Vishwakarma Puja 2026: देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा आज 17 सितंबर गुरुवार को है. विश्वकर्मा पूजा के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग है. सर्वार्थ सिद्धि योग में आप जिस मनोकामना से भगवान विश्वकर्मा की पूजा करेंगे, वह पूर्ण हो सकती है क्योंकि इस योग में किए गए कार्यों में सफलता मिलती है. आज विश्वकर्मा पूजा के दिन कन्या संक्रांति और गुरुवार व्रत का भी सुंदर संयोग बना है. इस दिन लोग अपने घरों, कारखानों, दुकानों आदि में विश्वकर्मा जी की स्थापना करके विधि विधान से पूजा अर्चना करते हैं. इसकी क्रम में कलम, दवात, बहीखाता, औजार, मशीन, वाहन आदि की भी पूजा होती है. उनकी कृपा से बिजनेस के कार्य सफल होंगे. आपके औजार, मशीन, साधन आदि सुरक्षित रहेंगे और आर्थिक उन्नति होगी. आइए जानते हैं विश्वकर्मा पूजा की आसान विधि, पूजा सामग्री, मुहूर्त, मंत्र, आरती, भोग आदि के बारे में.
विश्वकर्मा पूजा 2026 मुहूर्त
विश्वकर्मा पूजा के दिन सुबह में शुभ-उत्तम मुहूर्त 06:07 ए एम से 07:39 ए एम तक है. फिर चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम, लाभ-उन्नति मुहूर्त 12:15 पी एम से 01:48 पी एम तक है. शुभ-उत्तम मुहूर्त 04:52 पी एम से 06:24 पी एम तक है. इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम और अभिजित मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:40 पी एम तक है. इन शुभ समय में आप पूजा कर सकते हैं.
सुबह से शाम तक 2 शुभ योग
विश्वकर्मा पूजा पर सुबह से शाम तक 2 शुभ योग हैं. सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग सुबह में 06 बजकर 07 मिनट से प्रारंभ होंगे और शाम को 07 बजकर 53 मिनट तक रहेंगे.
विश्वकर्मा पूजा विधि
1) आज ब्रह्म मुहूर्त या सूर्योदय के समय स्नान आदि से निवृत हो जाएं. साफ कपड़े पहनें. विश्वकर्मा पूजा का संकल्प करें.
2) आप पूजा के लिए अपने दुकान, फैक्ट्री, वाहन आदि की साफ सफाई करा लें. उसके बाद शुभ मुहूर्त में लकड़ी की एक चौकी पर नया कपड़ा बिछाएं. उस पर भगवान विश्वकर्मा को स्थापित करें.
3) फिर विश्वकर्मा जी का पंचामृत से अभिषेक करें. उसके बाद अक्षत्, चंदन, फूल, माला, धूप, दीप आदि अर्पित करके पूजा करें. उनको प्रिय भोग चढाएं. पूजा समय मंत्रों का उच्चारण करते रहें.
4) अब आप अपने दुकान की तिजोरी, कलम, दवात, खाताबही, मशीनों, औजारों, वाहन आदि की पूजा कर लें. उन पर तिलक लगाएं.
5) सबसे अंत में पूजा का हवन करें. आरती से समापन करें.
6) भगवान विश्वकर्मा से बिजनेस में उन्नति का आशीर्वाद मांगें. कार्यों में आने वाली बाधाएं दूर हों. जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आए.
7) आसपास के लोगों में प्रसाद वितरण करें. अपनी क्षमता के अनुसार गरीब और जरूरतमंद लोगों को दान दें.