Dhirendra Shastri: बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री एक बार फिर अपने बेबाक और प्रेरणादायक भाषण के लिए सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को बांदा के खुरहंड पहुंचे धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू समुदाय को आत्मनिरीक्षण और एकता का एक शक्तिशाली संदेश दिया। उन्होंने साफ किया कि देश की प्रगति और 'हिंदू राष्ट्र' की अवधारणा नारों या विरोध प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि समाज के भीतर आंतरिक सुधार और सद्भाव से ही संभव है।
बीजेपी विधायक प्रकाश द्विवेदी के घर सुंदरकांड और हनुमान चालीसा पाठ में शामिल होने आए शास्त्री ने हजारों भक्तों को संबोधित किया। हिंदुओं को सलाह देते हुए उन्होंने कहा, "हिंदुओं, यह बात ध्यान से सुन लें: मुसलमानों को गाली देने से हिंदू राष्ट्र नहीं बनेगा। हमें सबसे पहले अपने अंदर की बुराइयों और कमियों को खत्म करना होगा।"
उन्होंने सामाजिक भेदभाव की कड़ी निंदा करते हुए नारा दिया, "जातिवाद को अलविदा कहो, हम सब हिंदू भाई हैं।" उनका मानना है कि जब तक समाज जाति के आधार पर बंटा रहेगा, एकता का सपना अधूरा ही रहेगा।
पारिवारिक मूल्यों और धैर्य पर सीख
अपने संबोधन के दौरान उन्होंने वैवाहिक और पारिवारिक व्यवस्था पर भी बात की। अन्य समुदायों की तुलना में सनातन धर्म की वैवाहिक परंपराओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी परंपरा में विवाह एक ऐसा बंधन है जो जन्म-जन्म तक चलता है। धैर्य के महत्व को समझाते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादा और कानून के दायरे में रहना सभी के हित में है। उन्होंने कहा, "अगर आप नियमों के दायरे में रहेंगे तो आपको ही फायदा होगा।"
अटूट विश्वास जरूरी है
भक्तों को भक्ति का सही रास्ता दिखाते हुए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि भगवान पर विश्वास कभी भी अधूरा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अक्सर लोग मुश्किलों का सामना करने पर अलग-अलग जगहों पर भटकते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि उन पर हनुमान जी की कृपा नहीं हो रही है। उन्होंने कहा, "भगवान पर पूरा भरोसा रखें। कंबल चढ़ाने या मोमबत्ती जलाने के बजाय, अपनी जड़ों और अपने इष्ट देवता पर अटूट विश्वास रखें। अगर आप सच में सब कुछ भगवान को सौंप देंगे, तो वह कभी भी आपके विश्वास को टूटने नहीं देंगे।"
बांदा में भारी भीड़
पिछले 10 दिनों में धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बांदा का यह दूसरा दौरा था। विधायक के आवास पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में बांदा और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय था, और शास्त्री जी के विचारों ने युवाओं और बुजुर्गों दोनों को समान रूप से प्रभावित किया।