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मानसून की पहली भारी बारिश से हिमाचल में तबाही, 6 लोगों की मौत, कई सड़कें बंद

मानसून की पहली भारी बारिश से हिमाचल में तबाही, 6 लोगों की मौत, कई सड़कें बंद

 

Himachal Weather: हिमाचल में अब पूरे प्रदेश में मॉनसून की एंट्री हो चुकी है और पहले ही दिन जनजीवन पर इसका व्यापक असर देखने को मिला है। इसके अलावा, जान-माल का नुकसान भी हुआ है। बुधवार को भारी बारिश के कारण राज्य के कई जिलों में सड़क संपर्क बाधित हो गया और बिजली व्यवस्था चरमरा गई। वहीं, लैंडस्लाइड और सड़क हादसों में बुधवार को छह लोगों की मौत हो गई।

गुरुवार को भी भारी बारिश का सिलसिला जारी रहा। चंबा जिले में भरमौर-चंबा सड़क पर दिनका घार के पास मलबा गिरने से मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। सड़क बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

मौसम विभाग के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही अधिकतम तापमान में 3 से 8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है, जबकि न्यूनतम तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। सबसे कम न्यूनतम तापमान कुकुमसेरी में 9.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, सबसे अधिक अधिकतम तापमान ऊना में 32.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

पिछले 12 घंटों में सबसे अधिक 100.4 मिमी बारिश सिरमौर जिले के पांवटा साहिब में हुई। इसके अलावा, कसौली में 86.0 मिमी, धर्मपुर (सोलन) में 83.4 मिमी, जैतो बैराज (सिरमौर) में 77.0 मिमी, धौलाकुआं में 69.0 मिमी, पच्छाद में 60.0 मिमी, शिमला के रामपुर में 53.0 मिमी, ऊना में 50.4 मिमी, नाहन में 38.3 मिमी और पालमपुर में 37.8 मिमी बारिश दर्ज की गई।

राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार शाम छह बजे तक प्रदेश में 35 सड़कें बंद थीं, जबकि 127 बिजली वितरण ट्रांसफार्मर (डीटीआर) ठप पड़े थे। सबसे अधिक प्रभावित कुल्लू जिला रहा, जहां 18 सड़कें बंद हैं। इसके अलावा, सोलन और चंबा जिलों में भी 12-12 सड़कें प्रभावित हुई हैं। लोक निर्माण विभाग की टीमें लगातार राहत एवं बहाली कार्य में जुटी हुई हैं और बंद मार्गों को खोलने का प्रयास कर रही हैं।

बारिश का सबसे अधिक असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा है। प्रदेशभर में 127 डीटीआर बंद हो गए हैं, जिनमें अकेले कुल्लू जिले के 86 ट्रांसफार्मर प्रभावित हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब तक राज्य में किसी भी जिले से पेयजल योजनाओं के प्रभावित होने या पेयजल आपूर्ति बाधित होने की सूचना नहीं मिली है।

जानकारी के अनुसार, आपदा से जुड़े हादसों में चार लोगों की मौत हुई है। कांगड़ा जिले में करंट लगने, आकाशीय बिजली गिरने और गिरने की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की जान गई। वहीं, मंडी जिले में एक महिला की पहाड़ी से पत्थर गिरने के कारण मौत हो गई।

इसके अलावा, बारिश से जुड़े अलग-अलग सड़क हादसों में किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई। इस तरह मॉनसून से संबंधित घटनाओं में अब तक कुल छह लोगों की जान जा चुकी है।

बारिश के कारण सार्वजनिक और निजी संपत्ति के साथ-साथ पशुधन को हुए नुकसान का प्रारंभिक आकलन 44.40 लाख रुपये किया गया है। सबसे अधिक आर्थिक नुकसान कांगड़ा जिले में दर्ज किया गया है, जहां करीब 16 लाख रुपये की क्षति का अनुमान है।

राज्य सरकार, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन एजेंसियां और संबंधित विभाग हाई अलर्ट पर हैं। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश जारी रहने की संभावना जताई है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्रों में सड़क और बिजली व्यवस्था जल्द से जल्द बहाल करने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।


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