TMC Election Strategy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच जोरासांको के विधायक विवेक गुप्ता तृणमूल कांग्रेस के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बनकर उभरे हैं। पूर्व राज्यसभा सांसद और सफल व्यवसायी गुप्ता की ‘प्रोफेशनल-फर्स्ट’ छवि शहरी और मध्यम वर्गीय मतदाताओं के बीच पार्टी की साख बचाने का काम कर रही है। जहां पार्टी चौतरफा जांच के घेरे में है, वहीं गुप्ता का बेदाग रिकॉर्ड विपक्ष के हमलों के खिलाफ एक ढाल साबित हो रहा है।
स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का मानना है कि पारंपरिक राजनेताओं के विपरीत विवेक गुप्ता एक पेशेवर की तरह काम करते हैं। उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला न होना बंगाल की राजनीति में एक दुर्लभ उपलब्धि है। उन्होंने अपनी छवि का उपयोग विकास की चर्चा को वापस लाने के लिए किया है। विवेकानंद फ्लाईओवर को सुरक्षित रूप से हटाना और जल निकासी व्यवस्था का आधुनिकीकरण उनके विकासोन्मुखी दृष्टिकोण के प्रमुख उदाहरण माने जाते हैं।
हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि व्यक्तिगत विश्वसनीयता किसी प्रणालीगत विफलता की भरपाई नहीं कर सकती। सवाल यह है कि क्या वह अपनी पार्टी के भीतर विवादास्पद नीतियों को चुनौती दे पाते हैं या मौन रहते हैं। भाजपा और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी उनके प्रभाव पर सवाल उठाते हुए कहा है कि साफ छवि के बावजूद जमीनी स्तर पर ट्रैफिक और अवैध निर्माण जैसी समस्याएं अब भी बरकरार हैं।
जोरासांको के कुछ निवासियों का कहना है कि उन्हें एक स्वच्छ छवि वाला विधायक तो मिला है, लेकिन पानी की आपूर्ति और सड़क मरम्मत जैसे बुनियादी कार्यों में और तेजी की जरूरत है। मतदाताओं के लिए अब केवल अच्छा बायोडाटा काफी नहीं, बल्कि परिणाम भी मायने रखते हैं। इसके बावजूद, कई लोग मानते हैं कि शहरी क्षेत्रों में पार्टी के अस्तित्व के लिए विवेक गुप्ता जैसे नेताओं की कार्यशैली एक ‘सुरक्षित बंदरगाह’ की तरह है।
आगामी चुनावों में विवेक गुप्ता का ‘क्लीन कार्ड’ तृणमूल का सबसे मजबूत पक्ष होगा। क्या व्यक्तिगत ईमानदारी शासन के व्यापक सवालों पर भारी पड़ेगी? उत्तर कोलकाता में यह एक टेस्ट केस की तरह है। समर्थक उन्हें पेशेवर पारदर्शिता का प्रतीक मानते हैं, जबकि आलोचक इसे केवल राजनीतिक ब्रांडिंग का हिस्सा बताते हैं। अंततः यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनकी ईमानदारी ही सबसे शक्तिशाली नीति साबित होती है।