Mohan Bhagwat: लंदन में RSS के ‘Celebration of Oneness’ (एकता का उत्सव) कार्यक्रम में बोलते हुए सरसंघचालक मोहन भागवत ने वहां मौजूद लोगों से रविवार को वन-टू-वन चर्चा की। इस दौरान उन्होंने RSS की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा कि हमारा काम नफरत नहीं, प्रेम फैलाना है।
भागवत ने कहा, ‘मैंने कुछ लोगों को यह कहते सुना है कि हमारे काम का आधार गहरी नफरत है। असल में यह बिल्कुल उल्टा है। शुद्ध सात्विक प्रेम ही हमारे काम का आधार है।’
हमारा सिद्धांत, अपनापन-शुद्ध सात्विक लव: भागवत
भागवत ने कहा, ‘हमारा सिद्धांत है, अपनापन, शुद्ध सात्विक लव। सभी के लिए। यह हिंदुत्व की हमारी पारंपरिक प्रकृति है। हिंदू अकेला नहीं है, वो एक परिवार है। एक कम्युनिटी है, समाज है। मनुष्यता है। और हम सब जानते हैं, वह पर्यावरण से प्यार करते हैं, सिर्फ उसकी पूजा नहीं करते हैं। तो अपनापन और प्रेम है, यही इसका आधार है। एकता और प्रगति के लिए चरित्र के निर्माण और गुण के विकास के लिए। और यही हमारा इकलौता आधार है। हमने कहा कि हमारे काम का आधार प्रेम है। कुछ लोग कहते हैं, नफरत है, लेकिन शुद्ध सात्विक प्रेम ही हमारा आधार है। यही हमारे काम का आधार है। आप पिछले 100 सालों में हमारी कार्यप्रणाली को देख सकते हैं।’
अस्तित्व ही सत्य है: भागवत
इसके अलावा हिंदू सभ्यता ने दुनिया को क्या दिया, खासकर इस मुश्किल समय में, इस पर भागवत ने अपना मत रखते हुए कहा, ‘देखो, सारे हिंदू विचार सिर्फ एक चीज पर आधारित हैं। अस्तित्व ही सत्य है। यह विविध लगता है। विविधताएं प्राकृतिक हैं। जो उसे स्वीकार करता है, उससे उम्मीद करता है। पर जब हम विविधता से सरोकार रखते हैं, तो हमारे मन में यही रहता है कि यह सजावट है, एकता और अस्तित्व के लिए। एक बहुत हो सकता है, बहुत एक हो सकता है। इसलिए बहुत सारों से सरोकार रखो, क्योंकि यह बेहद ही प्रैक्टिकल है। प्रकृति के हिसाब से चलना जरूरी है। लेकिन जब हम सरोकार रखते हैं, तो हमें उन्हें अलग रखकर नहीं सोचना चाहिए। हम एक हैं। सभी एक हैं। इस आधार पर हम सभी से सरोकार रखते हैं।’