Indians In Middle East: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच सबसे बड़ा सवाल भारतीयों की सुरक्षा का है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद कई गल्फ देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकाने निशाने पर आए हैं। मिडिल ईस्ट के इन देशों में लाखों भारतीय काम करते हैं और बड़ी संख्या में परिवार वहीं बसे हुए हैं. ऐसे हालात में यह जानना जरूरी है कि किस देश में कितने भारतीय हैं और भारत सरकार ने उनके लिए क्या कदम उठाए हैं।
मिडिल ईस्ट में बसते हैं कितने भारतीय?
भारत के विदेश मंत्रालय के ओवरसीज इंडियंस डेटा के मुताबिक, खाड़ी और आसपास के देशों में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। सबसे ज्यादा भारतीय संयुक्त अरब अमीरात में हैं. वहां करीब 35,54,274 भारतीय रहते हैं। इसके बाद सऊदी अरब में 24,60,603 भारतीय हैं।
वहीं कुवैत में 9,93,284, कतर में 8,35,175 और बहरीन में 3,23,908 भारतीय बसे हुए हैं. ओमान में 6,84,771 भारतीय रहते हैं। तनाव से सीधे प्रभावित देशों में भी भारतीय मौजूद हैं। इजराइल में लगभग 20,000 भारतीय हैं। जॉर्डन में 16,897, इराक में 17,100 और ईरान में 10,320 भारतीय नागरिक रहते हैं।
लेबनान में करीब 3,000, मिस्र में 3,141, यमन में 700, सीरिया में 97 और फिलिस्तीन में 11 भारतीय नागरिक दर्ज हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि मिडिल ईस्ट में लाखों भारतीय मौजूद हैं और किसी भी बड़े संघर्ष का असर सीधे उन पर पड़ सकता है।
किन देशों में सबसे ज्यादा जोखिम?
यूएई, सऊदी अरब, कतर, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार हैं। ये देश तेल उत्पादन और व्यापार के बड़े केंद्र हैं. इजराइल, इराक और ईरान जैसे देशों में भारतीयों की संख्या कम है, लेकिन वहां सीधा सैन्य तनाव है, इसलिए वहां रहने वाले भारतीयों के लिए सुरक्षा ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
अगर हवाई हमले या मिसाइल हमले बढ़ते हैं तो एयरपोर्ट बंद होने, उड़ानें रद्द होने और आवाजाही रुकने का खतरा रहता है। इससे भारतीय नागरिकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।
भारत के लिए यह इलाका क्यों अहम?
खाड़ी क्षेत्र भारत के लिए कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात सऊदी अरब, यूएई, इराक और कुवैत जैसे देशों से करता है। अगर युद्ध बढ़ता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है और भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
दूसरा, इन देशों में काम करने वाले भारतीय हर साल बड़ी मात्रा में पैसा भारत भेजते हैं. यह रेमिटेंस भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम है। अगर हालात और बिगड़ते हैं और कामकाज प्रभावित होता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
तीसरा, व्यापार और शिपिंग पर असर पड़ सकता है।ओमान और यूएई जैसे देशों के पोर्ट भारत के लिए अहम व्यापारिक मार्ग हैं।
भारत सरकार की एडवाइजरी
भारत सरकार ने ईरान, इजराइल, सीरिया, इराक, ओमान, कतर, फिलिस्तीन, सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कुवैत में रह रहे भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में नागरिकों से सतर्क रहने को कहा गया है। खास तौर पर इजराइल में रहने वाले भारतीयों को स्थानीय अधिकारियों और होम फ्रंट कमांड द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का सख्ती से पालन करने की सलाह दी गई है।