होम
देश
दुनिया
राज्य
खेल
बिजनेस
मनोरंजन
सेहत
नॉलेज
फैशन/लाइफ स्टाइल
अध्यात्म

 

1 क्विंटल गन्ने से चीनी ज्यादा बनेगी या एथेनॉल? समझें पूरा हिसाब

1 क्विंटल गन्ने से चीनी ज्यादा बनेगी या एथेनॉल? समझें पूरा हिसाब

 

Sugarcane ethanol: देश में चीनी की कीमतों में तेजी के बीच गन्ने से एथेनॉल उत्पादन को लेकर भी चर्चा तेज है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि 100 किलो यानी 1 क्विंटल गन्ने से आखिर कितनी चीनी और कितना एथेनॉल तैयार हो सकता है? इसकी मात्रा गन्ने की गुणवत्ता, मिल की रिकवरी और इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल पर निर्भर करती है।

1 क्विंटल गन्ने से कितनी चीनी निकलती है?

आमतौर पर 100 किलो गन्ने से करीब 9 से 12 किलो चीनी तैयार हो सकती है। हालांकि, वास्तविक उत्पादन मिल की रिकवरी दर पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी चीनी मिल की रिकवरी 10 फीसदी है तो 1 क्विंटल गन्ने से लगभग 10 किलो चीनी मिलेगी।

गन्ने की रिकवरी पूरे सीजन में एक जैसी नहीं रहती। पेराई की शुरुआत में रिकवरी अपेक्षाकृत कम हो सकती है, जबकि दिसंबर-जनवरी में गन्ने में मिठास बढ़ने के साथ रिकवरी भी बेहतर हो जाती है।

गन्ने से चीनी कैसे तैयार होती है?

चीनी बनाने की प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होती है:

  • पेराई: गन्ने को क्रश करके उसका रस निकाला जाता है।
  • रस की सफाई: रस से अशुद्धियां हटाई जाती हैं।
  • वाष्पीकरण: रस से पानी निकालकर उसे गाढ़ा किया जाता है।
  • क्रिस्टलीकरण: गाढ़ी चाशनी से चीनी के क्रिस्टल तैयार किए जाते हैं।
  • अलग करना और सुखाना: मशीनों की मदद से चीनी को शीरे से अलग कर सुखाया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया में चीनी के साथ खोई और शीरा (मोलासेस) जैसे उप-उत्पाद भी मिलते हैं।

1 क्विंटल गन्ने से कितना एथेनॉल बन सकता है?

एथेनॉल का उत्पादन इस बात पर निर्भर करता है कि गन्ने के किस हिस्से या उप-उत्पाद का इस्तेमाल किया जा रहा है।

गन्ने के रस से सीधे एथेनॉल बनाने पर 1 क्विंटल गन्ने से लगभग 7 से 8.4 लीटर एथेनॉल तैयार हो सकता है।

वहीं, बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर करीब 2.2 से 2.5 लीटर प्रति क्विंटल गन्ना और सी-हेवी शीरे से लगभग 1 से 1.1 लीटर एथेनॉल मिल सकता है।

एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया क्या है?

गन्ने से एथेनॉल बनाने के लिए पहले रस निकाला जाता है। इसके बाद उसमें खमीर मिलाकर फर्मेंटेशन कराया जाता है। इस प्रक्रिया में गन्ने की शर्करा अल्कोहल में बदलती है। इसके बाद डिस्टिलेशन और डिहाइड्रेशन के जरिए एथेनॉल को शुद्ध किया जाता है और फ्यूल-ग्रेड एथेनॉल तैयार किया जाता है।

चीनी और एथेनॉल में क्या है अंतर?

सरल भाषा में समझें तो एक ही 1 क्विंटल गन्ने से मिलने वाला आउटपुट इस बात पर काफी बदल जाता है कि गन्ने का इस्तेमाल किस प्रक्रिया में किया जा रहा है। चीनी उत्पादन में रिकवरी प्रतिशत अहम है, जबकि एथेनॉल उत्पादन में कच्चे माल और उसकी शर्करा की मात्रा महत्वपूर्ण होती है।

यानी 1 क्विंटल गन्ने का हिसाब सिर्फ “चीनी बनाम एथेनॉल” से तय नहीं होता, बल्कि गन्ने की गुणवत्ता, रिकवरी, तकनीक और इस्तेमाल किए गए कच्चे माल पर निर्भर करता है।


संबंधित समाचार