Haryana politics: सांसद सतपाल ब्रह्मचारी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को लेकर केंद्र और राज्य की बीजेपी सरकारों पर ज़ोरदार हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार इसका नाम बदलने की आड़ में इस कल्याणकारी योजना को धीरे-धीरे खत्म करने की साज़िश रच रही है। वह प्रेम सुख नगर गांव के प्रेम सुख धाम में जैन संत उपेंद्र मुनि द्वारा आयोजित एक सालाना कार्यक्रम में बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि बीजेपी सरकार मनरेगा को लेकर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने दावा किया कि नाम बदलने का इस्तेमाल जनता को भ्रमित करने के लिए किया जा रहा है। यह सिर्फ़ नाम बदलना नहीं है, बल्कि मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना को खत्म करने की एक सोची-समझी रणनीति है। हालांकि, सांसद को नया नाम याद नहीं आया और उन्होंने "जी राम जी" कहकर बात रोक दी।
महात्मा गांधी का नाम हटाना गलत कदम
सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि किसी भी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना न सिर्फ़ गलत है, बल्कि राष्ट्र की आत्मा का अपमान भी है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी भगवान राम के बहुत बड़े भक्त थे और अपने आखिरी पलों में भी उन्होंने "हे राम" कहा था। उन्होंने सवाल किया कि उनसे बड़ा राम भक्त कौन हो सकता है।
मनरेगा में केंद्र सरकार के योगदान में कमी के आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत 90 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाती थी, लेकिन अब हरियाणा सरकार पर 40 प्रतिशत योगदान देने का दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा पहले से ही भारी कर्ज में डूबा हुआ है, और यह एक बड़ा सवाल है कि सरकार इस अतिरिक्त बोझ को कैसे उठाएगी।
मजदूरों को काम नहीं, वादे अधूरे
सतपाल ब्रह्मचारी ने कहा कि हरियाणा में लगभग आठ लाख रजिस्टर्ड मजदूर हैं, लेकिन सरकार उनमें से सिर्फ़ 2100 को ही काम दे पाई है। उन्होंने 15 लाख रुपये देने के वादे को लेकर भी बीजेपी सरकार की आलोचना की, और कहा कि इतने साल बीत जाने के बाद भी वह वादा अधूरा है।
कांग्रेस संघर्ष के लिए तैयार
कांग्रेस सांसद ने कहा कि वह खुद मनरेगा और मजदूरों के अधिकारों के लिए किसी भी आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने हमेशा ज़रूरतमंदों, मजदूरों और किसानों के हितों की रक्षा की है, और बीजेपी सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठाती रहेगी। जैन समुदाय ने अहिंसा को सर्वोच्च धर्म के रूप में एक बेमिसाल संदेश दिया है। जैन समुदाय ने हमेशा अहिंसा के सिद्धांत को जीवन का मूल आधार माना है और समाज को शांति, संयम और सद्भाव का रास्ता दिखाया है। सांसद ने कहा कि जैन समुदाय की पहचान त्याग, तपस्या और आत्म-नियंत्रण से है। जैन संतों ने अपने आचरण से यह साबित किया है कि अहिंसा सिर्फ़ एक सिद्धांत नहीं है, बल्कि जीवन जीने का सबसे उत्तम तरीका है।
जैन संत हमेशा अहिंसा, करुणा और मानवता के मूल्यों के लिए खड़े रहे हैं और समाज को सही दिशा में मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संत उपेंद्र मुनि त्याग और तपस्या की जीती-जागती मिसाल हैं, जिनका जीवन अनुशासन, आध्यात्मिक साधना और आंतरिक पवित्रता की प्रेरणा है। ऐसे संतों का साथ समाज को नैतिक मूल्यों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को सच्चाई, अहिंसा और धर्म के रास्ते पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।