CM Yogi Holi Celebration: सीएम योगी आदित्यनाथ होली पर आज कुछ अलग अंदाज में नजर आ रहे हैं। सुबह-सुबह गोरखनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना और गोशाला में गायों के साथ कुछ वक्त बिताने के बाद सीएम योगी होली पर जुटे साधु-संन्यासियों और आम लोगों के बीच पहुंचे। काले चश्मा लगाए सीएम योगी को लोगों ने रंगों से सराबोर कर दिया। गोरखनाथ मंदिर में भजन-कीर्तन और होली गीतों के बीच जमकर अबीर-गुलाल उड़े। इस बीच सीएम योगी ने होली पर प्रदेश की जनता को शुभकामनाएं और बधाई दी।
क्या बोले सीएम योगी?
सीएम योगी ने एएनआई से बातचीत में प्रदेश की जनता को संदेश में कहा- ‘आज होली है। पूरे प्रदेशवासियों को उत्साह और उमंग के इस पावन पर्व की, समरसता के इस पावन पर्व की मैं हृदय से बधाई देता हूं। हजारों वर्षों की इस विरासत को संरक्षित करके भारत की ऋषि परंपरा ने, पूर्वजों ने जिस थाती को सौंपा है उसको वर्तमान पीढ़ी उसी उमंग व उत्साह के साथ आगे बढ़ा रही है। आज पूरे प्रदेश में हर तबके का व्यक्ति, हर सनातनी इस पावन पर्व के साथ जुड़कर आनंद की अनुभूति कर रहा है।
अगर कहीं कोई मनमुटाव, बैर का भाव, किसी भी स्तर पर रहा हो तो उसे समाप्त करके समरस्त समाज की स्थापना में एक नए प्रयास को आगे बढ़ा रहा है। वास्तव में उत्सव व उमंग का ये पर्व तब आता है जब शांति होती है, सौहार्द होता है, सुरक्षा का भाव होता है, एक विश्वास होता है। उत्तर प्रदेश और पूरा देश आज इस विश्वास के साथ आगे बढ़ा है। एक नए भारत का दर्शन हो रहा है। एक नया भारत जो विकसित भारत बनने की ओर अग्रसर हुआ है।’
सम्मत की राख से तिलक लगाकर की शुरुआत
गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के रंगपर्व की शुरुआत गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन या सम्मत की राख से तिलक लगाने के साथ हुई। पीठाधीश्वर के साथ ही मंदिर के प्रधान पुजारी एवं अन्य साधु-संत भी होलिकादहन की भस्म से रंगोत्सव का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंदिर में फाग गीत भी गाए गए।
नृसिंह शोभायात्रा के लिए निकले योगी
गोरखनाथ मंदिर से रंगोत्सव की शुरुआत करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ घंटाघर से शुरू होने वाली नृसिंह शोभायात्रा के लिए निकले हैं। इस शोभायात्रा की शुरुआत अपने गोरखपुर प्रवासकाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक नानाजी देशमुख ने 1944 में की थी। गोरखनाथ मंदिर में होलिकादहन की राख से होली मनाने की परंपरा इसके काफी पहले से जारी थी। नानाजी का यह अभियान होली के अवसर पर समाज को एकजुट करने के लिए था। नानाजी के अनुरोध पर इस शोभायात्रा का गोरक्षपीठ से भी गहरा नाता जुड़ गया। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के निर्देश पर महंत अवेद्यनाथ शोभायात्रा में पीठ का प्रतिनिधित्व करने लगे और यह गोरक्षपीठ की होली का अभिन्न अंग बन गया।