Vantara: सुप्रीम कोर्ट ने वन्यजीव बचाव, पुनर्वास और संरक्षण से जुड़े एक मामले में वनतारा के खिलाफ दायर नई अर्जी खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि जिन आरोपों को फिर से उठाने की कोशिश की गई है, वे पहले ही सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच दल यानी SIT की विस्तृत जांच के दायरे में आ चुके हैं और उन पर अंतिम रूप से विचार हो चुका है।
कोर्ट ने SIT रिपोर्ट को दोबारा खोलने से इनकार किया
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि जिन मामलों की जांच SIT कर चुकी है और जिन पर कोर्ट पहले फैसला दे चुका है, उन्हें बार-बार दोबारा नहीं खोला जा सकता। कोर्ट ने वनतारा के खिलाफ जांच, जब्ती या अभियोजन जैसी मांगों को अस्वीकार कर दिया।
आदेश में कोर्ट ने कहा कि यूएई, वेनेजुएला, ब्राजील, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों से जुड़े जानवरों के ट्रांसफर वैध दस्तावेजों, CITES परमिट और केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की मंजूरी के आधार पर हुए थे। कोर्ट ने इन्हें गैर-व्यावसायिक और जू-टू-जू ट्रांसफर माना।
जानवरों के ट्रांसफर को वैध और नियमों के अनुरूप माना गया
सुप्रीम कोर्ट ने जामनगर में वनतारा के काम की अहमियत को भी माना। आदेश में लुप्तप्राय मैकॉ पक्षियों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रम का जिक्र किया गया। कोर्ट ने कहा कि जिन जानवरों को कानूनी तरीके से लाकर सुरक्षित माहौल और देखभाल दी जा रही है, उन्हें वहां से हटाना उनके हित में नहीं होगा। बल्कि वह क्रूरता के दायरे में आएगा।
हर जीवन की रक्षा का संकल्प और मजबूत हुआ- वनतारा
वनतारा के सीईओ विवान करणी ने कहा, “यह फैसला दिखाता है कि हमारा काम सही दिशा में है। वनतारा में आया हर जानवर कानूनी प्रक्रिया के तहत आया है, उसकी पूरी संवेदनशीलता के साथ देखभाल की गई है और उसे जीवनभर सुरक्षा दी जा रही है। हमारे लिए संरक्षण सिर्फ कहने की बात नहीं, बल्कि हर दिन निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।”