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‘गंगा जल संधि तय करेगी भारत-बांग्लादेश रिश्तों का भविष्य’, तारिक रहमान के करीबी मंत्री का बड़ा बयान

‘गंगा जल संधि तय करेगी भारत-बांग्लादेश रिश्तों का भविष्य’, तारिक रहमान के करीबी मंत्री का बड़ा बयान

 

Ganges treaty: बांग्लादेश में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली BNP ने शनिवार को कहा कि भविष्य में बांग्लादेश-भारत संबंध काफी हद तक गंगा जल-बंटवारा समझौते के नवीनीकरण या उसके खत्म होने पर निर्भर करेंगे। उसने इस बात पर जोर दिया कि कोई भी अल्पकालिक समझौता अपर्याप्त होगा। ऐतिहासिक 'फरक्का दिवस' के मौके पर आयोजित BNP की एक चर्चा को संबोधित करते हुए BNP के महासचिव और स्थानीय सरकार ग्रामीण विकास तथा सहकारिता मंत्री मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने भारत को अल्टीमेटम दिया है।

उन्होंने कहा "यह संधि अनिश्चित काल के लिए होनी चाहिए और तब तक प्रभावी रहनी चाहिए जब तक कि इसकी जगह कोई भविष्य का समझौता न आ जाए।" मिर्ज़ा फखरुल इस्लाम आलमगीर, बीएनपी में प्रधानमंत्री तारिक रहमान के बाद दूसरे सबसे शक्तिशाली नेता माने जाते हैं और उन्होंने दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संधियों का पालन किए बिना भारत ने बांग्लादेश में बहने वाली 54 साझा नदियों पर एक के बाद एक बांध बना दिए हैं जिससे उनका प्राकृतिक प्रवाह बाधित हुआ है। बांग्लादेशी मंत्री ने कहा "भारत द्वारा अपने हित में एकतरफा जल निकासी बांग्लादेश के अस्तित्व के लिए खतरा बन गई है। देश के एक बंजर और वीरान ज़मीन में तब्दील होने के संकेत अभी से उभरने लगे हैं।"

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा जल संधि क्या है?

आपको बता दें कि गंगा जल संधि पर 12 दिसंबर 1996 को 30 वर्षों की अवधि के लिए हस्ताक्षर किए गए थे और ये समझौता इस वर्ष खत्म हो रहा है। लेकिन इसके संशोधन या नवीनीकरण पर चर्चा अभी तक शुरू नहीं हुई है। बांग्लादेश और भारत 54 नदियां साझा करते हैं जिनमें गंगा भी शामिल है। इससे जुड़े मुद्दों को सुलझाने के लिए दोनों देश एक द्विपक्षीय तंत्र संचालित करते हैं जिसे 'संयुक्त नदी आयोग' (Joint Rivers Commission) के नाम से जाना जाता है। इस बीच बांग्लादेशी संसद में विपक्ष के नेता और जमात-ए-इस्लामी के अमीर शफीकुर रहमान ने कहा कि लोग 'तीस्ता मास्टर प्लान' को लेकर किए जा रहे वादों से थक चुके हैं और अब वे ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

उन्होंने आगे कहा "सिर्फ चुनावों से पहले 'जागो बाहे, तीस्ता बचाओ' जैसे नारे लगाना काफी नहीं है। तीस्ता नदी के किनारे रहने वाले लोग अब जाग चुके हैं और अपनी जायज मांगें पूरी करवाना चाहते हैं।" उन्होंने शुक्रवार शाम रंगपुर शिल्पकाला ऑडिटोरियम में एक नागरिक सभा में ये बातें कही। उन्होंने आगे कहा कि तीस्ता मास्टर प्लान के लागू होने से उत्तरी बांग्लादेश में लगभग 2.5 करोड़ लोगों के जीवन और आजीविका पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

गंगा जल संधि को लेकर विवाद क्या है?

  • यह पूरा विवाद पश्चिम बंगाल में स्थित फरक्का बैराज को लेकर है जिसे भारत ने 1975 में बनाया था।
  • भारत का मकसद कोलकाता बंदरगाह को गाद से बचाने और जहाजों के आवागमन को सुचारू रखने के लिए गंगा के पानी को हुगली नदी की तरफ मोड़ना।
  • निचला तटीय देश होने के कारण बांग्लादेश (जहां गंगा को 'पद्मा' कहा जाता है) का आरोप था कि इस बैराज से सूखे के मौसम में उनके यहां पानी का प्रवाह कम हो जाता है जिससे कृषि, मत्स्य पालन और पर्यावरण (जैसे सुंदरवन में खारापन बढ़ना) पर बुरा असर पड़ता है। इसी विवाद को सुलझाने के लिए 1996 में यह 30 साल की संधि की गई थी।
  • यह संधि मुख्य रूप से हर साल 1 जनवरी से 31 मई के बीच लागू होती है। इसके तहत फरक्का बैराज पर पानी की उपलब्धता के आधार पर 10-10 दिनों के चक्र में पानी बांटा जाता है।
  • जैसे नदी में 70,000 क्यूसेक से कम पानी होने पर दोनों देशों के बीच 50-50 प्रतिशत पानी का बंटवारा
  • 70,000 से 75,000 क्यूसेक पानी भंडार रहने पर बांग्लादेश को 35,000 क्यूसेक पानी और बचा पानी भारत का।
  • 75,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी होने पर 40,000 क्यूसेक पानी भारत का और बचा सारा पानी बांग्लादेश का।
  • संधि के नियमों का पालन सुनिश्चित करने और रोजाना के जल प्रवाह की निगरानी के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधियों की एक 'संयुक्त समिति' बनाई गई है। यदि किसी 10 दिनों की अवधि में पानी का कुल प्रवाह 50,000 क्यूसेक से नीचे चला जाता है तो दोनों देशों की सरकारें आपातकालीन समायोजन के लिए तुरंत आपसी बैठक करेंगी। इस संधि में यह प्रावधान है कि हर 5 साल में या आवश्यकता पड़ने पर उससे पहले भी दोनों देश पानी की उपलब्धता और इसके प्रभाव की समीक्षा कर सकते हैं।
  • अब दिक्कत ये है कि पिछले 30 वर्षों में ग्लोबल वार्मिंग की वजह से सर्दियों और गर्मियों में गंगा के प्राकृतिक जल स्तर में काफी बदलाव आया है जिससे पुराना फॉर्मूला अब दोनों देशों की नई जरूरतों को पूरा करने में छोटा पड़ रहा है। बांग्लादेश भारत के साथ नए सिरे से और अधिक पानी की गारंटी वाली सख्त संधि की मांग कर रही हैं। लेकिन भारत के भीतर भी उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सिंचाई और बिजली परियोजनाओं के लिए पानी की आंतरिक मांग पहले से बहुत बढ़ गई है इसीलिए ये विवाद ऐसा बन चुका है जिसपर किसी समझौते तक पहुंचना काफी मुश्किल हो चुका है।

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