Winter Cold Prevention: सर्दियों का मौसम आते ही कई लोगों को सर्दी-जुकाम की परेशानी होने लगती है। कभी नाक बहने लगती है, तो कभी गले में खराश और लगातार छींक आने की समस्या होती है। जुकाम कई तरह के वायरस के कारण होता है और यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या उसके संपर्क में आने से फैलता है। शुरुआत में ही कुछ बातों का ध्यान रखने से इसे कम करने और इसकी चपेट में आने से बचने में मदद मिल सकती है।
जुकाम के शुरुआती लक्षण दिखते ही क्या करें?
अगर सुबह उठते ही गले में हल्की खराश, नाक में खुजली, छींक या नाक बहने जैसी परेशानी महसूस हो, तो शरीर को आराम दें। पर्याप्त नींद लें और दिनभर पानी पीते रहें। गले में परेशानी होने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करने से राहत मिलती है। खांसी होने पर एक साल से अधिक उम्र के लोगों को शहद से कुछ राहत मिलती है। एक साल से छोटे बच्चों को शहद नहीं देना चाहिए। ध्यान रखें कि शुरुआती लक्षण दिखने पर आराम करना और शरीर में पानी की कमी न होने देना जरूरी है।
इन आसान तरीकों से जुकाम से बचाव करें
जुकाम से बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखना जरूरी है। बाहर से घर आने के बाद और खाना खाने से पहले साबुन से हाथ धोएं। बार-बार आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। अगर आसपास किसी को जुकाम है, तो उसके साथ तौलिया, रूमाल या पानी पीने का गिलास साझा न करें।
खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या कोहनी से ढकें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत कूड़ेदान में डालें। कमरे में हवा आने-जाने की अच्छी व्यवस्था रखें और रोजाना संतुलित खाना खाएं। पर्याप्त नींद और नियमित शारीरिक गतिविधि भी सेहत बनाए रखने में मदद करती है।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
सामान्य जुकाम अक्सर समय के साथ ठीक होने लगता है। लेकिन अगर बुखार चार दिन से ज्यादा रहे, सांस लेने में परेशानी हो, सीने में दर्द हो या लक्षण दस दिन बाद भी ठीक न हों, तो डॉक्टर से सलाह लें। अगर पहले आराम मिलने के बाद बुखार या खांसी दोबारा बढ़ने लगे, तब भी जांच कराना जरूरी है।
जुकाम के लक्षण फ्लू जैसी बीमारियों में भी दिखाई देते हैं। इसलिए तेज बुखार, बहुत ज्यादा कमजोरी या गंभीर लक्षण होने पर इसे केवल सामान्य जुकाम मानकर नजरअंदाज न करें। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें, क्योंकि ये वायरस से होने वाले सामान्य जुकाम पर असर नहीं करती हैं।