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'दुनिया देख रही आपकी पाखंडी बयानबाजी', Iran ने बताई क्यों विफल हुई US के साथ वार्ता

'दुनिया देख रही आपकी पाखंडी बयानबाजी', Iran ने बताई क्यों विफल हुई US के साथ वार्ता

 

Iran America War: अमेरिका और ईरान के बीच अनिश्चितकाल के लिए सीजफायर हो चुका है. लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका की नाकाबंदी अभी भी जारी है. हालांकि पाकिस्तान की मध्यस्थता से होने वाली दोनों देशों के बीच शांति वार्ता नहीं हो सकी. इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका पर निशाना साधा और दोनों देशों के बीच शांति वार्ता के विफल होने के कारण भी बताए.

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने बुधवार को अमेरिका के साथ वार्ता की असफलता के कई कारण गिनाते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट किया. जिसमें उन्होंने अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर की जा रही नौसैनिक नाकाबंदी को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि दुनिया देख सकती है कि अमेरिका के दावे और कार्य आपस में मेल नहीं खाते.

ईरान ने बताया क्यों विफल हुई अमेरिका के साथ वार्ता?

ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिका के साथ विफल हुई वार्ता की तीन वजह बताई. जिसमें उन्होंने अमेरिका पर प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन करने, होर्मुज और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी और धमकियां देना शामिल है. पेज़ेश्कियन ने एक्स पर लिखा, "दुनिया आपकी अंतहीन पाखंडी बयानबाजी और दावों तथा कार्यों के बीच विरोधाभास देख रही है." उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि ईरान कभी भी संवाद और समझौते के खिलाफ नहीं था.

बता दें कि अमेरिका और ईरान के बीच इस सप्ताह पाकिस्तान में होने वाली वार्ता को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा बुधवार को समाप्त होने वाले युद्धविराम को बढ़ाने की घोषणा के बाद स्थगित कर दिया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि वार्ता में मुख्य वार्ताकार पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान को एक एकीकृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने के लिए समय दिया जा रहा है.

सीजफायर के बाद भी कम नहीं हुआ खतरा

अमेरिका ने भले ही सीजफायर को बढ़ा दिया हो लेकिन दोनों पक्षों से खतरे अभी भी जारी हैं. क्योंकि ईरान ने युद्धविराम की घोषणा के बाद तीन जहाजों को जब्त कर लिया है. जिनकी पहचान एमएससी फ्रांसेस्का, एपामिनोंडास और यूफोरिया के रूप में की गई है. इसके साथ ही अमेरिका ने भी अपनी नौसैनिक नाकाबंदी जारी रखी है और होर्मुज पर कड़ा पहरा दे रहा है. जिससे इस सीजफायर के कभी भी टूट जाने का भी खतरा मंडर रहा है.


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