Chandra Grahan 2025: चद्रग्रहण भारत में 7-8 सितंबर को दिखाई देगा और कुल 3 घंटे 29 मिनट तक चलेगा। जानें सूतक काल की शुरुआत और समाप्ति का समय, अपने शहर में ग्रहण की सही टाइमिंग, और क्या करें–क्या न करें इस विशेष दिन पर।
सूतक काल का राशियों पर प्रभाव
मेष: मन में बेचैनी और गुस्सा हावी हो सकता है, शांत रहना जरूरी है।
वृषभ: पैसों के लेन-देन में सतर्क रहें, निवेश सोच-समझकर करें।
मिथुन: रिश्तों में खटास आ सकती है, बातचीत में संयम रखें।
कर्क: सेहत को लेकर लापरवाही न करें, खानपान पर ध्यान दें।
सिंह: कामकाज में उतार-चढ़ाव रहेगा, फैसले सोच-समझकर लें।
कन्या: घर-परिवार में मनमुटाव हो सकता है, धैर्य से काम लें।
तुला: फिजूलखर्ची बढ़ सकती है, खर्च पर नियंत्रण जरूरी है।
वृश्चिक: इज्जत और सम्मान से जुड़ी चिंता हो सकती है, संयम रखें।
सूतक काल से पहले जरूर कर लें ये काम
- भोजन और जल में तुलसी पत्ते डालें
- भोजन और जल में कुश डालें
- सारा पका हुआ भोजन ढककर रखें
- ग्रहण के लिए पहले से सात्विक भोजन तैयार रखें
- ग्रहण से पहले स्नान कर लें
- धार्मिक ग्रंथों का पाठ या मंत्र जाप शुरू करें
ग्रहण के दौरान मंदिरों के कपाट क्यों बंद होते हैं?
हिंदू धर्म में ग्रहण के समय को अशुद्ध काल माना जाता है, जिसे "सूतक काल" कहा जाता है। मान्यता है कि इस दौरान राहु और केतु जैसे छाया ग्रह चंद्रमा (या सूर्य) पर प्रभाव डालते हैं, जिससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ जाता है। इसी कारण मंदिरों के कपाट ग्रहण की अवधि में बंद कर दिए जाते हैं ताकि इस अशुद्ध ऊर्जा का प्रभाव मंदिर की पवित्रता और भगवान की मूर्तियों पर न पड़े। ग्रहण के दौरान भगवान को न तो छुआ जाता है, न भोग लगाया जाता है और न ही आरती की जाती है। इसलिए परंपरागत रूप से मंदिरों के कपाट ग्रहण शुरू होने से पहले बंद कर दिए जाते हैं और ग्रहण समाप्ति के बाद शुद्धिकरण (स्नान, मंत्रोच्चार, जल से शुद्धि) के बाद ही खोले जाते हैं।