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‘मन हल्का हो गया', जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में भजन सुनकर रो पड़ीं मैथिली ठाकुर

‘मन हल्का हो गया', जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में भजन सुनकर रो पड़ीं मैथिली ठाकुर

 

MLA Maithili Thakur crying Video: जयपुर के प्रसिद्ध गोविंददेवजी मंदिर में रविवार को लोक गायिका और बिहार की अलीनगर विधायक मैथिली ठाकुर भावुक होकर रो पड़ीं। मंदिर में भजन गाते समय भक्तों की मधुर धुन, घंटियों की गूंज और तालियों की लय ने उनके मन को इतना छू लिया कि वे खुद को संभाल नहीं पाईं। मैथिली ने कहा, “पता नहीं मुझे क्या हो रहा है… भक्तों के भजन और गोविंदजी के दरबार की ऊर्जा ने मन को इतना छू लिया कि आंसू रुक नहीं रहे। 

भजन गाते हुए हुईं भावुक

मैथिली ठाकुर अपने दोनों भाइयों ऋषभ और अयाची के साथ गोविंददेवजी मंदिर पहुंची थीं। वहां भजन मंडली में शामिल होकर उन्होंने “आज तो नवेली राधा गौरी पूजन आई छ…'जैसे भजन गाए। इसी दौरान उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। उन्होंने बताया कि ऐसा लगा जैसे मन का सारा बोझ एक पल में हल्का हो गया हो। मैथिली ने कहा, “आज तक कई मंदिरों में दर्शन किए, लेकिन गोविंददेवजी के दरबार में जो अनुभूति हुई, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।”

आस्था और भक्ति की अनोखी अनुभूति

मैथिली ठाकुर ने मंदिर के वातावरण का जिक्र करते हुए कहा, “जैसे ही मंदिर में कदम रखा, हजारों श्रद्धालुओं की ‘जय-जय श्री राधे गोविंद’ की गूंज, घंटियों की मधुर ध्वनि और भजन की लय ने पूरा परिसर दिव्य ऊर्जा से भर दिया। उस पल कुछ ऐसा हुआ कि बिना वजह आंसू बहने लगे. लगा जैसे भीतर जमा थकान, चिंता और बोझ पिघलकर बह गया हो। भक्ति कभी-कभी शब्दों से नहीं, भावनाओं से महसूस होती है. गोविंददेवजी के दरबार में मुझे सच में शांति और सुकून मिला।”

जयपुर में ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ में हिस्सा

मैथिली ठाकुर जयपुर ‘यूनिक रंग राजस्थान रंग रथ यात्रा’ कार्यक्रम में हिस्सा लेने आई हैं। रविवार शाम को उनका एक कंसर्ट भी प्रस्तुत होने वाला है। इस दौरान उन्होंने गोविंददेवजी मंदिर दर्शन के अलावा अपने गायकी, राजनीतिक सफर और सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से जुड़े अनुभवों पर भी खुलकर बात की। 

भावुक पल का वायरल होना

मैथिली ठाकुर के इस भावुक पल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। भक्तों और फैंस ने उनकी आस्था और सादगी की खूब सराहना की है। कई लोगों ने लिखा कि “सच्ची भक्ति यही होती है, जहां आंसू खुद-ब-खुद बहने लगते हैं।” यह घटना बताती है कि आस्था के आगे कोई पद, पदवी या प्रसिद्धि नहीं टिकती-सिर्फ दिल का जुड़ाव रह जाता है। 


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