Iran War: पश्चिम एशिया में जारी संकट को देखते हुए मोदी सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की। सरकार की तरफ से विदेश सचिव और विदेश मंत्री ने हॉर्मुज स्ट्रेट से लेकर अन्य भारतीय कंसर्न के बारे में विस्तार से प्रेजेंटेशन दिया। बैठक में ईरान युद्ध और ऊर्जा सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर बातचीत हुई। यह बैठक करीब पौने दो घंटे चली।
सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर से पाकिस्तान की मध्यस्थता को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि हम कोई दलाल देश नहीं हैं जो पाकिस्तान से मध्यस्थता की बात करेंगे। हम मध्यस्थता नहीं करेंगे, हम क्यों करें मध्यस्थता। जयशंकर ने कहा कि अमेरिका 1981 से पाकिस्तान को मध्यस्थता के लिए इस्तेमाल कर रहा है।
सर्वदलीय बैठक में यह सवाल सपा नेता धर्मेंद्र यादव और कांग्रेस नेता मुकुल वासनिक ने यह पूछा था, जिस पर जयशंकर ने दो टूक जवाब दिया। सर्वदलीय बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी सहित कई वरिष्ठ मंत्री उपस्थित थे। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, जेडीयू और सीपीआईएम सहित सभी दलों के नेता भी मौजूद थे।
सर्वदलीय बैठक में और क्या-क्या हुआ?
बैठक में शामिल विपक्ष से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जब ये पूछा गया कि अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला क्यों किया? विपक्ष के प्रश्न के उत्तर में विदेश सचिव ने कहा कि ईरान ने परमाणु परीक्षण न करने का आश्वासन दिया था, लेकिन वह उस दिशा में आगे बढ़ रहा था। इसलिए अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया।
विपक्ष ने सवाल उठाया कि कोविड के संबंध में सदन में प्रधानमंत्री के बयान से देश में डर का माहौल बन रहा है। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि यह सही नहीं है, लेकिन अगर कहीं ऐसी स्थिति है, तो वे इसकी जांच करेंगे। असदुद्दीन ओवैसी ने बैठक में यह पूछा की ईरान के राष्ट्रपति की हत्या पर शोक संदेश में देरी क्यों हुई? उन्होंने यह भी पूछा कि क्या 8 ईरानी जहाज को हम भारत में जगह नहीं दिया।
खामेनेई की मौत पर शोक संदेश में देरी क्यों हुई?
सर्वदलीय बैठक में विपक्षी पार्टियों ने प्रधानमंत्री के इजराइल दौरे खासकर उसके टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए। खामेनेई की मौत पर शोक संदेश में हुई देरी पर जब विपक्ष ने सवाल किया तो केंद्र सरकार की तरफ से विदेश सचिव ने बताया कि नई दिल्ली में ईरान की एंबेसी ने खुद ही चार दिन बाद अपना दरवाजा खोला तब जाकर वहां शोक संदेश प्रकट किया गया।
युद्ध की स्थिति में भारत की कूटनीतिक विजय
विदेश सचिव ने बताया कि इस युद्ध की स्थिति में भारत की कूटनीतिक विजय है। पाकिस्तान का पलड़ा भारी होना कोई नई बात नहीं है। वह 1981 से ही दलाली की भूमिका निभाता आ रहा है। सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने एलपीजी और होर्मुज से आने वाले जहाजों के बारे में सवाल पूछे. सरकार ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है।
अगले 4-5 दिन में 4 जहाज भारत पहुंचेंगे
प्रेजेंटेशन में बताया गया कि अगले 4-5 दिनों में 4 जहाज पोर्ट पर पहुंचेंगे। LPG और पेट्रोलियम की हमने एडवांस बुकिंग कर ली है। हमने विभिन्न देशों से बातचीत का दायरा बढ़ाया है। सरकार ने सभी पक्षों को आश्वस्त किया है कि पर्याप्त ऊर्जा उपलब्ध है। कच्चा तेल आ रहा है। सरकार ने एडवांस ऑर्डर दे दिए हैं। पैनिक होने की कोई जरूरत नहीं है।अबतक 4,25,000 लोगों को निकाला जा चुका है।