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हिमाचल में ‘रमजान’ पर छात्रा के भाषण से बवाल, निजी स्कूल ने मांगी माफी

हिमाचल में ‘रमजान’ पर छात्रा के भाषण से बवाल, निजी स्कूल ने मांगी माफी

 

Himachal Schools Ramzan speech controversy: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के एक निजी स्कूल में प्रार्थना सभा में एक छात्रा के रमजान के बारे में भाषण देने पर विवाद हो गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर होने के बाद अब स्कूल प्रबंधन ने इस मामले पर सफाई पेश की। हालांकि, हिंदू नेता कमल गौतम ने इस मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन पर सवाल उठाए और कार्रवाई की मांग की। 


दरअसल, सिरमौर के ददाहू में एकेएम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल की प्रार्थना सभा में एक बच्ची ने रमजान के बारे में विस्तार से बताया। इस पर विद्यालय प्रबंधन की ओर से स्पष्टीकरण आया है और माफी भी मांगी। स्कूल प्रबंधन ने छात्रा के भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर अपने पेज पर अपलोड किया था, हालांकि, विवाद होने के बाद वीडियो को हटा लिया गया था। 

स्कूल प्रबंधन के पदाधिकारी सुरेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखा, जिसमें छात्रा रमजान के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने कहा कि यह सारा भाषण उन्होंने किताब से लिया था। उन्होंने कहा कि इस वीडियो को लेकर अगर किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह खेद प्रकट करते हैं। 

स्कूल प्रबंधन कमेटी के सदस्य विजय कुमार ने कहा कि 11वीं कक्षा की हिन्दी की किताब “अंतरा” से यह वक्तव्य लिया गया था। उन्होंने कहा कि यह रुटिन एक्टिविटी का वीडियो था और स्कूल के फेसबुक पेज पर अपलोड किया गया था। विजय कुमार ने कहा कि जिस किसी भी समुदाय के लोगों को इस मामले की वजह से ठेस पहुंची हो तो हम इसके लिए क्षमा प्रार्थी हैं। 

वीडियो में क्या कहती है छात्रा

इस वीडियो में सबसे पहले आदाब और सुप्रभात कहती है. फिर कहती है कि वह आज बच्चों को रमजान के बारे में बताती है। वीडियो में छात्रा रमजान की अच्छाइयों के बारे में विचार रखती है. छात्रा कहती है कि रमजान हमें भाईचारे के बारे में बताता है। 

हिंदू नेता ने उठाए सवाल

हिंदू नेता कमल गौतम ने इस मामले पर कहा कि स्कूल प्रबंधन का वास्तविकता ये है कि 11वीं कक्षा की हिन्दी की पुस्तक “अंतरा” में गद्य और काव्य खंड हैं। गद्य खंड में 9 पाठ हैं, जिनमें मुंशी प्रेमचंद की ओर से रचित ‘ईदगाह’ एक अमर हिंदी कहानी है, जो 4 साल के अनाथ हामिद और उसकी बूढ़ी दादी अमीना के निस्वार्थ प्रेम, बाल मनोविज्ञान और त्याग को दर्शाती है। वह कहते हैं कि इस कहानी में ईद के मौके पर, हामिद अपने दोस्तों के विपरीत खिलौने या मिठाई न खरीदकर, अपनी दादी के लिए उपहार खरीदता है. ईद को आधार बनाकर ग्रामीण मुस्लिम जीवन का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया गया है। हामिद का चरित्र हमें बताता है कि अभाव उम्र से पहले बच्चों में कैसे बड़ों जैसी समझदारी पैदा कर देता है। 

स्कूल टीचर पर कार्रवाई की मांग

कमल गौतम कहते हैं कि इस कहानी में कहीं पर भी रमजान के बारे इस ढंग का कोई विवरण नहीं है। जैसा की बच्ची प्रार्थना सभा में सुना रही थी। यह एक प्रयोग था जो जानबूझकर किया गया, परंतु हिन्दू समाज के विरोध के कारण विफल हो गया। यह स्पष्ट है कि विद्यालय प्रबंधन उस शिक्षिका को बचाने का प्रयास कर रहा है जिसने जानबूझकर एक विशेष मानसिकता के साथ बच्ची से यह वक्तव्य तैयार करवाया और दोषी शिक्षिका पर कार्यवाही करते हुए स्कूल से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। 


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