Diwali 2026: दीवाली का त्योहार नजदीक आते ही पटाखों की खरीदारी की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन इस बार आतिशबाजी का शौक लोगों की जेब पर भारी पड़ सकता है। कच्चे माल की कीमतों में उछाल और पटाखा फैक्ट्रियों पर सख्ती के कारण इस साल पटाखों के दाम 15 से 20 फीसदी तक बढ़ने की आशंका है। इसका असर त्योहार के लिए खरीदारी करने वाले ग्राहकों पर पड़ सकता है।
भारत में पटाखों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र तमिलनाडु का शिवकाशी है। यहां तैयार होने वाले पटाखों की आपूर्ति देश के कई हिस्सों में होती है। इस बार उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतों में बढ़ोतरी से निर्माताओं की लागत बढ़ गई है। पटाखा कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक, सल्फर की कीमत एक समय 75 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 140 रुपये तक पहुंच गई थी। बाद में इसमें कुछ गिरावट आई और कीमत करीब 100 रुपये प्रति किलो रह गई। इसके अलावा, एल्युमिनियम, सोडियम नाइट्रेट और अन्य जरूरी सामग्री भी लगभग 30 फीसदी महंगी हुई हैं।
सप्लाई में देरी का भी असर
पटाखा निर्माताओं के सामने सिर्फ महंगे कच्चे माल की समस्या नहीं है। खाड़ी क्षेत्र में शिपिंग से जुड़ी बाधाओं के कारण सल्फर और चिपकाने वाले पदार्थों की आपूर्ति में भी देरी हुई है। सामान पहुंचने में अधिक समय लगने से उत्पादन खर्च बढ़ रहा है। कारोबारियों का अनुमान है कि इन वजहों से पटाखे बनाने की लागत में करीब 15 फीसदी तक इजाफा हो सकता है।
सुरक्षा जांच के कारण उत्पादन पर दबाव
प्रशासन ने पटाखा फैक्ट्रियों में सुरक्षा नियमों की जांच तेजी से शुरू कर दी है। पिछले 10 महीनों में 24 हादसों में 41 लोगों की मौत और 39 लोगों के घायल होने के बाद 700 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि खतरनाक सामग्री से जुड़े कारोबार में सुरक्षा नियमों का पालन जरूरी है।
इन पटाखों के लिए चुकाने पड़ सकते हैं ज्यादा पैसे
अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में बाजार में 10 बड़े अनार के पैकेट की कीमत करीब 55 रुपये, 10 स्पेशल ग्राउंड स्पिनर की कीमत 80 रुपये और पांच दो-आवाज वाले रॉकेट की कीमत 70 रुपये बताई गई थी। त्योहार के दौरान मांग बढ़ने पर कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। कारोबारियों के अनुसार, बढ़ी हुई लागत के चलते इस बार ग्राहकों को पटाखे खरीदने के लिए ज्यादा बजट रखना पड़ सकता है।