होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
बिजनेस
मनोरंजन
सेहत
नॉलेज
फैशन/लाइफ स्टाइल
अध्यात्म

 

94 साल से हिंदू मुस्लिम साथ मनाते हैं त्योहार, जानिए क्या है मंदिर से जुड़ा इतिहास?

94 साल से हिंदू मुस्लिम साथ मनाते हैं त्योहार, जानिए क्या है मंदिर से जुड़ा इतिहास?

 

Pithoragarh News:रंगों का त्यौहार होली सामूहिक रुप से मनाये जाने वाला त्यौहार है, इस पर्व में सामाजिक एकता का स्वरूप सही मायनों में दिखाई देता है। सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में होली की भूमिका सदियों से रही है। पिथौरागढ़ नगर के पुराना चौक बाजार में होने वाली खड़ी इसका एक उत्कृष्ट उदाहरण है। जिसमें सभी धर्मों के लोग भागीदारी करते रहे हैं।

हिंदू-मुस्लिम मिलकर मनाते हैं सामाजिक सौहार्द का पर्व

सबसे पहले पुरानी बाजार की बसासत को समझना जरूरी है। यहां हिंदू और मुस्लिमों की बसासत एक साथ शुरू हुई। 1815 में गोरखा राज खत्म होने के बाद अंग्रेजों के हाथ में राज-काज आ गया। अंग्रेजी राज में ही पुराना बाजार क्षेत्र में शाह, खत्री, थापा, सार्की, बर्मा, माहरा और कुछ मुस्लिम परिवार इस क्षेत्र में बसे और धीरे-धीरे यहां बाजार बनने लगा। अलग-अलग क्षेत्रों से आये लोगों ने मिलजुलकर 1939 में यहां खड़ी होली गायन शुरू किया। मुस्लिम यहां ढोल बजाने लगे और हिंदू खड़ी होली गायन करने लगे।

इन सभी परिवारों की पांच से सात पीढ़ियों ने इस होली को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने-अपने समय में संभाली। पुराना बाजार क्षेत्र के बाद धर्मशाला लाइन, सिमलगैर बाजार, नया बाजार, स्टेशन क्षेत्र विकसित हुए और लोग इस होली के कारवां में जुड़ते गये। आज युवा पीढ़ी इस विरासत को आगे बढ़ाने का कार्य कर रही है। पुराना बाजार के निवासी अकबर खान और भोला भाई बताते हैं कि उनके परिवारों की पांच से अधिक पीढ़ियों के लोग पुराना बाजार होली कमेटी से जुड़े रहे हैं। पार्षद सुशील खत्री का कहना है कि यह होली सामाजिक सौहार्द का बेहतरीन उदाहरण है।

कई उतार-चढ़ावा झेले हैं होली ने

नगर के प्राचीन शिव मंदिर और मस्जिद के बीच स्थित चौक बाजार की होली ने कई उतार चढ़ाव झेले हैं। पिछली शताब्दी के नब्बे के दशक में शराब के बढ़ते प्रचलन ने होली को कोई बार बाधित किया, लेकिन इस साझी विरासत को बचाये रखने के लिए संकल्पबद्ध लोगों ने इस बुराई से होली का बाहर निकाल लिया। आज होली में शराब पीकर आने पर पूर्ण प्रतिबंध है। युवा शराब पीकर आने वाले लोगों को तत्काल बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। होली कमेटी के सुनील वर्मा का कहना है कि नई पीढ़ी इस विरासत का मूल्य समझती है। नई पीढ़ी को भी होली गायन सिखाया जा रहा है, जिससे भविष्य में युवा पीढ़ी विरासत को आगे बढ़ा सके।

गंगोलीहाट हाट कालिका मंदिर से जुड़ा है इतिहास

पिथौरागढ़: पुराना बाजार होली कमेटी गंगोलीहाट हाट कालिका मंदिर से जुड़ी बताई जाती है। जिले में दो प्रमुख स्थान हाट कालिका मंदिर और चौक बाजार में एक ही दिन चीर बांधी जाती है। होली कमेटी के अध्यक्ष त्रिभुवन लाल साह का कहना है कि चौक बाजार होली की चीर गंगोलीहाट मंदिर से लाई गई थी। तब से यहां चीर बंधन होता रहा है। चीर बांधने के दौरान मां हाटकालिका का स्मरण किया जाता है।
 


संबंधित समाचार