प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उत्तराखंड के हल्द्वानी में 17,547 करोड़ की योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस मौके पर पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित किया। पीएम मोदी ने कहा कि आज यहां 17,000 करोड़ रुपये से भी अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। ये सभी प्रोजेक्ट्स कुमाऊं के सभी साथियों को बेहतर कनेक्टिविटी और बेहतर सुविधाएं देने वाले हैं।
कुमाऊं आने का सौभाग्य मिला तो कई पुरानी यादें ताज़ा हो गईं हैं। ये इतनी आत्मीयता से आपने जो उत्तराखंडी टोपी मुझे पहनाई गई है, उसे पहनकर मुझे गर्व का अनुभव हो रहा है। हल्द्वानी शहर के ओवरऑल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए हम लगभग 2,000 करोड़ रुपये की योजना लेकर आ रहे हैं।
अब हल्द्वानी में पानी, सीवरेज, सड़क, पार्किंग, स्ट्रीट लाइट सभी जगह पर अभूतपूर्व सुधार होगा। इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाने के लिए तेज गति से ऐसे ही विकास कार्यों पर अनेक काम करने की जरूरत पर हमने जोर दिया है। उत्तराखंड में बढ़ रहे नए हाइड्रो प्रोजेक्ट्स, उत्तराखंड में बढ़ रही औद्योगिक क्षमता, इस दशक को उत्तराखंड का दशक बनाएगी। उत्तराखंड से कितनी ही नदियां निकलती हैं।
आजादी के बाद से ही यहां के लोगों ने दो धाराएं और देखी हैं। एक धारा है- पहाड़ को विकास से वंचित रखने की। और दूसरी धारा है- पहाड़ के विकास के लिए दिन रात एक कर देने की। हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ तेज गति से देश को नई ऊंचाई पर ले जाने में जुटी है। उधमसिंह नगर जिले में एम्स ऋषिकेश के सेटेलाइट केंद्र और पिथौरागढ़ में जगजीवन राम सरकारी मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी गई है।
उत्तराखंड के इस कार्यक्रम में करीब 9,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट सड़क निर्माण से जुड़े हैं। पीएम ग्राम सड़क योजना के तहत 1,200 किमी ग्रामीण सड़क बनाने का काम भी शुरू हुआ है। इन सड़कों के अलावा उत्तराखंड में 151 पुलों का निर्माण भी किया जाएगा।
वैसे जब जनता जनार्दन इन लोगों की सच्चाई जान चुकी है, तो इन लोगों ने एक नई दुकान खोल रखी है। वो दुकान है- अफवाह फैलाने की। अफवाह बनाओ, फिर उसे प्रवाहित करो और उसी अफवाह को सच मानकर दिनरात चिल्लाते रहो। 'उत्तराखंड अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर चुका है। इन वर्षों में आपने ऐसे भी सरकार चलाने वाले देखे हैं जो कहते थे- चाहे उत्तराखंड को लूट लो, मेरी सरकार बचा लो।
इन लोगों ने दोनों हाथों से उत्तराखंड को लूटा। जिन्हें उत्तराखंड से प्यार हो, वो ऐसा सोच भी नहीं सकते।' मेरा 7 साल का रिकॉर्ड देख लीजिए। खोज खोज कर ऐसी पुरानी चीजों को ठीक करने में ही मेरा समय जा रहा है। अब मैं काम को ठीक कर रहा हूं, आप उनकों ठीक कीजिये। पहले जो सरकार में रहे हैं, ये उनका परमानेंट ट्रेडमार्क रहा है। यहां उत्तराखंड में जिस लखवाड़ प्रोजेक्ट का काम शुरू हुआ है, उसका भी यही इतिहास है।
इस परियोजना के बारे में पहली बार 1976 में सोचा गया था। आज 46 साल बाद, हमारी सरकार ने इसके काम का शिलान्यास किया है। दिल्ली और देहरादून में सत्ता भाव से नहीं, सेवा भाव से चलने वाली सरकारे हैं। पहले की सरकारों ने सीमावर्ती राज्य होने के बावजूद इस क्षेत्र की अनदेखी की। ये राष्ट्र रक्षा के लिए संतानों को समर्पित करने वाली कुमाऊं की वीर माताएं भूल नहीं सकती है।