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Delhi के सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग, चार साल में दूसरी बार हुआ ऐसा

Delhi के सत्य निकेतन में गिरी बिल्डिंग, चार साल में दूसरी बार हुआ ऐसा

 

Delhi Building Collapsed: सत्य निकेतन में रविवार को फिर एक बिल्डिंग गिर गई। इसमें कई लोगों के फंसे होने की आशंका है। पिछले चार साल में इस इलाके में यह दूसरी घटना है। इससे पहले 25 अप्रैल 2022 को एक पुरानी तीन मंजिला इमारत में अवैध मरम्मत कार्य के दौरान हादसा हुआ। इसमें दो मजदूरों की मौत हो गई थी।

नगर निगम के नोटिस के बावजूद काम नहीं रोका गया था। इस मामले में जांच हुई लेकिन किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई। फिर से सत्यनिकेतन में ही यही हादसा सामने आ गया। करीब 80 गज के प्लाट पर भूतल के साथ चार मंजिला मकान था। इसमें हर फ्लोर पर पांच कमरे थे। इस तरह से यहां करीब 25 कमरे थे। इसका प्रयोग पीजी के तौर पर हो रहा था।

सूचना मिलते ही राहत व बचाव के लिए पुलिस, एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस वालंटियर्स मौके पर पहुंच गए। बचाव कार्य में बाधा न आए, इसके लिए आसपास की जगह खाली करा दी गई। हाथों से मलबा हटाने का काम शुरू किया गया ताकि मलबे में फंसे लोगों को सकुशल निकाला जा सके। लेकिन हादसे ने सवाल खड़े कर दिए हैं। खासकर जब तीन महीने पहले ही दक्षिणी दिल्ली में इसी तरह की घटना सामने आ चुकी है।

सैदुलाबाज के हादसे में छह लोगों की मौत

सैदुलाजाब में पांच मंजिला मकान ढहने से छह लोगों की मौत हो गई थी। कई लोग जख्मी हुए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि राजधानी में इमारतों का गिरना महज हादसा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। अवैध निर्माण, तय मानकों की अनदेखी और एमसीडी की ढिलाई की कीमत हर बार मासूम नागरिकों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है।

सर्वे कागजों तक सिमटा

हर हादसे के बाद एक तय ढर्रा देखने को मिलता है। अधिकारियों का निलंबन, जांच कमेटी का गठन और मुआवजा। लेकिन हकीकत यह है कि पुरानी और जर्जर इमारतों का सर्वे केवल कागजों तक सीमित रहता है। जब तक अवैध बेसमेंट और अतिक्रमण कर निर्माण पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, इस तरह की घटनाओं पर अंकुश नहीं लगेगा।


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