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श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव, पूजा के लिए रहेगा मात्र 44 मिनट का मुहूर्त, जानिए शुभ योग

श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव, पूजा के लिए रहेगा मात्र 44 मिनट का मुहूर्त, जानिए शुभ योग

 

Janmashtami 2025: इस वर्ष भगवान श्रीकृष्ण का 5252वां जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष 2025 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। यह पावन अवसर भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में बड़े हर्ष और उल्लास से मनाया जाता है। बता दें की कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर त्रिची स्थित श्री वेणुगोपाल कृष्ण मंदिर में भगवान कृष्ण के लिए विशेष अनुष्ठान और अभिषेकम किए गए, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।


इन राशि वालों को मिलेगा विशेष लाभ 

कन्या राशि
इस समय आपके जीवन में कुछ सकारात्मक बदलाव आने वाले हैं। विवाह के अच्छे प्रस्ताव मिल सकते हैं और व्यापार में नई डील होने की संभावना भी है। खासतौर पर तकनीकी, विज्ञापन, परामर्श या नवाचार के क्षेत्र से जुड़े लोगों को आगे बढ़ने के नए मौके मिलेंगे। कामकाज में सीनियर्स की सराहना मिलेगी और प्रमोशन का भी योग बन सकता है। साथ ही, यात्रा और व्यापार के जरिए लाभ मिलने की संभावना है।

धनु राशि
धनु राशि के जातकों के लिए यह समय करियर और कारोबार में सफलता लेकर आ सकता है। आपकी मेहनत रंग लाएगी और उन्नति के अवसर मिलेंगे। संतान सुख से मन प्रसन्न रहेगा। बिजनेस में मनचाहा लाभ मिलने की संभावना है और नए संपर्कों से व्यापार विस्तार भी संभव है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लोगों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है।

कुंभ राशि
कुंभ राशि वालों को जमीन-जायदाद से जुड़े मामलों में राहत मिलने की उम्मीद है। पारिवारिक जीवन में खासकर माता से संबंध और प्रगाढ़ होंगे। छात्रों के लिए यह समय पढ़ाई में सफलता और नई चीजें सीखने का अच्छा मौका लेकर आया है। संतान से किया वादा पूरा हो सकता है। जीवनसाथी, मित्र या बिजनेस पार्टनर का सहयोग मिलने से आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। करियर में नई योजनाओं पर काम शुरू करने का यह उपयुक्त समय है।


भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित करें ये विशेष भोग

माखन-मिश्री
भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं में माखन और मिश्री का विशेष स्थान है। वे बचपन में चुपचाप घर-घर जाकर माखन चुराते थे, इसी वजह से माखन-मिश्री का भोग उन्हें अत्यंत प्रिय है। जन्माष्टमी के दिन इसका भोग लगाने से श्रीकृष्ण की विशेष कृपा मानी जाती है।

पंचामृत
दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बना पंचामृत शुद्धता और पवित्रता का प्रतीक है। इस दिन श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक करना और इसे भोग स्वरूप अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

पंजीरी

धार्मिक पर्वों जैसे जन्माष्टमी और राम नवमी पर पंजीरी का भोग लगाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख प्रसादों में से एक है और इसे श्रद्धा से अर्पित करने पर विशेष फल मिलता है।

लौकी या खोए का पाग
जन्माष्टमी पर कई लोग लौकी, खोया, तिल या मूंगफली से बनी हुई विशेष मिठाई (जिसे पाग कहा जाता है) का भोग भी लगाते हैं। यह मिठाई भक्ति और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है और इसे प्रसाद रूप में बांटना भी पुण्यदायी होता है।


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