China Tibet Glacial Lakes: नेपाल में बाढ़ के कारण आई त्रासदी ने देश सहित हिमाचल की चिंता बढ़ा दी है। हिमाचल सहित अन्य राज्यों पर चीन-तिब्बत की 639 झीलों का साया है। 73 झीलें ऐसी हैं जो 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फैली हैं। अधिकतर झीलें चीन-तिब्बत क्षेत्र में हैं। ऐसे में इनकी निगरानी सेटेलाइट के माध्यम से की जा रही है। इसके लिए हिमाचल में अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत किया जा रहा है।
सेंसरयुक्त अर्ली वार्निंग सिस्टम
40 हेक्टेयर से अधिक के क्षेत्र में बनी चार झीलों के तराई क्षेत्रों में सेंसरयुक्त अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इसमें से लाहुल स्पीति की 99 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली गेपांग गाथ झील के डाउनस्ट्रीम में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा अर्ली वार्निंग सिस्टम को पुणे की सी डैक कंपनी के माध्यम से लगाया जा रहा है, जिसका अभी ट्रायल चल रहा है।
सांगला सहित इन तीन झीलों का सर्वे किया
इसके अलावा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सहयोग से सी-डैक की टीम ने किन्नौर की सांगला, बास्पा झील और कुल्लू की वासुकी झील का जियोलाजिकल एवं बाथीमेट्री सर्वे किया है। इन्हीं में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाने की योजना है। बाथीमेट्री से झील की वास्तविक गहराई, आकार और पानी की मात्रा का आकलन किया जाता है। वासुकी झील करीब 4,500 मीटर की ऊंचाई पर है। सर्वे में इसकी अधिकतम गहराई 36.91 और औसत गहराई 14.48 मीटर मिली। सांगला झील करीब 4,710 मीटर की ऊंचाई पर है।
किस घाटी में कितनी झीलें
73 ग्लेशियल झीलों में सतलुज घाटी में 62, चिनाब में सात, रावी में तीन और ब्यास में एक झील 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल की है। 2016 में ऐसी बड़ी झीलों की संख्या 63 थी। हिमाचल के हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों के पीछे हटने के साथ ग्लेशियल झीलों का तेजी से फैलता जाल भविष्य के बड़े जल प्रलय का खतरा बढ़ा रहा है। वर्ष 2016 में चार प्रमुख नदी घाटियों में जहां 805 ग्लेशियल झीलें दर्ज थीं, वहीं 2022 में इनकी संख्या बढ़कर 1,619 हो गई। पांच हेक्टेयर से छोटी झीलों की संख्या 1,441 रही।
मैप की गई झीलों का बड़ा हिस्सा तिब्बत क्षेत्र में
सतलुज घाटी में 995 झीलें मैप की गई हैं। इनमें 639 झीलें ऊपरी सतलुज के तिब्बत कैचमेंट और 356 हिमाचल के स्पीति तथा लोअर सतलुज क्षेत्र में हैं। यानी मैप की गई झीलों का बड़ा हिस्सा चीन के तिब्बत क्षेत्र में है। सतलुज के ऊपरी तिब्बती कैचमेंट में बड़ी संख्या में झीलों का होना हिमाचल के लिए इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सतलुज का प्रवाह तिब्बत से हिमाचल में प्रवेश करता है। पारछू झील जैसे संवेदनशील जल निकाय भी निगरानी में हैं।
नेपाल में हुई त्रासदी में अभी तक हिमाचल के ऊना के एक व्यक्ति का ही पता चला है। चीन के अधिकृत क्षेत्र में अधिकतर झीलें हैं। चार झीलों के डाउनस्ट्रीम में अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं। गेपांग गाथ के डाउनस्ट्रीम में ट्रायल चल रहा है। हर स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
-पुष्पेंद्र राणा, विशेष सचिव आपदा प्रबंधन प्राधिकरण।