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बागेश्वर बाबा पर सियासी संग्राम! राजभर के प्रवक्ता ने साधा निशाना, NDA में बढ़ी टेंशन!

बागेश्वर बाबा पर सियासी संग्राम! राजभर के प्रवक्ता ने साधा निशाना, NDA में बढ़ी टेंशन!

 

UP Politics: धीरेंद्र शास्त्री के भगवान राम और श्रीकृष्ण की तुलना वाले बयान पर छिड़ा विवाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ले चुका है। इस मुद्दे पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के भीतर ही दो अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं। एक तरफ पार्टी अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को सड़क पर उतरकर विरोध करने की चुनौती दे डाली, तो दूसरी तरफ पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव ने भाजपा और NDA के सहयोगी दलों के नेताओं की चुप्पी पर सवाल खड़े कर दिए।

सुभाष चंद्र यादव ने पूछा कि क्या भगवान श्रीकृष्ण का सम्मान भी अब जाति और राजनीतिक समीकरण देखकर किया जाएगा? उन्होंने भाजपा, सुभासपा, रालोद और अपना दल (एस) के नेताओं से इस मुद्दे पर खुलकर सामने आने की मांग की। वहीं, पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरविंद कुमार ने प्रवक्ता के बयान को उनका व्यक्तिगत विचार बताते हुए पार्टी से अलग कर दिया।

अखिलेश यादव को ओपी राजभर की खुली चुनौती

अंबेडकर नगर में मीडिया से बातचीत के दौरान ओमप्रकाश राजभर ने धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के कार्यक्रमों को लेकर अखिलेश यादव की सोशल मीडिया पोस्ट पर निशाना साधा। राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव केवल एक्स पर पोस्ट कर रहे हैं। अगर उन्हें धीरेंद्र शास्त्री का बयान गलत लगता है तो उन्हें सड़क पर उतरकर प्रदेशव्यापी आंदोलन करना चाहिए।

राजभर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा, 'मुर्दा आदमी हैं कि जिंदा आदमी हैं अखिलेश यादव? अगर जिंदा हैं, दम है तो आओ सड़क पर देखें पौरुष।' उन्होंने अखिलेश पर केवल ट्वीट और प्रेस कॉन्फ्रेंस की राजनीति करने का आरोप भी लगाया।

अपने ही प्रवक्ता ने NDA के नेताओं से मांगा जवाब

राजभर के हमले के बीच सुभासपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राजस्थान प्रदेश प्रभारी सुभाष चंद्र यादव ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर गठबंधन के भीतर ही सवाल खड़े कर दिए।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान का मामला सामने आने पर उत्तर प्रदेश के बड़े राजनीतिक नेताओं की आवाज खामोश क्यों है? उन्होंने भाजपा, सुभासपा, रालोद और अपना दल (एस) के नेताओं से पूछा कि आखिर किसने खुलकर इस मामले की निंदा की?

सुभाष चंद्र यादव ने सवाल उठाया कि क्या भगवान श्रीकृष्ण का सम्मान भी जाति और राजनीतिक समीकरण देखकर किया जाएगा? उन्होंने साफ कहा कि यह किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि धर्म और आस्था के सम्मान का विषय है।

पार्टी छोड़नी पड़े तो भी समझौता नहीं!

सुभाष चंद्र यादव ने अपनी पोस्ट में यहां तक कह दिया कि भगवान श्रीकृष्ण के सम्मान और सनातन धर्म की अस्मिता के मुद्दे पर वह कोई समझौता नहीं करेंगे। इसके लिए उन्हें राजनीतिक नुकसान उठाना पड़े या पार्टी में रहना पड़े अथवा नहीं, उन्हें इसकी परवाह नहीं है।

पार्टी ने प्रवक्ता के बयान से बनाई दूरी

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अरविंद कुमार ने प्रवक्ता सुभाष चंद्र यादव के बयान को उनका निजी विचार बताते हुए पार्टी का आधिकारिक रुख मानने से इनकार कर दिया।

यानी एक तरफ पार्टी सुप्रीमो ओपी राजभर विपक्ष के नेता अखिलेश यादव को चुनौती दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के प्रवक्ता NDA के सहयोगियों से सवाल पूछ रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विचारों का मतभेद है या NDA के भीतर इस मुद्दे पर असहजता की नई कहानी शुरू हो गई है?


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