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महिलाएं 30 के बाद जरूर कराएं ये 6 ब्लड टेस्ट, डायबिटीज समेत इन बीमारियों का चलेगा पता

महिलाएं 30 के बाद जरूर कराएं ये 6 ब्लड टेस्ट, डायबिटीज समेत इन बीमारियों का चलेगा पता

 

Blood Test for Women after 30: महिलाओं के शरीर में उम्र के हर पड़ाव में शारीरिक परिवर्तन होता है। इस दौरान शरीर में हार्मोनल बदलाव भी होते हैं। हार्मोनल बदलाव के दौरान अगर शरीर का कोई भी हार्मोन लेवल ठीक ना हो तो शारीरिक और मानसिक परेशानी बढ़ सकती है। ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया स्टेट ऑफ गवर्नमेंट के अनुसार रेगुलर हेल्थ चेकअप खुद को हेल्दी रखने का महत्वपूर्ण तरीका है। ब्लड टेस्ट की मदद से किसी भी बीमारी या सेहत से जुड़ी अन्य परेशानियों की जानकारी शुरुआत में ही मिल सकती है। और महिलाओं में होने वाले हार्मोनल बदलाव की वजह से साल में एक बार CBC, ब्लड शुगर टेस्ट समेत कुछ अन्य ब्लड टेस्ट करवाना चाहिए। इस आर्टिकल में समझेंगे कि महिलाओं को कौन-कौन से ब्लड टेस्ट साल में एक बार जरूर करवाने चाहिए और क्यों करवाने चाहिए।

महिलाओं को एनुअल ब्लड टेस्ट क्यों करवाना चाहिए?

विमेंस हेल्थ से जुड़ी कई ऐसी परेशानियां हैं जो धीरे-धीरे शुरू होती है, लेकिन लक्षण नजर नहीं आते हैं। नियमित ब्लड टेस्ट से शारीरिक परेशानियों को समझने में मदद मिल सकती है, जिससे महिलाएं फिट रह सकती हैं। अगर ब्लड टेस्ट में कुछ परेशानी नजर आती है, तो डॉक्टर ट्रीटमेंट शुरू कर सकते हैं। इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार साल में एक बार ब्लड टेस्ट करवाने से-

  • कम्पलीट हेल्थ की चेकअप हो जाती है।
  • किसी भी बीमारी के शुरुआती दिनों में ही जानकारी मिल सकती है।
  • न्यूट्रिशनल डेफिशिएंसी की जानकारी मिल सकती है।
  • जिन महिलाओं को ब्लड शुगर, हाई ब्लड प्रेशर या ऑबेसिटी जैसी समस्या है तो उनके लिए समय-समय पर ब्लड टेस्ट करवाना और भी ज्यादा जरूरी है।

महिलाओं के लिए जरूरी ब्लड टेस्ट

1. HbA1c और फास्टिंग ब्लड शुगर

डायबिटीज शुरुआत में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती है। ऐसे में HbA1c पिछले लगभग दो से तीन महीनों में औसत ब्लड शुगर की जानकारी देता है, जबकि फास्टिंग ब्लड शुगर उस समय ब्लड में मौजूद ग्लूकोज का लेवल बताता है। 2026 के American Diabetes Association स्टैंडर्ड के अनुसार सामान्य जोखिम वाली महिलाओं में डायबिटीज की स्क्रीनिंग 35 साल की उम्र से शुरू करने की सलाह दी जाती है। इससे पहले भी अधिक वजन, परिवार में डायबिटीज, PCOS, हाई ब्लड प्रेशर या गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज का इतिहास होने पर जांच की जरूरत हो सकती है।

2. लिपिड प्रोफाइल

इसमें LDL, HDL, ट्राइग्लिसराइड और कुल कोलेस्ट्रॉल की जांच होती है। बढ़ा हुआ LDL अक्सर किसी तरह का लक्षण नहीं देता, लेकिन लंबे समय तक धमनियों में प्लाक बनने का कारण बन सकता है और हार्ट अटैक तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है। WHO के अनुसार 2023 में बढ़ा हुआ LDL वर्ल्ड लेवल पर अनुमानित 36 लाख मौतों से जुड़ा था।

3. CBC और हीमोग्लोबिन

महिलाओं में आयरन की कमी और एनीमिया एक कॉमन प्रॉब्लम हो सकती है, खासकर जिन महिलाओं में पीरियड्स के दौरान बहुत ज्यादा ब्लीडिंग होती है। CBC से हीमोग्लोबिन के साथ रेड और व्हाइट ब्लड सेल्स तथा प्लेटलेट्स की स्थिति का पता चलता है। लगातार थकान, कमजोरी, चक्कर या सांस फूलने जैसी समस्याओं में यह जांच फायदेमंद हो सकती है। वहीं जिन महिलाओं को एनीमिया की शिकायत है उन्हें फेरिटिन और आयरन प्रोफाइल जैसी जांच भी करानी चाहिए। 

4. TSH

थायरॉइड हार्मोन में बदलाव महिलाओं में वजन, मासिक धर्म, एनर्जी, नींद और प्रजनन स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। केवल उम्र के आधार पर हर महिला में हर साल TSH कराना आवश्यक नहीं माना जाता। लेकिन थायरॉइड की बीमारी का पारिवारिक इतिहास, मासिक धर्म में बदलाव, वजन में अचानक बदलाव, बहुत ज्यादा थकान या गर्भधारण होने पर डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं।

5. किडनी फंक्शन टेस्ट

क्रिएटिनिन और eGFR जैसी जांचें किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने में मदद करती हैं। खासकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या लंबे समय से कुछ दवाएं लेने वाली महिलाओं में इनकी जरूरत बढ़ जाती है। किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में बिना लक्षण के रह सकती है, इसलिए जोखिम वाले लोगों में समय पर जांच जरूरी है।

6. लिवर फंक्शन टेस्ट

ALT, AST, बिलिरुबिन और अन्य मापदंडों से लिवर की स्थिति का प्रारंभिक आकलन किया जाता है। मोटापा, डायबिटीज, ट्राइग्लिसराइड, शराब का सेवन या कुछ दवाओं के लंबे समय तक इस्तेमाल में लिवर से जुड़ी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर लिवर फंक्शन की जांच के साथ आगे की जांच भी सलाह दे सकते हैं।


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