Ram Rahim Parole : डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह को एक बार फिर 21 दिन की फरलो मिली है. रोहतक की सुनारिया जेल में सजा काट रहे राम रहीम को इस बार भी अस्थायी तौर पर जेल से बाहर जाने की अनुमति दी गई है. यह उसकी 17वीं अस्थायी रिहाई है. ताजा फरलो के दौरान वह हरियाणा के सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा मुख्यालय में रहेगा.
राम रहीम मंगलवार सुबह करीब 6 बजे सुनारिया जेल से बाहर निकला. इसके बाद वह सुरक्षा घेरे के बीच सिरसा के डेरा मुख्यालय के लिए रवाना हुआ. रिपोर्टों के मुताबिक, पिछली कुछ पैरोल के दौरान उसे उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित बरनावा आश्रम में रहने की अनुमति मिली थी, लेकिन इस बार लगातार तीसरी बार सिरसा स्थित डेरे में रहने की मंजूरी दी गई है.
2017 में ठहराया गया था दोषी
बता दें कि राम रहीम को 2017 में दो महिला अनुयायियों से बलात्कार के मामले में दोषी ठहराया गया था. अदालत ने दोनों मामलों में उसे 10-10 साल की सजा सुनाई थी, यानी कुल 20 साल की सजा वह काट रहा है. इसके अलावा पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में भी उसे उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी. हालांकि, उसकी अस्थायी रिहाई का सिलसिला सजा के बाद लगातार चर्चा में रहा है. उपलब्ध रिकॉर्ड के मुताबिक, अक्टूबर 2020 से अब तक राम रहीम को पैरोल या फरलो के जरिए 17 बार जेल से बाहर आने की अनुमति मिल चुकी है. इनमें कुछ रिहाइयां बेहद कम अवधि की थीं, जबकि कई मौकों पर उसे कई सप्ताह के लिए जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई.
जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की मिली थी पैरोल
इस साल भी उसे पहले जनवरी में 40 दिन और मई में 30 दिन की पैरोल मिली थी. मई में मिली पैरोल के दौरान भी वह सिरसा के डेरे में रहा था. ताजा 21 दिन की रिहाई उस पैरोल के करीब तीन महीने बाद हुई है.
पैरोल और फरलो में क्या होता है अंतर?
दरअसल, पैरोल का मतलब है जेल से मिलने वाली एक छूट होती है. यह छूट उस कैदी को मिल सकती है, जो जेल में बंद होकर सजा काट चुका हो. वहीं, पैरोल देने का अधिकार राज्य सरकार को होता है और हर एक राज्य में इसके लिए अलग-अलग नियम कानून बनाए गए हैं. कैदी को पैरोल की सुविधा उसके व्यवहार और सजा काटने के तरीके के आधार पर दी जाती है. इससे वह सामाजिक संबंधों को सुधार सकता है.