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  • जानें क्या है माइग्रेन का दर्द, इसके कारण, लक्षण, इलाज

    जानें क्या है माइग्रेन का दर्द, इसके कारण, लक्षण, इलाज

     

    क्या आपको लगातार सिरदर्द हो रहा है, वह भी सिर के एक तरफ तो इसे डॉक्टर से जरूर दिखाएं। यह सिरदर्द माइग्रेन के कारण भी हो सकता है। माइग्रेन में आपको रह-रहकर सिरदर्द के तेज अटैक आते हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अमेरिका में इस समस्या से लगभग 30 प्रतिशत लोग ग्रस्त हैं, जबकि भारत में इससे कहीं ज्यादा लोग माइग्रेन की समस्या से परेशान हैं।

    माइग्रेन में सिर के आधे भाग में दर्द होता है, इसलिए इसे अधकपारी भी कहते हैं। जानें, क्या है माइग्रेन का दर्द, इसके कारण, लक्षण, इलाज और कुछ घरेलू उपाय। माइग्रेन एक विशिष्ट प्रकार का सिरदर्द है। माइग्रेन का दर्द कान, आंख के पीछे और कनपटी में भी होता है। यह दर्द सिर के किसी भी भाग में हो सकता है। इसे गंभीरता से लेना बहुत जरूरी है और सही समय पर इलाज भी करवाना चाहिए। माइग्रेन की समस्या कभी भी किसी भी उम्र में हो सकती है।

    इस दर्द का मुख्य कारण रक्त कोशिकाओं के फैलने एवं उनके नाड़ी तंतुओं से स्रावित रसायन, जो इन रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करते हैं। पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं को यह समस्या ज्यादा होती है और बहुत कम ही महिलाएं इसका उपचार कराती हैं।

    माइग्रेन के लक्षण

    जी मिचलाना, शरीर में असहज महसूस होना।

    सिर में भारी पन।

    सिर के पीछे की भाग जो गर्दन से सटा होता है, उसमे दर्द होना।

    तेज रोशनी से आंख में जोर पड़ना।

    ज्यादा शोर होने पर चिड़चिड़ापन महसूस करना।

    हर वक्त तनाव में रहना।

    माइग्रेन से होने वाला दर्द ज्‍यादातर शाम को होता है।

    इससे आंखों में भी तकलीफ रहती है।

    बायोफीडबैक, योग, एक्यूप्रेशर और नियमित व्यायाम आदि से माइग्रेन के दौरे को घटाने में मदद मिलती है। माइग्रेन से बचने के लिए सिरदर्द उत्पन्न करने वाले कारणों से बचना चाहिए, जैसे ऊंची आवाज में गाने सुनना, तनावग्रस्त रहना आदि। साथ ही दर्दनिवारक दवाओं का कम से कम इस्तेमाल करना चाहिए।

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  • अगर पनीर खाते है तो जानिए कैसे लाभकारी है सेहत के लिए

    अगर पनीर खाते है तो जानिए कैसे लाभकारी है सेहत के लिए

     

    पनीर को अगर अब तक आप केवल लजीज स्वाद और पसंद के कारण खाते हैं, तो यह जानकर आपको खुशी होगी कि अब से इसे अच्छी सेहत पाने के लिए भी खाया जा सकता है। जी हां, पनीर का सेवन सेहत को फायदे भी देता है।

    पनीर का सबसे बेहतरीन लाभ है कि यह आपकी हड्ड‍ियों और दांतों को मजबूत बनाता है साथ ही कैल्श‍ियम और फास्फोरस का एक बढ़िया स्त्रोत भी है। रोजाना पनीर का सेवन हड्डयिों की समस्या, जोड़ों में दर्द और दांत के रोगों से बचाए रखने में बेहद मददगार है।

    पाचन और पाचन तंत्र के लिए मेटाबॉलिज्म का रोल बहुत महत्वपूर्ण है। पनीर में अत्यधिक मात्रा में डायट्री फाइबर होते हैं जो भोजन के पाचन में बेहद मददगार साबित होता है। यह पाचन तंत्र के सुचारू रूप से चलने के लिए बेहद फायदेमंद और महत्वपूर्ण है।

    ओमेगा 3 से भरपूर पनीर डाइबिटीज से भी बेहद प्रभावी तरीके से लड़ता है। विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि वे भी अपने डाइबिटीज रोगियों को रोजाना पनीर को डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है, कि पनीर दोनों टाइप के डाइबिटीज के लिए प्रभावी साबित होता है।

    दूध से बनने के कारण पनीर में भी दूध के गुणों का भंडार है, जिनमें ऊर्जा का स्त्रोत भी शामिल है। शरीर में तुरंत ऊर्जा के लिए पनीर का सेवन फायदेमंद है। बॉडी ट्रेनिंग करने वालों के लिए यह और भी फायदेमंद है।

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  •  तुलसी एक फायदे अनेक, जानिए कौन-कौन सी बीमारी के इलाज में आती है काम

    तुलसी एक फायदे अनेक, जानिए कौन-कौन सी बीमारी के इलाज में आती है काम

     

    जब कभी आप को सर्दी या जुकाम होता है तो हर कोई आपको सलाह देता है कि तुलसी वाली चाय पी लो ठीक हो जाओंगे, लेकिन क्या पता है तुलसी सिर्फ सर्दी या जुकाम में ही लाभकारी नहीं है। इसके अलावा भी बहुत सी बिमारियां होती है जिनमें तुलसी मददगार होती है।   

    तुलसी कई रोगों को दूर करने और शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने में बड़ी कारगर है। यह पौधा शरीर की इम्‍यूनिटी बढ़ाने के साथ बैक्‍टीरिया और वायरल इंफेक्‍शन से लड़ता है।आयुर्वेद में कहा गया है कि अगर आप अपने घर में तुलसी लगाते हैं तो स्‍ट्रेस यानी कि तनाव घर से कोसों दूर रहता है।

    तुलसी के पत्तों के रस को गर्म करके दो-दो बूंद कान में टपकाने से कान का दर्द दूर होता है। तुलसी का काढ़ा खून को साफ करने का काम करता है और इससे कॉलेस्‍ट्रोल लेवल भी कम होता है।

    आप तुलसी के पत्तियों की मदद से किडनी की पथरी से छुटकारा पा सकते हैं। तुलसी के पत्तों को गरम पानी में डालकर उसका सारा अर्क निकाल लीजिए। इसके बाद उसमें एक चम्‍मच शहद मिलाकर रोजाना पीने से घर पर ही किडनी की पथरी का इलाज हो जाएगा। काली मिर्च और तुलसी के पत्तों की गोली बनाकर दांत के नीचे रखने से दांत के दर्द में आराम मिलता है

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  • डायबिटीज के रोगियों के लिए ये घरेलू नुस्खे होंगे वरदान साबित

    डायबिटीज के रोगियों के लिए ये घरेलू नुस्खे होंगे वरदान साबित

     

    भागदौड़ भरी जिदंगी में खानपान का ठीक से ध्यान न देना डायबिटीज के रोगियों के लिए और समस्या पैदा करने जैसा है। कुछ लोग डायबिटीज का घरेलू उपचार तलाशते हैं, लेकिन कोई भी दवा या नुस्खा बिना डॉक्टरी सलाह के अपनाना खतरनाक साबित हो सकता है। डायबिटीज की बीमारी एक बार हो जाए तो उससे छुटकारा पाना बहुत मुश्किल होता है। आज डायबिटीज से सिर्फ बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी परेशान हैं। तो चलिए हम आपको बताते हैं कि कैसे ये घरेलू नुस्खे अपना कर डायबिटीज की बीमारी को नियंत्रित रख सकते हैं।

    हल्दी को मसाले और सुंदरता के लिए इस्तेमाल किया जाता है लेकिन हल्दी का इस्तेमाल डायबिटीज के रोगियों के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है। हल्दी को दूध में मिलाकर पीने से शरीर का दर्द भी कम होता है। लौंग को कई बीमारियों में लाभकारी माना जाता है। लौंग के इस्तेमाल से पाचन क्रिया अच्छी रहती है। लौंग से बल्ड शुगर के लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है। क्योंकि लौंग में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो बल्ड शुगर के लेवल को कंट्रोल करने में मदद कर सकता है।

    लहसुन के इस्तेमाल से बल्ड शुगर के लेवल को कंट्रोल किया जा सकता है. क्योंकि लहसुन में मौजूद गुण बल्ड शुगर के लेवल को बढ़ने नहीं देते. लहसुन के इस्तेमाल से पेंट दर्द और अपचन की समस्या से भी छुटकारा मिल सकता है।

    तेजपत्ते का इस्तेमाल मसाले के रूप में खाना बनाने में किया जाता है. लेकिन तेजपत्ते के इस्तेमाल से डायबिटीज को भी नियंत्रित रखा जा सकता है। डायबिटीज के रोगियों को तेजपत्ते का काढ़ा बनाकर पीना चाहिए। इसके सेवन से डायबिटीज को नियंत्रित कर सकते है।

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  • आज के समय में मानसिक बीमारी एक बड़ी समस्या, ये उपाय करने से मिलेगी राहत

    आज के समय में मानसिक बीमारी एक बड़ी समस्या, ये उपाय करने से मिलेगी राहत

     

    हम में से ज्यादातर लोग अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान देते हैं, अच्छे खान-पान से शरीर की हर जरूरत को पूरा करते हैं जिससे कि शरीर स्वस्थ रहे और बीमार न पड़े। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि शरीर के अलावा आपके माइंड को भी आपकी केयर भी जरूरत हो सकती है? आज अधिकांश लोगों को जो बीमारियां हो रही हैं उसका बाहरी कारण कम और मानसिक ज्यादा है। आपको बताते है मानसिक बीमारियों से बचने के कुछ उपाय..

    कैसी भी परिस्थिति आ जाए लेकिन आप अपने विचारों को पॉजीटिव ही रखें। यह करना आसान नहीं होगा लेकिन अभ्यास करते-करते आपको सकारात्मक सोचने की आदत जरूर पड़ जाएगी।

    जब आप निगेटिव सोचते हैं, जैसे कि तुलना करना, किसी से जलना, किसी का बुरा चाहना, बदला लेना आदि भावनाएं रखते हैं, तब आपके दिमाग में जरूरत से ज्यादा विचार उत्पन्न होते हैं जिससे कि आपके दिल की गति बढ़ती है। इसी वजह से आपको हाईपरटेंशन जैसी बीमारी घेर सकती है इसीलिए अपने अच्छे मानसिक स्वास्थ्य के लिए नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

    ऐसी बातें जो आपको तनाव दे रही हैं, उन्हें छुपाने की बजाए जरूरत लगने पर किसी करीबी से शेयर कर लें। इससे आपका मन हल्का हो जाएगा। ज्यादा समय चिंता में बिताना किसी के भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं है। इसका आपके शरीर पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

    अगर आपको लगता है कि प्रसन्नता तो स्वत: ही आती है, इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं है। तो आपको जानकर आश्चर्य होगा कि विपरीत परिस्थितियों में भी ऐसी गतिविधियां और काम जो आपको पसंद है, उन्हें करने से भी आपका मूड बदल सकता है और आपको खुशी मिल सकती है। इसलिए उन तरीकों को खोजें जो आपको प्रसन्नता देते है और हर परिस्थिति में खुश रहने का प्रयास करें।

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  • खाना खाने के बाद करे मीठा खाने का मन तो खाए गुड़, होते है शरीर को ये फायदे

    खाना खाने के बाद करे मीठा खाने का मन तो खाए गुड़, होते है शरीर को ये फायदे

     

    खाना खाने के बाद अक्सर लोगों को कुछ मीठा खाने का मन करता है। अगर आप भी उन लोगों में से एक हैं तो मुंह मीठा करने के लिए चीनी या मिठाई की जगह गुड़ खाएं। जी हां, ऐंटिऑक्सिडेंट्स से भरपूर गुड़, पावरहाउस की तरह है जिसमें आयरन, पोटैशियम, गंधक, फॉस्फॉरस, कैल्शियम, विटमिन ए और विटमिन बी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। गुड़ खाने से न सिर्फ हमारा खून साफ होता है बल्कि शरीर का मेटाबॉलिज्म भी ठीक रहता है, इसलिए गुड़ वजन घटाने में भी आपकी मदद कर सकता है।

    अगर आप वजन घटाने की सोच रहे हैं तो डायट में चीनी की जगह गुड़ का इस्तेमाल करें क्योंकि चीनी के मुकाबले गुड़ में कैलरीज की मात्रा बेहद कम होती है लिहाजा इसे आप नैचुरल स्वीटनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद संहिता के अनुसार गुड़ शीघ्र पचने वाला, खून बढ़ाने वाला व भूख बढ़ाने वाला होता है। ऐसे में अगर आप गैस या ऐसिडिटी से परेशान हैं तो खाने के बाद थोड़ा गुड़ जरूर खाएं ऐसा करने से ये दोनों ही समस्याएं नहीं होती हैं। गुड़, सेंधा नमक, काला नमक मिलाकर चाटने से खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।

    गुड़, खून को साफ कर शरीर में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है जिससे आपको वजन घटाने में मदद मिलती है। जिस तरह ग्रीन टी शरीर को डिटॉक्स कर वेट लॉस में मदद करती है ठीक उसी तरह गुड़ भी हमारे शरीर के लिए डिटॉक्स का काम करता है और वजन घटाता है।

    वैसे तो गुड़, सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद है औऱ कई बीमारियों को दूर करने में भी मदद करता है। बावजूद इसके किसी भी चीज की अति बुरी होती है। लिहाजा गुड़ का सेवन भी सीमित मात्रा में ही करें। बहुत ज्यादा गुड़ खाने से शऱीर को नुकसान भी हो सकता है।

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  • स्वस्थ जीवन जीना है तो अपनाए ये जीवन शैली

    स्वस्थ जीवन जीना है तो अपनाए ये जीवन शैली

    स्वस्थ जीवन जीना एक कला है आज की भाग -दौड़ भरी जिंदगी में इतना टाइम नही मिलता जिससे हम अपनी देख भाल अच्छी तरह से कर सके ,लेकिन यहा पर बताये गये रूटीन को अपनी दिनचर्या में शामिल करके आप भी स्वस्थ जीवन जी सकते है।

    सुबह उठने के बाद गुनगुना पानी जरूर पिये ,गुनगुना पानी पिने से आपका पेट साफ़ होगा और फैट भी नही बड़ेगा। नाश्ते में अंकुरित चीजो को शामिल करे जैसे चना, दूध, दही, पोहा,ताजे फल आदी वही दोपहर का लंच टाइम से करे, दही जरुर खाए। रात्रि का खाना सोने से 1 घंटा पहले खाए,जादा मिर्च मसालेदार खाने से बचे। खाना खाने के 30 मिनट बाद पर्याप्त में मात्रा सादा पानी पिए।

    शाकाहारी भोजन को अहमियत दे ,जैसे अंकुरित अनाज,मिक्स दाल, हरी सब्जी, दूध, दही आदी। भोजन करने के बाद 15 से 20 मिनट walk जरुर करे। रोज सुबह ताजी हवा में टहलने की आदत बनाये,इससे आपका  पूरा दिन एनर्जी भरा होगा। बार बार खाने की आदत का त्याग करे। किसी भी तरह का तनाव लेने से बचे, अगर किसी तरह का तनाव दिमाग में है, तो उससे जल्दी बाहर निकलने की कोशिश करे।

    गहरी सास लेने की आदत बनाये। छोटी-छोटी बात पर गुस्सा करने से बचे,ऐसा करके आप B.P की problems से दूर रहेगे। अपने परिवार के साथ बैठकर आपस में बात जरुर करे। जब भी मौका मिले family या दोस्तों के साथ बाहर जरुर जाए। रात को पूरी नींद जरुर ले तभी आपका पूरा दिन अच्छा बीतेगा और काम को असानी से पूरा कर पाएगे।

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  • रोजाना प्याज खाने से शरीर को होते है ये फायदे...

    रोजाना प्याज खाने से शरीर को होते है ये फायदे...

     

    खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए प्याज का इस्तेमाल किया जाता है। खाने को स्वादिष्ट बनाने वाला प्याज आपके स्वास्थ्य को भी सही रखने में मदद करता है। बहुत से लोगों को यह पता नही होता है कि सब्जी के रुप में इस्तेमाल होने वाला प्याज शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है। तो आइए आपको बताते हैं रोजाना प्याज का सेवन आपको कैसे स्वस्थ रखने में मदद करता है।

    प्याज में एक्सपेक्टोरैंट प्रॉपर्टीज होते हैं जो खांसी और सांस की समस्या को दूर करने में मदद करता है। प्राचीनकाल से कफ, इंफेक्शन को दूर करने में प्याज का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके लिए रोजाना प्याज का सेवन करें। शरीर को खराब करने वाले पदार्थो को बाहर निकालना बेहद जरूरी होता है। प्याज में अमीनो एसिड होता है जो शरीर से हानिकारक टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है। साथ ही आपके पेट को साफ करता है।

    बीमारियों से शरीर को बचाने के साथ त्वचा को साफ करने में प्याज का इस्तेमाल फायदेमंद होता है। इसके लिए प्याज के जूस और सेब के सिरके को बराबर मात्रा में मिलाकर रोजाना त्वचा पर लगाएं। इससे त्वचा का पीएच संतुलित रहता है।

    शरीर को इंफेक्शन से बचाने के लिए इम्यून सिस्टम का मजबूत होना बेहद जरुरी होता है। प्याज में मौजूद पदार्थ शरीर में आसानी से मिक्स हो जाते हैं जो कई तरह की बीमारियों को दूर करने में मदद करता है।

     

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  • सेहत के लिए करेला है फायदेमंद,इन बीमारियों में करता है दवा के रूप में काम

    सेहत के लिए करेला है फायदेमंद,इन बीमारियों में करता है दवा के रूप में काम

     

    क्या आप जानते हैं कि स्वाद में कड़वा करेला सब्जी नहीं एक फल है। हमने करेले से जुड़े इस फैक्ट को ही नहीं और भी बहुत सी चीजों को अनदेखा किया है। करेला कई बीमारियों के लिए दवा के रूप में काम आ सकता है। करेले खाने के बहुत फायदे होते हैं। करेले में कई औषधीय तत्व मौजूद होते हैं, जो बेहद फायदेमंद होते हैं। करेले में भरपूर मात्रा में मिनरल्स, विटमिन्स, फाइबर और ऐंटीऑक्सिडेंट्स होते हैं, जो उसे एक सेहतमंद और फायदेमंद फल बनाता है।

    करेले का जूस आपके शरीर में इन्सूलिन को सक्रिय करता है जिससे ब्लड में मौजूद शुगर फैट में नहीं बदल पाता और बॉडी उसका सही इस्तेमाल कर पाती है। शुगर के फैट में न बदलने के कारण वजन कम करने में भी मदद भी मिलती है। सुबह एक गिलास करेले के जूस के सेवन से ब्लड शुगर लेवल को संतुलित और नियमित करने में काफी सहायता मिलती है।

    करेले का जूस ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करने में मददगार होता है, क्योंकि यह पोटेशियम से भरपूर होता है, जो शरीर में अत्यधिक सोडियम को अवशोषित करता है। यह आयरन और फोलिक एसिड से भरपूर होता है, जो स्ट्रोक के खतरे को कम करने और आपके दिल को स्वस्थ रखने के लिए जाना जाता है।

    करेले का जूस आपके बालों के लिए भी बहुत अच्छा है। करेले के जूस में भरपूर मात्रा में विटामिन ए, बी और सी भरपूर मात्रा में होते हैं। जो आपके बालों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं। सिरदर्द की समस्या से कई बार लोगों का सामना हो जाता है। लेकिन अगर सिरदर्द काफी समय से लगातार होने लगे तो ऐसे में करेला काफी फायदेमंद साबित होता है। इसके लिए करेले की पत्तियों को पीस लें और फिर इसे माथे पर लगा लें। ऐसा करने से सिरदर्द से आराम मिल जाएगा।

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  • Dieting कर रहे है आप तो ध्यान रखें इन बातों का, न खाए ये चीजे

    Dieting कर रहे है आप तो ध्यान रखें इन बातों का, न खाए ये चीजे

     

    फिट रहने, मोटापे और वजन को कंट्रोल में रखने के लिए अक्सर लोग डाइटिंग का सहारा लेते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि लड़कियां और महिलाएं ही डाइटिंग ज्यादा करती हैं क्योंकि वे अपनी बॉडी को लेकर ज्यादा कॉन्शियस होती हैं। लेकिन कई बार सही जानकारी न होने की वजह से वे ऐसी चीजें खा लेती हैं, जो मोटापे और वजन को कंट्रोल करने के बजाय बढ़ा देता हैं। चलिए आपको बताते हैं ऐसी चीजों के बारे में जिन्हें डाइटिंग के दौरान खाने से बचना चाहिए।

    अगर सुबह के नाश्ते में आप ब्रेड के साथ बटर खाते हैं। तो, डाइट के दौरान इसे तुरंत लेना बंद कर दें, क्योंकि इसमें हाई कोलेस्ट्रॉल युक्त कई ऐसे पद्दार्थ होते हैं जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होते हैं। बटर में 80% फैट होता है। हल्की फुल्की भूख लगने पर अगर आप फ्राय की हुई चीजें, फ्राय किए हुए स्नैक्स या चिप्स खाना पसंद करती हैं, तो डाइट के दौरान इसे भी न लें। क्योंकि इनकी गिनती भी हाई कैलोरी फूड में होती है।

    आइसक्रीम में भरपूर मात्रा में शुगर और फैट मौजूद होता है। इसे खाने से मूड तो फ्रेश होगा लेकिन वैट लॉस नहीं हो पाएगा। जंक फूड जैसे चाउमीन, मैगी, पिज्जा, सोया चाप आदि में हाई स्तर पर फैटी एसिड्स, कोलेस्ट्रॉल, और कैलोरी का मात्रा होती है, जो वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।

    ड्राई फ्रूट्स में कई पौष्टिक तत्व तो होते है लेकिन इनमें फैट और कैलोरी भी काफी मात्रा में होती है, जैसे 100 ग्राम बादाम में 163 कैलोरी, वहीं काजू में 155 और पिस्ते में 185 कैलोरी की मात्रा होती है। अगर आप इन्हें रोजाना जी भरकर खाती हैं तो वजन आसानी से कम होना मुश्किल ही है।

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  • Red Wine पीने वालों के लिए खुशखबरी, करती है शरीर में ये फायदें

    Red Wine पीने वालों के लिए खुशखबरी, करती है शरीर में ये फायदें


    शोधकर्ताओं ने एक खुशखबरी ढूंढ़ निकाली है। शोधकर्ताओं का मानना है कि रेड वाइन में एक ऐसा तत्व पाया जाता है, जिससे अवसाद व चिंता के इलाज में मदद मिल सकती है। पौधों से प्राप्त यह तत्व या प्लांट कंपाउंड रेसवेराट्रोल एक खास एंजाइम के स्राव को रोककर तनाव-रोधी प्रभाव दर्शाती है, जिससे चिंता नियंत्रण में रहती है।

    अमेरिका में यूनिवर्सिटी ऑफ बफेलो में सहायक प्राध्यापक यिंग जू के मुताबिक, अवसाद और चिंता विकारों से पीड़ित रोगियों के लिए रेसवेराट्रोल दवाओं का एक प्रभावी विकल्प हो सकता है। यह निष्कर्ष इस तथ्य पर प्रकाश डालती है कि कैसे रेसवेराट्रोल द्वारा न्यूरोलॉजिकल प्रक्रियाओं को प्रभावित किया जाता है। यह एक ऐसा तत्व है, जिसके असंख्य स्वास्थ्य लाभ हैं। यह अंगूर और बेरी के बीज और उनकी त्वचा में पाया जाता है।

    शोधकर्ताओं ने इस बात का पता तो लगा लिया है कि रेसवेराट्रोल में अवसाद को रोकने के गुण हैं, लेकिन इस तत्व का फॉस्टोडिएस्टरेज 4 (पीडीई4) से क्या संबंध है, इसका अभी पता नहीं लगाया जा सका है। फॉस्टोडिएस्टरेज 4 एक एन्जाइम है जो तनाव हार्मोन कॉर्टिकोस्टेरोन से प्रभावित होता है।

    कॉर्टिकोस्टेरोन तनाव के प्रति शारीरिक क्रिया को नियंत्रित करती है, बहुत अधिक चिंता से दिमाग में इस हॉर्मोन की मात्रा में वृद्धि होती है और आखिरकार इससे तनाव और अन्य मानसिक विकारों का जन्म होता है। शोधकर्ताओं ने इस बात का भी खुलासा किया कि कॉर्टिकोस्टेरोन की अत्यधिक मात्रा से प्रेरित होकर पीडीई4 तनाव और चिंता का कारण बनती है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, हालांकि रेड वाइन में रेसवेराट्रोल मौजूद होता है, लेकिन शराब के सेवन से नशे सहित कई और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम का खतरा बना रहता है।

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  • ब्रेकफास्ट में ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा या हानिकारक?

    ब्रेकफास्ट में ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा या हानिकारक?

     

    ब्रेकफास्ट में ज्यादातर लोग ब्रेड खाना पसंद करते हैं। यह किसी भी फॉर्म में हो सकता है। चाहे तो सिंपल स्लाइस के फॉर्म में या फिर टोस्ट के फॉर्म में या फिर सैंडविच के फॉर्म में। लेकिन क्या ब्रेड खाना सेहत के लिए अच्छा है?

    ब्रेड में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं। शरीर के लिए यह तत्व फ्यूल का काम करता है, लेकिन यह तब हेल्दी होता है जब इसके साथ अन्य पोषक तत्वों का भी मिश्रण हो। इस वजह से फलों और सब्जियों से मिलने वाले कार्बोहाइड्रेट्स को ज्यादा हेल्दी माना जाता है। पैक्ड और स्लाइस्ड ब्रेड में हाइली प्रॉसेस्ड सिंपल कार्बोहाइड्रेट्स होता है इस वजह से यह जल्दी पच जाता है, जिससे शरीर को पोषक तत्व नहीं मिलते और भूख भी जल्दी लग जाती है जो वजन बढ़ने का कारण बनता है।

    ब्रेड की जल्दी पच जाने वाली क्वॉलिटी ब्लड शुगर के लिए भी अच्छी नहीं होती है। दरअसल, जब पेट खाना पचाता है तो इससे ब्लड शुगर लेवल पर असर पड़ता है। हाई फाइबर वाले फूड्स इस लेवल को धीरे-धीरे बढ़ाते हैं लेकिन ब्रेड जल्दी पच जाती है, जिस वजह से इंसुलिन लेवल तेजी से बढ़ जाता है, जो खासतौर पर डायबीटीज के मरीजों के लिए ठीक नहीं है।

    ब्रेड को रोज खाने पर इसमें मौजूद अनहेल्दी तत्व कई बीमारियों का कारण बन सकते हैं, जैसे डायबीटीज, दिल की बीमारी और मोटापा। इसके साथ ही ब्रेड में मौजूद ग्लटन उन लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है जिन्हें इस एलिमेंट से एलर्जी होती है। ब्रेड खाना ही है तो होल ग्रेन ब्रेड खरीदें। पैकेट पर चेक करें कि उस पर अच्छे से इस बारे में मेंशन हो। इस ब्रेड की खासियत यह है कि इसमें फाइबर के तत्व मौजूद होते हैं जिससे यह रिफाइन्ड आटे से बनी ब्रेड जैसा नुकसान नहीं करती।

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  • शरीर में हो रहे है ये बदलाव तो ये है साइलंट हार्ट अटैक के लक्षण

    शरीर में हो रहे है ये बदलाव तो ये है साइलंट हार्ट अटैक के लक्षण

     

    अगर आपको हार्ट अटैक आने वाला हो तो आपको कैसे पता चलेगा? सीने में तेज दर्द होगा, आप खांसेंगे और फिर जमीन पर गिर जाएंगे। ऐसा आपने फिल्मों में देखा होगा। लेकिन जरूरी नहीं है कि हार्ट अटैक हमेशा किसी निशानी के साथ आए। इसलिए जरूरी है कि आप समय-समय पर अपना चेकअप कराते रहें। डायबीटीज, हाइपरटेंशन और मोटापे के शिकार लोगों में हार्ट अटैक का खतरा ज्यादा होता है।

    कई लोगों को लगता है कि जब हार्ट अटैक आएगा तो उनके सीने में तेज दर्द होगा और उन्हें पता चल जाएगा। लेकिन कई बार हार्ट अटैक बिना किसी लक्षण के अचानक आता है। इसे साइलंट हार्ट अटैक कहते हैं। हालांकि, इसके पहले आपके कई लक्षण आते हैं जिनपर ध्यान देकर आप समय पर अपना इलाज करा सकते हैं।

    अगर आपकी आर्टरी में ब्लॉकेज है तो आप सीने में दबाव महसूस करेंगे। सीने में दर्द या प्रेशर महसूस हो सकता है। अगर ऐसा कोई लक्षण है तो आपके लिए चिंता की बात है। सीने में तेज दर्द उठना और धीरे-धीरे पूरे बांह में दर्द फैलना हार्ट अटैक का लक्षण है। हालांकि, कई बार सीने में दर्द न होकर सिर्फ बांह में दर्द होता है। अगर आपको अचानक चक्कर आने लगे या आप इतनी कमजोरी महसूस करें कि ठीक से खड़े भी न हो पा रहे हों तो तुरंत आसपास के लोगों को सूचित करें और डॉक्टर को बुलाएं।

    अकसर, जबड़े में या गले में ठंड और सेंसिटिविटी के कारण दर्द उठता है। लेकिन अगर सीने के बीच में दर्द हो और बढ़ता हुआ जबड़े तक पहुंच जाए तो यह हार्ट अटैक का लक्षण है। अगर आपके पैरों में सूजन है तो इसका मतलब है कि हार्ट ठीक से ब्लड को पंप नहीं कर पा रहा है। हार्ट फेलिअर से पहले किडनी भी कमजोर होने लगती है जिसकी वजह से पैरों में सूजन होती है। इस लक्षण को बिल्कुल नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।

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  • मधुमेह के मरीज वजन कम करके बच सकते है हार्ट अटैक के खतरे से, शोध में दावा

    मधुमेह के मरीज वजन कम करके बच सकते है हार्ट अटैक के खतरे से, शोध में दावा

     

    आज के दौर में इस भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों की चपेट में आने का खतरा बढ़ गया है लेकिन कुछ वजन कम करके हम इन रोगों के खतरों को कम कर सकते हैं। कुछ वजन घटाकर टाइप 2 मधुमेह के साथ जीवन व्यतीत करने वाले लोगों में हृदयाघात और स्ट्रोक जैसे हृदय रोगों के दीर्घकालिक जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

    कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के एक शोध में यह जानकारी निकलकर आई है। डायबिटोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में इंग्लैंड के 725 श्वेत, अधिक वजन वाले वयस्क प्रतिभागियों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि समुचित ढ़ंग से वजन को नियंत्रित करके हृदयाघात और स्ट्रोक जैसे हृदय संबंधी रोगों के जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

    ब्रिटेन में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पोस्टडॉक्टोरल सदस्य जीन स्ट्रेलित्ज़ ने पीटीआई-भाषा से कहा, हमारे अध्ययन में हमने देखा कि टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित कम से कम 5 प्रतिशत वजन कम करने वाले लोगों में अपना वजन बरकरार रखने वाले लोगों की तुलना में सीवीडी का 48 प्रतिशत कम खतरा था।

    शोध में हिस्सा लेने वाले लोगों का वजन मधुमेह का पता लगने के दौरान और फिर उसके एक वर्ष बाद मापा गया। स्ट्रेलित्ज़ ने आगाह किया कि अध्ययन से यह संकेत नहीं मिलता है कि जीवनशैली में बदलाव सीवीडी के इलाज या रोकथाम के लिए मधुमेह रोगियों द्वारा ली जाने वाली दवाओं की जगह ले सकते हैं। उन्होंने कहा, हमारे अध्ययन में ऐसा कोई सबूत नहीं मिलता है कि जीवनशैली में बदलाव मधुमेह की दवाओं का स्थान ले सकते हैं।

    स्ट्रेलित्ज ने बताया, हालांकि हमारे शोध से पता चलता है कि टाइप 2 मधुमेह से पीड़ित लोगों को मधुमेह के निदान के बाद सीवीडी का दीर्घकालीन खतरा कम करने में वजन कम करने से कुछ फायदा हो सकता हैं।

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  • गर्मियों में खतरनाक है हीट स्ट्रोक दिल के मरीजों के लिए, ये करे उपाय

    गर्मियों में खतरनाक है हीट स्ट्रोक दिल के मरीजों के लिए, ये करे उपाय

     

    गर्मी के मौसम में दिनोंदिन पारा बढ़ रहा है और सभी लोग गर्मी से बेहाल हैं। तेज गर्मी और धूप में लू लगने का खतरा अधिक रहता है। वैसे तो लू किसी को भी लग सकती है, लेकिन दिल के मरीजों के लिए यह कुछ ज्यादा ही खतरनाक साबित हो सकती है। इसलिए ऐसे लोगों को गर्मी में ज्यादा ध्यान से रहने की जरूरत होती है जो हार्ट संबंधी बीमारियों से ग्रस्त हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार, लू लगने की वजह से बॉडी डिहाइड्रेट हो जाती है यानी उसमें पानी की कमी हो जाती है। यही स्थिति नर्व्स यानी धमनियों में रिसाव और स्ट्रोक का कारण बन जाती है। सांस फूलने लगती है और हार्ट पर प्रेशर बढ़ जाता है। इसलिए हार्ट पेशेंट्स को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

    धूप में निकलने से पहले अपने शरीर को अच्छी तरह से ढक लें और सूती व खुले कपड़े पहनें। साथ में पानी, ग्लूकोज और नींबू रखें ताकि बीच-बीच में पीते रहें और बॉडी हाइड्रेट रहे। सत्तू का घोल, छाछ और दही भी हीट स्ट्रोक से बचाने में मदद करते हैं। बेल का जूस भी हीट स्ट्रोक यानी लू से बचाने में फायदेमंद होता है। इसमें प्रोटीन, बीटा-कैरोटीन, थायमीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन-सी होता है जो सेहत का ख्याल रखते हैं और लू से बचाते हैं। इसके अलावा यह हार्ट के लिए भी काफी फायदेमंद होता है।

    ज्यादा टाइट और गहरे रंग के कपड़े न पहनें। खाली पेट बाहर न जाएं और ज्यादा देर भूखे रहने से बचें। दिल के मरीज इस मौसम में कुछ भी तला-भुना खाने से बचें और हेल्दी डायट लें। धूप से बचने के लिए छाते का इस्तेमाल करें। इसके अलावा, सिर पर गीला कपड़ा या रुमाल रखकर चलें। चेहरे को भी कपड़े से ढक लें। प्याज का जूस भी लू लगने से बचाता है। आयुर्वेद के अनुसार, लू लगने से बचाने में प्याज का जूस काफी मददगार है। बाहर निकलने से पहले या तो इसे शरीर के खुले हिस्सों पर लगा लें या फिर रोजाना एक चम्मच प्याज का जूस थोड़े से शहद के साथ मिलाकर पिएं।

    गर्मी के मौसम में मिलने वाली अधिकांश सब्जियों की तासीर ठंडी होती है और ऐसी सब्जियों का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। जैसे टिंडी, लौकी, तोरी, कद्दू, खीरा, ककड़ी आदि। इसके अलावा आंवला, पुदीना, कच्चा प्याज भी भरपूर मात्रा में खाएं।

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