Gold Colour: सोना अपनी शानदार पीली चमक की वजह से हजारों सालों से सभ्यताओं को आकर्षित करता आ रहा है। ज्यादातर धातुओं के उलट, जो चांदी जैसी या फिर ग्रे रंग की दिखती हैं, सोने का रंग प्राकृतिक रूप से गहरा सुनहरा होता है। यही वजह है कि यह दुनिया की सबसे कीमती धातुओं में से एक माना जाता है। आइए जानते हैं कि आखिर सोने का रंग पीला ही क्यों होता है।
रंग कैसे दिखता है?
किसी भी चीज का रंग उस रोशनी की वेवलेंथ पर निर्भर होता है, जिसे वह रिफ्लेक्ट करती है। जब सूरज की सफेद रोशनी किसी चीज पर पड़ती है, तो कुछ रंग सोख लिए जाते हैं, जबकि कुछ रिफ्लेक्ट हो जाते हैं। रिफ्लेक्ट हुई रोशनी हमारी आंखों तक पहुंचती है और हमारा दिमाग उसे उस चीज के रंग के तौर पर समझता है। ज्यादातर धातुएं, जैसे चांदी और एल्यूमीनियम, लगभग पूरे विजिबल स्पेक्ट्रम को रिफ्लेक्ट करती हैं। इस वजह से वे सफेद या फिर चांदी जैसी दिखती हैं।
सोना नीली रोशनी को सोखता है
सोना दूसरी ज्यादातर धातुओं से अलग तरह से व्यवहार करता है। सभी विजिबल रंगों को रिफ्लेक्ट करने के बजाय, सोना नीली और बैंगनी वेवलेंथ के एक बड़े हिस्से को सोख लेता है। वहीं, यह लाल, नारंगी और पीली वेवलेंथ को हमारी आंखों तक वापस रिफ्लेक्ट करता है। इन रिफ्लेक्ट हुए रंगों के मेल से सोने को उसका खास पीला रंग मिलता है।
सोने के भारी एटम की भूमिका
सोने का एटॉमिक नंबर 79 है। इसका मतलब है कि सोने के हर एटम के न्यूक्लियस में 79 प्रोटॉन होते हैं। न्यूक्लियस काफी भारी होता है। इस वजह से इसके सबसे करीब वाले इलेक्ट्रॉन मजबूत आकर्षण बल (Attractive Force) को महसूस करते हैं। ये अंदरूनी इलेक्ट्रॉन बहुत तेज रफ्तार से घूमते हैं। उनकी गति प्रकाश की रफ्तार के लगभग आधे तक पहुंच जाती है।
आइंस्टीन की थ्योरी
इतनी ज्यादा रफ्तार पर अल्बर्ट आइंस्टीन की रिलेटिविटी (सापेक्षता) की थ्योरी के प्रभाव महत्वपूर्ण हो जाते हैं। रिलेटिविटी के मुताबिक, बहुत तेज रफ्तार से चलने वाले पार्टिकल ऐसे व्यवहार करते हैं, जैसे उनका द्रव्यमान (Mass) बढ़ गया हो। इसकी वजह से सोने के एटम में अंदरूनी इलेक्ट्रॉन ऑर्बिटल थोड़े सिकुड़ जाते हैं और न्यूक्लियस के और करीब आ जाते हैं।
इसके बाद इलेक्ट्रॉनों को अलग-अलग एनर्जी लेवल के बीच जाने के लिए जरूरी ऊर्जा बदल जाती है। यही वजह है कि सोने के एटम दूसरे रंगों की तुलना में नीली रोशनी को अधिक प्रभावी ढंग से सोखते हैं। क्योंकि रिफ्लेक्ट हुई रोशनी से नीली वेवलेंथ हट जाती है, इसलिए बची हुई रिफ्लेक्टेड रोशनी मुख्य रूप से पीले, नारंगी और लाल रंग की होती है। यही वैज्ञानिक कारण है कि सोना हमें प्राकृतिक रूप से पीले रंग का दिखाई देता है।