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आखिर 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस? जानिए इसके पीछे का इतिहास 

आखिर 26 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है गणतंत्र दिवस? जानिए इसके पीछे का इतिहास 

 

26 January History: कुछ ही दिनों में, पूरा भारत गणतंत्र दिवस मनाएगा। यह दिन हर भारतीय के लिए बहुत खास है, चाहे वे भारत में रहते हों या विदेश में। लोग अक्सर सोचते हैं कि इस दिन ऐसा क्या हुआ था जो इसे इतना खास बनाता है और हम इसे गणतंत्र दिवस के रूप में क्यों मनाते हैं? 26 जनवरी को भारतीय धरती पर ऐसा क्या हुआ था जिसने इस दिन को भारतीयों के लिए इतना महत्वपूर्ण बना दिया? हर भारतीय को इस सवाल का जवाब पता होना चाहिए। अगर आप थोड़े कन्फ्यूज हैं, तो आइए इसका आसान और सीधा जवाब जानते हैं।

भारतीय संविधान: कई बदलावों और चर्चाओं का नतीजा

4 नवंबर, 1947 को संविधान का ड्राफ्ट संविधान सभा में पेश किया गया, जहाँ अगले दो सालों तक इस पर विस्तार से चर्चा हुई। कई बैठकें हुईं, और यह सुनिश्चित करने के लिए कई बदलाव किए गए कि संविधान न्याय, विश्वास, समानता और अन्य मूल्यों को बनाए रखे जो लोगों के साथ जुड़ सकें। फिर, 24 जनवरी, 1950 को संविधान को अपनाया गया, और 308 सदस्यों ने दस्तावेज़ की दो कॉपियों पर साइन किए – एक हिंदी में और दूसरी अंग्रेजी में। इस कदम ने भारत को एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में स्थापित किया।

 गणतंत्र दिवस 26 जनवरी को क्यों मनाया जाता है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, संविधान सभा ने संविधान को लागू करने से पहले दो और दिन इंतजार करने का फैसला किया, और इस तरह, भारतीय संविधान 26 जनवरी, 1950 को पूरे देश में लागू हुआ। इस तारीख का महत्व भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) से जुड़ा है। इस दिन, 26 जनवरी, 1930 को अपने लाहौर अधिवेशन के दौरान, कांग्रेस ने ब्रिटिश शासन से पूर्ण स्वतंत्रता की घोषणा की और सभी भारतीयों से इसे स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने का आग्रह किया। इस अधिवेशन के दौरान पहली बार तिरंगा झंडा फहराया गया था। इस अधिवेशन के बीस साल बाद, 26 जनवरी, 1950 को देश का संविधान फाइनल हुआ और लागू किया गया। यही कारण है कि इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है।


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