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America-Iran के बीच क्यों नहीं हुआ कोई समझौता ? इन मुद्दों पर फंसा पेच

America-Iran के बीच क्यों नहीं हुआ कोई समझौता ? इन मुद्दों पर फंसा पेच

 

America-Iran War: मध्य पूर्व में स्थाई शांति के लिए इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान की वार्ता आखिरकार फेल हो गई. दुनिया की सबसे अहम कूटनीतिक वार्ता में एक मानी जा रही इस वार्ता पर हर किसी की निगाहें थी. हर कोई चाहता था कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता हो जाए जिससे न सिर्फ मध्य पूर्व में शांति बहाल हो बल्कि पूरी दुनिया भी चैन की सांस ले सके. लेकिन शांति वार्ता में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो पाया. जिसने एक बार फिर से जंग के रास्ते खोल दिए. ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच एक बार फिर से हमलों की शुरुआत हो सकती है. 

बेनतीजा रही 21 घंटे चली वार्ता

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शनिवार को अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता शुरू हुई. ये वार्ता करीब 21 घंटों तक चली. लेकिन इस वार्ता में दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका. इस वार्ता को सिर्फ एक डील नहीं बल्कि मध्य पूर्व में चल रही जंग को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए सबसे अहम माना जा रहा था, जिससे पिछले करीब डेढ़ महीने से मिडिल ईस्ट को ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को संकट में धकेल दिया है.

वार्ता खत्म होने के बाद क्या बोले वेंस

शांति वार्ता खत्म होने के बाद अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने साफ शब्दों में कहा कि दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हुआ. जिसके पीछे की सबसे बड़ी वजह ईरान का अमेरिकी शर्तों को न मानना है. उन्होंने कहा, "हमने 21 घंटे तक लगातार बातचीत की, कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके." वेंस ने आगे कहा कि हमने अपनी रेड लाइन्स स्पस्ट कर दी थीं, लेकिन ईरान ने उन्हें स्वीकार नहीं किया." उन्होंने कहा कि वार्ता के दौरान अमेरिका ने काफी लचीलापन दिखाया, लेकिन "ईरानी पक्ष ने आगे बढ़ने से इनकार कर दिया."

अमेरिका की अत्यधिक मांगों के चलते नहीं बनी बात

वहीं इस वार्ता को लेकर ईरान ने भी अपना रुख  साफ किया. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि चर्चा बहुत गहन रही और कई अहम मुद्दों पर बातचीत हुई, लेकिन सफलता तब मिलती है जब दूसरा पक्ष ईमानदारी और संतुलन दिखाता है. उन्होंने कहा, "पिछले 24 घंटों में होर्मुज स्ट्रेट, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंध हटाने, युद्ध मुआवजा और पूरे क्षेत्र में जंग खत्म करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई." इसके साथ ही बकाई ने अमेरिका पर "अत्यधिक और गैरकानूनी मांगें" रखने का आरोप लगाया.


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