UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस के इतिहास में रविवार का दिन गर्व, भावनाओं और उपलब्धियों से भरा रहा, जब पुलिस लाइंस में आयोजित दीक्षांत परेड में नौ माह की कठोर प्रशिक्षण प्रक्रिया पूरी कर महिला आरक्षियों समेत हजारों नवचयनित सिपाहियों ने पुलिस बल में औपचारिक प्रवेश किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेधावी आरक्षियों को सम्मानित किया और डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी नवसिपाहियों को शपथ दिलाई। समारोह के दौरान कई महिला आरक्षियों की आंखें अपने परिवारों के सामने भावुक हो गईं, जब उनके संघर्ष और सपनों को सफलता का रूप मिला।
सीएम के हाथों सम्मान, भावुक हुआ समारोह
दीक्षांत परेड के दौरान जब उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला आरक्षियों को पुरस्कार दिए गए, तो माहौल भावनाओं से भर गया। कई आरक्षियों ने अपने माता-पिता को पुलिस कैप पहनाकर सम्मानित किया तो कई ने वर्षों के संघर्ष को सफलता में बदलते देखा। गाजीपुर की नेहा यादव के लिए यह पल बेहद खास रहा, जिन्हें सीएम योगी ने बेस्ट कंपनी कमांडर समेत तीन पुरस्कार प्रदान किए।
पुलिस में शामिल हुए 57 हजार नए सिपाही
इस दीक्षांत समारोह के बाद करीब 57 हजार प्रशिक्षित सिपाही यूपी पुलिस बल में शामिल हुए, जिनमें 12 हजार से अधिक महिला आरक्षी हैं। सभी सिपाहियों को उनकी तैनाती वाले जिलों और कमिश्नरेट में भेज दिया गया, जहां सोमवार से उनका व्यवहारिक प्रशिक्षण शुरू होगा।
प्रशिक्षण के दौरान इन्हें थानों पर तैनात कर कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग की जमीनी समझ विकसित कराई जाएगी। तीन महीने के बाद उनकी तैनाती में आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
टॉपर्स और मेधावी आरक्षियों का सम्मान
समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली महिला आरक्षियों को विशेष सम्मान दिया गया। नेहा यादव को पूरे कोर्स में टॉपर और सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार मिला, जबकि रिया सिंह कुशवाह को परेड कमांडर द्वितीय और कुमारी सोनम को परेड कमांडर तृतीय के रूप में सम्मानित किया गया।
सपनों की नई उड़ान
ललितपुर की रिया सिंह कुशवाह ने एमएससी के बाद शिक्षक की नौकरी छोड़ी और पुलिस सेवा को चुना। उन्हें परेड कमांडर द्वितीय का सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि अनुशासन और टीमवर्क ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया और अब वह सब-इंस्पेक्टर बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ेंगी।
परिवारों के सपनों का साकार होना
जौनपुर की शीतल तिवारी और पूजा देवी जैसी कई महिला आरक्षियों के लिए यह दिन जीवन का सबसे खास पल बन गया। किसी ने पिता का सपना पूरा किया तो किसी ने भाई के प्रेरणादायक सपनों को आगे बढ़ाया। कई आरक्षियों ने कहा कि कठिन ट्रेनिंग के बावजूद परिवार का सहयोग उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा।
संघर्ष से सफलता तक
कानपुर की मानसी त्रिवेदी और मऊ की कुमारी सोनम जैसी आरक्षियों ने सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद सफलता हासिल की। सोनम ने दो पुरस्कार प्राप्त कर यह साबित किया कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।