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  • अनिल अंबानी को बड़ा झटका, 21 दिन में चीनी बैंकों को देने होंगे करीब 54 अरब 48 करोड़

    अनिल अंबानी को बड़ा झटका, 21 दिन में चीनी बैंकों को देने होंगे करीब 54 अरब 48 करोड़

     

    रिलायंस समूह के चेयरमैन अनिल अंबानी को ब्रिटेन की एक अदालत ने चीन के तीन बैंकों को 21 दिन के भीतर 71.7 करोड़ डॉलर (INR करीब 54 अरब 48 करोड़ 48 हजार) का भुगतान करने को कहा है। इन बैंकों को एक ऋण करार के तहत अंबानी से यह राशि वसूल करनी है। दरअसल, लंदन में इंग्लैंड और वेल्स के हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति निजेल टियरे ने कहा कि अनिल अंबानी जिस व्यक्तिगत गारंटी को विवादित मानते हैं वह उन पर बाध्यकारी है। न्यायमूर्ति टियरे ने आदेश में कहा कि यह घोषणा की जाती है कि बचाव पक्ष (अंबानी) पर गारंटी बाध्यकारी है। ऐसे में अंबानी को बैंकों को गारंटी के रूप में 71,69,17,681.51 डॉलर चुकाने होंगे।

    वही, अनिल अंबानी के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस द्वारा वैश्विक पुनर्वित्तपोषण के लिए 2012 में लिए गए कर्ज पर दी गई कथित व्यक्तिगत गारंटी से संबंधित है। प्रवक्ता ने कहा कि स्पष्ट किया जाता है कि यह अंबानी का व्यक्तिगत ऋण नहीं है। इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल बैंक ऑफ चाइना ने यह दावा कथित रूप से उस गारंटी के आधार पर किया है जिस पर अंबानी ने कभी हस्ताक्षर नहीं किए थे।

    साथ ही, अंबानी ने लगातार कहा है कि उन्होंने अपनी ओर से किसी को यह गारंटी देने के लिए अधिकृत नहीं किया। प्रवक्ता ने कहा कि जहां तक ब्रिटेन की अदालत के फैसले का सवाल है निकट भविष्य में भारत में इसके प्रवर्तन की कोई संभावना नहीं है अंबानी इस मामले में कानूनी सलाह ले रहे हैं जिसके बाद वह आगे की कार्रवाई करेंगे। 

    क्‍या है मामला? 

    दरअसल, यह मामला चीन के इंडस्ट्रियल एंड कमिर्शियल बैंक और चाइना लि. मुंबई शाखा, चाइना डेवलपमेंट बैंक और एक्जिम बैंक और चाइना से जुड़ा है। फरवरी में इन बैंकों के समर्थन में सशर्त आदेश जारी किया गया था। जज डेविड वाक्समैन ने सात फरवरी को इस मामले में सुनवाई करते हुए 2021 में पूरी सुनवाई तक छह सप्ताह में 10 करोड़ डॉलर के भुगतान का आदेश दिया था। इस सप्ताह आए आदेश में पूर्व में तय अगले साल 18 मार्च को सुनवाई की तारीख को रद्द करते हुए बैंकों के पक्ष में अदालती लागत का भी आदेश दिया।

    इससे कुल बकाया राशि में 7,50,000 पौंड और जुड़ गए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार अंबानी को 71.7 करोड़ डॉलर की राशि चुकानी है। इसमें 54,98,04,650.16 डॉलर का मूलधन, 22 मई तक बकाया 5,19,23,451.49 डॉलर का ब्याज और 11,51,89,579.86 करोड़ डॉलर का डिफॉल्ट ब्याज शामिल है।

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  • अब यात्री जून से कर सकेंगे हवाई सफर, इन एयरलाइंसों ने शुरू की बुकिंग

    अब यात्री जून से कर सकेंगे हवाई सफर, इन एयरलाइंसों ने शुरू की बुकिंग

     

    देश में कुछ विमानन कंपनियों ने एक जून से यात्रा के लिए बुकिंग शुरू कर दी है। इस कड़ी में विमानन कंपनी इंडिगो और विस्तारा की तरफ से एयरलाइंस की बुकिंग शुरू कर दी गई है। गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते वाणिज्यिक उड़ान सेवाएं 31 मई तक निलंबित हैं। इसके बाद 1 जून से इंडिगो और विस्तारा की तरफ से बुकिंग शुरू की गई है। जबकि स्पाइसजेट की तरफ से अभी बुकिंग नहीं की जा रही है।

    दरअसल, एक सूत्र ने बताया कि घरेलू एयरलाइंस ने जून से अपनी उड़ानों के लिए बुकिंग खोल दी है। इंडिगो और विस्तारा के सूत्रों ने कहा कि वे घरेलू उड़ानों के लिए बुकिंग ले रहे हैं। हालांकि बुकिंग शुरू होने के बारे में इंडिगो, विस्तारा और गोएयर की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई।  वही,  स्पाइसजेट के एक प्रवक्ता ने संपर्क करने पर कहा, 'हमारी अंतरराष्ट्रीय बुकिंग 15 जून तक बंद है।'

    इसके अलावा एयर पैसेंजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एपीएआई) के अध्यक्ष सुधाकर रेड्डे ने सोमवार को कहा था कि कुछ विमानन कंपनियां बुकिंग कर रही हैं। बता दें कि कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए देशव्यापी लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही 25 मार्च से वाणिज्यिक उड़ानों को निलंबित कर दिया गया था। 

     

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  • कोरोना लॉकडाउन : मारुति सुजुकी मानेसर कारखाने में 12 मई से फिर से शुरू करेगी उत्पादन

    कोरोना लॉकडाउन : मारुति सुजुकी मानेसर कारखाने में 12 मई से फिर से शुरू करेगी उत्पादन

     

    कोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए देश में 17 मई तक लॉकडाउन जारी है। ऐसे में लॉकडाउन के कारण देश की कई सरकारी और निजी कंपनी बंद पड़ी है। लेकिन अर्थव्यवस्था को दोबारा से पटरी पर लाने के लिए अब धीरे-धीरे सभी कामों को कुछ नियमों और शर्तों के साथ दोबारा से शुरू किया गया है। इसी कड़ी में देश की सबसे बड़ी कार विनिर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआई) ने शेयर बाजार को सूचना देते हुए बताया कि वह हरियाणा के मानेसर स्तिथ कारखाने में 12 मई से उत्पादन का कार्य फिर से शुरू करने जा रही है।

    बता दें कि कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के लिए आवागमन पर राष्ट्रव्यापी पाबंदियों के चलते कंपनी ने अपने कारखाने बंद कर रखे हैं। ऐसे में पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाने के सरकार के निर्णय के बाद वाहन और कई अन्य क्षेत्रों की कंपनियां अपने कल-कारखाने फिर चालू कर रही हैं। इसके लिए उन्हें सरकारों की ओर से जारी कुछ हिदायतों का पालन करना जरूरी है।

    दरअसल, मारुति सुजुकी ने बताया कि हरियाणा सरकार से उसे मानेसर कारखाना चालू करने की अनुमति 22 अप्रैल को ही मिल चुकी है। लेकिन वह वाहनों के उत्पादन में निरंतरता बनाए रखने और बाजार में उनकी बिक्री की सुविधा का आकलन करने के बाद ही उत्पादन शुरू करेगी। कंपनी ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि वह मानेसर कारखाने में 12 मई को फिर उत्पादन चालू करेगी। वही, गुडगांव जिला प्रशासन ने मारुति सुजुकी को अभी एक पाली के आधार पर काम शुरू करने की छूट दी है।

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  • पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ोत्तरी से सरकार को 1.6 लाख करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना

    पेट्रोल-डीजल पर उत्पाद शुल्क बढ़ोत्तरी से सरकार को 1.6 लाख करोड़ अतिरिक्त राजस्व मिलने की संभावना

     

    देश में फैली कोरोना वायरस (Covid-19) महामारी के चलते नकदी संकट से जूझ रही केंद्र सरकार को पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में रिकॉर्ड बढ़ोत्तरी से चालू वित्त वर्ष में 1.6 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व मिल सकता है। इससे सरकार को कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन से हो रहे राजस्व नुकसान की भरपाई करने में मदद मिलेगी। जानकारी के लिए बता दें कि मंगलवार देर रात सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 13 रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया।

    अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें दो दशक के निचले स्तर पर चली गयी हैं। इस स्थिति का लाभ उठाने के लिए सरकार ने यह निर्णय किया है। औद्योगिक सूत्रों के मुताबिक दो महीने से कम की अवधि में यह दूसरी बार उत्पाद शुल्क बढ़ाया गया है। वित्त वर्ष 2019-20 के बराबर उपभोग होने पर इससे सरकार को 1.7 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय होने की उम्मीद है।

    हालांकि कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से किए गए लॉकडाउन के चलते ईंधन के उपभोग में कमी आई है क्योंकि लोगों की आवाजाही पर रोक है। ऐसे में चालू वित्त वर्ष 2020-21 के बचे 11 महीनों में इस शुल्क बढ़ोत्तरी से होने वाली अतिरिक्त आय 1.6 लाख करोड़ रुपये रह सकती है। इससे पहले सरकार ने 14 मार्च को पेट्रोल और डीजल पर तीन-तीन रुपये प्रति लीटर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था।

    सार्वजनिक क्षेत्र की इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 16 मार्च से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा है। सरकार के इस कदम से उत्पाद शुल्क के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी के चलते उनके द्वारा कमाया गया लाभ गिर सकता है। अधिकारियों ने बताया कि सामान्य तौर पर पेट्रोल-डीजल पर कर की दर बदलने का सीधा असर ग्राहक पर पड़ता है और इसकी कीमतों में फेरबदल होता है।

    लेकिन 14 मार्च को उत्पाद शुल्क में की गयी बढ़ोत्तरी के बावजूद ईंधन की कीमतें स्थिर रहीं। इस बढ़े हुए शुल्क को कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें गिरने से हुए लाभ से बदल लिया गया। ब्रेंट कच्चा तेल की कीमत 18 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थी जो 1999 के बाद का सबसे निचला स्तर था।

    इस बारे में रेटिंग एजेंसी मूडीज इंवेस्टर्स सर्विस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरट वित्त पोषण) ने कहा कि भारत सरकार के पेट्रोल पर 21 डॉलर प्रति बैरल और डीजल पर 27 डॉलर प्रति बैरल कर बढ़ाने से सरकार को 21 अरब डॉलर का राजस्व मिलेगा, यदि साल भर इस शुल्क बढ़ोत्तरी को बरकरार रखा जाता है तो। 

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  • शराब के बाद अब दिल्ली में पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा, केजरीवाल सरकार ने बढ़ाया वैट

    शराब के बाद अब दिल्ली में पेट्रोल-डीजल हुआ महंगा, केजरीवाल सरकार ने बढ़ाया वैट

     

    दिल्ली में शराब के बाद अब केजरीवाल सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ा दिया है। सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में पेट्रोल पर 1.67 रुपये प्रति लीटर वैट बढ़ाया गया है। वहीं, डीजल पर 7.10 रुपये प्रति लीटर वैट बढ़ाया गया है। बता दें कि दिल्ली सरकार ने आज यानि मंगलवार को पेट्रोल और डीजल पर वैट बढ़ाने का ऐलान किया।

    ऐसे में पेट्रोल पर वैट को बढ़ाकर 27 फीसदी से 30 फीसदी कर दिया गया है, जबकि डीजल पर 16.77 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया है। इसके साथ दिल्ली में अब पेट्रोल की कीमत 71.26 प्रति लीटर हो गई है, जबकि डीजल की कीमत बढ़कर 69.29 प्रति लीटर हो गई है। आपको बता दें  कि इससे पहले दिल्ली में सरकार ने शराब पर 70 फीसद कोरोना सेस लगा दिया गया।

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  • रेलवे प्रवासी मजदूरों को नहीं बेच रहा टिकट, प्रवासियों को फ्री भोजन और बोतलबंद पानी दिया जा रहा

    रेलवे प्रवासी मजदूरों को नहीं बेच रहा टिकट, प्रवासियों को फ्री भोजन और बोतलबंद पानी दिया जा रहा

     

    भारतीय रेलवे ने प्रवासी मजदूरों को लेकर साफ कर दिया है कि वह प्रवासियों से रेल किराया नहीं वसूल रहा है। रेलवे का कहना है कि वह प्रवासियों को टिकट नहीं बेच रहा है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, रेल मंत्रालय सूत्र के अनुसार भारतीय रेलवे सामाजिक दूरी को बनाए रखने के लिए प्रत्येक कोच में बर्थ खाली रखते हुए श्रमिक विशेष ट्रेनें चला रहा है। ट्रेनें गंतव्य स्थान से खाली लौट रही हैं। रेल मंत्रालय द्वारा प्रवासियों को मुफ्त भोजन और बोतलबंद पानी दिया जा रहा है। रेलवे ने देश के विभिन्न हिस्सों से अब तक 34 श्रमिक विशेष ट्रेनें चलाई हैं। संकट के समय में विशेष रूप से गरीब से गरीब लोगों को भी सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा प्रदान करने की अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को पूरा कर रही है।

     

    सूत्रों के मुताबिक, रेलवे राज्य सरकारों से इस वर्ग के लिए केवल मानक किराया वसूल रहा है जो रेलवे द्वारा ली जाने वाली कुल लागत का महज 15 प्रतिशत है। रेलवे प्रवासियों को कोई टिकट नहीं बेच रहा है। केवल राज्यों द्वारा प्रदान की गई सूचियों के आधार पर यात्रियों को यात्रा करवा रहा है।

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  • Video: देशभर में दिखी शराब की बेताबी, दुकानों पर लगी लंबी-लंबी लाइनें

    Video: देशभर में दिखी शराब की बेताबी, दुकानों पर लगी लंबी-लंबी लाइनें

     

    देश में लॉकडाउन के तीसरे चरण में गृह मंत्रालय की तरफ से कुछ शर्तों के साथ कई दुकानें खोलने का फैसला किया गया है। इसमें शराब की दुकानें खुलना भी शामिल हैं। शराब के बिना लगभग 1.5 महीनों से जी रहे लोगों की बेताब आज इस कदर देखने को मिल रही है कि सुबह से ही लोगों ने ठेकों के आगे लंबी-लंबी लाइने लगा ली। वहीं राजधानी दिल्ली में तो शराब की एक दुकान के आगे लोगों ने करीब एक किलोमीटर लंबी लाइन लगा ली।

    कर्नाटक के बेंगलुरु में एक शराब की दुकान पर लोगों की काफी भीड़ दिखे जा रही है। राज्य सरकार ने सुबह 9 से लेकर शाम 7 बजे तक ही शराब की बिक्री की अनुमति दी है। लोग सुबह से ही लंबी-लंबी कतारों में शराब लेने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।

    देशभर में जारी लॉकडाउन 3.0 के बीच राजनांदगांव में सरकार द्वारा शराब की दुकानें खोले जाने के निर्देश के बाद शराब की दुकान के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ी। पुलिस को उनके बीच सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने में काफी मुश्किल का सामना करना पड़ा। जिसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

    बता दें कि शराब की बिक्री से वित्त वर्ष 2019-20 में महाराष्ट्र ने 24,000 करोड़ रुपये, पश्चिम बंगाल ने 11,874 करोड़ रुपये, तेलंगाना ने 21,500 करोड़, उत्तर प्रदेश ने 26,000 करोड़, कर्नाटक ने 20,948 करोड़, पंजाब ने 5,600 करोड़ रुपये और राजस्थान ने 7,800 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। दिल्ली को भी इस दौरान करीब 5,500 करोड़ रुपये का आबकारी शुल्क मिला था।

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  • सोमवार से मिलनी शुरू हो जाएगी जनधन खाते में दूसरी किस्त, पैसा निकालने का अब ये है नियम

    सोमवार से मिलनी शुरू हो जाएगी जनधन खाते में दूसरी किस्त, पैसा निकालने का अब ये है नियम

     

    देश में जारी कोरोना वायरस के कहर के बीच महिला जनधन खाताधारकों के खातों में 500 रुपये की सरकारी सहायता की दूसरी किस्त सोमवार से मिलनी शुरू हो जाएगी। कोविड-19 संकट के दौरान गरीबों की मदद के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 मार्च को महिला जनधन खाताधारकों के खातों में अप्रैल से तीन महीने तक हर माह 500 रुपये की मदद देने की घोषणा की थी। वित्तीय सेवा सचिव देवाशीष पांडा ने शनिवार को ट्वीट के जरिये यह जानकारी दी।

    उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत प्रधानमंत्री जनधन योजना (पीएमजेडीवाई) महिला खाताधारकों के बैंक खातों में मई माह की किस्त भेज दी गई है।’’ उन्होंने कहा कि लाभार्थियों को यह पैसा निकालने के लिए एक सारिणी जारी की गई है। उसी के हिसाब से वे बैंक शाखा या ग्राहक सेवा केंद्र (सीएसपी) जाकर पैसा निकालें। इस पैसे को एटीएम से भी निकाला जा सकता है। 

    उन्होंने कहा कि बैंक शाखाओं में भीड़ न जुटे इसलिए इस राशि का स्थानांतरण पांच दिन की अवधि में किया जाएगा। इससे सामाजिक दूरी के दिशानिर्देशों का अनुपालन करने में मदद मिलेगी। तय सारिणी के अनुसार ऐसी महिलाएं जिनके जनधन खाते का आखिरी अंक शून्य और एक है उनके खातों में यह पैसा चार मई को डाला जाएगा। जिनके खातों का आखिरी अंक दो और तीन है, वे पांच मई को अपने खातों से पैसा निकाल सकती हैं। 

    छह मई को चार और पांच अंतिम अंक और आठ मई को छह और सात अंतिम अंक की महिला लाभार्थियों के खातों में यह पैसा डाला जाएगा। जिन खातोंधारकों के खातों का अंतिम अंक आठ और नौ है उन्हें 11 मई को यह पैसा मिलेगा। किसी आपात स्थिति में महिला खाताधारक तत्काल यह पैसा निकाल सकेंगी। 11 मई के बाद वे कभी भी अपनी सुविधानुसार यह पैसा निकाल सकेंगी। 

     

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  • आज से 162 रुपए सस्ता हुआ रसोई गैस सिलेंडर, जानें कटौती के बाद किस राज्य में कितना है दाम

    आज से 162 रुपए सस्ता हुआ रसोई गैस सिलेंडर, जानें कटौती के बाद किस राज्य में कितना है दाम

     
    देश में जारी लॉकडाउन के बीच आज एलपीजी सिलेंडर की कीमत में कटौती की गई है। इंडियन ऑयल कंपनी ने बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर पर भारी कटौती की है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने बिना सब्सिडी वाले एलपीजी रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 162 रुपए प्रति की कटौती की है।
     
    वही, ऑयल मार्केटिंग कंपनी की तरफ से जारी की गई नई लिस्ट के मुताबिक, कमर्शियल सिलेंडर पर भी कटौती की है। 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर के दाम 256 रुपए कम कर दी गए हैं। ऐसे में 19 किलोग्राम वाले सिलेंडर अब 1029.50 रुपए का हो गया है। यह जानकारी इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दी गई है। 
     
    जानिए किस राज्य में कितने का हुआ सिलेंडर
         
    दिल्ली - 581.50
    कोलकाता - 584.50  
    मुंबई - 579
    चेन्नई - 569.50
    गुरुग्राम - 588.50
    नोएडा - 585.50
    बेंगलुरु - 585
    भुवनेश्वर - 592.50
    चंडीगढ़ - 583
    हैदराबाद- 589.50
    जयपुर - 583
    लखनऊ - 581
    पटना - 621
    जानकारी के लिए बता दें कि तेल विपणन कंपनियां हर महीने की एक तारीख को एलपीजी सिलेंडर के दामों की समीक्षा करती है। 

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  • चोकसी सहित 50 डिफाल्टर्स का 68,607 करोड़ का कर्ज बट्टे खाते में, कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना

    चोकसी सहित 50 डिफाल्टर्स का 68,607 करोड़ का कर्ज बट्टे खाते में, कांग्रेस ने केंद्र पर साधा निशाना

     

    देश के बैंकों ने तकनीकी तौर पर 50 बड़े विलफुल डिफाल्टर्स के 68,607 करोड़ रुपए के कर्ज की बड़ी राशि को को बट्टा खाते में डाल दिया है। भगोड़ा हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी भी इन विलफुल डिफॉल्टर्स की सूची में शामिल है। यह बात भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत दी गई जानकारी से सामने आई है।

    दरअसल, आरटीआई कार्यकर्ता साकेत गोखले ने सूचना का अधिकार कानून के तहत देश के केंद्रीय बैंक से 50 विलफुल डिफाल्टर्स का ब्योरा और उनके द्वारा लिए गए कर्ज की 16 फरवरी तक की स्थिति का के बारे में जानकारी मांगी थी। जिसके बाद गोखले ने बताया, 'मैंने यह आरटीआई इसलिए डाली क्योंकि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और वित राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा संसद के बजट सत्र के दौरान बीते 16 फरवरी को पूछे गए तारांकित सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया था।'

    गोखले ने आगे बताया कि जो जानकारी सरकार ने नहीं दी वह आरबीआई के केंद्रीय जन सूचना आधिकारी अभय कुमार ने 24 अप्रैल को दी, जिसमें कई चैंकाने वाले खुलासे हुए हैं। आरबीआई ने बताया कि इस राशि (68607 करोड़ रुपये) में बकाया और टेक्निकली या प्रूडेंशियली 30 सितंबर, 2019 तक बट्टा खाते में डाली गई रकम है। इससे पहले की रिपोर्ट में एक चूक हो गई थी, जिसे अब सुधार ली गई है। इसके अलावा आरटीआई कार्यकर्ता ने कहा, 'आरबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के दिसंबर 2015 के फैसले का हवाला देते हुए विदेशी कर्जदारों के संबंध में जानकारी देने से मना कर दिया था।'

    शीर्ष 50 डिफाल्टर कंपनियों के 68,607 करोड़ रुपये के बकाये को तकनीकी रूप से बट्टे खाते में डालने वाली बात जब सामने आई तो इसके बाद कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। इसके बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मुद्दे पर मोर्चा संभाला।

    दरअसल, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने रिजर्व बैंक के इस जवाब को सार्वजनिक करते हुए जान-बूझ कर बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले शीर्ष 50 कर्जदारों की सूची जारी की, जिसमें विजय माल्या और मेहुल चोकसी के नाम भी थे। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कहा कि उन्होंने सरकार से संसद में बैंक का कर्ज नहीं लौटाने वाले 50 बड़े डिफाल्टरों के बारे में जानकारी मांगी थी।इस प्रकरण के बाद ही वित्तमंत्री ने ये ट्वीट किए।

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने ट्वीट में लिखा, 'लोकसभा एमपी राहुल गांधी और कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने बेशर्मी के साथ लोगों को गुमराह की कोशिश की है। बिल्कुल कांग्रेस वाले तरीके से उन्होंने संदर्भ से बाहर निकालकर तथ्यों को सनसनीखेज बनाया है।'

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  • कोरोना संकट: RBI ने म्यूचुअल फंड्स के लिए 50000 करोड़ की विशेष नकदी सुविधा का किया ऐलान

    कोरोना संकट: RBI ने म्यूचुअल फंड्स के लिए 50000 करोड़ की विशेष नकदी सुविधा का किया ऐलान

     

    म्यूचुअल फंड पर नकदी के दबाव को कम करने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने आज एक अहम फैसला लिया है। आरबीआई ने म्यूचुअल फंड के लिए 50 हजार करोड़ के विशेष नकदी सुविधा का ऐलान किया है। दरअसल, आरबीआई ने सोमवार को म्‍यूचुअल फंड्स के लिए एक विशेष ऋण योजना का ऐलान किया, जिसके तहत उन्‍हें 50,000 करोड़ रुपए का लोन उपलब्‍ध कराया जाएगा, ताकि उद्योग में तरलता का संकट न खड़ा हो।

    रिजर्व बैंक ने एक बयान में कहा कि COVID-19 की वजह से पूंजी बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है। कोरोना महामरी ने म्यूचुअल फंड (MF) पर तरलता का दबाव डाला है। आरबीआई ने कहा, 'एमएफ पर तरलता दबाव को कम करने के उद्देश्य से, 50,000 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड के लिए विशेष तरलता सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।'

    इसके अलावा भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जोर दिया कि वह  COVID-19 के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे उसे वह उठाएगा। हालांकि इस समय यह संकट उच्‍च जोखिम वाले ऋण म्‍यूचुअल फंड्स में ही है, जबकि शेष उद्योग में तरलता बनी हुई है।

    वही, स्‍पेशल लिक्विडिटी फंड-एमएफ के तहत आरबीआई फ‍िक्‍स रेपो रेट पर 90 दिन की अवधि का एक रेपो ऑपरेशन शुरू करेगा। एसएलएफ-एमएफ ऑन-टॉप और ओपन-एंडेड है और बैंक सोमवार से शुक्रवार तक किसी भी दिन वित्‍त हासिल करने के लिए अपनी बोली जमा कर सकते हैं। यह सुविधा 27 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और 11 मई, 2020 तक चालू रहेगी। बाजार परिस्थितियों के मुताबिक केंद्रीय बैंक इसकी समय-सीमा और कोष में वृद्धि करने पर विचार करेगा।

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  • कोरोना संकट: सरकार का बड़ा फैसला, केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021 तक लगाई रोक

    कोरोना संकट: सरकार का बड़ा फैसला, केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर जुलाई 2021 तक लगाई रोक

     

    देश में फैले कोरोना वायरस के चलते अर्थव्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ा है। इस बीच गुरुवार को केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला किया है। फैसले के अनुसार, केंद्रीय कर्मचारियों को मिलने वाले डीए यानी महंगाई भत्ते बढ़ोतरी पर रोक लगा दी गई है। ये रोक एक जुलाई 2021 तक जारी रहेगी।

    दरअसल, वित्त मंत्रालय ने आज यह जानकारी दी है कि केंद्रीय सरकार के कर्मचारियों को महंगाई भत्ता और केंद्रीय सरकार के पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत की किस्त 1 जनवरी 2020 से देय नहीं होगी। 1 जुलाई 2020 और 1 जनवरी 2021 से डीए और डीआर की अतिरिक्त किस्तों का भी भुगतान नहीं किया जाएगा। हालांकि, वर्तमान दरों पर महंगाई भत्ता और महंगाई राहत का भुगतान जारी रहेगा। 

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  • कोरोना संकट के बीच इतिहास में पहली बार जीरो डॉलर के नीचे गया कच्चे तेल का दाम

    कोरोना संकट के बीच इतिहास में पहली बार जीरो डॉलर के नीचे गया कच्चे तेल का दाम

     

    कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच सोमवार को अमेरिकी कच्चे तेल की कीमत रसातल में पहुंच गई। न्यूयॉर्क में कच्चे तेल की कीमत में इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी बेंचमार्क क्रूड वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) ने 20 अप्रैल को अब तक के इतिहास में अपना सबसे बुरा दिन देखा। सोमवार को डब्ल्यूटीआई में कच्चा तेल का भाव गिरकर 0 डॉलर प्रति बैरल से भी नीचे -$37.63 प्रति बैरल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।

    कारोबार की शुरुआत 18.27 डॉलर प्रति बैरल से हुई थी लेकिन यह ऐतिहासिक 1 डॉलर और उसके बाद जीरो और बाद में कम होकर निगेटिव में पहुंच गई। बता दें कि 1946 के बाद पहली बार इस तरह की गिरावट देखने को मिली है। कच्चे तेल की मांग घटने और स्टोरेज की कमी की वजह से तेल कीमतों में यह गिरावट आई है।

    गौरतलब है कि तेल के सबसे बड़े निर्यातक OPEC और इसके सहयोगी जैसे रूस, पहले ही तेल के उत्पादन में रिकॉर्ड कमी लाने पर सहमत हो चुके थे। अमेरिका और बाकी देशों ने भी तेल उत्पादन में कमी लाने का फैसला किया थाा। लेकिन, कोविड-19 के चलते बंद पड़े उद्योग धंधे की वजह से तेल उत्पादन में कमी लाने के बावजूद दुनिया के पास इस्तेमाल की जरूरत  से अधिक कच्चा तेल उपलब्ध है।

    वही, इससे पहले सोमवार को बाजार खुलने पर भाव यह 10.34 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया था जो 1986 के बाद इसका सबसे निचला स्तर था। कोरोना वायरस संकट की वजह से दुनियाभर में घटी तेल की मांग के चलते इसकी कीमतें लगातार गिर रही है।

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  • अब बिना मास्क के नहीं मिलेगा पेट्रोल और डीजल, देश में लागू हुआ 'No mask, No Fuel' नियम

    अब बिना मास्क के नहीं मिलेगा पेट्रोल और डीजल, देश में लागू हुआ 'No mask, No Fuel' नियम

     

    देश में 3 मई तक लागू लॉकडाउन के बीच 20 अप्रैल से कई क्षेत्रों में थोड़ी ढील दी गई है। ऐसे में आज सड़को पर वाहनों की आवाजाही भी बढ़ गई है। लेकिन इस बीच देश में आज से एक दिलचस्प नियम शुरू हो गया है जिसके चलते अब जो भी पेट्रोल पंप पर बिना मास्क के पेट्रोल या डीजल लेने जायेगा उसे वह नहीं मिलेगा।

    जी हां, कोविड-19 के लगातार बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने कहा कि यह हमने यह फैसला पेट्रोल पंप पर काम करने वाले स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। यह देशभर में लागू है। ऐसे में देशभर में पेट्रोल पंपों पर काम करने वाले स्टाफ और आम लोगों की सुरक्षा को देखते हुए 'No mask, No Fuel' की स्ट्रैटेजी अपनाई जा रही है। यानी पेट्रोल या डीजल भरवाने जा रहे हैं लोगों के लिए अब मास्क पहनना अनिवार्य है।

    आपको बता दें कि लॉकडाउन के दौरान जरूरी सेवाओं के तहत पेट्रोल पंप को भी शामिल किया गया है। वही, ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने एकमत सै फैसला लिया है कि​ अगर कोई ग्राहक बिना मास्क लगाए पेट्रोल पंप पर ईंधन के लिए आए तो उन्हें ईंधन नहीं दिया जाएगा।

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  • केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में नहीं होगी 20 फीसदी की कटौती : वित्त मंत्रालय

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में नहीं होगी 20 फीसदी की कटौती : वित्त मंत्रालय

     

    केंद्र सरकार के कर्मचारियों की पेंशन में कोई कटौती हो रही है या नहीं वित्त मंत्रालय ने इसको साफ किया है। दरअसल, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि सरकार पेंशन में 20 फीसदी कटौती करने पर विचार कर रही है।

    इस पर रविवार को वित्त मंत्रालय की ओर से ट्वीट किया गया, 'रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि केंद्र कर्मचारियों के पेंशन में 20 फीसदी कटौती की योजना है। यह खबर झूठ है। पेंशन भुगतान में कोई कटौती नहीं की जाएगी। यह साफ किया जाता है कि सरकार के कैश मैनेजमेंट निर्देशों के तहत सैलरी और पेंशन पर कोई प्रभाव नहीं होगा।' मंत्रालय के इस ट्वीट को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी रीट्वीट किया है।

    आपको बता दें कि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश में लागू लॉकडाउन के कारण अर्थव्यवस्था काफी प्रभावित हुई है। जिसके चलते सरकार ने पिछले दिनों राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से लेकर सांसदों तक के वेतन में कटौती की है। इसके अलावा राज्यों ने भी विधायक और बड़े कर्मचारियों के वेतन में कमी की घोषणा की है। इसके बाद यह अफवाह भी तेजी से फैलने लगी थी कि सरकार अब रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन में भी कटौती करने जा रही है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स मं भी दावा किया गया कि पेंशन में 20 फीसदी तक कटौती की जा सकती है। 

    इसके अलावा ट्विटर पर एक यूजर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को टैग करते हुए पूछा था कि केंद्र सोशल मीडिया और टीवी चैनल्स पर सरकार की ओर से जारी एक सर्कुलर देखा, जिसमें पेंशन में 20% की कटौती की बात कही गई है। इससे पेंशनरों पैनिक माहौल पैदा हो रहा है। क्या यह सच है? कृपया तुरंत स्पष्ट करें।' इसका जवाब देते हुए मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यह खबर झूठी है और पेंशन में किसी प्रकार की कटौती नही होगी।

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