RSS chief Mohan Bhagwat: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर नागपुर में विजयादशमी उत्सव और शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया गया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कार्यक्रम में शस्त्र पूजन किया और संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि अर्पित की. उन्होंने स्मृति मंदिर में हेडगेवार की प्रतिमा पर पुष्पांजलि भी चढ़ाई.
विजयादशमी के इस विशेष आयोजन में मोहन भागवत ने देश, समाज और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एकता का संदेश देते हुए कहा कि जब-जब हम बंटे हैं, तब-तब कमजोर हुए हैं. वहीं, फ्रांस में 'रिजीम चेंज' को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा न पहले हुआ है और न आगे होगा.
स्व की भावना पर दिया जोर
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ के कार्य, जो 100 वर्षों से चल रहे हैं, वे 'स्व' को जगाने का काम करते हैं. इसी 'स्व' की भावना के आधार पर, भारत को एकजुट और मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. 'स्वबोध' की झलक संविधान की प्रस्तावना में मिलती है, 'हम, भारत के लोग.' 'हम' या 'स्व' की यही भावना हमारा वह भावनात्मक जुड़ाव है, जिसके कारण इतनी विविधताओं वाला देश प्राचीन काल से ही एक देश, एक समाज और एक राष्ट्र रहा है. जब हम इसे भूल गए, तो हमारा पतन हुआ, हम बंट गए और कमजोर हो गए, हम इतने नीचे गिर गए कि हमें सैकड़ों वर्षों तक उपनिवेशवाद को झेलना पड़ा.
संतुलित व समग्र विकास की दृष्टि
मोहन भागवत ने कहा कि विज्ञान और तकनीकी की प्रगति मनुष्यों को भौतिक दृष्टि से सुखी जीवन जीने में, जीवन में ज्ञान और तर्क के आधार पर अपने व्यवहार को निर्दोष करने में मदद करती है. पर यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि तकनीकी केवल साधन है. केवल उपभोगवादी अथवा जड़वादी दृष्टिकोण से विकास होता है तो सुख सुविधा के साथ उससे बड़ी हानी मोल लेनी पड़ती है.
नेपाल त्रासदी का किया जिक्र
कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा कि हाल ही में नेपाल में जो भयानक त्रासदी हुई, जिसमें हजारों लोगों की जान चली गई, उसका एक कारण हिमालयी क्षेत्र में हुआ एकतरफा विकास भी हो सकता है. यह क्षेत्र भारत, तिब्बत, भूटान और चीन सहित कई देशों में फैला हुआ है. इतनी बड़ी संख्या में इंसानी जान जाने से हम सभी को गहरा दुख है, और ऐसी त्रासदियों के बाद प्रभावित लोगों की मदद और राहत के लिए हम स्वाभाविक रूप से एक साथ आते हैं. लेकिन, यह बहुत जरूरी है कि हम विकास के प्रति एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं.
कहा कि इंसान ही यह तय करता है कि किसी साधन का इस्तेमाल किस दिशा में किया जाए और उसके इस्तेमाल में क्या सही है या क्या गलत. इसलिए, ज्ञान और तकनीक हासिल करने के साथ-साथ, उनके सही इस्तेमाल के लिए जरूरी समझ भी विकसित करनी चाहिए. साथ ही, इनके इस्तेमाल से जुड़े नैतिक और व्यावहारिक अनुशासन को भी अमल में लाना चाहिए.
कैप्टन मच्छार की तारीफ की
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि RSS हिंदू चेतना को जगाने और पूरे समाज को एक सुसंगठित और सशक्त समाज के रूप में ढालने का काम कर रहा है. इन्हीं मूल्यों ने कैप्टन स्मित मच्छार को वह करने के लिए प्रेरित किया, जो उन्होंने किया.