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अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से खुश हुआ भारत, PM मोदी बोले - 'मैं इस डील का...'

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते से खुश हुआ भारत, PM मोदी बोले - 'मैं इस डील का...'

 

PM Modi On US-Iran Peace Deal: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता बहाल होगी। उन्होंने कहा कि लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है तथा कई देशों को जानमाल का नुकसान उठाना पड़ा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए पीएम मोदी ने लिखा कि वह पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि इस तनाव ने दुनिया भर में आर्थिक व्यवधान पैदा किया और अनेक देशों को नुकसान पहुंचाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि इस समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में शांति और स्थिरता लौटेगी। साथ ही अंतरराष्ट्रीय नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी राहत मिलेगी। उन्होंने बातचीत के जरिए सभी लंबित मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने की उम्मीद भी जताई।

ट्रंप ने किया शांति समझौते का ऐलान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार (14 जून) को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर सहमति बनने की जानकारी दी। ट्रंप के अनुसार, दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

इस प्रक्रिया में अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची तथा संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ शामिल होंगे। प्रस्तावित 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) के दौरान दोनों पक्ष कई अहम मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

शांति वार्ता के दौरान ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों, फ्रीज किए गए फंड्स की रिहाई, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी। अंतिम समझौता लागू होने तक दोनों देशों के बीच अस्थायी व्यवस्थाएं प्रभावी रहेंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है तो पश्चिम एशिया में तनाव कम होगा और वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार मार्गों तथा अंतरराष्ट्रीय आर्थिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।


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