Navratri 2026 Fourth Day: शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। हर दिन देवी के एक अलग स्वरूप की आराधना का विधान है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा को सृष्टि की रचनाकार माना जाता है। कहा जाता है कि जब चारों ओर अंधकार था, तब देवी की मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की उत्पत्ति हुई थी। इसी वजह से उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है। मां कूष्मांडा की पूजा में मंत्र जाप, भोग और फूलों का विशेष महत्व माना जाता है। भक्त उनसे सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन में सकारात्मकता की कामना करते हैं। आइए जानते हैं मां कूष्मांडा का स्वरूप, उनकी पूजा विधि, प्रिय भोग और मंत्र से जुड़ी खास बातों के बारे में।
चौथे दिन होती है मां कूष्मांडा की पूजा
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। साल 2026 में नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से हुई है। इस हिसाब से चौथा दिन बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को है। इस दिन भक्त सुबह स्नान करके पूजा की तैयारी करते हैं और विधि-विधान से देवी की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा अपने भक्तों को ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता प्रदान करती हैं। उनकी पूजा से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
मां कूष्मांडा का स्वरूप और धार्मिक महत्व
मां कूष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है, क्योंकि उनकी आठ भुजाएं हैं। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, जप माला, गदा और चक्र सुशोभित रहते हैं। देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनका तेज सूर्य के समान माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा में सूर्य के भीतर निवास करने की शक्ति है। उन्हें सूर्य मंडल के मध्य में विराजमान माना जाता है। यही वजह है कि उनका संबंध सूर्य देव से भी जोड़ा जाता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में मां कूष्मांडा को सूर्य ग्रह की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।
मां कूष्मांडा की पूजा विधि
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके मां दुर्गा और मां कूष्मांडा का ध्यान करें। पूजा के दौरान इन बातों का ध्यान रख सकते हैं।
सबसे पहले मां कूष्मांडा के सामने दीपक जलाएं और पूजा का संकल्प लें। देवी को लाल रंग के फूल अर्पित करें। धार्मिक परंपराओं में लाल फूलों को देवी की पूजा के लिए शुभ माना जाता है। मां को फल, मिठाई और अपनी श्रद्धा के अनुसार सात्विक भोग अर्पित करें। इसके बाद मां कूष्मांडा के मंत्र का जाप करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ कर सकते हैं। सबसे आखिर में मां की आरती करें और परिवार की सुख-शांति की कामना करें।
मां कूष्मांडा का प्रिय भोग क्या है?
नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा को मालपुआ अर्पित करने की परंपरा कई जगह प्रचलित है। वहीं, भक्तगण फल, मिठाई और अन्य सात्विक पकवानों का भोग भी लगाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां को भोग लगाने के बाद प्रसाद परिवार के सदस्यों और दूसरे लोगों में बांटना शुभ माना गया है।
मां कूष्मांडा का मंत्र और जाप का महत्व
ॐ देवी कूष्माण्डायै नमः॥
इस मंत्र का जाप करते समय मां कूष्मांडा का ध्यान करें। भक्तों की मान्यता है कि देवी के मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और पूजा में एकाग्रता बढ़ती है।
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। जनता टीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है।