Indian return from Iran: ईरान में आर्थिक संकट और महंगाई के खिलाफ शुरू हुआ जन-आक्रोश अब एक भीषण गृहयुद्ध जैसी हिंसा में बदल चुका है, जिससे वहां रह रहे हजारों भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में हुई हिंसा में 3,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं, जिसके बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है।
शुक्रवार देर रात कई भारतीय छात्र और नागरिक दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचे, जहां अपनों से मिलते ही उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। भारत सरकार और तेहरान स्थित दूतावास इस रेस्क्यू मिशन और नागरिकों की सुरक्षा पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
दिल्ली एयरपोर्ट पर भावुक मंजर और आपबीती
शुक्रवार रात जब ईरान से भारतीयों का पहला जत्था दिल्ली पहुंचा, तो एयरपोर्ट का माहौल गमगीन हो गया। महीनों से डर के साये में जी रहे छात्र अपने परिजनों को देखते ही लिपट कर रोने लगे। जम्मू-कश्मीर के एक छात्र ने बताया कि वहां हालात कल्पना से भी ज्यादा खराब हैं और विरोध-प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। मेडिकल छात्रा अर्श दहरा समेत कई नागरिकों ने बताया कि वे निजी फ्लाइट्स और दूतावास की मदद से जैसे-तैसे अपनी जान बचाकर वहां से निकलने में सफल रहे हैं।
ईरान में हिंसा और मौत का तांडव
ईरान की मुद्रा 'रियाल' में ऐतिहासिक गिरावट और बेतहाशा महंगाई के कारण 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए प्रदर्शन अब देश के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़पों में अब तक 3,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से अधिकतर की मौत गोली लगने से हुई है। 14 जनवरी को एयरस्पेस बंद होने के कारण हजारों लोग वहां फंस गए थे, जिसे 15 जनवरी को दोबारा खोला गया ताकि विदेशी नागरिक सुरक्षित निकल सकें।
विदेश मंत्रालय की एडवाइजरी और हेल्पलाइन
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि वर्तमान में लगभग 9,000 भारतीय ईरान में हैं, जिनमें से ज्यादातर छात्र हैं। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नागरिकों को उपलब्ध साधनों का उपयोग कर तुरंत ईरान छोड़ने की सलाह दी है। दूतावास ने चार इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर और एक आधिकारिक ईमेल आईडी जारी की है। सरकार ने नागरिकों को निर्देश दिया है कि वे अपने पासपोर्ट, वीजा और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज हर समय अपने पास तैयार रखें ताकि आपातकालीन निकासी में देरी न हो।
वैश्विक तनाव और अमेरिकी हस्तक्षेप का डर
ईरान में यह संकट केवल आंतरिक नहीं रहा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान सरकार ने प्रदर्शनकारियों पर हिंसा बंद नहीं की, तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। ट्रंप की इस धमकी के बाद सुरक्षा स्थिति और भी नाजुक हो गई है। यही कारण है कि भारत सरकार युद्ध जैसी स्थिति की आशंका को देखते हुए अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए प्राथमिकता के आधार पर काम कर रही है।