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नागपंचमी...बिना खाना खाए कितने दिन जिंदा रह सकता है सांप? जानिए साइंस का जवाब

नागपंचमी...बिना खाना खाए कितने दिन जिंदा रह सकता है सांप? जानिए साइंस का जवाब

 

Nag Panchami: नागपंचमी नाग की पूजा का दिन है। मान्यता है कि इस दिन नाग की पूजा करने से कालसर्प जैसे दोषों से राहत मिलने के साथ परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। नाग को हमेशा ही रहस्यमय जीवों में माना गया है। इसकी एक वजह इनसे जुड़ी मान्यताएं और लोकथाएं हैं। सांप को लेकर एक सवाल यह भी है कि आखिर यह कितने समय तक भूखा रह सकता है? विज्ञान कहता है, इंसान को कुछ घंटे खाना न मिले तो हालत खराब होने लगती है, लेकिन सांप के मामले में ऐसा नहीं है।

सांप कई महीनों तक बिना कुछ खाए जीवित रह सकते हैं। वे कितने समय तक बिना खाए-पिए रह सकते हैं, यह काफी हद तक उनके आकार, उम्र, प्रजाति और उनके आखिरी बार खाए गए भोजन की मात्रा पर निर्भर करता है।

कितने समय तक भूखे रह सकते हैं सांप?

ज्यादातर स्वस्थ वयस्क सांप 6 से 12 महीने तक बिना खाना खाए रह सकते हैं। हालांकि, यह समय प्रजाति के आकार, उम्र और मेटाबॉलिज्म की स्थिति पर काफी हद तक निर्भर करता है। दिलचस्प बात यह है कि जहां बड़े अजगर एक साल से भी ज्यादा समय तक बिना खाए रह सकते हैं, वहीं कॉर्न स्नेक जैसी छोटी प्रजातियां 3 से 4 महीने तक जिंदा रह सकती हैं।

कुछ प्रजातियों को लेकर वैज्ञानिकों ने और भी हैरान करने वाले दावे किए हैं। शोध बताते हैं कि कुछ सांप लगातार दो साल तक भूखे रहने की स्थिति को झेल सकते हैं।

बिना भोजन ऐसे जिंदा रहते हैं सांप?

सांपों की इस खास खूबी के पीछे असली राज उनका मेटाबॉलिज्म है। साल 2007 में अमेरिका के एक शोधकर्ता मार्शल मैक्यू ने रैट स्नेक, वेस्टर्न डायमंडबैक रैटलस्नेक और बॉल पायथन जैसी तीन प्रजातियों के 62 सांपों को करीब छह महीने तक बिना खाना दिए रखा और उनके शरीर में होने वाले बदलावों का अध्ययन किया।

नतीजा चौंकाने वाला था। इन सांपों ने अपनी सामान्य मेटाबॉलिज्म दर को 72 प्रतिशत तक घटा लिया। यानी शरीर को चलाने के लिए जितनी ऊर्जा चाहिए होती है, सांप उसे बेहद कम कर देते हैं। इससे शरीर में मौजूद फैट यानी चर्बी का भंडार बहुत धीरे-धीरे खर्च होता है।

सबसे खास बात रही कि भोजन न मिलने के बावजूद इन सांपों की लंबाई कम नहीं हुई, बल्कि वे बढ़ते भी रहे। इसने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि बिना भोजन के भी लंबाई बढ़ती है, वो भी शरीर में मौजूद चर्बी से।

भूख लगने पर शरीर में क्या-क्या बदलता है?

भूखे रहने के दौरान सांप का शरीर एक तय क्रम में काम करता है। सबसे पहले शरीर में जमा चर्बी को एनर्जी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। सिर्फ सांपों में ही नहीं, इंसानों और बाकी जानवरों में भी ऐसा होता है। लेकिन जब यह चर्बी खत्म होने लगती है, तो कुछ प्रजातियां और भी आगे बढ़ जाती हैं। रैट स्नेक जैसी कुछ प्रजातियां अपने शरीर के प्रोटीन को तोड़कर ऊर्जा हासिल करना शुरू कर देती हैं।

जंगल में भूखा रहना सांपों के लिए आम बात

जंगल में यह स्थिति कोई असामान्य बात नहीं है। ठंड के मौसम में कई सांप ‘ब्रूमेशन’ नाम की एक अवस्था में चले जाते हैं, जो कुछ हद तक स्तनधारी जीवों की शीतनिद्रा यानी हाइबरनेशन जैसी होती है। इस दौरान वे खाना बंद कर देते हैं और अपने शरीर की सारी गतिविधियां धीमी कर लेते हैं, ताकि सर्दियों का मौसम बिना भोजन के आसानी से निकल सके।

खाने और मेटाबॉलिज्म को लेकर सांपों की जरूरतें वैसे भी इंसानों से बेहद कम होती हैं। ठंडे इलाकों में रहने वाले सांपों को साल भर में सिर्फ अपने वजन से दो से चार गुना भोजन की जरूरत होती है। यानी करीब डेढ़ किलो का एक बॉल पायथन साल भर में महज तीन से साढ़े पांच किलो भोजन में ही आराम से गुजारा कर सकता है।

पानी के बिना ज्यादा दिन नहीं टिकते सांप

भूख को लेकर भले ही सांप बेहद सहनशील हों, लेकिन पानी की कमी उनके लिए उतनी ही घातक साबित होती है, जितनी किसी और जीव के लिए। विशेषज्ञों के मुताबिक, मेटाबॉलिज्म धीमा कर लेने से सांप कैलोरी की जरूरत को तो टाल सकते हैं, लेकिन शरीर को पानी जरूर चाहिए। यही वजह है कि जहां भूख से मरने में सांपों को महीनों लग सकते हैं, वहीं पानी न मिलने पर सिर्फ कुछ हफ्तों में ही उनकी जान को खतरा हो सकता है।

यही कारण है कि लंबे समय तक भूखे रहने के बावजूद जो सांप जंगलों में जिंदा बचे रहते हैं, वे अक्सर पानी के किसी न किसी स्रोत के आसपास ही अपना ठिकाना बनाकर रखते हैं।


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