होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
बिजनेस
मनोरंजन
सेहत
नॉलेज
फैशन/लाइफ स्टाइल
अध्यात्म

 

भारत में चीनी की कीमत कौन तय करता है? सरकार या किसान, जानिए किसका कितना रोल

भारत में चीनी की कीमत कौन तय करता है? सरकार या किसान, जानिए किसका कितना रोल

 

Sugar Price in India: चाय की प्याली से लेकर त्योहारों की मिठाइयों तक, चीनी हर घर की जरूरत का हिस्सा है। इसी बीच देश में चीनी के दाम बढ़ने से आम लोगों की चिंता बढ़ गई है। चीनी के दाम अचानक बढ़ने का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। पिछले एक महीने में औसत खुदरा कीमत भी 48.18 रुपये से बढ़कर 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।

ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चीनी का भाव तय कौन करता है? क्या किसान अपनी मर्जी से गन्ने की कीमत तय करता है या सरकार इसका फैसला करती है? तो आइए, आज हम आपको बताते हैं कि भारत में चीनी की कीमत कौन तय करता है और सरकार या किसान का कितना रोल है।

चीनी की कीमत कितनी बढ़ी है?

कई शहरों में चीनी की खुदरा कीमत 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है। करीब डेढ़ महीने पहले जहां थोक बाजार में चीनी 42 से 45 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, वहीं अब इसका भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो हो गया है। चीनी की कीमत बढ़ने का असर घरों के बजट के साथ-साथ चाय की दुकानों, मिठाई और खाद्य कारोबार पर भी पड़ रहा है। व्यापारियों के मुताबिक, मांग बढ़ने और सप्लाई कम होने की वजह से कीमतों में तेजी आई है। वहीं, एथेनॉल नीति को लेकर भी चर्चा हो रही है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए सरकार ने कीमतों पर कंट्रोल के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी दी है और बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू की है।

भारत में चीनी की कीमत कौन तय करता है?

केंद्र सरकार जरूरी वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत चीनी क्षेत्र को कंट्रोल करती है। इसके लिए चीनी उत्पादन, बिक्री, स्टॉक, आयात और निर्यात पर नजर रखी जाती है। सरकार घरेलू बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रखने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए अलग-अलग फैसले ले सकती है। चीनी से जुड़े नियमों के तहत सरकार बिक्री के लिए चीनी का कोटा जारी करने, उसके आवागमन, आयात-निर्यात और न्यूनतम बिक्री मूल्य से जुड़े फैसले भी ले सकती है। जरूरत पड़ने पर स्टॉक की जांच और चीनी मिलों या गोदामों की तलाशी का अधिकार भी व्यवस्था में दिया गया है।

सरकार या किसान का कितना रोल है?

चीनी की कीमत तय करने में सरकार की बड़ी भूमिका होती है, जबकि किसान का रोल गन्ने की कीमत तक सीमित रहता है। केंद्र सरकार गन्ने के लिए FRP यानी Fair and Remunerative Price तय करती है। चीनी मिलों को किसानों से गन्ना कम से कम किस कीमत पर खरीदना है, यह कीमत CACP की सिफारिशों और राज्य सरकारों, साथ ही अन्य पक्षों से चर्चा के आधार पर तय होती है। वहीं, कुछ राज्य अपनी State Advised Price यानी SAP भी तय करते हैं, जो FRP से ज्यादा हो सकती है। वहीं, दूसरी तरफ बाजार में चीनी की कीमत को कंट्रोल करने के लिए सरकार उत्पादन, बिक्री, स्टॉक, आयात और निर्यात पर नियम बना सकती है।

2025-26 सीजन के लिए कितना है FRP?

2025-26 के चीनी सीजन के लिए गन्ने की FRP 355 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है। यह 10.25 फीसदी की बेसिक रिकवरी दर से जुड़ी है। अगर रिकवरी इससे ज्यादा होती है, तो किसानों को हर 0.1 फीसदी की अतिरिक्त रिकवरी पर 3.46 रुपये प्रति क्विंटल का प्रीमियम मिलता है। वहीं, 9.5 फीसदी से कम रिकवरी होने पर भी किसानों के हित में कटौती नहीं करने का फैसला किया गया है। ऐसे किसानों को 329.05 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिलेगी।

कुछ राज्यों में अलग कीमत

पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड अपनी अलग State Advised Price यानी SAP भी घोषित करते हैं। यह कीमत आमतौर पर केंद्र की FRP से ज्यादा होती है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में SAP के हिसाब से गन्ने का भुगतान चीनी मिलों की जिम्मेदारी है। पंजाब में राज्य सरकार और हरियाणा में राज्य सरकार की ओर से सब्सिडी के जरिए FRP और SAP के बीच के अंतर को पूरा करने की व्यवस्था है।


संबंधित समाचार