Navratri Fifth Day 2026: नवरात्रि के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की आराधना का संबंध सुख-समृद्धि और संतान सुख की कामना से भी जुड़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मां स्कंदमाता का नाम कैसे पड़ा और उनकी गोद में बालक कार्तिकेय क्यों विराजमान रहते हैं? इस दिन पूजा के दौरान किन रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है और मां को कौन सा भोग अर्पित करना चाहिए? आइए जानते हैं।
कैसे पड़ा मां स्कंदमाता नाम?
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान स्कंद की माता होने के कारण माता पार्वती को स्कंदमाता कहा जाता है। भगवान स्कंद को भगवान कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। उन्हें देवताओं की सेना का सेनापति माना जाता है। भगवान कार्तिकेय भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र तथा भगवान गणेश के भाई हैं। मां स्कंदमाता का स्वरूप मां की ममता और शक्ति को दर्शाता है। उनकी गोद में बालक कार्तिकेय विराजमान रहते हैं। यही कारण है कि देवी के इस स्वरूप को मातृत्व और संतान के प्रति प्रेम से जोड़कर देखा जाता है। नवरात्रि के पांचवें दिन मां की पूजा करते समय भक्त अपने परिवार की सुख-समृद्धि और बच्चों के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
कैसा है मां स्कंदमाता का स्वरूप?
मां स्कंदमाता को चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनकी ऊपरी दोनों भुजाओं में कमल के फूल होते हैं। एक हाथ में वह बालक स्कंद यानी भगवान कार्तिकेय को धारण करती हैं, जबकि दूसरा हाथ अभय मुद्रा में रहता है। अभय मुद्रा को भय से मुक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। देवी को सिंह पर सवार दिखाया जाता है। कुछ चित्रों में वह कमल के आसन पर विराजमान दिखाई देती हैं। कमल पर विराजमान होने के कारण उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। उनका यह स्वरूप शक्ति, साहस, ममता और करुणा का संदेश देता है।
संतान सुख से क्यों जुड़ी है मां स्कंदमाता की पूजा?
मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजा जाता है। इसी वजह से धार्मिक मान्यताओं में उनके स्वरूप को मातृत्व और संतान से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि संतान सुख की कामना करने वाले भक्त नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करके उनका आशीर्वाद मांगते हैं।
मां स्कंदमाता को पीला और सफेद रंग क्यों प्रिय है?
पीला रंग: पीले रंग को प्रसन्नता, सकारात्मकता, ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान पीले रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। यह रंग उत्साह और नई ऊर्जा का भी प्रतीक है।
सफेद रंग: सफेद रंग शांति, पवित्रता और सादगी का प्रतीक है। मां स्कंदमाता को कमल पर विराजमान होने के कारण पद्मासना कहा जाता है। कमल और सफेद रंग को पवित्रता से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए पूजा के दौरान सफेद वस्त्र पहनना भी शुभ माना जाता है।
मां स्कंदमाता की पूजा विधि
नवरात्रि के पांचवें दिन स्नान करने के बाद मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। देवी के सामने दीपक जलाएं और उन्हें फूल, अक्षत, फल तथा अपनी श्रद्धा के अनुसार भोग अर्पित करें। इसके बाद मां के मंत्र का जाप करें और धूप-दीप से आरती करें। पूजा करते समय मन को शांत रखें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें। संतान सुख की कामना करने वाले भक्त भी अपनी श्रद्धा के अनुसार मां के सामने प्रार्थना कर सकते हैं। पूजा के अंत में मां से सुख, शांति और परिवार के कल्याण का आशीर्वाद मांगें।
मां स्कंदमाता का मंत्र
नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में इस मंत्र का जाप किया जाता है।
ॐ देवी स्कन्दमात्रे नमः॥
मां स्कंदमाता को किस चीज का भोग लगाएं?
मां स्कंदमाता की पूजा में केला, अन्य मौसमी फल और सात्विक मिठाई अर्पित की जा सकती है। कई भक्त देवी को केले का भोग लगाना शुभ मानते हैं। इसके अलावा, घर में शुद्धता के साथ तैयार की गई खीर या अन्य मिठाई भी चढ़ाई जा सकती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।