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Hisar और प्रदेश के अन्य जिलों में फसलों पर पड़ी बारिश, ओलावृष्टि की मार

Hisar और प्रदेश के अन्य जिलों में फसलों पर पड़ी बारिश, ओलावृष्टि की मार

 

Haryana Weather Update: कई दिनों की तपिश के बाद जिले में मंगलवार को मौसम का मिजाज बदल गया और जिले के कई गांवों में मंगलवार दोपहर को ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई, जिससे फसलों को काफी नुकसान हुआ है। गांव खारिया, डोभी, शाहपुर, मात्रश्याम, सीसवाला, खरखड़ी, खोखा, रावलवास सहित आसपास के क्षेत्रों में बारिश के साथ तेज ओलावृष्टि हुई। अचानक हुई इस प्राकृतिक आपदा से किसानों की खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। ओलावृष्टि शहरी क्षेत्र में भी हुई। किसानों के अनुसार सरसों, गेहूं, जौ, चना व पशु चारे की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। ओलावृष्टि के कारण फसलें खेतों में बिछ गई, जिससे उत्पादन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। हालांकि प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का आधिकारिक आकलन नहीं किया गया है, लेकिन किसानों का कहना है कि नुकसान काफी ज्यादा है।

चरखी दादरी (हप्र) : गांव पालड़ी, कोरी रूपा, कादमा, नौरंगाबास और बाढड़ा क्षेत्र में मंगलवार दोपहर मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। तेज बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि से सरसों और गेहूं की फसलों को नुकसान पहुंचा है। खेतों में खड़ी और कटी सरसों की फसल काफी प्रभावित हुई है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। क्षेत्र में सरसों की 80 प्रतिशत कटाई हो चुकी थी, लेकिन ओलों की मार से कटी हुई फसल भी खराब हो गई। गेहूं की फसल की कटाई अभी शुरू ही हुई थी, जिस पर भी इस मौसम ने बड़ा असर डाला है। किसान देवेंद्र नम्बरदार, कृष्ण कुमार, सुरेंद्र सिंह, ओमप्रकाश और सूरत सिंह ने बताया कि मौसम अचानक खराब हुआ और तेज ओलावृष्टि शुरू हो गई, जिससे खेतों में भारी नुकसान हुआ। रबी की फसल ही उनकी मुख्य आमदनी का साधन होती है, लेकिन इस प्राकृतिक आपदा ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। किसानों ने सरकार से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलाया जाये।

कनीना (निस) : कनीना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर के समय तेज हवा के साथ बारिश एवं हल्की ओलावृष्टि से सरसों एवं गेहूं की फसल में नुकसान की संभावना बन गई है। कनीना सहित कुछ गांवों में हलकी ओलावृष्टि होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें तन गई हैं। बारिश से खेतों में खडी गेहूं की फसल लेट गई है तथा कटाई की जा चुकी सरसों की फसल में झड़त हुई है। बता दें कि कनीना खंड में इस बार गेहूं की बजाय सरसों की बुआई अधिक रकबे में की गई है। कृषि विभाग के उपमंडल अधिकारी ने बताया कि कनीना खंड में 18 हजार हेक्टेयर भूमि पर सरसों तथा करीब 9 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं सहित आलू, मटर, गाजर, मूली, हरी मिर्च, चना,जौ व हरा चारा की फसल की गई है। मौसम विभाग की ओर से 31 मार्च को तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई गई थी। जिसे लेकर किसानों ने गेहूं की फसल में की जा रही सिंचाई रोक दी थी। मौसम के उतार-चढाव के दौरान दिन और रात्रि का तापमान सामान्य से कम रह सकता है।


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