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शख्स ने मुर्गे को खिलाया सूखा मेवा, बदले में जिताए 1.53 करोड़ रुपए, जानिए क्या है पूरा मामला?

शख्स ने मुर्गे को खिलाया सूखा मेवा, बदले में जिताए 1.53 करोड़ रुपए, जानिए क्या है पूरा मामला?

 

Andhra Pradesh Cockfight: आंध्र प्रदेश और असम में मकर संक्रांति और माघ बिहू त्योहारों के दौरान होने वाली पारंपरिक जानवरों की लड़ाई ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। इन आयोजनों में करोड़ों रुपये की सट्टेबाजी होती है, जिससे कोर्ट के आदेशों की अनदेखी भी सामने आई है। आंध्र प्रदेश के पश्चिम गोदावरी जिले में संक्रांति के मौके पर हुई एक मुर्गे की लड़ाई में एक बड़ा रिकॉर्ड बना।

ताडेपल्लीगुडेम शहर में हुई मुर्गे की लड़ाई में राजमुंदरी रमेश नाम के एक आदमी ने 1.53 करोड़ रुपये जीते। रमेश के मुर्गे ने गुडीवाड़ा प्रभाकर के मुर्गे को हरा दिया। रमेश ने अपनी जीत का श्रेय अपने मुर्गे की खास देखभाल को दिया। उसने बताया कि वह पिछले छह महीनों से अपने मुर्गे को सूखे मेवे खिलाकर उसकी शारीरिक ताकत बढ़ाने के लिए तैयार कर रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी

यह ध्यान देने वाली बात है कि बैन के बावजूद, आंध्र प्रदेश के कई हिस्सों में ये लड़ाइयां और उनसे जुड़ी सट्टेबाजी बड़े पैमाने पर जारी है। इस बीच, असम के मोरीगांव जिले में माघ बिहू के मौके पर पारंपरिक भैंसों की लड़ाई (मोह जुज) का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन आयोजनों पर बैन के बावजूद, बैद्यबोरी और अहतगुड़ी जैसे इलाकों में लोगों ने इस परंपरा को जारी रखा।

स्थानीय प्रशासन ने टिप्पणी करने से इनकार किया

स्थानीय प्रशासन ने इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि यह मामला विचाराधीन है। इन आयोजनों को माघ बिहू फसल उत्सव का एक अहम हिस्सा माना जाता है, जो बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों को आकर्षित करता है। इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर पशु अधिकारों और सांस्कृतिक परंपराओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे टकराव को सामने ला दिया है।


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