करे नजरबंद नेताओं को रिहा

    जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट सेवा बहाल पर अमेरिकी राजनयिक का बयान, कहा जल्द करे नजरबंद नेताओं को रिहा

     

    जम्मू-कश्मीर में करीब पांच महीने बाद इंटरनेट सेवा बहाल कर दी गई है। 2G मोबाइल इंटरनेट सेवाओं की बहाली के साथ ही कुछ पाबंदियां जरूर लगाई गई हैं। मसलन प्रशासन की ओर से जारी एडवाइजरी के अनुसार, घाटी के लोग 301 वेबसाइट्स ही एक्सेस कर सकेंगे। सोशल मीडिया साइट्स पर पाबंदी जारी रहेगी।

    जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट बहाली पर दक्षिण और केंद्रीय एशियाई मामलों की अमेरिका की वरिष्ठ राजनयिक एलिस वेल्स ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा, कश्मीर में इंटरनेट सेवा की आंशिक बहाली जैसे प्रगतिशील कदम से मैं खुश हूं। हम लगातार सरकार से अनुरोध करेंगे कि वो हमारे राजनयिकों को नियमित पहुंच की अनुमति दें और बिना किसी आरोप के हिरासत में लिए गए नेताओं को रिहा करने के लिए तेजी से कदम बढ़ाएं।

    एलिस वेल्स ने आगे कहा, यात्राएं अक्सर ज्यादा सुनने और समझने का मौका देती हैं, खासतौर से भारत के CAA को लेकर, इस मुद्दे पर देश जबरदस्त तरीके से लोकतांत्रिक समीक्षा के दौर से गुजर रहा है, फिर चाहे वो विपक्ष के द्वारा सड़कों पर हो, मीडिया में हो या अदालत में, वेल्स ने हाल ही में 15 देशों के राजनयिकों के जम्मू-कश्मीर दौरे को महत्वपूर्ण बताया था। उन्होंने घाटी में इंटरनेट बैन और नेताओं की हिरासत पर चिंता व्यक्त की थी। दौरे को लेकर उन्होंने कहा था कि उन्हें यकीन है कि राजनयिकों के कश्मीर दौरे के बाद घाटी के हालात सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

     

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  • भूकंप के झटकों से दहला तुर्की, 18 की मौत, 200 से ज्यादा घायल

    भूकंप के झटकों से दहला तुर्की, 18 की मौत, 200 से ज्यादा घायल

     

    अंकारा. पूर्वी तुर्की में शुक्रवार देर रात आए भूकंप में 20 लोगों के मारे जाने की खबर है. लगभग 400 से ज्यादा लोग हताहत हुए हैं. कई इमारतें ढह गईं. भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 दर्ज की गई है. तुर्की के आंतरिक मामलों के मंत्री सुलेमान सोयलू ने बताया- भूकंप के झटके पूर्वी एलाजिग प्रांत के सिवरिस कस्बे के आसपास महसूस किए गए. मृतकों की संख्या बढ़ सकती है.

    यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, सिवरिस शहर में भूकंप का दायरा 10 किलोमीटर के क्षेत्र में ज्यादा था. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार 40-40 सेकंड के 15 झटके महसूस किए गए. लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए. सरकारी अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है. घायलों को करीबी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

    तुर्की में बुधवार 22 जनवरी को भी भूकंप आया था. मणिसा प्रांत के कर्कगाक और अखीसर शहरों में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे. तब रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 5.4 दर्ज की गई थी. जान-माल का नुकसान नहीं हुआ था.

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  • कश्मीर पर ट्रंप की पेशकश पर भारत का जवाब, हमारा स्टैंड पूरी तरह साफ, किसी तीसरे पक्ष की भूमिका...

    कश्मीर पर ट्रंप की पेशकश पर भारत का जवाब, हमारा स्टैंड पूरी तरह साफ, किसी तीसरे पक्ष की भूमिका...

     

    भारत ने अमेरिका को फिर से स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता किसी भी हालत में स्वीकार नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह जानकारी दी। एक अन्य सवाल के जवाब में रवीश कुमार ने कहा कि कश्मीर पर तनावपूर्ण स्थिति बनाने की पाक की कोशिश विफल हो चुकी है और दुनिया को उसका दोहरा मापदंड डबल स्टैंडर्ड समझ आ चुका है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावोस में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को उठाया था। इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए रवीश कुमार ने कहा, 'कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष को लेकर हमारा पक्ष स्पष्ट है और उसमें कोई बदलाव नहीं होने वाला है। मैं एक बार फिर से दोहराना चाहता हूं कि इस मामले में तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं है।

    उन्होंने कहा कि अगर कोई द्विपक्षीय मुद्दा भारत और पाकिस्तान के बीच है तो शिमला समझौते और लाहौर घोषणा के तहत दोनों देशों के बीच ही होना चाहिए। मगर यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह बातचीत के लिए सही माहौल तैयार करे। इसके लिए उसे आतंकवाद और हिंसा का रास्ता छोड़ना होगा।

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  • डेमोक्रेट पार्टी से सांसद तुलसी गबार्ड ने हिलेरी क्लिंटन पर किया 350 करोड़ रु का मानहानि का केस

    डेमोक्रेट पार्टी से सांसद तुलसी गबार्ड ने हिलेरी क्लिंटन पर किया 350 करोड़ रु का मानहानि का केस

     

    डेमोक्रेट पार्टी से सांसद तुलसी गबार्ड ने अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन पर 5 करोड़ डॉलर यानी करीब 350 करोड़ रुपये का मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है। हिलेरी ने पिछले साल एक टीवी इंटरव्यू के दौरान गबार्ड पर सांकेतिक तौर पर निशाना साधा था। हिलेरी ने कहा था- मैं कोई अंदाजा नहीं लगा रही, लेकिन लगता है कि उन्हें राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी से ऐसा उम्मीदवार मिल गया है, जो चुनाव में किसी तीसरी पार्टी से खड़ा हो सके।

    हिलेरी ने गबार्ड का नाम लिए बगैर कहा था कि वे रूसी एजेंसियों की पसंदीदा हैं। रूस के पास उसका समर्थन करने के लिए कुछ वेबसाइट्स और प्रोग्राम हैं। तुलसी ने हिलेरी के इस बयान पर बुधवार को ही मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने इशारों में हिलेरी पर निशाना साधते हुए कहा कि राष्ट्रपति पद का चुनाव हारने वाली उम्मीदवार ने उन्हें रूस की पसंद कहकर बदनाम किया है। हिलेरी ने 2016 में डेमोक्रेट पार्टी की तरफ से डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। उन्हें हार मिली थी।

    तुलसी के वकीलों ने मैनहैटन फेडरल कोर्ट में हिलेरी के खिलाफ मामला दायर किया। एक वकील ने बताया कि हिलेरी ने तुलसी गबार्ड के बारे में झूठ बोला है। चाहे निजी दुश्मनी हो, राजनीतिक दुश्मनी हो या पार्टी में किसी बदलाव का डर हो, हिलेरी और उनके सहयोगी लंबे समय से डेमोक्रेटिक पार्टी में हावी रहे हैं। हिलेरी और तुलसी दोनों ही इसी पार्टी से हैं। मुकदमे के मुताबिक, हिलेरी को तुलसी इसलिए पसंद नहीं हैं, क्योंकि 2016 में राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान तुलसी ने उनका समर्थन न कर सीनेटर बर्नी सैंडर्स का समर्थन किया था।

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  • इस रिपोर्ट में किया गया दावा, इस प्रिंस ने किया दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का फोन हैक!

    इस रिपोर्ट में किया गया दावा, इस प्रिंस ने किया दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति का फोन हैक!

     

    दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और Amazon के बॉस जेफ बेजोस ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान द्वारा भेजे गए एक संदेश को खोलने के बाद अपने फोन के हैक होने का दावा किया है। 56 वर्षीय बेजोस और प्रिंस WhatsApp पर संदेशों का आदान-प्रदान कर रहे थे, जब उन्हें प्रिंस की ओर से एक वीडियो संदेश प्राप्त हुआ, जिसके बाद माना गया कि बेजोस का मोबाइल हैक हो गया।

    The Guardian की रिपोर्ट में यह बात सामने आई। वहीं, यह सवाल भी खड़ा हुआ कि क्या दुनिया का सबसे अमीर आदमी, जो वाशिंगटन पोस्ट का मालिक भी है, उनका फोन सऊदी अरब के प्रिंस द्वारा गोपनीय सामग्री के लिए हैक किया गया है। बता दें कि यह दावा भी किया गया कि बेजोस के फोन से एक घंटों के भीतर ही बड़ी मात्रा में डेटा चोरी कर लिया गया।

    बता दें कि जेफ बेजोस का सेल फोन 2018 में सऊदी प्रिंस के वाट्सऐप संदेश के बाद हैक हो गया था। The Guardian ने मंगलवार को बताया कि अमेजन अरबपति को मोहम्मद बिन सलमान के निजी फोन नंबर से संबंधित कोड वाली एक वीडियो फ़ाइल मिली थी। बाद में फोन की फोरेंसिक जांच के अनुसार, संदेश 1 मई, 2018 को भेजा गया था। एक घंटे के भीतर ही बेजोस के फोन से बड़ी मात्रा में डेटा निकाला गया था। किस तरह का डेटा लिया गया, इसकी कोई डिटेल नहीं है।

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  • चीन का कोरोना वायरस पहुंचा अमेरिका, सामने आया पहला मरीज

    चीन का कोरोना वायरस पहुंचा अमेरिका, सामने आया पहला मरीज

     

    अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने मंगलवार को चीन में फैले नए वायरस के अपने यहां पहले मामले की जानकारी दी है। यह वायरस चीन के वुहान शहर में फैला हुआ है। संघीय एवं राज्य अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित की उम्र 30 से 35 साल की है और वह वुहान से अमेरिका आया है। हालांकि वह वुहान के सीफूड बाजार में नहीं गया था जो कि वायरस संक्रमण का केंद्र बना हुआ है।

    उन्होंने बताया कि व्यक्ति को एहतियात के तौर पर अस्पताल में भर्ती किया गया है न कि इसलिए कि वह गंभीर स्थिति में है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक कोरोना वायरस सी-फूड से जुड़ा है। कोरोना वायरस विषाणुओं के परिवार का है और इससे लोग बीमार पड़ रहे हैं। यह वायरस ऊंट, बिल्ली तथा चमगादड़ सहित कई पशुओं में भी प्रवेश कर रहा है। दुर्लभ स्थिति में पशु मनुष्यों को भी संक्रमित कर सकते हैं। इस वायरस का मानव से मानव संक्रमण वैश्विक स्तर पर कम है।

    कोरोना वायरस के मरीजों में आमतौर पर जुखाम, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में दिक्कत, बुखार जैसे शुरुआती लक्षण देखे जाते हैं। इसके बाद ये लक्षण निमोनिया और किडनी को नुकसान पहुंचाते हैं। अभी तक कोरोना वायरस से निजात पाने के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है। इस वायरस के इलाज के लिए वैक्सीन बनाने का काम वैज्ञानिक कर रहे हैं।

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  • इस युवक ने किया 3 पॉर्न वेबसाइटों के खिलाफ मुकदमा, कहा इस कारण वीडियो का पूरा लुत्फ नहीं उठा पाता

    इस युवक ने किया 3 पॉर्न वेबसाइटों के खिलाफ मुकदमा, कहा इस कारण वीडियो का पूरा लुत्फ नहीं उठा पाता

     

    न्यूयॉर्क में रहने वाले एक बधिर व्यक्ति ने तीन पॉर्न वेबसाइटों के खिलाफ वर्ग भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है। व्यक्ति ने अपनी अर्जी में कहा है कि सबटाइटल के बिना वह वेबसाइटों पर उपलब्ध सामग्री का पूरा-पूरा लुत्फ नहीं उठा पाता है। ब्रुकलीन फेडरल कोर्ट में गुरुवार को दी गई अर्जी में यारोस्लाव सुरिज ने पॉर्नहब, रेडट्यूब और यूपॉर्न तथा उसके कनाडाई मुख्य कंपनी माइंडगीक के खिलाफ मुकदमा दायर कर कहा है कि वे अमेरिकंस विद डिसैबिलिटी एक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं।

    इससे पहले भी सुरिज इसी बात को लेकर फॉक्स न्यूज के खिलाफ मुकदमा कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि वह अक्टूबर और इस महीने कुछ वीडियो देखना चाहते थे, लेकिन नहीं देख पाए। सुरिज ने अपने 23 पन्ने की अर्जी में लिखा है, सबटाइटल के बिना बधिरों और ऐसे लोगों को जिन्हें कम सुनाई देता है वे वीडियो का पूरा-पूरा लुत्फ नहीं उठा पाते हैं, जबकि सामान्य लोग ऐसा कर पाते हैं।

    सुरिज ने कहा कि वह चाहते हैं कि पॉर्न वेबसाइटें सबटाइटल दें और उन्होंने कुछ हर्जाने की भी मांग की है।  पॉर्नहब के वाइस प्रेसिडेंट कोरी प्राइस ने एक बयान जारी कर कहा है कि वेबसाइट पर सबटाइटल वाला भी एक सेक्शन है और उन्होंने उसका लिंक भी दिया है।

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  • ईरान के सुप्रीम लीडर को ट्रंप ने चेताया, जुबान संभालकर बोलें...

    ईरान के सुप्रीम लीडर को ट्रंप ने चेताया, जुबान संभालकर बोलें...

     

    संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामनेई को अपने शब्दों को लेकर सावधान रहने की हिदायत दी है। उन्होंने खामनेई की अमेरिका और यूरोपीय देशों पर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए यह चेतावनी दी है।

    ट्रंप ने ट्वीट कर चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि ईरान के तथाकथित सुप्रीम लीडर ने यूरोप और अमेरिका के बारे में बहुत ओछी बातें की हैं। उनकी अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो रही है और उनके लोग पीड़ित हैं। ऐसे में उन्हें अपने शब्दों को लेकर बहुत सावधान रहना चाहिए। ट्रंप के मुताबिक, खामनेई ने अपने भड़काऊ बयान में अमेरिका को शातिर और यूरोपीय देशों ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी को अमेरिका का नौकर बताया था, जो कि गलत बयान था।

    ट्रंप ने इस बयान पर पलटवार करते हुए ईरानी नेता पर हमला बोला था। ट्रंप ने एक अन्य ट्वीट में ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान के वे लोग, जो अमेरिका से प्यार करते हैं, एक ऐसी सरकार डिजर्व करते हैं, जो उन्हें मारने की बजाय उनके सपनों को पूरा करने में दिलचस्पी रखती है। उन्होंने अपने ट्वीट में ईरानी नेताओं से अपील की कि उन्हें अपने देश को बर्बादी की ओर ले जाने की बजाय आतंक को छोड़ देना चाहिए और ईरान को फिर से महान बनाना चाहिए।

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  • कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने फिर मुंह की खाई, नहीं चली चीन की पैंतरेबाजी

    कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान ने फिर मुंह की खाई, नहीं चली चीन की पैंतरेबाजी

     

    जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को एक बार फिर नाकामी हाथ लगी है। पाकिस्तान का समर्थन करते हुए चीन ने कश्मीर मसले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अन्य देशों का समर्थन पाने की कोशिश की लेकिन बात नहीं बनी। अन्य देशों ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा है। परिषद के अन्य सभी सदस्य देशों ने इसका विरोध किया। UNSC के सदस्य देशों ने कहा कि इस मुद्दे पर बहस के लिए यह सही जगह नहीं है।

    फ्रांस की ओर से भी इसका विरोध किया गया। फ्रांस ने जम्मू-कश्मीर को भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा बताते हुए इस पर चर्चा का विरोध किया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, हमने एक बार फिर देखा कि पाकिस्तान ने ये मुद्दा उठाने की कोशिश की, जिसे किसी का भी समर्थन नहीं मिला, हमें खुशी है कि इस मामले में पाकिस्तान के किसी बेबुनियाद आरोप को UN ने चर्चा के लायक नहीं समझा।

    चीनी राजदूत झांग जुन ने कहा, हमने जम्मू-कश्मीर को लेकर बैठक की थी. मुझे पूरा यकीन है कि आप सब लोगों को पता होगा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद को चिट्ठी लिख कहा है कि उन्हें जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालातों पर गौर करना चाहिए। मुझे लगता है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच बातचीत के जरिए सकारात्मक नतीजे आ सकते हैं। बातचीत मददगार होगी और इससे सब हल हो सकता है।

    बता दे कि हाल ही में UN की बैठक में पाकिस्तान ने कहा था कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म किए जाने के बाद वहां के हालात सामान्य नहीं हैं। स्थानीय नेताओं को उनके घरों में कैद किया गया है। इंटरनेट समेत कई सेवाएं अभी भी बंद हैं। भारत कई सार्वजनिक मंचों से घाटी के हालात सामान्य बता रहा है। पाकिस्तान को जवाब देते हुए सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, दुनिया आपके झूठ से तंग आ चुकी है। सब आपका सच जानते हैं और अब हमारे खिलाफ झूठ फैलाना बंद करें। कोई भी आपकी बात मानने को तैयार नहीं है।

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  • इस अरबपति को चाहिए गर्लफ्रेंड, विज्ञापन निकाल गर्लफ्रेंड के लिए रखी ये शर्त

    इस अरबपति को चाहिए गर्लफ्रेंड, विज्ञापन निकाल गर्लफ्रेंड के लिए रखी ये शर्त

     

    एक जापानी अरबपति ने गर्लफ्रेंड के लिए एक विज्ञापन निकाला है। इस विज्ञापन में अरबपति शख्स ने बताया है कि उसे चांद की यात्रा के लिए गर्लफ्रेंड की तलाश है। युसाकु मेजावा नामक इस अरबपति का हाल ही में जापानी एक्ट्रेस के साथ ब्रेकअप हुआ है।

    युसाकु ऐसी गर्लफ्रेंड ढूंढ रहे हैं, जो जिंदगी को पूरी तरह से इंजॉय करना चाहती हों और जिनकी उम्र 20 साल या फिर उससे अधिक हो। तेजतर्रार उद्यमी युसाकु ने कहा कि उसने अकेलेपन की वजह से ऐसा विज्ञापन दिया है। उन्होंने कहा कि अब तक मैंने ऐसी जिंदगी जी है, जैसा मैं जीना चाहता था। बता दें कि युसाकु के दो महिलाओं से तीन बच्चे हैं।

    विज्ञापन में युसाकु ने कहा कि मैं अब 44 साल का हो गया हूं। अकेलेपन और खालीपन की भावनाएं धीरे-धीरे मुझ पर हावी होने लगी हैं। इसको लेकर युसाकु ने ट्विटर पर एक पोस्ट भी किया है। बता दें कि आवेदन करने की अंतिम तिथि 17 जनवरी 2020 है। वहीं, चयन मार्च के आखिर में होगा।

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  • ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकाने पर फिर दागे रॉकेट, चार इराकी सैनिक घायल

    ईरान ने इराक में अमेरिकी ठिकाने पर फिर दागे रॉकेट, चार इराकी सैनिक घायल

     

    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं हो रहा है। हाल ही में ईरान ने रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के मुखिया जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेते हुए इराक स्थित दो अमेरिकी बेस पर एक दर्जन से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया था। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि इस अटैक में करीब 80 अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

    US ने इसका खंडन किया था। इराक की राजधानी बगदाद में बीते रविवार एक बार फिर अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर रॉकेट दागे जाने का मामला सामने आया है। खबर के अनुसार, इस हमले में चार इराकी सैनिकों के घायल होने की खबर है। अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने से जुड़ी अभी कोई खबर नहीं है। मिली जानकारी के मुताबिक, रॉकेट यहां स्थित अल-बलाद एयरबेस पर दागे गए। इस बेस में अमेरिकन ट्रेनर, सलाहकार और F-16 लड़ाकू विमान की मेंनटेंस सर्विस से जुड़े सैनिक रहते हैं।

    अल-बलाद F-16 लड़ाकू विमानों का मुख्य एयरबेस है। बताया जा रहा है कि कुछ रॉकेट एयरबेस स्थित रेस्टोरेंट में आकर गिरे थे। इस हमले में एयरबेस का रन-वे भी क्षतिग्रस्त हुआ है। रॉकेट अटैक में घायल हुए इराकी सैनिक एयरबेस के गेट पर तैनात थे। बेस में अमेरिकन एक्सपर्ट्स, ट्रेनर और एडवाइजर समेत काफी लोग थे। हमले में किसी के मारे जाने की खबर नहीं है। अभी तक किसी ने भी इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए हाल ही में US ने अपने अधिकारियों और सैनिकों को इस एयरबेस से हटाना शुरू कर दिया था। बताया जा रहा है कि जिस समय यह हमला हुआ उस समय एयरबेस पर अमेरिकी नागरिक नहीं थे।

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  • ट्रंप ने सुलेमानी को मारने की वजह का किया खुलासा, बताया क्यों ईरानी जनरल को बनाया निशाना

    ट्रंप ने सुलेमानी को मारने की वजह का किया खुलासा, बताया क्यों ईरानी जनरल को बनाया निशाना

     

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार जारी है। बयानों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी पश्चिमी एशिया में अमेरिका के चार दूतावासों पर हमले की योजना बना रहा था।

    यह पूछे जाने पर कि क्या अन्य दूतवासों पर बड़े पैमाने में हमले की योजना थी? इस पर ट्रंप ने कहा, मैं यह साफ तौर पर कह सकता हूं कि चार दूतावासों पर हमले की योजना तैयार की गयी थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि बगदाद स्थित दूतावास इनमें में एक था। वहीं, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि गुप्त रिपोर्ट के मुताबिक, सुलेमानी पश्चिम एशिया में अमेरिकी राजनयिक और सेना के जवानों को निशाना बनाने की योजना बना रहा था, इसलिए अमेरिका ने उसके खिलाफ यह कार्रवाई की।

    बता दे अमेरिका ने पिछले सप्ताह इराक के बगदाद अंतरार्ष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास रॉकेट से हमला किया था जिसमें, सुलेमानी की मौत हो गई थी। सुलेमानी की मौत के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया और ईरान ने भी बीते बुधवार को इराक स्थित अमेरिका के दो एयरबेस पर मिसाइल से हमला कर दिया। ईरान के मिसाइल हमले के बाद अमेरिका ने उस पर नए प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी।

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  • ईरान के विदेश मंत्री ने माना, अमेरिका की वजह से गलती से मार गिराया था यूक्रेन का यात्री विमान

    ईरान के विदेश मंत्री ने माना, अमेरिका की वजह से गलती से मार गिराया था यूक्रेन का यात्री विमान

     

    ईरान ने शनिवार को स्वीकार किया कि उसकी सेना ने यूक्रेन के विमान को मार गिराया था, जिससे उसमें सवार 176 लोगों की मौत हो गई थी। यह बयान शनिवार सुबह आया, जिसमें कहा गया कि मानवीय चूक के चलते यह दुर्घटना हुई। इससे पहले ईरान ने कई दिनों तक विमान को गिराने की बात से इनकार किया, लेकिन अमेरिकी और कनाडा ने कहा था कि उन्हें विश्वास है कि ईरान ने ही विमान को मार गिराया है।

    ईरान के विदेश मंत्री जावेद जरीफ ने कहा कि ये एक दुखद दिन है, हमारी सेना द्वारा की गई शुरूआती जांच में ये पाया गया है कि अमेरिकी दुस्साहस की वजह से इंसानी गलती हुई जो एक बड़े हादसे में तब्दील हो गई। हमें इसका दुख है और हम अपने लोगों, उनके परिवारों और उन देशों से माफी मांगते हैं जो इस हादसे का शिकार हुए हैं।

    गौरतलब है कि यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस का बोइंग 737 विमान तेहरान से उड़ान भरने के कुछ समय बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। ईरान द्वारा इराक में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर किए गए मिसाइल हमले के कुछ देर बाद यह विमान हादसा हुआ था। यह विमान यूक्रेन की राजधानी कीव जा रहा था। बुधवार को दुर्घटनाग्रस्त हुए इस विमान में ईरान के 82, कनाडा के 63, यूक्रेन के 11, स्वीडन के 10, अफगानिस्तान के चार, जर्मनी के तीन और ब्रिटेन के तीन नागरिक सवार थे।

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  • EU से बाहर निकलेगा ब्रिटेन, ब्रिटिश सांसदों ने ब्रेक्जिट डील को मंजूरी दी

    EU से बाहर निकलेगा ब्रिटेन, ब्रिटिश सांसदों ने ब्रेक्जिट डील को मंजूरी दी

     

    ब्रिटेन के हाउस ऑफ कॉमंस ने यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के समझौते को गुरुवार को मंजूरी दे दी। समझौते के पक्ष में 330 वोट पड़े जबकि विरोध में 231 वोट डाले गए। मालूम हो कि बोरिस जॉनसन ने ब्रेग्जिट मुद्दे पर ही प्रचंड बहुमत के साथ पिछले महीने में सत्ता में दोबारा वापसी की थी। 

    ब्रेग्जिट पर सांसदों की मंजूरी के साथ सालों की देरी के बाद ब्रिटेन के 31 जनवरी को यूरोपीय संघ से बाहर निकलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।

    हालांकि अभी 'ईयू-यूके विदड्रॉवल एग्रीमेंट बिल' को अनिर्वाचित हाउस ऑफ लॉर्ड्स और यूरोपीय संसद द्वारा पारित किया जाना बाकी है, जिसे केवल औपचारिकता मात्र माना जा रहा है. ब्रिटेन यूरोपीय संघ की 50 साल पुरानी अपनी सदस्यता खत्म करने की ओर बढ़ रहा है.

    ब्रेक्जिट का मतलब है ब्रिटेन एक्जिट यानि ब्रिटेन का यूरोपीय यूनियन से बाहर जाना. 2016 में ब्रिटेन में ब्रेक्जिट को लेकर जनमत संग्रह किया गया था जिसमें 52 फीसदी लोगों का मानना था कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन से बाहर निकलना चाहिए जबकि 48 फीसदी लोगों की राय ब्रेक्जिट के विरोध में थी.

    अब 31 जनवरी तक ब्रिटेन की संसद को ब्रेक्जिट पर फैसला करना है और शायद यही कारण है कि जनता ने एक बार फिर से बोरिस जॉनसन को इतने भारी बहुमत के साथ सत्ता सौंपी है.

    कंजरवेटिव पार्टी की सबसे बड़ी विरोधी लेबर पार्टी को केवल 203 सीटें मिलीं. पिछली बार की तुलना में जहां कंजरवेटिव की 47 सीटें बढ़ गईं वहीं लेबर पार्टी को 59 सीटों का नुकसान हुआ.

    दरअसल साल 2008 में ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आने लगी थी, महंगाई और बेरोजगारी़ बढ़ रही थी वहीं जनता भी बेहद परेशान हो चुकी थी. ऐसे में ये मांग उठी कि ब्रिटेन को ईयू यानि यूरोपीय यूनियन से अलग हो जाना चाहिए.

    इस मांग के पीछे तर्क ये था कि ब्रिटेन को हर साल ईयू के बजट के लिए 9 अरब डॉलर देने होते हैं, साथ ही फ्री वीजा पॉलिसी के कारण भी ब्रिटेन को नुकसान हो रहा है. ईयू से अलग होने की मांग करने वाले लोगों का मानना था कि ईयू ने ब्रिटेन की मंदी को दूर करने के लिए कुछ खास नहीं किया जबकि ब्रिटेन ने हमेशा ईयू के लिए काफी कुछ किया है.

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  • ट्रंप को लगा झटका, अमेरिकी संसद के निचले सदन में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित करने का प्रस्ताव पारित

    ट्रंप को लगा झटका, अमेरिकी संसद के निचले सदन में राष्ट्रपति के अधिकार सीमित करने का प्रस्ताव पारित

     

    ईरान के साथ संभावित युद्ध को लेकर अमेरिका की सियासत गरमा गई है। अमेरिकी संसद के निचले सदन ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के अधिकार सीमित करने वाले प्रस्ताव को पारित कर दिया है। अब ट्रंप को ईरान पर पलटवार करने की खुली छूट नहीं होगी।

    डेमोक्रेटिक सांसदों के बहुमत वाले निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रस्ताव के पक्ष में 194 वोट पड़े। अब इस प्रस्ताव को संसद के ऊपरी सदन सीनेट में पेश किया जाएगा। डेमोक्रेट्स का आरोप है कि ट्रंप ने संसद को जानकारी दिए बिना ही इराक में ईरान के कमांडर जनरल सुलेमानी पर ड्रोन हमले की इजाजत दे दी थी।

    इसके बाद नैंसी पेलोसी ने अमेरिकी सांसदों को चिट्ठी लिखकर राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई को सीमित करने का प्रस्ताव रखा था। बता दें कि पिछले हफ्ते बगदाद में ईरानी शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी के एक अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे जाने के बाद बुधवार को ईरान ने बगदाद में दो अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना कर मिसाइलें दागी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है।

     

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