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Toilet Paper Health Risks: टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कहीं बिगाड़ न दे सेहत! जानें इसके नुकसान

Toilet Paper Health Risks: टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल कहीं बिगाड़ न दे सेहत! जानें इसके नुकसान

 

Toilet Paper Health Risks: टॉयलेट पेपर आज रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, लेकिन क्या इसका इस्तेमाल हर किसी के लिए पूरी तरह सुरक्षित है? इसे लेकर समय-समय पर कई तरह की बातें सामने आती रही हैं। कुछ रिसर्च में टॉयलेट पेपर में ऐसे केमिकल पाए गए हैं, जिन्हें लेकर स्वास्थ्य पर असर पड़ने की चिंता जताई गई है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम तौर पर टॉयलेट पेपर से किसी व्यक्ति को बड़ा स्वास्थ्य जोखिम होने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। फिर भी, कुछ लोगों में इसके इस्तेमाल से खुजली, जलन और एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

टॉयलेट पेपर में मिले कुछ चिंताजनक केमिकल

टॉयलेट पेपर में पाए जाने वाले कुछ केमिकल को लेकर चिंता जताई गई है। 2023 में की गई एक स्टडी में दुनिया भर के 21 ब्रांड के टॉयलेट पेपर में पीएफएएस यानी पर- और पॉलीफ्लोरोएल्काइल सब्सटेंस पाए गए। इन्हें आमतौर पर “फॉरएवर केमिकल” कहा जाता है। इस स्टडी में टॉयलेट पेपर में इनकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। पीएफएएस के संपर्क को महिलाओं में प्रजनन संबंधी समस्याओं, बच्चों में विकास से जुड़ी दिक्कतों और कुछ तरह के कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जोड़ा गया है। हालांकि, टॉयलेट पेपर के जरिए इन केमिकल के संपर्क का वास्तविक स्वास्थ्य प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

2019 में घाना में हुई एक स्टडी में टॉयलेट पेपर में पैथलेट्स की मात्रा भी पाई गई थी। पैथलेट्स ऐसे केमिकल हैं, जो शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित कर सकते हैं। इसी रिसर्च में टॉयलेट पेपर में पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन यानी पीएएच और कुछ सेमी-वोलेटाइल क्लोरीनेटेड ऑर्गेनिक कंपाउंड्स भी पाए गए थे। इन केमिकल को कैंसर और प्रजनन संबंधी नुकसान से जोड़ा गया है।

रीसाइकिल टॉयलेट पेपर को लेकर भी उठे सवाल

कुछ रिसर्च में रीसाइकिल किए गए पेपर से बने टॉयलेट पेपर को लेकर भी सावधानी बरतने की बात कही गई है। इसकी वजह यह है कि ऐसे पेपर में पुराने अखबार या रीसाइकिल किए गए कैश रजिस्टर की रसीदों जैसे पेपर का इस्तेमाल हो सकता है। इनसे बीपीए यानी बिस्फेनॉल ए जैसे केमिकल टॉयलेट पेपर में पहुंच सकते हैं। रिसर्च में बीपीए के संपर्क को प्रजनन संबंधी समस्याओं और हृदय संबंधी बीमारियों समेत कई स्वास्थ्य प्रभावों से जोड़ा गया है। हालांकि, टॉयलेट पेपर में पाए जाने वाले बीपीए की मात्रा आम तौर पर कम होती है और इसका वास्तविक स्वास्थ्य प्रभाव अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

संवेदनशील हिस्से पर इस्तेमाल होने से बढ़ती है चिंता

टॉयलेट पेपर से जुड़े केमिकल को लेकर चिंता की एक वजह यह भी है कि इसका इस्तेमाल शरीर के बेहद संवेदनशील हिस्से पर होता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जननांग और गुदा के आसपास की त्वचा शरीर के दूसरे हिस्सों की तुलना में पतली और ज्यादा संवेदनशील होती है। इन हिस्सों में म्यूकोसल सतह होती है, जो पतली, नम और ज्यादा संवेदनशील होती है। यही वजह है कि कुछ केमिकल यहां शरीर में ज्यादा आसानी से अवशोषित हो सकते हैं।

हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी कहते हैं कि टॉयलेट पेपर किसी व्यक्ति के लिए जहरीले पदार्थों के संपर्क का सबसे बड़ा स्रोत नहीं है। खाने की चीजों, पैकेजिंग, सफाई के उत्पादों और कपड़ों के जरिए होने वाला संपर्क कई मामलों में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है।

हर टॉयलेट पेपर से बीमारी का खतरा नहीं

यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। टॉयलेट पेपर को सीधे गंभीर बीमारियों की वजह मानना सही नहीं होगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अभी उपलब्ध रिसर्च यह साबित नहीं करती कि सामान्य टॉयलेट पेपर का इस्तेमाल लोगों के लिए कोई बड़ी हेल्थ दिक्कत है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, टॉयलेट पेपर जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले उत्पादों में पीएफएएस और दूसरे औद्योगिक केमिकल की मात्रा आमतौर पर बहुत कम होती है और इन्हें सीधे कैंसर से जोड़ने के स्पष्ट सबूत नहीं हैं। उनका कहना है कि आजकल इस्तेमाल होने वाले टॉयलेट पेपर में ब्लीचिंग की आधुनिक प्रक्रिया भी पहले की तुलना में काफी अलग है और इससे बनने वाले संभावित हानिकारक पदार्थों की मात्रा बहुत कम होती है। केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अलोक ए. खोराना के अनुसार, टॉयलेट पेपर से जहरीले पदार्थों का संपर्क भोजन और पानी की तुलना में काफी कम होने की संभावना है। हालांकि, उनका कहना है कि इस विषय पर आगे और रिसर्च की जरूरत है।

खुशबू और रंग वाले टॉयलेट पेपर से हो सकती है जलन

टॉयलेट पेपर से होने वाली ज्यादा आम परेशानी त्वचा में जलन हो सकती है। न्यूयॉर्क की डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. हन्ना कोपेलमैन के मुताबिक, उनके पास ऐसे मरीज आते हैं, जिन्हें टॉयलेट पेपर इस्तेमाल करने के बाद खुजली और जलन होती है। कई बार लोग इसे यीस्ट इंफेक्शन या एक्जिमा समझ लेते हैं, जबकि परेशानी का कारण टॉयलेट पेपर हो सकता है। एलर्जिस्ट और इम्यूनोलॉजिस्ट डॉ. मेगन डब्ल्यू. शेफर्ड के मुताबिक, कुछ टॉयलेट पेपर में खुशबू और डाई जैसे पदार्थ होते हैं, जो संवेदनशील लोगों में जलन या एलर्जी की वजह बन सकते हैं। वहीं, फ्लशेबल वाइप्स में मौजूद कुछ प्रिजर्वेटिव भी त्वचा में एलर्जी पैदा कर सकते हैं।

कौन सा टॉयलेट पेपर चुनना बेहतर है?

अगर टॉयलेट पेपर इस्तेमाल करने के बाद बार-बार खुजली, जलन या लालिमा होती है, तो उसके प्रकार पर ध्यान देना चाहिए। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए सादा, बिना खुशबू और बिना डाई वाला टॉयलेट पेपर बेहतर विकल्प हो सकता है। खरीदते समय पैकेट पर अनसेंटेड, डाई-फ्री या क्लोरीन-फ्री जैसे शब्द देखे जा सकते हैं। डॉ. कोपेलमैन के मुताबिक, टॉयलेट पेपर में बिना जरूरत के मिलाए गए केमिकल से बचना संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए मददगार हो सकता है।


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