Budget 2026 : आज 1 फरवरी 2026 को देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर तय करने वाला केंद्रीय बजट संसद में पेश कर दिया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवीं बार बजट भाषण देकर सरकार की आर्थिक प्राथमिकताओं का खाका सामने रखा। इस बजट से टैक्सपेयर्स, मिडिल क्लास, किसान, गांव और निवेशकों सभी को बड़ी उम्मीदें थीं और अब सबकी नजर इस पर है कि आखिर आम आदमी की जेब पर इसका असर क्या पड़ा है। आइए जानते है इस बजट में आम आदमी के लिए क्या कुछ खास है। और कौन सी चीजें महंगी होंगी और कौन सी सस्ती।
Budget 2026 Kya Sasta Kya Mehnga: बजट में क्या हुआ सस्ता और क्या महंगा? पूरी लिस्ट
क्या होगा सस्ता?
• कपड़े
• लेदर आइटम
• सिंथेटिक फुटवियर
• चमड़े के उत्पाद
• कैंसर-शुगर की 17 दवाएं ड्यूटी फ्री
• लिथियम आयन सेल
• मोबाइल बैटरियां होंगी सस्ती
• सोलर ग्लास होंगे सस्ते
• मिश्रित गैस सीएनजी
• ईवी
• माइक्रोवेव ओवन
• विदेश यात्रा
• बीड़ी
क्या महंगा होगा?
• खनिज (मिनरल)
• शराब
• स्क्रैप
• Future Option Trading
• प्रॉपर्टी पर अतिरिक्त टैक्स → शेयर बायबैक महंगा
इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सरकार ने क्या बताया था?
• बजट से ठीक पहले पेश हुए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में देश की अर्थव्यवस्था की मजबूत और कमजोर दोनों तस्वीर दिखाई थी। सर्वे के मुताबिक भारत को अपनी वर्किंग-एज आबादी का फायदा मिल रहा है, लेकिन हेल्थ सेक्टर और रोजगार सृजन बड़ी चुनौतियां बने हुए हैं। इसके साथ ही आगामी वित्त वर्ष के लिए GDP ग्रोथ 6.8 से 7.2 प्रतिशत के बीच रहने का अनुमान जताया गया था, जिससे बजट से उम्मीदें और बढ़ा दी थीं।
• बजट पेश होने से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण राष्ट्रपति भवन पहुंचीं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को बजट की जानकारी दी। परंपरा के मुताबिक राष्ट्रपति मुर्मू ने उन्हें दही-चीनी खिलाकर शुभकामनाएं दीं। इसके बाद सुबह 11 बजे संसद में बजट भाषण शुरू हुआ, जिसमें सरकार ने कई अहम घोषणाएं कीं।
• कुल मिलाकर बजट 2026 का असर सिर्फ टैक्स स्लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि रसोई के सामान, इलाज, निवेश, रोजगार और बचत से जुड़े फैसलों पर भी इसका सीधा प्रभाव डालने वाला है। अब आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह बजट आम आदमी के लिए कितना राहत भरा साबित हुआ और किन मोर्चों पर महंगाई की मार झेलनी पड़ सकती है।
• यह बजट ऐसे समय में आया है जब देश के भीतर घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक स्तर पर हालात चुनौतीपूर्ण हैं। अमेरिकी टैरिफ नीतियां, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच सरकार को ग्रोथ और वित्तीय संतुलन के बीच नाजुक संतुलन साधना था। निवेशक भी यह देख रहे हैं कि सरकार विकास को रफ्तार देने के साथ-साथ महंगाई और राजकोषीय घाटे को किस तरह कंट्रोल में रखती है।