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कांग्रेस विधायकों से कथित बदसलूकी पर गरमाई सियासत, हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल से मिलेंगे नेता

कांग्रेस विधायकों से कथित बदसलूकी पर गरमाई सियासत, हुड्डा के नेतृत्व में राज्यपाल से मिलेंगे नेता

 

Haryana Assembly News: हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायकों और सुरक्षा कर्मियों (पुलिस) के बीच हुए कथित दुर्व्यवहार का मामला अब राजभवन तक पहुंचने जा रहा है।

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक सोमवार को दोपहर 12 बजे लोकभवन में राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपेंगे। कांग्रेस विधायकों का आरोप है कि विधानसभा के सत्र में भाग लेने के लिए पहुंचने के दौरान सुरक्षा कर्मियों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और उन्हें गेट पर रोका गया।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा के भीतर उठाया। सदन में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और विधानसभा अध्यक्ष के साथ तीखी नोकझोंक हुई। स्थिति बिगड़ने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के आठ विधायकों को नेम किया, जिसके बाद मार्शलों ने उन्हें सदन से बाहर कर दिया।

हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही भी दो बार स्थगित करनी पड़ी। मानसून सत्र के पहले दिन कांग्रेस विधायक भूपेंद्र सिंह हुड्डा के नेतृत्व में काले कपड़े पहनकर और हाथों में तख्तियां लेकर विधानसभा पहुंचे थे।

कांग्रेस विधायक सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए विधानसभा में प्रवेश करना चाहते थे, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें गेट पर ही रोक दिया। इसके बाद कथित तौर पर धक्का-मुक्की और विवाद की स्थिति पैदा हो गई।

इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के आरोप अलग-अलग हैं। भाजपा विधायकों का आरोप है कि हंगामे के दौरान नेता प्रतिपक्ष हुड्डा ने एक सुरक्षाकर्मी को कोहनी मारी। वहीं, हुड्डा ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षाकर्मियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की और दुर्व्यवहार किया तथा इस दौरान उनके कपड़े तक फाड़ दिए गए।

कांग्रेस ने मामले को केवल विधानसभा के भीतर का विवाद मानने की बजाय अब राज्यपाल के समक्ष उठाने का फैसला किया है। हुड्डा के साथ कांग्रेस विधायक राज्यपाल को पूरे घटनाक्रम से अवगत कराते हुए ज्ञापन सौंपेंगे।

इससे पहले सदन में हुए हंगामे ने सरकार और विपक्ष के बीच पहले से चल रहे राजनीतिक टकराव को और तीखा कर दिया है। सत्ता पक्ष का जोर सदन की मर्यादा और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने पर है।


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