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राम मंदिर चंदा विवाद पर कमल नयन दास का बड़ा बयान, बोले- 'बदनामी हुई, न्यायिक जांच हो'

राम मंदिर चंदा विवाद पर कमल नयन दास का बड़ा बयान, बोले- 'बदनामी हुई, न्यायिक जांच हो'

 

Ram Mandir Donation Allegations: राम मंदिर में दान के पैसे को लेकर चल रहे आरोपों पर राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नित्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, "हमें आरोपों के संबंध में कुछ पता नहीं है। मेरे लिए सब कुछ राष्ट्र है। चाहे राम मंदिर का आंदोलन हो या कोई अन्य आंदोलन। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा। जो कुछ भी हो, उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने पर उन्हें दंड मिलना चाहिए। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।"

कमल नयन दास ने कहा, "जिसकी साइकिल पर चलने की औकात नहीं थी, आज उसकी बड़ी-बड़ी बिल्डिंग हैं। मैं किसी का नाम नहीं लूंगा, लेकिन जिसका भी नाम सामने आए, उसे दंडित किया जाना चाहिए। हमें विश्वास है कि मुख्यमंत्री ईमानदार हैं और इस मामले में जरूर कार्रवाई करेंगे।"

‘बदनामी हो रही है, न्यायिक जांच होना चाहिए’

उन्होंने आगे कहा, "सारा समाज जानता है कि किसी के होटल लखनऊ में बन रहे हैं, किसी के कहीं और बन रहे हैं। यह पैसा कहां से आ रहा है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। बैठकों में कभी इस तरह की बातें सामने नहीं आईं। इतना जरूर है कि इसकी जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री जी दोषियों को क्षमा नहीं करेंगे। भक्तों ने कुंतलों चांदी दान की है। बिना नाम के चेक भी हमारे पास आए हैं। सबकी जांच होनी चाहिए।"

उन्होंने कहा, "हमने कभी हिसाब नहीं लिया है, लेकिन हम चाहते हैं कि इस पूरे मामले की जांच हो। इससे बहुत बड़ी बदनामी हो रही है। न्यायिक जांच होनी चाहिए। हमें विश्वास है कि मुख्यमंत्री इस पर जरूर कार्रवाई करेंगे। 19 जून से महाराज जी का जन्मोत्सव है। हम संतों से भी बात करेंगे और मुख्यमंत्री से भी चर्चा करेंगे।"

अखिलेश यादव ने उठाया था सवाल

दरअसल, यह मुद्दा हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था, जिसके बाद सियासी विवाद शुरू हो गया। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के चढ़ावे का हिसाब-किताब स्पष्ट नहीं है और धनराशि गायब होने की आशंका जताई थी। हालांकि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सभी लेन-देन पूरी पारदर्शिता के साथ किए जा रहे हैं और नियमित ऑडिट भी हो रहा है।


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